मुश्किल में ब्रिटेन की पीएम लिज़ ट्रस, वित्त मंत्री को किया बर्खास्त

ब्रिटेन में ये चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस जल्द ही अपनी आर्थिक योजना में बड़ा बदलाव कर सकती हैं. इन्हीं अटकलों के बीच उन्होंने वित्त मंत्री क्वाज़ी क्वार्टेंग को बर्खास्त कर दिया है.

लाइव कवरेज

दिनेश उप्रेती, कमलेश मठेनी and अभिनव गोयल

  1. मुश्किल में ब्रिटेन की पीएम लिज़ ट्रस, वित्त मंत्री को किया बर्खास्त

    क्वाज़ी क्वार्टेंग के साथ ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस

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    इमेज कैप्शन, क्वाज़ी क्वार्टेंग के साथ ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस

    ब्रिटेन में ये चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस जल्द ही अपनी आर्थिक योजना में बड़ा बदलाव कर सकती हैं. इन्हीं अटकलों के बीच उन्होंने वित्त मंत्री क्वाज़ी क्वार्टेंग को बर्खास्त कर दिया है.

    प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस को लिखे पत्र में क्वाज़ी क्वार्टेंग ने कहा कि आर्थिक विकास को लेकर उनका दृष्टिकोण सही था और अभी भी उसका समर्थन करते हैं.

    उम्मीद है कि वे कुछ ही घंटों में वे बिजनेस टैक्स को कम करने की अपनी की गई घोषणा से कदम पीछे खींच सकती हैं.

    क्वाज़ी क्वार्टेंग की जगह उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेरेमी हंट को नया वित्त मंत्री नियुक्त किया है. जेरेमी हंट ने प्रधानमंत्री चुनाव में ऋषि सुनक का समर्थन किया था.

    एडवर्ड अर्गर
    इमेज कैप्शन, एडवर्ड अर्गर को ट्रेजरी मंत्री बनाया गया है

    टैक्स में कटौती का वादा लिज़ ट्रस के आर्थिक एजेंडे के केंद्र में था. इसी घोषणा के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पेश की थी.

    क्वाज़ी क्वार्टेंग ने अपने पत्र में लिखा है, "जैसा कि मैंने पिछले हफ्तों में कई बार कहा है कि यथास्थिति को बनाने रखना कोई आसान रास्ता नहीं है."

    "बहुत लंबे समय से यह देश कम विकास दर और बढ़े हुए टैक्स से ग्रस्त है. अगर इस देश को सफल होना है तो इसे बदलना होगा."

    क्वाज़ी क्वार्टेंग को जवाब देते हुए प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने लिखा कि उनके जाने से वे खुद काफी दुखी हैं.

    वीडियो कैप्शन, ब्रिटेन की नई गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन का भारत कनेक्शन

    उन्होंने राष्ट्रहित को सबसे आगे रखते हुए पद छोड़ने के लिए उन्हें शुक्रिया भी कहा है.

    लिज़ ट्रस ने लिखा, "देश के विकास के लिए हम दोनों का नजरिया और दृढ़ विश्वास एक जैसा है."

    क्वाज़ी क्वार्टेंग को महज 38 दिनों के बाद ही पद छोड़ना पड़ा. वे इस पद पर सबसे कम दिनों के लिए रहने वाले दूसरे वित्त मंत्री हैं.

    लंबे समय से लिज़ ट्रस के सहयोगी क्वाज़ी क्वार्टेंग ने उनकी टैक्स कटौती की विचारधारा का समर्थन किया था और नियुक्ति के समय उनके राजनीतिक साथी की तरह सबके सामने आए थे.

    वीडियो कैप्शन, COVER STORY: सुनक पर कैसे भारी पड़ीं लिज़ ट्रस?

    इसके अलावा प्रधानमंत्री ने क्रिस फिलिप को कैबिनेट ऑफिस में बुला लिया है. उनकी जगह एडवर्ड अर्गर को ट्रेजरी मंत्री बनाया गया है.

    कई दिनों से लिज़ ट्रस को बाजार की उथल-पुथल को शांत करने और अपनी पार्टी को आश्वस्त करने के लिए अपने आर्थिक एजेंडे के कुछ हिस्सों या पूरे प्लान को छोड़ने के लिए कहा जा रहा है, जिसके चलते पार्टी पोल में पिछड़ गई है.

    कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ सांसदों ने लिज़ ट्रस को प्रधानमंत्री पद से हटाने के विकल्पों पर भी चर्चा की है, जिससे 12 साल से सत्ता संभाल रही पार्टी में खींची लकीर साफ दिखाई देने लगी है.

    प्रधानमंत्री ने पहले ही इनकम टैक्स की शीर्ष दरों को खत्म करने की अपनी योजना से यू-टर्न ले लिया है.

