ताज महल से जुड़े 'ग़लत तथ्य' किताबों से हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से SC का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने इतिहास की किताबों में ताज महल के बारे में दी गई 'ग़लत जानकारी' को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
लाइव कवरेज
प्रियंका झा and शुभम किशोर
चीन में शी जिनपिंग के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों को पुलिस ने दबाया, आख़िर ये नौबत आई कैसे?
वीडियो कैप्शन, चीन में शी जिनपिंग के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों को पुलिस ने दबाया. आख़िर ये नौबत आई कैसे?
सड़कों पर राष्ट्रपति जिनपिंग के इस्तीफ़े की मांग करते हुए प्रदर्शन होने लगे और कोरा कागज़ पकड़कर लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराया.
चीन में सरकार विरोधी प्रदर्शन बेहद कम देखे जाते हैं.
इस वजह से पुलिस फ़ौरन हरकत में आई और प्रदर्शनकारियों पर सख़्ती बरती.
आज अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देकर कहा कि वो देश के कानून के दायरे में रहें.
चीन के कई प्रमुख शहरों में भारी पुलिस बल तैनात हैं. इनमें शंघाई भी शामिल है जहां भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने बैरीकैड्स लगाए हैं.
ये प्रदर्शन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में एक बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित हो रहे हैं. बीबीसी संवाददाता मार्क अर्बन की ख़ास रिपोर्ट.
ब्रेकिंग न्यूज़, सिंगर जुबिन नौटियाल सीढ़ियों से गिरकर घायल हुए, अस्पताल में भर्ती
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सिंगर जुबिन नौटियाल सीढ़ियों से गिरने की वजह से घायल हो गए हैं. उनके प्रतिनिधि ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी पीटीआई से बताया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
जुबिन नौटियाल के प्रतिनिधि ने मीडिया को जारी किए गए बयान में कहा है, "गिरने की वजह से उनकी कोहनी टूट गई है.
पसलियों में क्रैक है और सिर में चोट लगी है."
33 साल के संगीतकार जुबिन के दाहिनी हाथ का ऑपरेशन किया जाएगा और उन्हें ज़्यादा मेहनत का काम करने से मना किया गया है.
नौटियाल 'रातां लंबियां...', 'लुट गए...', 'हमनवा मेरे...', 'तुझे कितने चाहने लगे हम...', 'तुम ही आना...' और 'बेवफ़ा तेरा मासूम चेहरा...' जैसे मशहूर गीतों के लिए जाने जाते हैं.
'गोविंदा नाम मेरा' मूवी के लिए उनका 'बना शराबी...' गीत बुधवार को रिलीज़ हुआ है.
BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए
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हेलो. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकरात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे होंगे.
हम जानते हैं कि आप जैसे व्यस्त इंसान के लिए सारी ख़बरों पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.
ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.
ये पांच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.
अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ ने उत्तर कोरिया पर लगाए नए प्रतिबंध
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अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों ने उत्तर कोरिया के तीन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. ये कदम उत्तर कोरिया के
हाल के मिसाइल परीक्षणों के बाद उठाए गए हैं.
उत्तर कोरिया ने इस साल रिकॉर्ड 60 मिसाइलें लॉन्च की हैं. इसके
साथ ही उन्होंने कई इंटर कॉन्टिनेंटल मिसाइलें भी लॉन्च की हैं. उत्तर कोरिया के अधिकारी जॉन – II हो,
यू जिन और केम सू गिल ने कथित तौर पर इन हथियारों के विकास में “बहुत बड़ी भूमिका” निभाई है.
जापान,
दक्षिण कोरिया और यूरोपीय यूनियन ने उन पर प्रतिबंध लगाए हैं.
उत्तर कोरिया पर कई सालों से पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखे
हैं. नए प्रतिबंधों के तहत इन अधिकारियों की अमेरिका में सभी संपत्तियां फ़्रीज़
कर दी जाएंगी, ये लोग किसी तरह का व्यापार या किसी अमेरिकी से लेनदेन नहीं कर पाएंगे.
