लेस्टर में हिंदू-मुस्लिम तनाव के सिलसिले में एक व्यक्ति को जेल भेजा गया
इंग्लैंड के लेस्टर शहर में बीते शनिवार को हुई नारेबाज़ी और तनाव के सिलसिले में पुलिस ने अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
इसके बाद अदालती कार्यावाही में बीस वर्षीय अमोस नोरोन्हा को इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने और अराजकता फैलाने के लिए 10 महीने की सज़ा सुनाई गई है. शहर में फैले तनाव के लिए सज़ा पाने वाला ये पहला व्यक्ति है. नोरोन्हा ने आक्रामक हथियार रखने की बात स्वीकारी थी.
शहर में ईस्टर्न आई अख़बार निकालने वाले बर्नी चौधरी का कहना है कि हिंदू और मुसलमानों के बीच ये तनाव पिछले महीने दुबई में हुए क्रिकेट मैच के बाद शुरू हुआ है.
इस बीच लेस्टर के मेयर पीटर सोल्सबी ने कहा है कि इंटरनेट पर काफ़ी दुष्प्रचार हो रहा है जिससे शहर में तनाव बढ़ रहा है.
क्या है तनाव पर लोगों की राय
एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में 28 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मुक़ाबले के बाद सेकई जगहों पर दोनों समुदाय के लोगों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हुई, जिसमें ये ताज़ा घटना है.
लेस्टर में मौजूद फे़डेरेशन ऑफ़ मुस्लिम ऑर्गेनाइज़ेशन्स के सुलेमान नगदी ने बीबीसी से कहा, "हमने यहां सड़कों पर जो देखा वो चिंताजनक है. भारत पाकिस्तान मैच के बाद से यहां समुदाय में तनाव तो पहले से था. यहां खेल के मौक़े पर लोगों का बड़ा जमावड़ा लगता है और कभी-कभी हालात बिगड़ भी जाते हैं."
"हमें शांति से काम लेना चाहिए, इस तरह का तनाव ख़त्म होना चाहिए. कुछ युवा हैं जो बेहद नाराज़ हैं इस कारण वही कहर ढा रहे हैं. हम सभी को ये संदेश देना चाहते हैं कि ये सब ख़त्म होना चाहिए. हम इन युवाओं के घर में उनके बड़े-बूढ़ों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं, कि वो उन्हें समझाएं."
लेस्टर में हिंदू और जैन मंदिरों से जुड़े संजीव पटेल कहते हैं कि शनिवार रात हुई घटना से वो सकते में हैं.
वे कहते हैं, "हम दशकों से इस शहर में शांति से रहते आए हैं लेकिन बीते कुछ हफ़्ते से ये साफ़ है कि कई बातें हैं जिन पर चर्चा ज़रूरी है ताकि ये समझा जा सके कि लोग किस बात से नाराज़ हैं."
"किसी भी हालत में हिंसा का रास्ता अपनाना सही नहीं है. बीते कुछ दिनों से और ख़ास कर शनिवार को जो कुछ हुआ उससे हमें डर है. हिंदू और जैन समुदाय और मुसलमान समुदाय के नेता बार-बार कह रहे हैं कि हमें शांति से काम लेना है."