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सरकार ने कहा एयरपोर्ट में भीड़ और देरी की समस्या दस दिन के अंदर होगी ख़त्म

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में मंगलवार को बयान दिया. अब सोशल मीडिया पर उनके बयान का एक हिस्सा वायरल हो रहा है और लोग सवाल कर रहे हैं.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे and शुभम किशोर

  1. तवांग में भारत-चीन के सैनिकों की झड़प को लेकर राजनाथ सिंह के बयान पर उठ रहे सवाल

    अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में मंगलवार को बयान दिया. अब सोशल मीडिया पर उनके बयान का एक हिस्सा वायरल हो रहा है और लोग सवाल कर रहे हैं.

    दरअसल, रक्षा मंत्री से सदन में सवाल किया गया कि तवांग की घटना 9 दिसंबर को हुई लेकिन इसके बारे में चार दिन बाद यानी 13 दिसंबर को संसद में बयान क्यों दिया जा रहा है. इस पर राजनाथ सिंह ने कहा, "बीच में छुट्टी भी थी."

    आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान ने रक्षा मंत्री का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "ये लोग किस स्तर पर उतर आए हैं? क्या छुपा रहे ये लोग?"

    वहीं, हाल ही में चर्चा में रहे फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर ने भी ये वीडियो शेयर किया है.

    9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर के यांगत्से में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई. इसमें दोनों तरफ के सैनिक घायल हुए.

    घटना के बाद से विपक्ष, सरकार पर हमलावर है.

    राजनाथ सिंह ने संसद में क्या कहा?

    घटना को लेकर राजनाथ सिंह ने मंगलवार, 13 दिसंबर को संसद में जानकारी दी.

    उन्होंने बताया, "9 दिसंबर 2022 को पीएलए सैनिकों ने तवांग सेक्टर के यांगत्से एरिया में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास किया. चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया है."

    उन्होंने कहा, "इस फेस ऑफ में हाथापाई भी हुई है. भारतीय सेना ने पीएलए को उनकी पोस्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया."

    राजनाथ सिंह ने कहा, "इस झड़प में दोनों ओर के सैनिकों को चोटें भी आई हैं. इस घटना में हमारे किसी भी सैनिक की न तो मृत्यु हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है."

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप: अर्जेंटीना ने क्रोएशिया से छीना फ़ाइनल का टिकट, 3-0 से दी मात

    अर्जेंटीना ने फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप 2022 के फ़ाइनल में जगह बना ली है.

    अर्जेंटीना ने क़तर के लुसैल स्टेडियम में खेले गए पहले सेमीफ़ाइनल में क्रोएशिया को 3-0 से हराया.

    मैच के शुरुआती कुछ मिनटों को छोड़कर पूरे वक़्त लियोनल मेसी की अर्जेंटीना टीम का दबदबा रहा. ब्राज़ील को हराकर सेमीफ़ाइल में पहुंची क्रोएशिया टीम पूरे मैच में दबाव में नज़र आई.

    अर्जेंटीना के लिए पहला गोल लियोनल मेसी ने पेनल्टी के जरिए किया. दो गोल जूलियन अल्वरेज़ ने किए.

    पहले हाफ़ में अर्जेंटीना ने 2-0 की बढ़त बना ली थी. दूसरे हाफ़ में 69वें मिनट में अल्वरेज़ ने दूसरा गोल किया.

    उन्हें दोनों ही पास मेसी ने दिए. मेसी पूरे मैच में जादुई अंदाज़ में खेलते दिखाई दिए.

    फ़ाइनल में अर्जेंटीना का मुक़ाबला रविवार को दूसरे सेमीफ़ाइनल की विजेता टीम से होगा. वर्ल्ड कप का दूसरा सेमीफ़ाइनल फ्रांस और मोरक्को के बीच खेला जाएगा.

    86वें मिनट में क्रोएशिया के पास गोल करने का मौका था लेकिन टीम इस मौके को भुना नहीं सकी.

    खचाखच भरे स्टेडियम में अर्जेंटीना के फैन्स का जोश देखते ही बना.

  3. फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप: अर्जेंटीना ने किया तीसरा गोल

    लियोनल मेसी की अर्जेंटीना टीम ने पहले सेमीफ़ाइनल के दूसरे हाफ में भी दबदबा बनाए रखा है.

