आठ अरब होने वाली है दुनिया की आबादी, कौन सी मुश्किलें बढ़ेंगी?
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि दुनिया की आबादी नवंबर के मध्य तक आठ अरब के पार हो जाएगी.
उन्होंने कहा कि ये वैज्ञानिक सफलताओं और पोषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार के लिए के कारण है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि जैसे-जैसे मानव परिवार बड़ा हो रहा है, यह और अधिक विभाजित होता जा रहा है.
उन्होंने कहा कि अरबों लोग संघर्ष कर रहे हैं, करोड़ों भुखमरी और अकाल जैसी स्थिति झेल रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग नए मौकों की तलाश में हैं, वो कर्ज़ से मुक्ति चाहते हैं और युद्ध और जलवायु आपदाओं से दूर भागना चाहते हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, "जब तक हम वैश्विक अमीरों और वंचितों के बीच की खाई को पाट नहीं देते, हम तनाव और अविश्वास, संकट और संघर्ष से भरी आठ अरब आबादी वाली दुनिया के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं."
"आंकड़े गवाह हैं. चंद अरबपतियों के पास दुनिया के सबसे गरीब आधे लोगों के बराबर संपत्ति है."
एंटोनियो गुटेरेस कहते हैं कि विश्व स्तर पर शीर्ष एक फ़ीसदी लोगों को दुनिया की आय का पांचवां हिस्सा मिलता है, जबकि सबसे अमीर देशों के लोग सबसे गरीब लोगों की तुलना में 30 साल अधिक जीने की उम्मीद कर सकते हैं.
हाल के दशकों में जैसे-जैसे दुनिया समृद्ध और स्वस्थ हुई है, ये असमानताएं भी बढ़ी हैं.
गुटेरेस कहते हैं, "लंबे समय तक चलने वाले ट्रेंड के साथ पर्यावरण संकट और कोरोना महामारी से उबरने में अलग-अलग समय लगने जैसे गंभीर मुद्दे भी हमारे सामने हैं. हम धीरे-धीरे जलवायु आपदा, उत्सर्जन और बढ़ते तापमान की ओर बढ़ रहे हैं. बाढ़, तूफ़ान और सूखा, उन देशों पर भी बुरा असर डाल रहा है जिनका वैश्विक तापमान बढ़ने में ज़रा भी योगदान नहीं है."
उन्होंने कहा कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध ने पहले ही खाद्य, ऊर्जा और आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है, जिसका सबसे बुरा असर विकासशील देशों पर हुआ है. ये असमानताएं सबसे ज़्यादा महिलाओं, लड़कियों और कमज़ोर तबके पर असर डालती हैं, जो पहले से ही बुरी तरह भेदभाव का शिकार है.
गुटेरेस कहते हैं, "कई देश भीषण कर्ज़ मे डूबे हैं, ग़रीबी और भूख बढ़ रही है और इसका असर जलवायु पर भी हो रहा है."