पाकिस्तान में सेना प्रमुख के बदलते ही तहरीक-ए-तालिबान ने क्यों किया बड़ा ऐलान?
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इमेज कैप्शन, इस साल फरवरी की इस तस्वीर में पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत के बाद लौच रहे हरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की कमिटी के सदस्य और नेता शमी उल-हक़
पाकिस्तान सरकार और प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच बातचीत, संघर्ष विराम, फिर अघोषित हमले, फिर उसके बाद घोषित हमले और अब उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई जारी है.
लेकिन क्या वास्तव में दोनों के बीच बातचीत की प्रक्रिया अब नाकाम हो चुकी है, या अभी भी इसमें प्रगति संभव है?
टीटीपी के हमलों की घोषणा के बाद, क्वेटा में पोलियो विरोधी अभियान के लिए जा रही पुलिसकर्मियों की बस के पास हुए आत्मघाती हमले को एक बड़ा हमला माना जा रहा है. हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और 20 पुलिसकर्मियों समेत 25 लोग घायल हुए.
प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली और कहा कि ताज़ा आदेशों के मुताबिक़ इस हमले को अंजाम दिया गया है.
इसरो जासूसी मामले से जुड़े पाँच अभियुक्तों को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका
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इमेज कैप्शन, नांबी नारायण
सुप्रीम कोर्ट ने साल 1994 के इसरो जासूसी मामले में वैज्ञानिक नांबी नारायण को कथित रूप से फंसाने के मामले से जुड़े अभियुक्तों को झटका दिया है.
शीर्ष न्यायालय ने इस मामले में पुलिस और आईबी के पांच पूर्व अधिकारियों को अग्रिम ज़मानत देने वाले केरल हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया. केरल उच्च न्यायालय ने 2021 में ये आदेश दिया था.
जस्टिस एमआर शाह की अगुवाई वाली पीठ ने ज़मानत याचिकाओं को हाई कोर्ट वापस भेज दिया और कहा कि इसपर चार सप्ताह के भीतर फ़ैसला किया जाए.
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सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों को पाँच सप्ताह के लिए गिरफ़्तारी से सुरक्षा भी दी है, जब तक हाईकोर्ट अपना अतिम फ़ैसला न ले ले.
सीबीआई ने केरल हाई कोर्ट की ओर से पाँच अभियुक्तों की दी गई अग्रिम ज़मानत वाले फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
केरल हाई कोर्ट ने पूर्व गुजरात डीजीपी आरबी श्रीकुमार, पूर्व केरल डीजीपी सिबी मैथ्यूज़, केरल के दो पूर्व पुलिस अधिकारी एस विजयन और एस दुर्गा दत्त के साथ रिटायर्ड ख़ुफ़िया अधिकारी पीएस जयप्रकाश को इस मामले में अग्रिम ज़मानत दे दी थी.
सीबीआई का कहना था कि अग्रिम ज़मानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है.
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डॉक्टर नांबी नारायण इसरो के वो वैज्ञानिक थे जिन्हें 30 नवंबर 1994 को गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान को देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
उन पर भारत के सरकारी गोपनीय क़ानून (ऑफ़िशियल सीक्रेट लॉ) के उल्लंघन और भ्रष्टाचार समेत अन्य कई मामले दर्ज किए गए. 1996 में उन्हें ज़मानत मिली. 1996 में ही सीबीआई ने उन्हें क्लीनचिट भी दे दी.
इसरो की एक आंतरिक जांच में भी पता चला कि क्राइजेनिक इंजन से जुड़ा कोई काग़ज ग़ायब नहीं था.
नांबी नारायणन ने उन्हें ग़लत तरीके से फंसाने के लिए केरल सरकार पर मुक़दमा कर दिया था. मुआवज़े के तौर पर उन्हें 50 लाख रुपए दिए गए थे.
लश्कर-जैश जैसे पाकिस्तानी आतंकी समूह जा रहे हैं अफ़ग़ानिस्तान, पूर्व अफ़ग़ान सुरक्षा प्रमुख बोले
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अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व सुरक्षा प्रमुख ने दावा किया है कि तालिबान सरकार लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों को अफ़ग़ाानिस्तान में अपना ठिकाना बनाने दे रही है.