    ऐसा माना जा रहा है कि टैक्स दरों में कटौती के वादे से पीछे हटना लिज़ ट्रस के राजनीतिक करियर को एक बड़ा धक्का साबित होगा. उन्हें प्रधानमंत्री बने सिर्फ 39 दिन ही हुए हैं.

  2. शाहरुख़ खान और भारत में काम करने को लेकर ये बोलीं माहिरा ख़ान

    वीडियो कैप्शन, शाहरुख़ खान और भारत में काम करने को लेकर ये बोलीं माहिरा ख़ान

    पाकिस्तानी एक्ट्रेस माहिरा ख़ान को पसंद करने वाले भारत में भी कम नहीं हैं. उनकी आने वाली फ़िल्म मौला जट्ट में उनके लुक की काफी चर्चा है.

    ये पहला मौक़ा भी है, जब वो किसी पंजाबी फ़िल्म में काम कर रही हैं.

    बीबीसी संवाददाता वंदना ने माहिरा ख़ान ने उनकी अप-कमिंग फ़िल्म मौला जट्ट, भारत में उनके काम करने के अनुभव और भारत से जुड़ी उनकी यादों के बारे में विस्तार से बात की.

  3. हंसल मेहता की फ़िल्म 'फ़राज़' पर रोक लगाने से दिल्ली हाई कोर्ट ने किया इनकार

    हंसल मेहता की फ़िल्म 'फ़राज़'

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    दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को हंसल मेहता की फ़िल्म 'फ़राज़' की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है.

    हंसल मेहता की 'फ़राज़' साल 2016 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए चरमपंथी हमलों पर आधारित है.

    इस मामले में ढाका टेरर अटैक की दो पीड़ितों की माताओं ने फ़िल्म 'फ़राज़' की रिलीज़ रोकने के लिए याचिका दायर की थी.

    हाई कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले का निपटारा कर दिया और फिल्म की रिलीज़ पर स्टे देने के अपने पिछले फ़ैसले को भी रद्द कर दिया है.

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    याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि ये फ़िल्म उनकी बेटियों की 'ख़राब छवि' पेश करती है. इससे उनके पुराने जख़्म फिर से कुरेदे जाएंगे और उनकी निजता के अधिकार का भी हनन होता है. उन्होंने अपने मुक़दमे में मानहानि का भी दावा किया था.

    जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों पक्षों के तथ्यों और दावों के मद्देनज़र परिस्थितियां बचावकर्ता (हंसल मेहता) के पक्ष में हैं. कोर्ट ने ये भी कहा कि फिल्म बनाने में काफी बड़ी रकम खर्च की जा चुकी है.

    "इसलिए याचिकाकर्ता अब किसी रोक के हकदार नहीं है. फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश रद्द किया जाता है. साथ ही याचिका खारिज की जाती है. फिल्म की रिलीज़ होने से यदि याचिकाकर्ता के किसी अधिकार का हनन होता है तो उन्हें मुआवजे का दावा करने का हक होगा."

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    अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 नवंबर तय की है.

    33 पन्नों के अपने आदेश में हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि मृतक की निजता के अधिकार पर उनकी माताएं विरासत का दावा नहीं कर सकती हैं.

  4. यहां 66 साल से हिंदू से बौद्ध बन रहे हैं लोग

    वीडियो कैप्शन, यहां 66 साल से हिंदू से बौद्ध बन रहे हैं लोग

    आज के दिन ही 66 साल पहले भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था.

    बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली इस साल दीक्षा के समारोह में नागपुर में शामिल हुए. देखिए ये रिपोर्ट.

    रिपोर्ट: फ़ैसल मोहम्मद अली

  5. देवदासी प्रथा पर अब तक क्या कदम उठाए गए, केंद्र और छह राज्यों को एनएचआरसी का नोटिस

    देवदासी प्रथा

    देश के कई मंदिरों में, ख़ासकर दक्षिण भारत में जारी देवदासी प्रथा की समस्या पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र सरकार और छह राज्यों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्होंने इसे ख़त्म करने के लिए जो कदम उठाए हैं, उसकी जानकारी विस्तार से दें.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एनएचआरसी ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय के सचिवों और कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों को ये नोटिस जारी किया है. उन्हें छह हफ़्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट फाइल करने के लिए कहा गया है.

    इस नोटिस में कहा गया है, "देवदासी सिस्टम की कुप्रथा को खत्म करने के लिए कई क़ानून बनाए गए हैं लेकिन अभी भी ये चल रहा है.... कम उम्र की लड़कियों को देवदासी के तौर पर समर्पित कर देने की इस कुप्रथा की सुप्रीम कोर्ट ने भी आलोचना की है."

    वीडियो कैप्शन, लोकतंत्र की नींव मज़बूत करने वाली महिलाओं की कहानी.