    अर्जेंटीना की टीम ने 3-0 की बढ़त बना ली है. दूसरे हाफ के 69वें मिनट में तीसरा गोल हुआ. तीसरा गोल जूलियन अल्वरेज़ ने ही किया. उन्होंने मेसी के पास को गोलपोस्ट में डाल दिया.

    पहले हाफ में अर्जेंटीना ने दो गोल किए थे. पहला गोल मेसी और दूसरा जूलियन अल्वरेज़ ने किया.

    दूसरे हाफ में 57वें मिनट पर मेसी के पास गोल करने का एक और मौका था लेकिन वो क्रोएशिया के गोलकीपर को छका नहीं सके.

    62वें मिनट में क्रोएशिया ने फ्री किक हासिल की.

  4. फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप: अर्जेंटीना का पहले हाफ़ में दबदबा, 2-0 से आगे

    अर्जेंटीना ने फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के पहले सेमीफ़ाइनल के पहले हाफ में क्रोएशिया पर दबदबा बनाए रखा.

    क्रोएशिया के खिलाड़ी शुरुआत में जोश में दिख रहे थे लेकिन मैच के 34वें मिनट में लियोनल मेसी ने पेनल्टी पर गोल दागा.

    इसके पांच मिनट बाद मेसी के पास पर जूलियन अल्वारेज़ ने दूसरा गोल किया.

    इसके बाद क्रोएशिया की टीम पूरी तरह दबाव में दिखने लगी. पिछले वर्ल्ड कप में फ़ाइनल तक पहुंची क्रोएशिया की टीम ने शुरुआती मिनटों में जैसा खेल दिखाया वो उसे आगे बरक़रार नहीं रख सकी.

    क्रोएशिया के खिलाड़ियों ने शुरुआत में आक्रामक खेल दिखाया. वो मेसी को घेरे हुए थे. मेसी शुरुआती मिनटों में ही हैमिस्ट्रिंग को सलहाते दिखे. ऐसे में उन्हें फिटनेस से जुड़ी दिक्कत लगी लेकिन पेनल्टी पर पहला गोल दागने के बाद मेसी पूरी लय में दिखने लगे.

    पहले हाफ में क्रोएशिया की टीम एक बार भी टार्गेट को हिट नहीं कर पाई.

  5. ब्रेकिंग न्यूज़, फुटबॉल वर्ल्ड कप: अर्जेंंटीना ने सेमीफ़ाइनल में दूसरा गोल किया

    अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल के पहले सेमीफ़ाइनल में क्रोएशिया पर 2-0 की बढ़त बना ली है.

    अर्जेंटीना के लिए दूसरा गोल जूलियन अल्वरेज़ ने किया. लियोनल मेसी ने उन्हें पास दिया.

    उन्होंने क्रोएशिया के खिलाड़ियों को छकाते हुए गेंद गोलपोस्ट में डाल दी.

    अर्जेंटीना के लिए पहला गोल मेसी ने किया था.

  6. फुटबॉल वर्ल्ड कप: अर्जेंटीना के लिए मेसी ने किया पहला गोल

    फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के पहले सेमीफ़ाइनल में अर्जेंटीना ने पहला गोल कर दिया है. ये गोल पेनल्टी पर लियोनल मेसी ने किया.

    अर्जेंटीना को 34 वें मिनट में पेनल्टी मिली. मेसी ने ये मौका भुना लिया.

    इसके पहले क्रोएशिया टीम के खिलाड़ी पूरे भरोसे के साथ खेल रहे थे. उन्होंने बॉल पूरे अधिकार के साथ कब्ज़ा किया हुआ था.

    क्रोएशिया के खिलाड़ियों ने मेसी के इर्द गिर्द घेरा सा बना रखा था. क्रोएशिया के खिलाड़ी मेसी की साख से ज़्यादा प्रभावित होते नहीं दिख रहे थे.

    15वें मिनट के करीब क्रोएशिया ने शॉर्ट कॉर्नर हासिल किया लेकिन डेजन लोवरन का प्रयास टीम के काम नहीं आया.

    27वें मिनट के करीब क्रोएशिया को अर्जेंटीना के हाफ में फ्री किक मिली.

  7. फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप: अर्जेंटीना बनाम क्रोएशिया, पहला सेमीफ़ाइनल शुरू

    अर्जेंटीना और क्रोएशिया के बीच फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप का पहला सेमीफ़ाइनल क़तर के लुसैल स्टेडियम में शुरू हो गया है.

    दोनों टीमों का समर्थन करने के लिए स्टेडियम में बड़ी संख्या में फैन्स मौजूद हैं.