आज प्रेस रिव्यू में सबसे पहले अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' की ये ख़बर.
अफ़ग़ान ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व निदेशक रहमतुल्लाह नाबिल ने द हिंदू को इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत को तालिबान के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए लेकिन उसे अपनी सुरक्षा को लेकर कोताही नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने चेतावनी दी कि तालिबान की मदद से भारत को निशाना बनाने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी समूहों ने अफ़ग़ानिस्तान को अपना नया ठिकाना बना लिया है और अब उनकी पहुंच बेहतर तकनीक तक हो रही है.
राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट में शामिल होना चाहते थे ये संत, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा...
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Author, सुचित्र मोहंती, बीबीसी हिंदी के लिए
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इमेज कैप्शन, समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, स्वामी चक्रपाणि हिंदू महासभा से भी जुड़े हुए हैं
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें स्वामी चक्रपाणि ने मांग की थी कि उन्हें राम जन्मभूमि ट्रस्ट में शामिल किया जाए.
राम जन्मभूमि ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की देखरेख कर रहा है.
चीफ़ जस्टिस डॉक्टर धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने चक्रपाणि को अपनी बात ट्रस्ट के समक्ष रखने का निर्देश दिया.
स्वामी चक्रपाणि की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "हम इस याचिका पर यहां सुनवाई नहीं करने जा रहे हैं. हमें माफ करें. जो दिल में आए, वो करें."
खुद को संत कहने वाले स्वामी चक्रपाणि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ये मांग की थी कि अदालत उन्हें ट्रस्ट में शामिल किए जाने के लिए सक्षम अधिकारियों को निर्देश जारी करे.
एम्स सर्वर हैकिंग क्यों है ख़तरे की घंटी
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भारत में लगभग सभी को पता है कि दिल्ली का एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) देश का सबसे प्रतिष्ठित, पुराना, बड़ा और सबसे भरोसेमंद सरकारी अस्पताल है.
एम्स तो 1956 से मरीज़ों के लिए खुल गया था, लेकिन कम्प्यूटर पर डेटा सुरक्षित रखने की तकनीक आने के बाद से एक अनुमान है कि कम से कम पांच करोड़ मरीज़ों के सभी रिकॉर्ड इस अस्तपाल में महफ़ूज़ रहे हैं. 23 नवंबर, 2022 तक.
क्योंकि इस दिन एम्स अस्पताल के कम्प्यूटर सर्वर पर एक ज़बर्दस्त साइबर हमला हुआ था जिसके बाद लगभग सभी सर्वर ठप पड़ गए.
इसमें अस्पताल का ई-हॉस्पिटल नेटवर्क भी शामिल था जिसे नेशनल इंफ़ॉरमेटिक्स सेंटर (एनआईसी) संचालित करता है. अफ़रातफ़री के बीच इमरजेंसी, आउट-पेशेंट, इन-पेशेंट और सभी जांच लैबों का काम कम्प्यूटरों से हटाकर हाथ से करना शुरू करना पड़ा था.
समाजवादी पार्टी के विधायक इरफ़ान सोलंकी गिरफ़्तार
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इमेज कैप्शन, समाजवादी पार्टी के विधायक इरफ़ान सोलंकी
समाजवादी पार्टी के विधायक इरफ़ान सोलंकी और उनके भाई रिज़वान सोलंकी को शुक्रवार को कानपुर पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया. दोनों अपने परिवार के साथ आत्मसमर्पण करने पुलिस कमिश्नर ऑफ़िस पहुंचे थे.
इरफ़ान और रिज़वान सोलंकी पर ज़मीन विवाद में एक महिला के घर को जलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था. दोनों फ़रार चल रहे थे और दोनों के ख़िलाफ़ गै़र-ज़मानती वारंट जारी किया गया था.
पुलिस ने सपा विधायक इरफान सोलंकी और उनके भाई रिजवान के खिलाफ जाजमऊ की डिफ़ेंस कॉलोनी में रहने वाली नाजिर फ़ातिमा की शिकायत पर बीती आठ नवंबर को मुक़दमा दर्ज किया था.
