बिहार के भीतर पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं.
छात्र जद (यू) के उम्मीदवार आनंद मोहन को अध्यक्ष पद पर विजयी घोषित किया गया. तो वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सम्बद्ध विपुल महासचिव पद पर विजयी रहे.
19 नवंबर के शाम से ही 'पटना आर्ट्स एंड क्राफ्ट कॉलेज' में हो रही काउंटिग के परिणाम आज (20 नवंबर) को तड़के आए.
आनंद मोहन को कुल 3710 वोट मिले और दूसरे नंबर पर एनएसयूआई से सम्बद्ध शाश्वत शेखर रहे.
तीसरे नंबर पर छात्र राजद से सम्बद्ध साकेत कुमार रहे. आइसा और छात्र राजद के साथ ही जन अधिकार छात्र परिषद जैसे छात्र संगठन सेंट्रल पैनल में जगह बनाने में असफल रहे.
सेंट्रल पैनल के बाकी पद जैसे उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पर भी छात्र जद (यू) के सिर ही जीत का सेहरा बंधा.
हालांकि छात्र राजद और आइसा जैसे छात्र संगठनों ने पटना विश्वविद्यालय प्रशासन पर पक्षपात व सरकार के इशारे पर काम करने के आरोप लगाए हैं. वहीं काउंटिंग के दौरान काउंटिंग सेंटर पर जायजा लेने पहुंचे कुलपति गिरीश चौधरी की गाड़ी पर हमला भी हुआ.
कुलपति के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी हुई.
इसके अलावा मतगणना की राउंड दर राउंड घोषणा न किए जाने को लेकर भी छात्र समुदाय में रोष देखा गया. छात्र राजद से सम्बद्ध भाग्य भारती और आइसा से सम्बद्ध आदित्य रंजन का कहना था कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि वोटों की गिनती की घोषणा न की जाए.
छात्रों को यह पता न चल सके कि कौन आगे चल रहा है और कौन पीछे, जबकि तमाम विश्वविद्यालयों से लेकर मेनस्ट्रीम राजनीति में वोटिंग के रुझान के साथ ही शुरू से अंत तक हो रही गिनती के राउंड की घोषणा की जाती है. चाहे वो मुखिया या वार्ड काउंसलर का चुनाव हो या फिर विधायक या सांसद का चुनाव ही क्यों न हो?
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में इस वर्ष कुल 54.5 प्रतिशत मतदान हुआ है. सबसे अधिक वोट पटना वीमेंस कॉलेज में 68.75 प्रतिशत तक हुआ, वहीं सबसे कम वोटिंग प्रतिशत पटना लॉ कॉलेज का रहा. यहां महज 32.29 प्रतिशत वोट पड़े. तो वहीं बीते रोज मतदान के दौरान पटना कॉलेज कैंपस के भीतर हुई हिंसा और गोलीबारी के साथ ही पत्रकारों के साथ की गई मारपीट के मामले में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
सूबे की राजनीति को संचालित करने वाले तमाम राजनीतिक दल पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर दखल देते हैं. सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के कई ऐसे बड़े नेता हैं जो पटना यूनिवर्सिटी से छात्र राजनीति करते हुए ही मेनस्ट्रीम राजनीति में दाखिल हुए. चाहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद हों या फिर सीएम नीतीश कुमार. चाहे सुशील कुमार मोदी हों या फिर रविशंकर प्रसाद.