    अर्जेंटीना के समर्थकों की संख्या ज़्यादा है. कई फैन्स 10 नंबर की जर्सी पहने हुए हैं. अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी लियोनल मेसी 10 नंबर की जर्सी ही पहनते हैं. कई फैन्स 'मेसी-मेसी' के नारे भी लगा रहे हैं.

    क्रोएशिया के फैन्स संख्या में कम हैं लेकिन उनके जोश में कोई कमी नहीं दिख रही है. क्रोएशिया टीम पिछले वर्ल्ड कप में फ़ाइनल तक पहुंची थी. टीम के स्टार खिलाड़ी लुका मॉडरिच अच्छी लय में हैं और उनसे आज के मैच में उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है.

  8. भीमा कोरेगांव: गौतम नवलखा जनवरी के दूसरे सप्ताह तक नज़रबंद रहेंगे, सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला

      • Author, सुचित्र मोहंती, बीबीसी हिंदी के लिए

    सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा में अभियुक्त गौतम नवलखा के हाऊस अरेस्ट की अवधि को जनवरी के दूसरे सप्ताह तक के लिए बढ़ा दिया है.

    नवलखा के वकील ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि नवलखा का हाउस अरेस्ट "सुचारू" ढंग से चल रहा है.

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थे. सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि हाउस अरेस्ट को जनवरी के दूसरे हफ़्ते तक के लिए बढ़ा दिया जाए.

    नवलखा अप्रैल 2020 से जेल में हैं और कई तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर को आदेश दिया कि नवलखा की "सेहत और उम्र" को देखते हुए उन्हें नज़रबंद रखा जाए. आदेश के बाद नवलखा को 19 नवंबर को जेल से रिहा किया गया था और एक महीने के लिए नज़रबंद कर दिया गया था.

    मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर के अपने आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया.

    क्या है भीमा कोरेगांव मामला

    मराठा सेना और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुए युद्ध की 200वीं सालगिरह के मौक़े पर 31 दिसंबर, 2017 के दिन 'भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस प्रेरणा अभियान' के बैनर तले कई दलित संगठनों ने मिलकर एक रैली आयोजित की थी. इस लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ़ से महार रेजीमेंट लड़ रही थी जिसमें ज़्यादातर दलित सैनिक थे.

    भीमा कोरेगांव की रैली मराठा सेना के ख़िलाफ़ इन्हीं दलितों के शौर्य की याद में आयोजित की गई थी. इसका नाम यलगार परिषद रखा गया. शनिवार वाड़ा के मैदान पर हुई इस रैली में 'लोकतंत्र, संविधान और देश बचाने' की बात कही गई.

    इसमें कई नामी हस्तियां मसलन- प्रकाश आंबेडकर, हाईकोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल, गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवानी, जेएनयू छात्र उमर ख़ालिद, आदिवासी एक्टिविस्ट सोनी सोरी आदि मौजूद रहे. इनके भाषणों के साथ कबीर कला मंच ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए.

    अगले दिन जब भीमा कोरेगांव में उत्सव मनाया जा रहा था, आस-पास के इलाक़ों- मसलन, संसावाड़ी में हिंसा भड़क उठी और एक नौजवान की जान चली गई. इस मामले में हिंदुत्ववादी संस्था समस्त हिंद अघाड़ी के नेता मिलिंद एकबोटे और शिव प्रतिष्ठान के संस्थापक संभाजी भिड़े के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज की गई.

    पहली एफ़आईआर में जिग्नेश मेवानी और उमर ख़ालिद पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया था. दूसरी एफ़आईआर तुषार दमगुडे की शिकायत पर यलगार परिषद से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज की गई. इस एफ़आईआर के संबंध में जून में सुधीर धवले समेत पांच सामाजिक कार्यर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया.

    इसके बाद 28 अगस्त को पुणे पुलिस ने गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव, अरुण फ़रेरा और वरनॉन गोन्ज़ाल्विस को गिरफ़्तार कर लिया, ये सभी लोग जाने-माने सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं.

  9. न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने विपक्षी नेता को अपमानित करने पर माफ़ी मांगी

    न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने संसद में अपने विपक्षी नेता को अपमानित करने के लिए माफ़ी मांगी है.

    विपक्ष के नेता डेविड सेमोर के ख़िलाफ़ जेसिंडा की कही बातें माइक्रोफ़ोन ऑन रहने के कारण सुनाई दे गईं थीं.

