प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में 'परीक्षा पर चर्चा' के छठे संस्करण के दौरान
छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की.
उन्होंने
कहा कि आलोचना अच्छी चीज़ है लेकिन कुछ लोग आदतन आलोचना करते हैं, उस पर ध्यान मत
दीजिए क्योंकि उनका इरादा कुछ और होता है.
परीक्षा
से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को टिप्स देते हुए कहा, "कभी-कभी होता है कि आलोचना करने वाला कौन हैं, ये महत्वपूर्ण होता है. जो अपना
है, वो कहता है तो आप उसे सकारात्मक लेते हैं, लेकिन जो आपको पसंद नहीं है, वो कहते हैं तो आपको गुस्सा आता है. आलोचना करने वाले आदतन आलोचना करते रहते हैं तो उसे एक बक्से
में डाल दीजिए क्योंकि उनका इरादा कुछ और है. ऐसे लोग हैं जो बहुत मेहनत करते हैं."
"कुछ लोगों के लिए कड़ी मेहनत उनके जीवन के शब्दकोश में मौजूद नहीं है. कुछ मुश्किल से स्मार्ट वर्क करते हैं और कुछ स्मार्ट तरीके से हार्ड वर्क करते हैं. हमें इन पहलुओं की बारीकियों को सीखना चाहिए और परिणाम के लिए उसी अनुसार काम करना चाहिए."
उन्होंने कहा, "हम राजनीति में कितने ही चुनाव क्यों न जीत लें लेकिन ऐसा दबाव पैदा किया जाता है कि हमें हारना नहीं है. चारों तरफ से दबाव बनाया जाता है. क्या हमें इन दबावों से दबना चाहिए? अगर आप अपनी ऐक्टिविटी पर फोकस रहते हैं तो आप ऐसे संकट से बाहर आ जाएंगे. कभी भी दबावों के दबाव में न रहें."
"मेहनती बच्चों को चिंता रहती है कि मैं मेहनत करता हूं और कुछ लोग चोरी कर अपना काम कर लेते हैं. ये जो मूल्यों में बदलाव आया है, ये समाज के लिए खतरनाक है. अब जिंदगी बदल चुकी है, जगत बहुत बदल चुका है. आज हर कदम पर परीक्षा देनी पड़ती है. नकल से जिंदगी नहीं बन सकती है."
"सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, वैसे भी जीवन में हमें समय के प्रबंधन के प्रति जागरूक रहना चाहिए. काम का ढेर इसलिए खड़ा हो जाता है क्योंकि समय पर उसे नहीं किया गया. काम करने से कभी थकान नहीं होती, काम करने से संतोष होता है. काम ना करने से थकान होती है कि इतना काम बचा है."
उन्होंने कहा कि एक बार आप इस सत्य को स्वीकार कर लेते हैं कि मेरी एक क्षमता है और मुझे अब इसके अनुकूल चीजों को करना है... आप जिस दिन अपने सामर्थ्य को जान जाते हैं, उस दिन बहुत बड़े सामर्थ्यवान बन जाते हैं.
'कुछ लोग आदतन आलोचना करते हैं'
"आदतन आलोचना करने वालों पर ध्यान मत दीजिए. हमें अपना फोकस कभी छोड़ना नहीं चाहिए. मां-बाप से भी मेरा आग्रह है कि टोका-टोकी के जरिए आप अपने बच्चों को 'मोल्ड' नहीं कर सकते."
"हर मां-बाप अपने बच्चों का सही मूल्यांकन करें और बच्चों के भीतर हीन भावना को ना आने दें."
पीएम मोदी ने कहा, "हमारे देश में अब गैजेट-यूज़र्स के लिए औसतन छह घंटे का स्क्रीन-टाइम है. यह निश्चित रूप से उस समय और ऊर्जा की मात्रा को दर्शाता है जो किसी व्यक्ति की ओर से अर्थहीन और उत्पादकता के बिना निकाल दी जाती है. यह गहरी चिंता का विषय है और लोगों की रचनात्मकता के लिए खतरा है."