    एनएचआरसी ने इस प्रथा को महिलाओं के यौन शोषण और उन्हें देह व्यापार की ओर धकेलने वाली कुप्रथा बताया और साथ ही कहा कि ऐसा करना एक महिला के गरिमा के साथ जीने और बराबरी के उसके अधिकार का उल्लंघन है.

    एनएचआरसी ने अपने नोटिस में जिस मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया है, उसके अनुसार, देवदासी प्रथा की ज्यादातर पीड़िताएं ग़रीब परिवारों से हैं और उनका संबंध अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तबके से है.

    इस व्यवस्था के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है, "एक लड़की को देवदासी बनाने के लिए उसकी शादी किसी मंदिर के देवता से करा दी जाती है और उसके बाद वो अपनी पूरी ज़िंदगी उस मंदिर के रोज़मर्रा के कामकाज़ में और पुजारी की देखभाल में गुजार देती है. इस कुप्रथा का शिकार होने वाली ज़्यादा लड़कियों को यौन शोषण का सामना करना पड़ता है. पुरुष उनका यौन शोषण करते हैं, उन्हें गर्भवती बना देते हैं और फिर उनकी किस्मत पर उन्हें छोड़ दिया जाता है."

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    एनएचआरसी की नोटिस के अनुसार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने देवदासी प्रथा को क्रमशः साल 1982 और 1988 में अवैध करार दे दिया था.

    नोटिस में कहा गया है, "हालांकि इसके बावजूद कर्नाटक में 70 हज़ार से अधिक महिलाएं देवदासी की ज़िंदगी जी रही हैं. जस्टिस रंगनाथ राव की चेयरमैनशिप में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में 80 हज़ार देवदासियां हैं."

  6. शरणार्थियों का जीवन बेहतर बनाने की कोशिश

    वीडियो कैप्शन, अनुमान है कि जंग से दुनियाभर से लगभग दस करोड़ लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.

    संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि जंग और ऐसी ही अन्य दूसरी वजहों से दुनियाभर से लगभग दस करोड़ लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा है.

    विस्थापितों के लिए सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम में तंबुओं में ज़िंदगी गुजारना आसान नहीं होता. उनकी ज़िंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है स्वीडन की एक कंपनी, जिसका नाम है बेटर शेल्टर.

  7. परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण

    परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी आईएनएस

    इमेज स्रोत, ANI

    भारत की परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत से आज बंगाल की खाड़ी में बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया.

    रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि मिसाइल का परीक्षण पहले से निर्धारित सीमा तक किया गया. मिसाइल ने बंगाल की खाड़ी में सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदा.

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    बयान में कहा गया पनडुब्बी से मिसाइल के लॉन्च ने, इसमें काम करने वालों की क्षमता और एसएसबीएन प्रोग्राम को मान्यता दी है. ये प्रोग्राम भारत की परमाणु क्षमता का एक अहम हिस्सा है.

    आईएनएस अरिहंत को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 26 जुलाई 2009 को लॉन्च किया था और अगस्त 2013 में पनडुब्बी के न्यूक्लियर रिएक्टर को एक्टिवेट किया गया था.

  8. आख़िर क्या है रूस की आक्रामकता की वजह ?

    वीडियो कैप्शन, क्या लंबे वक़्त से चल रहे युद्ध की वजह रूस की सेना थक गई है ?

    क्या रूस के पास हथियारों की कमी हो गई है, क्या लंबे वक़्त से चल रहे युद्ध की वजह रूस की सेना थक गई है, क्या यहीं वजह है कि रूस बेहद आक्रामक हो रहा है.

    कुछ ऐसा ही मानना है ब्रिटेन की एक ख़ुफ़िया एजेंसी के महानिदेशक का, जिनका ये भी मानना है कि रूस अब भी नुकसान पहुंचा सकता है. बीबीसी संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर की रिपोर्ट.

  9. राहुल गांधी ने बताया, भारत जोड़ो यात्रा का मकसद क्या है?

    राहुल गांधी

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    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

    उन्होंने कहा कि "भारत जोड़ो यात्रा का मकसद बीजेपी से ये पूछना है कि महंगाई अपने अधिकतम स्तर पर क्यों हैं? जो गैस सिलेंडर कभी 400 रुपये का आता था वो आज 1 हजार रुपये का क्यों आ रहा है? क्यों हमारे देश के 45 सालों के इतिहास में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा है? क्यों भारतीय इतिहास में पहली बार किसानों को जीएसटी देना पड़ रहा है? क्यों गरीबों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अमीर लोग जो चाहें वो कर सकते हैं?"

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    राहुल गांधी ने केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल पूछा कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले क्यों लिए गए.

    उन्होंने कहा कि कोविड के समय सरकार ने मजदूरों और किसानों का साथ नहीं दिया.