    मंगलवार को संसद में एक बहस के दौरान सेमोर ने जेसिंडा से कहा कि वो एक उदाहरण दें जब उन्होंने "ग़लती की, उसके लिए माफ़ी मांगी और फिर उसे सुधारा."

    इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा कई बार हुआ है.

    दोनों पक्षों में इसके बाद थोड़ी देर बहस हुई , इसके बाद जेसिंडा ने बैठते हुए कहा, "इतना बड़ा घमंडी."

    बाद में प्रधानमंत्री दफ़्तर के प्रवक्ता ने बताया कि अर्डर्न ने सेमोर से माफ़ी मांगी है.

  10. तवांग में भारत-चीन झड़प पर कांग्रेस ने मोदी सरकार से पूछे ये सवाल

    भारत और चीन के बीच तवांग में हुई झड़प पर सरकार के बयान के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर कई सवाल उठाए हैं.

    कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेसवार्ता में पीएम मोदी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा, "पिछले साल हम बार-बार चेतावनी दे रहे थे कि चीन अरुणाचल प्रदेश के कई इलाक़ों के नाम बदल रहा है. लेकिन मोदी जी कहते थे नाम बदलने से क्या होगा. देख लीजिए, अब वो दरवाज़े पर दस्तक दे रहे हैं."

    उन्होंने कहा कि बीजेपी के अरुणाचल से सांसद तापिर गाओ ने भी चीन के भारत की सीमा के अंदर घुसने की जानकारी दी थी.

    खेड़ा ने कहा, "तापिर गाओ कहते रहे कि चीन 60-70 किलोमीटर अंदर घुस आया है. आपके कहा कोई बात नहीं आने दीजिए...आप क्यों घबराते हैं चीन से, क्यों 18 बार चीन के राष्ट्रपति से मिलते हैं."

    इसके अलावा कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से पांच सवाल मोदी सरकार से पूछे.

    कांग्रेस ने लिखा, "मोदी सरकार ने 'पीएम केयर फंड' में चीन की कंपनि‍यों से पैसा क्‍यों ल‍िया?"

    "बीजेपी का डेल‍िगेशन 2019 में चीन की तानाशाह सरकार से क्‍या सीखने गया था? और वहां से क्‍या सीखकर आए हैं? चीन की कम्‍युन‍िस्‍ट पार्टी के साथ क्‍या समझौता क‍िया?"

    "2017 में मोदी सरकार ने चीन की ज‍िस कंपनी (यूसी वेब मोबाइल) पर आरोप लगाया था कि ये भारतीयों का डाटा चुराकर चीन भेजती है, आखिर क्या मजबूरी थी कि 2019 में बीजेपी ने इसी कंपनी को अपनी चुनावी ब्रांडिग में इस्तेमाल किया?"

    "व‍िश्‍व बैंक ने चीन की ज‍िस कंपनी 'डोंगफेंग' को बैन क‍िया, उस कंपनी को ही मोदी सरकार ने जम्‍मू कश्‍मीर में स्‍मार्ट मीटर का प्रोजेक्‍ट दे द‍िया. क्‍यों? जम्‍मू कश्‍मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में चीन की कंपनी को काम क्‍यों द‍िया गया?"

    "चीन सरकार के मुखपत्र 'ग्‍लोबल टाइम्‍स' ने क्‍यों ल‍िखा क‍ि मोदी के गुजरात हारने से चीन को नुकसान होगा? PM मोदी का चीन से ये कैसा र‍िश्‍ता है?"

    अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में बीते शुक्रवार भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में कुछ भारतीय सैनिकों को गंभीर चोटें आई हैं.

    भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को संसद में कहा है कि इस झड़प में कुछ भारतीय सैनिकों को चोटें आई हैं, लेकिन किसी भी सैनिक की मौत नहीं हुई है.

    उन्होंने कहा, "चीनी सैनिकों ने नौ दिसंबर 2022 को तवांग सेक्टर के यांग्त्से इलाक़े में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफ़ा रूप से बदलने का प्रयास किया. चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया.

    इस तनातनी में हाथापाई हुई. भारतीय सेना ने बहादुरी से चीनी सैनिकों को हमारे इलाक़े में अतिक्रमण करने से रोका और उन्हें उनकी पोस्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया. इस झड़प में दोनों ओर के कुछ सैनिकों को चोटें आईं.''