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महिला का आरोप था कि ज़मीन के विवाद में विधायक सोलंकी और उनके भाई के साथ कुछ अन्य साथियों ने उनके घर को आग लगा दी थी. महिला ने कहा कि घटना के समय वो एक शादी में शामिल होने गई थीं.
फ़ातिमा का आरोप है कि डिफ़ेंस कॉलोनी में उनकी एक ज़मीन है जिसके एक बड़े हिस्से पर सपा विधायक और उनके भाई ने कब्ज़ा कर रखा है. इसका विरोध करने पर अभियुक्तों ने उनके घर में आग लगा दी.
गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने बताया, "इन लोगों को लगातार पुलिस ढूंढ रही थी. गै़र ज़मानती वारंट जारी किए गए. कई राज्यों में दबिश दी थी. आज इन दोनों ने कमिश्नर कार्यालय में आत्मसमर्पण किया. पुलिस ने इन्हें तुरंत गिरफ़्तार किया है और दोनों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा. अगर सबूतों के आधार पर ज़रूरत पड़ी तो पुलिस कस्टडी कोर्ट से मांगी जाएगी."
'द कश्मीर फ़ाइल्स' को प्रोपेगैंडा कहने वाले नदाव लपिड ने क्या मांगी माफ़ी
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'द कश्मीर फ़ाइल्स' को 'प्रोपेगैंडा' और 'भद्दी' फ़िल्म कहने वाले इसराइली फ़िल्म निर्माता और गोवा में हुए अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह के चीफ़ ज्यूरी नदाव लपिड ने माफ़ी मांगी है.
हालांकि, उन्होंने फ़िल्म 'द कश्मीर फ़ाइल्स' को लेकर दिए बयान पर नहीं बल्कि लोगों को पहुंचे दुख के लिए माफ़ी मांगी है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद कश्मीरी पंडित समुदाय या पीड़ितों का अपमान करना नहीं था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ नदाव लपिड ने एक समाचार चैनल से कहा, "मैं किसी का अपमान नहीं करना चाहता. मेरा मकसद पीड़ितों या उनके रिश्तेदारों का अपमान करना कभी नहीं था. अगर मेरे बयान को इस तरह समझा गया है तो मैं माफ़ी मांगता हूं."
उन्होंने कहा, "लेकिन साथ ही, मैंने जो कुछ भी कहा... मैंने स्पष्ट रूप से कहा कि मेरे और मेरे साथी ज्यूरी सदस्यों के लिए यह एक 'प्रोपेगैंडा' फ़िल्म थी जिसे ऐसे प्रतिष्ठित प्रतिस्पर्धात्मक सेक्शन में दिखाना सही नहीं था. मैं इस बात को बार-बार दोहरा सकता हूं.''
भारत-पाकिस्तान वर्ल्ड कप मैच में कोहली के छक्कों पर क्या बोले हारिस रऊफ़
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इमेज कैप्शन, हारिस रऊफ़ (फ़ाइल फ़ोटो)
पाकिस्तानी क्रिकेटर हारिस रऊफ़ का मानना है कि विराट कोहली के सिवा ऐसा कोई भी बेजोड़ ख़िलाड़ी नहीं जो उनकी बॉल पर वैसे छक्के लगाता, जैसे टी-20 विश्व कप में भारत के साथ मुक़ाबले में लगे. इस मैच में भारत ने पाकिस्तान को आख़िरी गेंद पर चार विकेट से हराया था.
अक्टूबर में हुए इस मुक़ाबले को लेकर रऊफ़ ने पहली बार इस पर अपनी राय रखी. पाकिस्तानी वेबसाइट 'क्रिकविक' से बात करते हुए उन्होंने ये भी माना कि अगर हार्दिक पंड्या या दिनेश कार्तिक उनकी बॉल पर इस तरह छक्के मारते तो उन्हें 'दुख' होता. इस मैच में विराट कोहली ने 52 गेंदों पर 83 रनों की नाबाद पारी खेली थी. ये उनकी सर्वश्रेष्ठ टी-20 पारियों में से एक है.