  10. वो जगह जहाँ 66 सालों से जारी है हिंदू से बौद्ध बनने का सिलसिला: ग्राउंड रिपोर्ट

    डॉ. बी. आर. अम्बेडकर

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    नागपुर में जहाँ पाँच अक्तूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) विजयादशमी और अपना स्थापना दिवस मना रहा था, उसी शहर में उसी दिन दलितों और नए-नए बौद्ध बने लोगों का एक विशाल समूह 'अशोक विजयादशमी' का आयोजन कर रहा था.

    ग़ौर करने की बात ये भी है कि दिल्ली में जहाँ आम आदमी पार्टी के नेता और मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को हिंदू धर्म के देवी-देवताओं का अपमान करने के आरोप में इस्तीफ़ा देना पड़ा, वहीं नागपुर में ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ. जबकि नागपुर में भी वही 22 प्रतिज्ञाएँ दोहराई गई थीं जो दिल्ली के कार्यक्रम का हिस्सा थीं.

    ये बाबा साहब आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएँ हैं जिनमें से कुछ को भारतीय जनता पार्टी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान बता रही है.

    ये 22 प्रतिज्ञाएँ 'धम्म दीक्षा' का हिस्सा हैं जिन्हें डाक्टर भीमराव आंबेडकर ने लंबे विचार-विमर्श के बाद तैयार किया था, और जिनकी चर्चा महाबोधि सोसायटी के महासचिव को भेजी गई चिट्ठी में उन्होंने विस्तार से की है.

  11. ज्ञानवापी मामला: किन कारणों से हुई कार्बन डेटिंग की मांग ख़ारिज

      • Author, अनंत झणाणे
      • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
    वीडियो कैप्शन, ज्ञानवापी मस्जिद मामला: अदालत ने दिया अहम आदेश

    बनारस के ज़िला जज एके विश्वेश की अदालत ने हिन्दू पक्ष की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पाए गए कथित शिवलिंग की वैज्ञानिक जांच और कार्बन डेटिंग की मांग को ख़ारिज कर दिया है.

    चार महिला हिन्दू पक्षकारों ने यह मांग कोर्ट के सामने रखी थी और मुख्य पक्षकार राखी सिंह ने इसका विरोध किया था.

    आपको बता दें कि इसी साल मई के महीने में हुए सर्वे में हिन्दू पक्ष का दावा था कि ज्ञानवापी मस्जिद के वज़ुखाने के बीचबीच एक शिवलिंग बरामद हुआ है.

    ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने इस फव्वारा बताया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद समिति की मांग पर इसे सील कर सुरक्षित करने के आदेश दिए थे.

    यह साबित करने के लिए कि सील किया गया ढांचा शिवलिंग है, हिन्दू पक्ष ने वैज्ञानिक जाँच और कार्बन डेटिंग की प्रक्रिया की अदालत से मांग की थी.

    वीडियो कैप्शन, ज्ञानवापी मस्जिद का मामला वाराणसी की निचली अदालत और सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.

    किन कारणों से हुई कार्बन डेटिंग की मांग ख़ारिज

    अपने आदेश में ज़िला जज एके विश्वेश ने कार्बन डेटिंग की हिन्दू पक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि, "उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के 17 मई 2022 को निर्देशित किया है कि अधिवक्ता कमिश्नर की कार्रवाई के दौरान जो कथित शिवलिंग पाया गया है उसे सुरक्षित रखा जाए."

    जज विश्वेश ने कहा, "ऐसी स्थिति में यदि कार्बन डेटिंग की तकनीक का प्रयोग करने पर या ग्राउंड पेनेट्रेटिंग राडार का प्रयोग करने पर उक्त कथित शिवलिंगम को क्षति पहुँचती है तो यह उच्चतम न्यायालय के 17 मई 2022 के आदेश का उल्लंघन होगा. ऐसा होने पर आम जनता की धार्मिक भावनाओं को भी चोट पहुँच सकती है."

    जज विश्वेश ने ये भी कहा, "मेरा यह भी विचार है कि इस स्तर पर अधिवक्ता कमिश्नर की कार्रवाई में पाए गए कथित शिवलिंगम की आयु, प्रकृति और संरचना का निर्धारण करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वे को निर्देश दिया जाना भी उचित नहीं होगा और ऐसा करने से इस वाद में अंतर्निहित प्रश्नों के न्यायपूर्ण समाधान की कोई संभावना प्रतीत नहीं होती है."

    इसके बाद अदालत ने इस मांग को ख़ारिज करने का फ़ैसला सुनाया.

    वीडियो कैप्शन, ज्ञानवापी मस्जिद मामले में 1991 के क़ानून की चर्चा क्यों हो रही?

    क्या कहना है हिन्दू पक्ष के वकीलों का?