  11. दिनभर- पूरा दिन पूरी ख़बर मानसी और प्रेरणा के साथ

  12. अमेरिकी फ़र्म का दावा, फ़ादर स्टैन स्वामी के कंप्यूटर में हैकरों ने प्लांट किए सबूत

    अमेरिका की एक फ़ोरेंसिक फ़र्म ने दावा किया है कि फ़ादर स्टैन स्वामी, जिन्हें भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ़्तार किया गया था, उनके लैपटॉप पर हैकरों की मदद से कुछ सबूत प्लांट किए गए थे.

    वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक आर्सेनल कन्सल्टिंग नाम की फ़र्म की एक डिजीटल फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में पाया गया है कि हैकरों ने उनके लैपटॉप में वैसे दस्तावेज़ डाले जिन्हें सबूत के तौर पर पेश किया जा सके.

    फ़र्म के मुताबिक, ऐसे कुल 44 दस्तावेज हैं, जिसमें कथित तौर पर मायोवादियों को लिखी चिट्ठी भी शामिल है. इससे पहले भी ये फर्म इसी तरह के दावे कर चुकी है.

    एनआई की जांच में स्वामी और मायोवादियों के बीच इलेक्ट्रॉनिक पत्रचार का आरोप लगाया है.

    फ़ादर स्टैन स्वामी का जुलाई में निधन हो गया था. 84 साल के स्टैन स्वामी भीमा कोरेगाँव मामले में न्यायिक हिरासत में थे. उन पर हिंसा भड़काने का मामला चल रहा था.

    तमिलनाडु में जन्मे फ़ादर स्टेन स्वामी के पिता किसान थे और उनकी माँ गृहणी थीं.

    उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक बेंगलुरु में हाशिए पर मौजूद समुदायों के नेताओं के प्रशिक्षण के लिए एक स्कूल चलाया.

    स्टैन स्वामी के दोस्त और एक्टिविस्ट ज़ेवियर डायस बताते हैं, "उनके लिए किसी भी चीज़ की तुलना सबसे ज़्यादा ज़रूरी लोग थे. उन्होंने लोगों की सेवा के लिए चर्च की मान्यताओं की भी परवाह नहीं की."

    स्वामी मृदुभाषी व्यक्ति के रूप में चर्चित थे. उन्हें जानने वाले लोग बताते हैं कि 1991 में झारखंड आने के बाद से वे आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम करते रहे.

    फ़ादर स्टैन स्वामी के एक सहयोगी ने बीबीसी को बताया था कि वो लगातार आदिवासियों के लिए संघर्ष करते रहे.

    नक्सली होने के तमगे के साथ जेलों में सड़ रहे 3000 महिलाओं और पुरुषों की रिहाई के लिए वो हाई कोर्ट गए. वो आदिवासियों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए दूरदराज़ के इलाक़ों में गए.

  13. तवांग में झड़प पर चीनी सेना ने पूरे मामले पर कुछ और ही कहा

    अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 9 दिसंबर को चीन और भारत के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि चीनी सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश में तवांग के यांग्त्से में अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफ़ा बदलने का प्रयास किया.

    राजनाथ सिंह ने कहा, ''चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया. इस तनातनी में हाथापाई हुई. भारतीय सेना ने बहादुरी से चीनी सैनिकों को हमारे इलाक़े में अतिक्रमण करने से रोका और उन्हें उनकी पोस्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया. इस झड़प में दोनों ओर के कुछ सैनिकों को चोटें आईं.''

    अब चीन की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि वर्तमान में हालात नियंत्रण में हैं. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारत से अनुरोध करता है कि दोनों देशों के बीच सरहद को लेकर जो समझौते हैं, उनका पालन करे.

    वांग ने विदेश मंत्रालय की दैनिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है. चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार चीनी सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि पीएलए का वेस्टर्न थिएटर कमांड वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी भूभाग में रूटीन पट्रोलिगं कर रहा था तभी भारतीय सैनिक चीन के हिस्से में आ गए और चीन के सैनिकों को रोकने की कोशिश की.''

  14. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को ICC ने दिया झटका

    पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच जारी टेस्ट सिरीज़ का पहला मैच जिस रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया था,वहां की पिच को आईसीसी एलीट पैनल ऑफ मैच रेफ़रीज़ के एंडी पायक्रॉफ़्ट ने 'औसत से भी ख़राब' करार दिया है.