रऊफ ने 'क्रिकविक' वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा, "वह (कोहली) अलग स्तर के खिलाड़ी हैं और वह जिस तरह के शॉट्स खेलते हैं और उन्होंने जो दो छक्के जड़े, मुझे नहीं लगता कि कोई दूसरा खिलाड़ी उस तरह के शॉट्स लगा पाता. अगर दिनेश कार्तिक या हार्दिक पंड्या ने मुझ पर उस तरह से शॉट लगाए होते तो मुझे दुख होता लेकिन ऐसा कोहली ने किया था जो अलग स्तर के खिलाड़ी हैं."
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उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता था कि वह (कोहली) उस लेंथ पर मैदान में इस तरह का शॉट लगा सकते हैं. इसलिए उन्होंने मेरी गेंद पर जो शॉट लगाया, वो उनका क्लास था. मेरी प्लानिंग ठीक थी लेकिन वह शॉट शानदार स्तर का था. "
रऊफ़ ने कहा, "भारत को 12 गेंदों पर 31 रन चाहिए थे. मैंने चार गेंदों पर सिर्फ़ तीन रन दिए. मैं जानता था कि आख़िरी ओवर नवाज़ डालने वाला है, वो एक स्पिनर हैं और मैंने कोशिश की कि उनके ओवर में 20 से अधिक रन बनाने के लिए बचें."
रऊफ़ ने ये भी बताया कि उनके और विराट कोहली के बीच अच्छे रिश्ते हैं.
जो बाइडन बोले, पुतिन से बात करने को तैयार, लेकिन रखी शर्त
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करना चाहते हैं बशर्ते रूसी राष्ट्रपति यूक्रेन में जारी युद्ध ख़त्म करने की इच्छा दिखाएं.
जो बाइडन ने ये बातें अपने समकक्ष फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक साझा प्रेस कांफ्रेंस में कही. इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं.
इस दौरान मैक्रों ने व्हाइट हाउस में बाइडन से मुलाक़ात की और दोनों नेताओं के बीच फ्रांस की उर्जा ज़रूरतों के बरे में बात हुई. मैक्रों ने बाइडन को बताया कि स्वच्छ उर्जा को लेकर अमेरिका जो सब्सिडी दे रहा है उसका असर यूरोप में नौकरियों पर पड़ेगा.
दोनों नेताओं के बीच यूरोप की परेशानियों का निपटारा करने के लिए एक ज्वायंट टास्क फोर्स बनाने पर भी सहमति हुई. इसके अलावा दोनों के बीच रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर चर्चा हुई.
ब्रेकिंग न्यूज़, सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में 'मास्टरमाइंड' गोल्डी बरार अमेरिका से गिरफ़्तार: भगवंत मान
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पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मास्टरमाइंड माने जाने वाले गोल्डी बरार को अमेरिका से हिरासत में लिया गया है.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर इसकी जानकारी दी है.
भगवंत मान ने अहमदाबाद में कहा, "कनाडा में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बरार को आज सुबह अमेरिका में पकड़ लिया गया है. कैलिफोर्निया पुलिस ने हमसे संपर्क किया है. जल्द ही गोल्डी बरार को भारत लाया जाएगा और उसे सख्त से सख्त सजा दी जाएगी. इससे बहुत से परिवारों को न्याय मिलेगा."
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इसी साल 29 मई को सिद्धू मूसेवाला की हत्या कर दी गई थी. उनपर सरेआम गोलियां चलाई गई थी, जिससे मौक़े पर ही उनकी मौत हो गई थी.
पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह को इस हमले का संदिग्ध बताया. बिश्नोई 2015 से ही जेल में बंद है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े गोल्डी बरार ने मूसेवाला की हत्या की ज़िम्मेदारी ली थी.
इससे पहले दो मामलों में इंटरपोल गोल्डी बरार के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर चुकी है.
वीडियो कैप्शन, सिद्धू मूसेवाला के चाहने वाले उन्हें याद कर रहे हैं.
