संयुक्त राष्ट्र
सुरक्षा परिषद की काउंटर-टेररिज़्म कमेटी (यूएनएससी-सीटीसी) की भारत में हो रही
विशेष बैठक के दूसरे दिन राजधानी दिल्ली में इसके सदस्यों ने 26/11 चरमपंथी हमले में मारे
गए और ज़िंदा बचे लोगों के साथ उनके परिजनों के लिए एक मिनट का मौन रखा.
संयुक्त राष्ट्र
में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने समिति के सदस्यों से मौन रखने का
आग्रह किया.
वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बैठक के पूर्ण अधिवेशन को संबोधित किया.
इस दौरान उन्होंने कहा कि समाज को अस्थिर करने में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब चरमपंथियों और चरमपंथी संगठनों के टूलकिट का शक्तिशाली उपकरण बन गए हैं.
उन्होंने कहा कि ये लोग इन माध्यमों का उपयोग प्रोपेगेंडा, कट्टरता और षड्यंत्र फैलाने के लिए कर रहे हैं.
एस जयशंकर ने कहा, ''पिछले कुछ सालों में चरमपंथी संगठनों ने खुले और उदार समाजों में तकनीक तक पहुंच बनाकर अपनी क्षमताओं को बढ़ाया है. वे आज़ादी, सहिष्णुता और प्रगति पर हमला करने के लिए खुले समाज की तकनीक, धन और व्यवहार का उपयोग करते हैं.''
उन्होंने चरमपंथ को मानवता के लिए सबसे बड़े ख़तरों में से एक क़रार दिया है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पिछले 2 दशकों में चरमपंथ जैसे ख़तरों से निपटने के लिए चरमपंथ विरोधी प्रतिबंध प्रणाली के इर्द-गिर्द अहम ढांचा विकसित किया है.
जयशंकर के अनुसार, ''आज दिल्ली में सीटीसी की इस विशेष बैठक में आप सब आए, जो दिखाता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य चरमपंथ के अहम और उभरते हुए मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.''
भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि यह बैठक उन देशों की ओर दुनिया का ध्यान खींचने में बहुत प्रभावी साबित हुई है, जिन्होंने चरमपंथ को सरकार द्वारा वित्त पोषित उद्यम में बदल डाला है.
उन्होंने कहा है कि दुनिया भर की सरकारों के लिए चरमपंथी समूहों द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल बहुत बड़ी चुनौती बन गई है.
भारत में पहली बार हो रही यह बैठक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इस बारे में ट्वीट करके बताया, ''संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा 15 सदस्यों के अलावा अगले 5 सदस्य और संयुक्त राष्ट्र के कामकाजी सहयोगी और विशेष एजेंसियां चरमपंथी उद्देश्यों से पैदा होने वाले ख़तरों पर चर्चा के लिए साथ आए.''
''इस विशेष बैठक में उन तरीक़ों पर चर्चा होगी, जिनसे इसके सदस्य इन ख़तरों का मुक़ाबला करने के लिए मिला-जुला वैश्विक प्रयास कर सकें.''
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में इस बैठक के तीन उद्देश्य बताए. उन्होंने लिखा, ''इस बैठक में सूचना और संचार तकनीक, पेमेंट की नई तकनीक के साथ धन उगाहने के तरीक़ों और ड्रोन तकनीक पर चर्चा की जाएगी.''
शुक्रवार को एक अन्य ट्वीट में उन्होंने बताया था कि यह दुर्लभ मौक़ा है, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक न्यूयॉर्क के बाहर हुई हो.
'चरमपंथ में नई और उभरती तकनीक के इस्तेमाल से निपटने' के लिए हो रही यूएनएससी-सीटीसी की इस बैठक का आयोजन पहली बार भारत में हो रहा है.
शुक्रवार को मुंबई में हुई इसकी बैठक उसी ताज होटल में हुई, जहां चरमपंथियों ने 26 नवंबर, 2008 को हमला किया था. वहीं शनिवार को यह बैठक राजधानी दिल्ली में हो रही है.