    इसकी वजह से आईसीसी पिच एंड आउटफील्ड मॉनिटरिंग प्रोसेस के अंतर्गत रावलपिंडी स्टेडियम को एक डीमेरिट पॉइंट दिया गया है.

    इस मैच की पिच की काफ़ी आलोचना हुई थी,जिसमें गेंदबाज़ों के लिए कोई मदद नहीं थी. मैच की पहली पारी में इंग्लैंड ने 657रनों का पहाड़ खड़ा किया था. मैच के पहले दिन 75 ओवर में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने 506 रन बना डाले थे.

    पाकिस्तान ने बदले में 579 रन बनाए थे. हालांकि,आखिरी दिन शानदार गेंदबाज़ी कर इंग्लैंड ने पाकिस्तान की दूसरी पारी को जल्दी से आउट कर ये मैच हरा दिया था.

    इस स्टेडियम को कम समय में दूसरी बार डीमेरिट पॉइंट मिला है. इससे पहले मार्च में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए मैच के बाद भी इसे 'औसत से ख़राब' पिच करार दिया गया था.

    पायक्रॉफ़्ट ने इस बारे में कहा, ''ये बहुत ही सपाट पिच थी,जिसमें किसी भी गेंदबाज़ के लिए कोई मदद नहीं थी. यही वजह थी कि बल्लेबाज़ों ने तेज़ी से रन बनाए और दोनों टीमों ने विशाल स्कोर खड़ा किया. मैच में इतने ओवर होने के बाद भी पिच में कोई बदलाव नहीं आया था.''

    ''क्योंकि बल्लेबाज़ों के लिए इस पिच में कुछ ख़ास नहीं था,इसलिए आईसीसी गाइडलाइंस के मुताबिक मैंने इस पिच को औसत से कमतर पाया है.''

    पायक्रॉफ्ट की ये रिपोर्ट पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भेज दी गई है.

  15. अरुणाचल प्रदेश के सीएम ने कहा, चीन याद रखे यह 1962 का भारत नहीं है

    अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से में भारत और चीन के सैनिकों की झड़प को लेकर कहा है कि यह इलाक़ा उनके विधानसभा क्षेत्र में आता है.

    खांडू ने कहा कि वह हर साल इस इलाक़े में सेना के जवान ग्रामीणों से मिलते हैं.

    पेमा खांडू ने कहा, ''यह 1962 नहीं है. अगर किसी ने दुःसाहस किया तो क़रारा जवाब मिलेगा. ईंट का जवाब पत्थर से नहीं, ईंट का जवाब लोहा से दे रही है हमारी वीर भारतीय सेना.''

    इससे पहले मंगलवार को भारत के रक्षा मंत्री ने पूरे मामले पर संसद में कहा था, ''नौ दिसंबर 2022 को चीनी सैनिकों ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से इलाक़े में, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफ़ बदलने का प्रयास किया. चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया. इस तनातनी में हाथापाई हुई. भारतीय सेना ने बहादुरी से चीनी सैनिकों को हमारे इलाक़े में अतिक्रमण करने से रोका और उन्हें उनकी पोस्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया. इस झड़प में दोनों ओर के कुछ सैनिकों को चोटें आईं.''

    अरुण जेटली जब रक्षा मंत्री थे तब उन्होंने डोकलाम विवाद को लेकर 2017 में कहा था कि 2017 का भारत 1962 के भारत से अलग है. जेटली ने कहा कि दोनों भारत में फ़र्क है.''

    जेटली ने कहा था, ''डोकलाम की जो वर्तमान स्थिति है, उसके साथ चीन छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहा है. इस मुद्दे पर चीज़ें बिल्कुल स्पष्ट हो गई हैं. ऐसे में किसी को लगता है कि हम वहाँ पर आएंगे और ज़मीन पर कब्ज़ा करेंगे जो कि बिल्कुल उचित नहीं है. 1962 की स्थिति कोई और थी, अब का भारत अलग है.''

  16. बिहार में सीटीईटी-बीटीईटी अभ्यर्थियों पर फिर चली लाठी

      • Author, विष्णु नारायण
      • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

    बिहार की राजधानी पटना के व्यस्ततम चौराहे ‘डाक बंगला चौराहे’ पर प्रदर्शन कर रहे सीटीईटी-बीटीईटी की परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों पर एक बार फिर से लाठीचार्ज हुआ है. सीटीईटी अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से विज्ञप्ति जारी करने और बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

    आज (मंगलवार) से बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई है और सीटीईटी पास शिक्षक अभ्यर्थियों ने विधानसभा घेराव का कॉल दिया था.

