गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन जलाए जाने के मामले में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे एक शख़्स फ़ारूक़ को सुप्रीम कोर्ट ने आज जमानत दे दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ़ारूक़ पहले ही 17 साल जेल में रह चुके हैं और ट्रेन जलाए जाने के मामले में उनकी भूमिका पत्थरबाज़ी करने की थी.
चीफ़ जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ की बेंच ने गुरुवार के आदेश में कहा, "हम फ़ारूक़ को जमानत देंगे क्योंकि वो पहले ही 17 साल जेल में रह चुके हैं."
साल 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच को जलाए जाने के मामले में फ़ारूक़ को पत्थरबाज़ी के आरोप में उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.
चीफ़ जस्टिस ने जमानत देने का फ़ैसला सुनाते हुए कहा, "17 साल बीत गए हैं. दोषी ठहराए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ उनकी अपील शीर्ष अदालत में पेंडिंग है."
सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में 13 मई, 2002 को एक अन्य अभियुक्त अब्दुल रहमान धनतीया उर्फ कनकट्टू को छह महीने के लिए जमानत दे दी थी. अब्दुल की पत्नी को कैंसर था और उनकी बेटियां मानसिक रूप से बीमार थीं.
11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल की जमानत 31 मार्च, 2023 तक के लिए बढ़ा दी थी. 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगा दी गई थी जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे.
सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले में गुजरात सरकार का पक्ष रखते हुए फ़ारूक़ को जमानत दिए जाने का विरोध किया.
उनका कहना था कि इस मामले में फ़ारूक़ और दूसरे अभियुक्तों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके थे जिससे जलती हुई ट्रेन से लोगों को भागने में बाधा पहुंची थी.
उन्होंने कहा, "ये महज पत्थरबाज़ी का मामला नहीं है. फ़ारूक़ समेत अन्य अभियुक्तों को इस केस में जमानत नहीं दी जानी चाहिए."
अक्टूबर, 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने इस केस में 11 अभियुक्तों की सज़ा को मृत्युदंड से उम्र क़ैद में बदल दिया था और 20 दोषियों के आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा था.