    हिंदू पक्ष के मुख्य वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट से कार्बन डेटिंग की जांच की मांग ख़ारिज होने के बाद कहा कि "न्यायालय ने ये तर्क दिया कि क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई के आर्डर से उस एरिया को सील कर रखा था. तो उसमें अगर हम कोई भी आर्डर पास करेंगे तो वो उस आर्डर का उल्लंघन होगा."

    विष्णु शंकर जैन कहते हैं कि वो इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

    उन्होंने मीडिया से कहा कि, "ये ऑर्डर अगेंस्ट दी रिकॉर्ड है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई के आर्डर से ट्रायल कोर्ट को पावर दी थी, की वो सारी एप्लीकेशन डिसाइड करे. सारी महिलाएं याचिकाकर्ता इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे कि ट्रायल कोर्ट को अप्रोच करिए. तो ट्रायल कोर्ट आज कह रहा है हम नहीं कर सकते क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सील कर रखा है तो इस मांग को लेकर हम दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाएंगे."

    महिला वादी राखी सिंह ने कार्बन डेटिंग का विरोध किया था.

    इसके बारे में चार अन्य महिला याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि, "वो तो इस पूरी मांग के ख़िलाफ़ थीं. और उन्होंने एफिडेविट दी थी की साइंटिफिक जांच होनी नहीं चाहिए, तो ये चार महिला याचिकाकर्ता रेखा पाठक, सीता साहू, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी इन चारों की मांग है कि इसमें सांइटिफिक जांच होनी चाहिए तो हमारी जो एप्लीकेशन रिजेक्ट हुई है और उसके विरुद्ध हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे."

    वीडियो कैप्शन, ज्ञानवापी मस्जिद में जुमे की नमाज़ पढ़ने के बाद क्या बोले ये मुसलमान?

    क्या है मस्जिद समिति के वकील का कहना?

    ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन देखने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद के वकील मोहम्मद तौहीद खान कहते हैं कि "माननीय न्यायालय ने अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान किया और जनता की धार्मिक आस्था का भी ख़्याल रखते हुए कार्बन डेटिंग की एप्लीकेशन निरस्त कर दिया है."

    वे कहते हैं कि "उनकी शिवलिंग के संबंध में कार्बन डेटिंग की डिमांड की गई थी जबकि जो तथाकथित शिवलिंग है वो सब्जेक्ट मैटर इन सूट (वाद का मुद्दा) नहीं हैं सब्जेक्ट मैटर इन इश्यू नहीं है. वाद में पूजा अर्चना का दावा है और उसको डायवर्ट करने के लिए बिना वजह कार्बन डेटिंग की मांग की गई थी."

    आपको बता दें कि अदालत के सामने कार्बन डेटिंग की मांग का विरोध करते हुए मुस्लिम पक्ष ने ही यह दलील दी थी कि कथित शिवलिंग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील किया गया है और किसी निर्जीव वस्तु की कार्बन डेटिंग की जाँच नहीं हो सकती है.

    वीडियो कैप्शन, उत्तर प्रदेश में बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद का मामला अदालत पहुंच गया है.

    क्या होती है कार्बन डेटिंग की जांच?

    कार्बन डेटिंग एक व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है, जिसका उपयोग कार्बनिक पदार्थों की आयु को जानने के लिए किया जाता है, जो चीज़ें कभी जीवित थीं. जीवित चीजों में विभिन्न रूपों में कार्बन होता है.

    डेटिंग पद्धति इस तथ्य का उपयोग करती है कि कार्बन का एक विशेष समस्थानिक (आइसोटोप) होता है, जिसे सी-14 कहा जाता है, जिसका परमाणु द्रव्यमान (मास) 14 है, यह रेडियोधर्मी है और समय के साथ यह जैविक शरीर में कम होने लगता है.

    तो किसी पौधे या जानवर के मरने के बाद, शरीर में कार्बन -12 से कार्बन -14 का अनुपात या उसके अवशेष बदलना शुरू हो जाते हैं.

    इस परिवर्तन को मापा जा सकता है और इसका उपयोग जीव की मृत्यु के अनुमानित समय को निकालने के लिए किया जाता है.

    हालांकि अत्यंत प्रभावी, कार्बन डेटिंग को सभी परिस्थितियों में लागू नहीं किया जा सकता है.

    विशेष रूप से, इसका उपयोग निर्जीव चीजों की उम्र निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता है, जैसे कि उदाहरण के लिए चट्टानें.

    साथ ही, कार्बन डेटिंग के माध्यम से 40,000-50,000 वर्ष से अधिक की आयु की गणना नहीं की जा सकती है.

    ऐसा इसलिए है क्योंकि आधे जीवन के आठ से दस चक्र पार करने के बाद, कार्बन -14 की मात्रा लगभग नगण्य हो जाती है.

    वीडियो कैप्शन, वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे का दूसरा दिन

    क्या किसी ऐतिहासिक ढांचे की कार्बन डेटिंग हो सकती है?

