चीन की सेना को ट्रेनिंग देने के लिए पूर्व मिलिट्री पायलटों की भर्ती के दावों की जांच कराएगा ऑस्ट्रेलिया

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ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनकी सेना इस मामले की जाँच कर रही है कि उनके पूर्व सैनिकों ने चीन की मिलिट्री को प्रशिक्षण दिया है या नहीं.
इससे पहले ब्रिटेन भी कह चुका है कि वो अपने पायलटों को चीनी सेना में प्रशिक्षण देने से रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर क़ानूनी कार्रवाई कर सकता है.
ऐसी ख़बरें सामने आईं जिसमें दावा किया गया कि दक्षिण अफ़्रीका का एक फ़्लाइट स्कूल, चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को प्रशिक्षित करने के लिए दक्षिण ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका सहित कई अन्य देशों के पूर्व सैनिकों को भर्ती कर रहा है.
इस स्कूल का नाम टेस्ट फ़्लाइंग एकेडमी ऑफ़ साउथ अफ़्रीका (टीएफ़एएसए) है.
बीबीसी की ख़बर के अनुसार ब्रिटेन के 30 पूर्व सैन्य पायलट चीन की पीएलए को प्रशिक्षित करने गए हैं.
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ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार रॉयल एयर फ़ोर्स के पूर्व पायलटों को भर्ती करने के लिए सालाना 2 करोड़ रुपए से भी अधिक के वेतन का प्रस्ताव दिया गया.
फ़ाइनेंशियल टाइम्स की ख़बर के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि न सिर्फ़ पूर्व बल्कि कुछ मौजूदा सैनिकों को भी भर्ती के लिए ऑफ़र दिया गया है.

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इस ख़बर के आने के बाद ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि वो चीन में पीपल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों को ट्रेनिंग देने के लिए सेवारत और पूर्व ब्रिटिश सैन्य पायलटों की भर्ती की कोशिशों को रोकने के लिए निर्णायक क़दम उठा रही है.
अब ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने भी कहा है कि उन्होंने अपने मंत्रालय से इन दावों की जाँच करने के लिए कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना के पायलट को भी दक्षिण अफ़्रीकी फ़्लाइट स्कूल ने चीन में काम करने के लिए भर्ती किया था.
मार्ल्स ने एक बयान में कहा, "मैं ये सुनकर बहुत हैरान और परेशान हूँ कि ऐसे भी कुछ जवान थे जिन्हें दूसरे देश मोटी रकम का लालच देकर अपने लिए काम करवा रहे थे. मैंने विभाग से इन दावों की जाँच करने और इस मामले में स्पष्ट सुझावों के साथ मेरे पास आने को कहा है."
न्यूज़ीलैंड की डिफ़ेंस फ़ोर्स ने फ़ाइनेंशियल टाइम्सको बताया है कि उनके चार पूर्व पायलटों को टीएफ़एएसए ने भर्ती किया है लेकिन कोई सेवारत सैनिक इसमें शामिल नहीं है.