पंजाब पुलिस ने ये दावा भी किया था कि ये सिद्धू मूसेवाला की हत्या यूथ अकाली दल के नेता विकी मिड्डुखेरा की 2021 में हुई हत्या का बदला लेने के लिए की गई थी.
पुलिस के दावे के अनुसार सिद्धू मूसेवाला की हत्या की पूरी प्लानिंग गोल्डी बरार ने विदेश में बैठे-बैठ की और लॉरेंस बिश्नोई के साथ मिलकर अपने शूटर्स के ज़रिए इस हत्या को अंजाम दिया.
लॉरेंस और गोल्डी दोनों ही चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति में सक्रिय थे. अबोहर ज़िले के रहने वाले लॉरेंस चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे.
क़तर में ख़ास अंदाज़ में फ़ुटबॉल विश्व कप का लुत्फ़ उठाते आम लोग
वीडियो कैप्शन, क़तर के आम लोग ख़ास अंदाज़ में उठा रहे फ़ुटबॉल विश्व कप का लुत्फ़
फुटबॉल विश्व कप का ख़ुमार पूरे क़तर पर सिर चढ़ कर बोल रहा है और ऐसा हो भी क्यों ना?
ये मध्य पूर्व में हो रहा पहला विश्व कप टूर्नामेंट जो है, लेकिन स्टेडियम और फैन ज़ोन से दूर क़तर के आम लोग ख़ास अंदाज़ में इस वर्ल्ड कप को देख रहे हैं.
बीबीसी की टीम दोहा में ऐसे ही कुछ फ़ुटबॉल फ़ैन्स से मिली.
ताइवान के लोकतंत्र की रक्षा के लिए ब्रिटेन सैनिक सहायता भेज सकता है: ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल
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इमेज कैप्शन, ताइवान की राष्ट्रपति के साथ ब्रिटेन के विदेश मामलों से जुड़ी समिति की अध्यक्ष एलिसिया केयर्न्स
ताइवान गए ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख ने कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो ब्रिटेन इस क्षेत्र में ताइवान के लोकतंत्र की रक्षा के लिए सैनिक सहायता भेज सकता है.
ब्रिटेन के विदेश मामलों से जुड़ी समिति की अध्यक्ष एलिसिया केयर्न्स ने कहा है कि ताइवान के पास ऐसे दोस्त हैं जो उसका साथ देंगे.
16 साल बाद ब्रिटेन के किसी प्रतिनिधिमंडल की ये पहली ताइवान यात्रा है.
चीन ने इस ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल की ताइवान यात्रा पर उसके आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया है.
चीन का कहना है कि ये यात्रा 'वन चाइना पॉलिसी' का स्पष्ट उल्लंघन है.
ताइवान में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है और वो खुद को चीन से अलग मानता है लेकिन बीजिंग उसे एक अलग हो गए प्रांत के रूप में देखता है.
COVER STORY: क्या गुजरात को मिल रही है तरजीह?
वीडियो कैप्शन, क्या विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र हाल ही में कई बड़े प्रोजेक्ट्स गए गुजरात की झोली में?
महाराष्ट्र और गुजरात की जो साल 1960 में अलग राज्य बन गए और तब से दोनों मे दोस्ती भी है और विवाद भी है.
विकास और निवेश को लेकर विवाद पिछले कुछ दिनों में तब चरम पर पहुंच गया जब गुजरात चुनाव से ठीक पहले दो बड़े प्रोजेक्ट्स महाराष्ट्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात में गए.
क्या इसका कारण राजनैतिक है या फिर कुछ और. इसी का पता लगाने के लिए बीबीसी संवाददाता मयूरेश कोण्णूर ने महाराष्ट्र और गुजरात का दौरा किया और भेजी ये ग्राऊंड रिपोर्ट.
परेश रावल ने 'बंगालियों के लिए मछली पकाओगे' वाले बयान पर माफ़ी मांगी
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अभिनेता और बीजेपी नेता परेश रावल ने अपने 'बंगालियों के लिए मछली पकाओगे' वाले बयान के लिए माफ़ी मांगी है.
दरअसल, परेश रावल का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था. वीडियो में वो गुजराती भाषा में वलसाड की एक सभा को संबोधित कर रहे थे.