    आज सीटीईटी अभ्यर्थी जब गांधी मैदान से डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़े तो उन्हें डाकबंगला चौराहे पर ही रोक लिया गया. कई घटों तक डाकबंगला चौराहे पर जाम की स्थिति बनी रही.

    गांधी मैदान से विधानसभा के लिए बढ़े तो उन्हें डाक बंगला चौराहे पर ही रोक लिया गया. अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने साल 2019 में ही एग्जाम पास किया था. इंतज़ार करते-करते थक गए हैं. कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही, शिक्षा मंत्री कहते हैं कि इंतज़ार करो.

    क़रीब तीन महीने पहले भी शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज हुआ था. तब एक तिरंगा लिए सीटीईटी अभ्यर्थी पर लाठीचार्ज करने पर पटना के एडीएम लॉ एंड ऑर्डर के के सिंह को सस्पेंड तक कर दिया था.

  17. बिलकिस बानो मामले की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने ख़ुद को अलग किया

    बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई के ख़िलाफ़ दायर रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने ख़ुद को अलग कर लिया है.

    जस्टिस अजय रस्तोगी की अगुवाई वाली दो जजों की बेंच को इस मामले में सुनावाई करनी थी लेकिन जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने ख़ुद को इस सुनवाई से अलग किया.

    मई 2022 में जस्टिस रस्तोगी की बेंच ने फ़ैसला किया था कि मामले में दोषियों की रिहाई का फ़ैसला गुजरात सरकार करेगी, न कि उस राज्य की सरकार जहां ट्रायल किए गए थे. मामले का ट्रायल मुंबई में हुआ था.

    गुजरात में 2002 के दंगों में बिलकिस बानो नाम की मुस्लिम महिला से गैंग रेप के सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया था. 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंग रेप और उनके परिवार के 14 सदस्यों की हत्या के मामले 2008 में 11 लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा मिली थी. इन 14 सदस्यों में बिलकिस बानो की तीन साल की बेटी भी थी. इस साल अगस्त महीने में गुजरात के एक पैनल ने इन्हें सज़ा में छूट दे दी थी.

    मुंबई में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 2008 में बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोप में 11 अभियुक्तों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस सज़ा पर अपनी सहमति की मुहर लगाई थी.

    सभी दोषी 15 साल से अधिक वक़्त तक सज़ा काट चुके थे. इस आधार पर इनमें से एक अभियुक्त राधेश्याम शाह ने सज़ा में रियायत की गुहार लगाई थी.

  18. अरुणाचल का तवांग भारत के लिए इतना अहम क्यों है?

    अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में बीते शुक्रवार भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में कुछ भारतीय सैनिकों को गंभीर चोटें आई हैं. कहा जा रहा है कि चीनी सैनिक भी इस झड़प में ज़ख़्मी हुए हैं.

    भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को संसद में कहा है कि इस झड़प में कुछ भारतीय सैनिकों को चोटें आई हैं, लेकिन किसी भी सैनिक की मौत नहीं हुई है

    भारत चीन सीमा पर स्थित तवांग समुद्र तल से 10,000 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है. भारत और चीन दोनों के लिए ये रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है.

    यह इलाक़ा 1962 में भारत-चीन के बीच कई युद्ध का गवाह रहा है. तब चीन इस इलाक़े में घुस गया था लेकिन फिर वो वापस चला गया था.

    केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2016 में कहा था, "तवांग धार्मिक और रणनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है. ये 1962 की भारत-चीन युद्ध की याद दिलाता है."

    विशेषज्ञों का मानना है कि तवांग बहुत ज़रूरी इलाक़ा है क्योंकि ये चीन-भूटान सीमा पर है. चीन अगर तवांग पर कब्ज़ा कर लेता है तो अरुणाचल के नज़रिये से रणनीतिक तौर पर उसे बढ़त मिल जाएगी.

    इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहे दोनों देश

    चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिणी तिब्बत का इलाक़ा' बताता आया है और तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा से लेकर भारतीय प्रधानमंत्री के अरुणाचल दौरे पर चीन आपत्ति जताता रहा है.

    चीन इन कठिन इलाक़ों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है.

    चीन ने साल 2017 में एलान किया था कि वो तिब्बत से ल्हासा तक के लिए चेंगदू होते हुए रेलवे लाइन का निर्माण करेगा.

    नवंबर 2013 में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के निकट तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के लिए एक सड़क बनाई है. इस सड़क की मदद से ये इलाक़ा चीन के हाईवे नेटवर्क से जुड़ता है.

    अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ चीन की सरकार ने 200 अरब यूआन ल्हासा के आसपास रोड नेटवर्क में खर्च करने का एलान किया था.

    भारत भी इलाक़े में सुरक्षा के लिहाज से यहाँ इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहा है. साल 2016-17 में नरेंद्र मोदी सरकार ने क़रीब 5,850 करोड़ इलाक़े के 610 किलोमीटर लंबी सड़क को बेहतर बनाने के लिए मंज़ूरी दी है.

    इसके अलावा सेना की बेहतर मूवमेंट के लिए तास्किंग गांव नें 52 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना है.

    द प्रिंट की ख़बर की एक ख़बर के मुताबिक, अरुणाचल के इस इलाके को जोड़ने वाले कई पुलों को भी अपग्रेड किया गया है. इसके अलावा सेला सुरंग का काम भी ख़त्म होने वाला है, जो कि 13,000 फ़ीट पर दुनिया की सबसे ऊंची दो लेन की टनल होगी.

    लेकिन फ़िलहाल तवांग के लिए सड़क का रास्ता ही ज़रिया है. तवांग से सबसे क़रीब रेलवे स्टेशन भी 330 किलोमीटर दूर है. हेलीकॉप्टर वहां पहुंचते हैं लेकिन उनका परिचालन भी मौसम के हालात पर निर्भर है.

  19. चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिणी तिब्बत' क्यों कहता है?

  20. नीतीश कुमार का यह बयान क्या तेजस्वी को उत्तराधिकार बनाने का संकेत है?

    बिहार में इसी साल अगस्त महीने में नीतीश कुमार ने एक बार फिर से बीजेपी को छोड़ आरजेडी का दामन थामा तो ऐसी अटकलें लगाई गईं कि अब वह तेजस्वी को बिहार की ज़िम्मेदारी दे देंगे और ख़ुद राष्ट्रीय राजनीति में जाएंगे.

    बिहार में आरजेडी नेता भी कहते मिल जाते हैं कि आने वाले समय में नीतीश कुमार बिहार की ज़िम्मेदारी तेजस्वी यादव को ही सौंप देंगे, इसीलिए उनकी हर बात मानी जा रही है.

    नीतीश कुमार के हालिया बयान से इन अटकलों को बल मिला है कि वह बिहार की कमान तेजस्वी को देने का मन बना चुके हैं.

    सोमवार को नीतीश कुमार ने बिहारशरीफ़ के पैठना-भागनबिगहा रहुई डेंटल कॉलेज का उद्घाटन करते हुए कहा था कि उन्होंने बहुत काम कर लिया और अब तेजस्वी आगे का काम करते रहेंगे. नीतीश कुमार ने लोगों से अपील की है कि अब वह तेजस्वी को आगे बढ़ाएं. जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ऐसा कह रहे थे तो बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव भी वहीं थे.

    नीतीश कुमार ने कहा, ''हमलोग तो बहुत काम कर ही दिए हैं. बाक़ी भी कुछ होगा तो तेजस्वी जी आगे का काम करते रहेंगे. कोई आपस में विवाद भी करवाना चाहे तो मत उलझिएगा. आपस में एकजुट रहना है.''

    2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पूर्णिया ज़िले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा था कि यह उनका आख़िरी चुनाव है और अंत भला तो सब भला. नीतीश कुमार ने कहा था, ''और ये जान लीजिए कि यह मेरा आख़िरी चुनाव है. अंत भला तो सब भला.''

    यह सवाल पहले से ही उठता रहा है कि नीतीश कुमार के बाद जेडीयू का क्या होगा? नीतीश कुमार ने अभी तक किसी को आगे नहीं किया है जिससे पता चले कि उनके बाद पार्टी कौन देखेगा. अगर 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार का आख़िरी था तो 2025 में उनकी पार्टी का क्या होगा?

    जब नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को जेडीयू की कमान सौंपी थी तब कहा जा रहा था कि उन्होंने अपना उत्तराधिकार चुन लिया है. लेकिन आरसीपी सिंह पार्टी से बाहर चुके हैं और उन्हें भी लगता है कि नीतीश कुमार तेजस्वी को ही कमान सौंप देंगे.