    यह समझने और जानने के लिए बीबीसी ने लखनऊ के बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉक्टर राजेश अग्निहोत्री से बात की.

    उन्होंने बीबीसी को बताया कि रेडियो कार्बन डेटिंग एकमात्र तरीका है जिसके माध्यम से सभी जीवित वस्तुओं की उनके मौत के बाद उनकी आयु के बारे में जानकारी मिल सकती है. इस जानकारी को बाद में पुरातात्विक जानकारी से जोड़ कर देखा और समझा जा सकता है.

    तो क्या निर्जीव चीज़ों की कार्बन डेटिंग की जा सकती है?

    डॉक्टर राजेश अग्निहोत्री बताते हैं, "पत्थरों और धातुओं की डेटिंग नहीं हो सकती है क्योंकि उनमें कार्बन नहीं होता है. लेकिन जब निर्जीव वस्तुओं की स्थापना होती है तो उनके साथ दूसरे जैविक सामान जैसे अनाज, कपड़े, लकड़ी, रस्सी जैसी कोई दूसरी चीज़ें भी मिल जाती हैं जिनकी कार्बन डेटिंग हो सकती है."

    वीडियो कैप्शन, ज्ञानवापी मस्जिद में मां श्रृंगार गौरी की प्रतिमा का निरीक्षण होना था, लेकिन नहीं हो सका.

    तो क्या इन जैविक सामान से किसी ढांचे की उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है?

    इस सवाल के जवाब में डॉक्टर राजेश अग्निहोत्री कहते हैं, "निश्चित रूप से इस तकनीक के इस्तेमाल से किसी ढांचे की विश्वसनीय उम्र का पता लगाया जा सकता है, जिसे उस समय की दूसरी पुरातात्विक जानकारी के साथ जोड़ कर देखा जाना चाहिए."

    राजेश अग्निहोत्री कहतें है कि कार्बन डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल राम जन्म भूमि और इमामबाड़े के ऐतिहासिक संदर्भ को स्थापित करने के लिए भी किया गया था. ये जांच भारतीय पुरातत्व विभाग से मिले सैम्पल पर की गयी थी. इन सैम्पल्स को एएसआई और बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान ने मिल कर एकत्रित किया था.

  12. आज का कार्टून: अपशब्द चयन समिति

    आज का कार्टून

    चुनावों के दौरान नेताओं की भाषा पर आज का कार्टून.

  13. 'आप' नेता राजेंद्र पाल गौतम ने हजारों समर्थकों के साथ निकाली जाति उन्मूलन संकल्प यात्रा

    दिल्ली के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम

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    इमेज कैप्शन, दिल्ली के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम

    आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने आज अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में राज निवास से डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक तक जाति उन्मूलन संकल्प यात्रा निकाली.

    उन्होंने जातिवाद और छुआछूत से लड़ने का संकल्प लिया. इस संकल्प यात्रा में सैकड़ों की संख्या में समर्थक हाथ में झंडे और पोस्टर लिए हुए थे. वे 'जय भीम, जय भीम' के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे.

    राजेंद्र गौतम ने कहा, "जाति के आधार पर एक विशेष समुदाय के लोगों को टारगेट करने वाली घटनाएं खत्म होनी चाहिए. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए."

    उन्होंने कहा, "मैं आंबेडकर के संविधान और कानून में विश्वास रखता हूं. बुद्ध के माध्यम से भारत ने दुनिया में शांति और मानवता का संदेश देने का काम किया है. मुझे विश्वास है कि हमारा देश मानवता और शांति के साथ आगे बढ़ेगा."

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    राजेंद्र गौतम ने 5 अक्टूबर को बौद्ध धर्म के एक कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी. इस कार्यक्रम में लोगों ने हिंदू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाया था. इसमें शिरकत करने वाले करीब 10 हजार लोगों के साथ राजेंद्र पाल गौतम ने कुछ प्रतिज्ञाएं दोहराई थीं.कथित तौर पर उनमें हिंदू देवी देवताओं की पूजा न करने की शपथ भी शामिल थी.

    इस कार्यक्रम के बाद विवाद बढ़ा तो उन्होंने दिल्ली सरकार में अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

  14. प्रोफ़ेसर जोसेफ़: एक प्रश्न की वजह से जिनके हाथ काट दिए गए

    हमले के वक़्त प्रोफ़ेसर जोसेफ़ न्यूमैन कॉलेज के मलयालम विभाग के प्रमुख थे
    इमेज कैप्शन, हमले के वक़्त प्रोफ़ेसर जोसेफ़ न्यूमैन कॉलेज के मलयालम विभाग के प्रमुख थे

    प्रोफ़ेसर जोसेफ़ पर हमला विवादित मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया यानी पीएफ़आई के लोगों ने किया था. भारत सरकार ने पिछले ही महीने इस संगठन पर पाबंदी लगा दी है. बीबीसी ने केरल जाकर इस भयानक हमले और उसके बाद आज तक की घटनाओं को जानने की कोशिश की है.