वीडियो में परेश रावल कह रहे हैं, "गैस सिलेंडर महंगे हैं लेकिन उसके दाम घटेंगे भी. लोगों को रोज़गार भी मिलेगा. लेकिन क्या होगा अगर दिल्ली की तरह रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी आपके पड़ोस में आकर रहने लगेंगे? आप गैस सिलेंडरों का क्या करोगे? बंगालियों के लिए मछली पकाओगे?"
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"गुजरात के लोग महंगाई झेल लेंगे लेकिन ये नहीं... जिस तरह से वो लोग भद्दी बाते करते हैं, उन लोगों को अपने मुंह पर डायपर लगाने की ज़रूरत है."
एक यूज़र ने ये भी लिखा कि उन्हें इस मसले पर सफ़ाई देनी चाहिए.
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इस यूज़र को कोट करते हुए परेश रावल ने लिखा, "बिलकुल मछली कोई मुद्दा नहीं था क्योंकि गुजराती भी मछली पकाते और खाते हैं लेकिन मैं ये स्पष्ट करना चाहता हूं कि बंगाली से मेरा मतलब अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं से था. फिर भी मैंने आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई हो तो उसके लिए माफ़ी मांगता हूं."
क़तर: दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक में ग़रीबी कैसी है?
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क़तर में ग़रीबी दिखना और इसे लेकर बात करना बहुत आसान मामला नहीं है. जो लोग इस पर बात भी करते हैं, वो बहुत संभल कर बोलते हैं.
बीबीसी मुंडो से एक टैक्सी ड्राइवर ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा, "ये बहुत मुश्किल मुद्दा है और आपको सबसे पहले खुद को बचाना होगा क्योंकि इस पर प्रशासन बहुत सख़्त है."
क़तर दुनिया के सबसेधनी देशोंमें शामिल है, वहां भी ग़रीबी है और इस बारे में यहां ठीक से बात नहीं होती है. वो इसलिए कि ग़रीबी भी यहां बहुत हद तक छिपी होती है.
विदेशी कामगारों को अलग-थलग और बहुत दुर्गम जगहों पर रखा जाता है, ख़ासकर उन इलाक़ों से बहुत दूर जहां पर्यटक आम तौर पर आते-जाते हैं.
लोकतंत्र के बारे में हमें सिखाने की ज़रूरत नहीं, यूएन में भारत बोला
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि लोकतंत्र के बारे में उसे सिखाने की ज़रूरत नहीं है. संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कम्बोज ने ये बयान दिया.
भारत गुरुवार को ही दिसंबर महीने के लिए 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बना है. इस दौरान भारत की प्राथमिकता आतंकवाद से मुक़ाबला करना और बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना होगा.
यूएनएससी की अध्यक्षता के पहले दिन भारत की रुचिरा कम्बोज ने मासिक कार्यक्रम पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित किया.
भारत में प्रेस की आज़ादी और लोकतंत्र से जुड़े एक सवाल के जवाब में रुचिरा कम्बोज ने कहा, "मैं ये कहना चाहूंगी कि लोकतंत्र पर क्या करना है, ये हमें बताने की ज़रूरत नहीं है."
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उन्होंने कहा, "जैसा कि सब जानते हैं भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है. भारत में, लोकतंत्र की जड़ें ढाई हज़ार साल पुरानी हैं. हम हमेशा एक लोकतंत्र रहे हैं. हाल के समय में देखें तो हमारे यहां लोकतंत्र के सभी मज़बूत स्तंभ- विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और चौथा स्तंभ प्रेस मज़बूती से काम कर रहे हैं. इसके साथ ही सोशल मीडिया भी है. इसलिए ये देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में एक है."
रुचिरा कम्बोज ने कहा, "हर पांच साल के बाद हम दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया (चुनाव) पूरी करवाते हैं. यहां हर किसी को अपने मन का बोलने की आज़ादी है और इसी तरह हमारा देश चलता है. हम तेज़ी से सुधार कर रहे हैं, बदलाव ला रहे हैं."