राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में गणतंत्र दिवस की शाम सात बजे बीबीसी की मोदी पर बनी डॉक्युमेंट्री देखने के मामले में दस छात्रों को 14 दिन के लिए विश्वविद्यालय से सस्पेंड कर हॉस्टल से निकाल दिया गया है.
सस्पेंड किए गए अधिकतर छात्र दक्षिण भारत के मुस्लिम परिवारों से हैं. इस कार्रवाई को विश्वविद्यालय प्रशासन अनुशासनात्मक कार्रवाई बता रहा है, लेकिन, सस्पेंड हुए छात्र डॉक्युमेंट्री देखने को कार्रवाई की वजह बता रहे हैं.
इस मामले पर बीबीसी हिंदी ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर आनंद भालेराव से उनका पक्ष लेने की कोशिश की. काफी कोशिशों के बाद उनका पक्ष नहीं मिल पाया.
सस्पेंड हुए छात्रों ने क्या कहा?
सस्पेंड हुए छात्रों को हॉस्टल और यूनिवर्सिटी से बाहर निकाल दिया गया है.
नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में गुजरात के रहने वाले एक छात्र ने कहा, "26 जनवरी को कुछ दोस्तों ने पोस्टर बनाया कि शाम को विश्वविद्यालय में पोस्ट ऑफिस के पास बीबीसी की मोदी पर बनाई डॉक्युमेंट्री देखेंगे."
"वहां हमने स्क्रीन नहीं लगाई, शाम को सात बजे फ़ोन पर ही डॉक्युमेंट्री देख रहे थे."
"वहां सिक्योरिटी भी मौजूद थी, उन्होंने हमसे कहा कि भारत में यह बैन है क्यों देख रहे हो. हमने उनसे कहा कि हम फ़ोन पर देख रहे हैं, इसके बाद सिक्योरिटी ने पुलिस को बुला लिया."
छात्र ने बताया, "हमें उठने के लिए कहा लेकिन हम बैठकर फ़ोन में डॉक्युमेंट्री देख रहे थे. आठ बजे तक हमने डॉक्युमेंट्री देखी और फिर सब अपने हॉस्टल में चले गए. इस दौरान कोई नारेबाजी नहीं हुई, कुछ देर के लिए बहस ज़रूर हुई थी."
"इसके बाद वहां एबीवीपी से जुड़े छात्र आए और नारेबाजी करने लगे. इतनी ही देर में हॉस्टल के कुछ व्हॉट्सएप ग्रुप में एबीवीपी वाले चैट कर रहे थे कि यह हमारी पहचान पर खतरा है. सभी बास्केटबॉल कोर्ट में पहुंचे, और नारेबाजी की कि हम देश विरोधी गतिविधियां नहीं होने देंगे."
'एबीवीपी ने हॉस्टल में लगाए नारे...'
सस्पेंड हुए छात्र ने बताया, "रात दस बजे एबीवीपी से जुड़े चालीस से पचास छात्र भगवा झंडे लेकर बास्केटबॉल कोर्ट में एकजुट हुए हुए नारेबाजी करने लगे 'देश के गद्दारों भारत छोड़ो', 'देश के गद्दारों को गोली मारो......को'."
उन्होंने बताया, "रात क़रीब सवा ग्यारह बजे वे लोग भगवा झंडा लेकर नारेबाजी करते हुए हॉस्टल में आ गए. हॉस्टल की लाइट्स बंद कर दी और सभी कमरे के गेट पर लात मारने लगे. हम बहुत घबरा गए थे."
"उन्होंने छात्रों के नाम की रैंडम लिस्ट बनाई, लिस्ट में अधिकतर मुस्लिम छात्रों के नाम लिखे थे. कई ऐसे नाम लिखे जो हॉस्टल में थे ही नहीं."
पहले दो फिर नो छात्रों को किया सस्पेंड
सस्पेंड हुए एक मुस्लिम छात्र ने बीबीसी से नाम नहीं लिखने की शर्त पर कहा, "26 जनवरी की देर रात तक हंगामा होता रहा. इसके बाद 27 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर कुछ छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया."
"28 तारीख़ को फिर एक आदेश जारी किया गया और छात्रों को सस्पेंड किया गया. इस तरह दस छात्रों को सस्पेंड किया गया है."
उन्होंने बताया, "विश्वविद्यालय की सिक्योरिटी ने 28 तारीख़ की रात जबरन हम लोगों को हॉस्टल और यूनिवर्सिटी से बाहर निकाल दिया गया. विश्वविद्यालय प्रोक्टर ने हमसे बात तक नहीं की और न ही हमें हमारा पक्ष बताने का मौक़ा दिया. अब प्रोक्टर फ़ोन भी नहीं उठा रहे हैं."
सस्पेंड हुए छात्र ने आरोप लगाते हुए कहा, "एबीवीपी ने जो लिस्ट बनाई है उसी आधार पर प्रशासन छात्रों को सस्पेंड कर रहा है."
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को मेल के ज़रिए सस्पेंशन लेटर भेजे हैं. इस घटना के बाद छात्र इतना घबरा गए हैं कि अधिकतर ने अपने परिजनों को इसके बारे में कोई जानकारी तक नहीं दी है.
छात्रों को भेजे गए सस्पेंशन लेटर में सस्पेंड करने का कारण विश्वविद्यालय नियम 3.3 और 3.5 का हवाला दिया गया है. छात्रों का कहना है कि नियम 3.3 के अनुसार 'टीचर्स और अथॉरिटी के साथ मिस बिहेव करना' और 3.5 के अनुसार 'गैदरिंग एट इन डिजाइन प्लेस' का ज़िक्र है.
विश्वविद्यालय का क्या कहना है?
इस विवाद पर विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी अनुराधा ने बीबीसी से फ़ोन पर कहा, "हमने जो दस बच्चों को सस्पेंड किया है, इसका डॉक्युमेंट्री से कोई संबंध नहीं है.
प्रॉक्टोरियल बोर्ड से यह डिसीप्लिनरी एक्शन लिया गया है. ऐसे एक्शन पहले भी लिए गए हैं. इसको जबरदस्ती डॉक्युमेंट्री के साथ जोड़ा जा रहा है."
विश्वविद्यालय के प्रोक्टर केएल शर्मा से जब इस मामले में बात करने के लिए फ़ोन किया गया तो उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. मैसेज पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
सस्पेंड हुए छात्रों के एबीवीपी पर लगाए आरोप पर एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री होशियार मीणा ने बीबीसी हिंदी से फ़ोन पर कहा, "विश्वविद्यालय में एबीवीपी कार्यकर्ताओं से बात हुई है. गलत आरोप है कि एबीवीपी की लिस्ट के आधार पर छात्रों को सस्पेंड किया गया है, प्रशासन एबीवीपी थोड़े ही चला रही है."
"भारत को जी 20 की अध्यक्षता मिली है जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को बिगाड़ने का कार्य किया जा रहा है."
होशियार मीणा ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है तो माहौल बिगाड़ने का काम कौन कर रहा है. सस्पेंड तो बहुत छोटी कार्रवाई है, ऐसे लोग देश की छवि बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए."