भारत-चीन के सैनिकों में हुई झड़प पर क्या कह रहे हैं विदेशी जानकार
सोमवार देर शाम ये ख़बर आई कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीनी सेना के बीच नौ दिसंबर को झड़प हुई थी और इसमें दोनों देशों के कुछ सैनिक ज़ख़्मी हुए थे.
मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के दोनों सदनों में इस घटना पर बयान दिया और बताया कि नौ दिसंबर को चीन के सैनिकों ने सीमा पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की और भारतीय सैनिकों ने इसका दृढ़ता से जवाब दिया.
चीन और भारत के बीच इस गतिरोध पर विदेशी जानकार और पत्रकार भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
डॉएचे वेले के इंटरनेशनल चीफ़ संवाददाता रिचर्ड वॉकर ने न्यूज़ चैनल पर एक प्रसारण के दौरान कहा, “इस गतिरोध की ख़ास बात ये है कि चीन और भारत के बीच सिर्फ़ सीमा पर विवाद नहीं है बल्कि चीन एक पूरे राज्य पर अपना दावा करता है.''
''चीन इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है. अरुणाचल के तवांग की ख़ास अहमियत है. यहाँ पुरानी मॉनिस्ट्री है. रणनीतिक रूप से यह बेहद ख़ास इलाक़ा है.”
“जानकार इस क्षेत्र को भारत और चीन के बीच संभावित रूप से सबसे ख़तरनाक फ्लैशपॉइंट बताते हैं. ये दुनिया के सबसे बड़े सीमा विवादों में से एक है. लद्दाख में 2020 में हुई झड़प से भारत-चीन संबंधों में बड़ी खटास थी.”
डेरेक ग्रॉसमैन की पहचान इंडो पैसिफिक विश्लेषक के तौर पर है. उन्होंने कहा कि सर्दी आ गई है लेकिन सरहद पर तनाव कम नहीं हो रहा है.
अमेरिका स्थित एशियन स्टडी सेंटर के निदेशक जेफ़ एम स्मिथ ने इस ममाले पर कहा है, “इंडो-पैसेफ़िक क्षेत्र में चल सीमा विवादों को दर्ज करने की ज़रूरत है. चीन-भारत, चीन-भूटान, चीन-ताइवान, चीन, फ़िलिपींस, चीन-वियतनाम, चीन-इंडोनेशिया इन सभी के साथ सीमा विवाद है. ”
लंदन से निकलने वाले अख़बार फ़ाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट को टैग करते हुए लेखक विलियम डेलरिम्पल ने ट्वीट किया, “ ये एक रोचक और ज़रूरी लेख है. ”
ये लेख 2020 में लद्दाख सीमा पर भार-चीन के बीच हुई झड़प के समय लिखा गया और इसमें भारत-चीन के बीच सैन्य क्षमता की तुलना की गई थी.
अमेरिका स्थित थिंकटैंक माइकल कगेलमैन द विलसन सेंटर में दक्षिण एशिया के निदेशक लिखते हैं कि पिछले कुछ दिनों में, भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन और विशेष रूप से अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान के बीच सीमा पर हिंसा हुई है, तालिबान के अधिग्रहण के बाद सबसे घातक हिंसा थी. ये सभी फ्लैशप्वाइंट भू-राजनीति से लेकर भू-अर्थशास्त्र में बदलाव की चुनौतियों को उजागर करते हैं.