    (चेतावनी- यह कहानी कुछ लोगों को विचलित कर सकती है)

    12 साल पहले की यह घटना प्रोफ़ेसर जोसेफ़ के दिमाग़ में अब तक ताज़ा है. वह जुलाई महीने की बारिश का मौसम था. उस समय प्रोफ़ेसर जोसेफ़ की उम्र 52 साल थी. वो एक स्थानीय कॉलेज में मलयालम भाषा पढ़ाते थे. एक रविवार को वो अपनी मां और बहन के साथ कार पर घर लौट रहे थे.

    लेकिन घर से महज़ 100 मीटर की दूरी पर एक वैन ने उनका रास्ता रोक लिया. इस मिनी वैन से छह लोग निकले और वो प्रोफ़ेसर जोसेफ़ की कार की तरफ टूट पड़े. इन हमलावरों में से एक के पास एक कुल्हाड़ी भी थी.

    उनमें से एक प्रोफ़ेसर जोसेफ़ की कार के ड्राइवर की तरफ़ का दरवाज़ा खोलने की कोशिश करने लगा, जबकि एक हाथ में चाकू लेकर उनकी तरफ़ बढ़ा. बाक़ी तीन लोग कार के पिछले दरवाज़े की तरफ़ बढ़े, जहां प्रोफ़ेसर की बहन बैठी थीं.

  15. 14 अक्टूबर 2022 का ‘दिनभर: पूरा दिन, पूरी ख़बर’, सुनिए अंजुम शर्मा और प्रेरणा से

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  16. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बढ़त

    डॉलर

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    भारतीय रिजर्व बैंक ने आज कहा कि सात अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 20.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर बढ़कर 532.86 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पिछले हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 4.85 अरब डॉलर घटकर 532.66 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया था.

    अक्टूबर 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब अमेरिकी डॉलर के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. करीब एक साल में भारत के विदेशी मुद्रा में करीब 93 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है.

    फॉरेन करेंसी एसेट, विदेशी मुद्रा भंडार का एक अहम हिस्सा है. इसमें करीब 1.31 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट देखी गई है. अब ये 471.49 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है.

    इसके अलावा सोने की होल्डिंग की जो कीमत है उसमें वृद्धि देखी गई है. इसकी कीमत अब 1.35 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 38.95 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई है.

  17. जीएन साईबाबा को हाईकोर्ट ने किया बरी, नक्सलियों से संबंध का था आरोप

    जीएन साईबाबा

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    इमेज कैप्शन, जीएन साईबाबा

    दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर जीएन साईबाबा को बरी करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फ़ैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन आदेश देने से इनकार कर दिया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के थोड़ी देर बाद ही नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट ने इसे चुनौती दी.

    हालांकि शीर्ष अदालत ने एनआईए को इस बात की इजाजत दी कि वो मामले की जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के पास आवेदन दे सकता है.

    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वो बॉम्बे हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक नहीं लगा सकते हैं क्योंकि मामले के दोनों पक्षकार की बात उन्होंने नहीं सुनी है.

  18. एकता कपूर की वेब सिरीज़ 'एक्सएक्सएक्स' पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

    एकता कपूर

    इमेज स्रोत, ANI

    वेब सिरीज़ 'एक्सएक्सएक्स' के 'आपत्तिजनक कॉन्टेंट' पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इसकी प्रोड्यूसर एकता कपूर को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आप इस देश की नौजवान पीढ़ी का दिमाग प्रदूषित कर रही हैं.

    सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी एकता कपूर की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की. ओटीटी प्लेटफॉर्म 'ऑल्टबालाजी' पर प्रसारित की गई इस सिरीज़ में कथित 'आपत्तिजनक कॉन्टेंट' को लेकर उनके ख़िलाफ़ जारी किए गए गिरफ़्तारी वॉरंट्स को एकता कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराने वालों का कहना है कि इस सिरीज़ के कथित 'आपत्तिजनक कॉन्टेंट' में सैनिकों का अपमान किया गया है और इससे उनके परिवार वालों की भावनाएं आहत हुई हैं.

    सुप्रीम कोर्ट

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    जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार ने कहा, "कुछ किए जाने की ज़रूरत है. आप इस देश की नौजवान पीढ़ी का दिमाग़ ख़राब कर रही हैं. ये सभी के लिए उपलब्ध है. ओटीटी कॉन्टेंट सभी के लिए उपलब्ध है. आप लोगों को किस तरह का विकल्प मुहैया करा रही हैं?.... आप इसके उलट नौजवानों का दिमाग़ ख़राब रही हैं."

    इस मामले में एकता कपूर का पक्ष सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी रख रहे थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस सिलसिले में पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है और इस बात की कोई उम्मीद नहीं है कि मामले की जल्द सुनवाई हो पाएगी.

    उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही मामले में एकता कपूर को पहले भी संरक्षण दिया है. मुकुल रोहतगी ने कहा कि 'ऑल्टबालाजी' पर ये कॉन्टेंट सब्सक्रिप्शन बेस्ड है और देश में इसे देखने या नहीं देखने की आज़ादी सब को है.

    इस मामले में एकता कपूर का पक्ष सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने रखा

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    इमेज कैप्शन, इस मामले में एकता कपूर का पक्ष सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने रखा

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हर बार जब आप इस अदालत में आते हैं.... हमारी नज़र में ये ठीक नहीं है. हम ऐसी याचिकाएं दायर करने पर जुर्माना लगाएंगे. मिस्टर रोहतगी कृपया आप अपने क्लाइंट को ये बता दें. सिर्फ़ इसलिए कि आप अच्छे वकीलों की सर्विस ले सकती हैं.... ये अदालत रसूख रखने वाले लोगों के लिए नहीं है. ये अदालत कमज़ोर लोगों के लिए काम करती है... वे लोग जिनके पास तमाम सुविधाएं हैं, अगर उन्हें इंसाफ़ नहीं मिल पाता है तो आप आम आदमी की स्थिति के बारे में सोचें. हमने इस मामले में ऑर्डर देखा है और हमारे अपने रिजर्वेशंस हैं."

    सुप्रीम कोर्ट ने ये सुझाव दिया कि पटना हाई कोर्ट में इस मामले की स्थिति जानने के लिए कोई स्थानीय वकील देखें.

    बिहार के बेगूसराय ज़िले की एक अदालत ने एक एक्स सर्विसमैन शंभू कुमार की शिकायत पर एकता कपूर के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया था. शंभू कुमार की साल 2020 में दर्ज कराई गई शिकायत में ये दावा किया है कि 'एक्सएक्सएक्स' के सीजन-2 में एक सैनिक की पत्नी को लेकर 'आपत्तिजनक कॉन्टेंट' दिखाया गया है.

  19. टी20 वर्ल्ड कप 2022: रविवार से शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट से जुड़ी ख़ास बातें

    टी20 विश्व कप 2022

    इमेज स्रोत, Jonathan DiMaggio

    आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप की शुरुआत रविवार से हो रही है. 16 अक्टूबर को टूर्नामेंट का पहला मैच होगा, 13 नवंबर को फाइनल मुक़ाबला खेला जाएगा. टूर्नामेंट के लिए भारतीय टीम का एलान भी किया जा चुका है.

    ऐसे में जानते हैं इस टी 20 विश्व कप से जुड़ी बड़ी बातें.

    टी 20 वर्ल्ड कप 2022 में कितनी टीमें हिस्सा ले रही हैं?

    टूर्नामेंट में कुल 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं. पूरे टूर्नामेंट को ग्रुप स्टेज और सुपर-12 में बांटा गया है.

  20. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र पर जानलेवा हमले की घटना पर भारत ने क्या कहा

    क्राइम सीन

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    ऑस्ट्रेलिया में 28 साल के भारतीय छात्र को कई बार चेहरे, छाती और पेट में कई बार चाकू मारा गया. हमलावर, भारतीय छात्र से कथित रूप से पैसों की मांग कर रहा था.

    सोमवार को जारी अपने बयान में एनएसडब्ल्यू पुलिस फोर्स ने कहा कि ये घटना 6 अक्टूबर को रात करीब 10.30 बजे हुई, जब शुभम गर्ग नाम का भारतीय छात्र पेसिफिक हाईवे पर चल रहा था.

    डेली टेलिग्राफ अखबार के मुताबिक पुलिस ने डेनियल नॉरवुड और एक 27 साल से संदिग्ध को शुभम गर्ग की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

    पुलिस ने बताया कि शुभम गर्ग ने करीब के एक घर से मदद मांगी थी. उन्हें रॉयल नोर्थ हॉस्पिटल ले जाया गया है, जहां उनकी सर्जरी की है. उनकी तबीयत नाजुक लेकिन स्थिर बनी हुई.

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    डेली टेलिग्राफ ने बताया कि शुभम गर्ग ने हमलावर को कैश देने से मना कर दिया था जिसके बाद ये हमला किया गया.

    पुलिस ने अभियुक्त के घर से कई चीजों को अपने कब्जे में लिया है और उसे फॉरेन्सिक जांच के लिए भेजा गया है.

    इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में स्थित भारतीय उच्चायोग, घटना को लेकर स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और उम्मीद करता है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होगी.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "यह एक दुखद घटना है. वह (शुभम गर्ग) अस्पताल में हैं और उनका इलाज किया जा रहा है."