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यूक्रेनी सेना ने रूसी कब्ज़े से जिन इलाकों को छुड़ाया, वहां पहुंचे ज़ेलेंस्की

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की इज़ियम शहर पहुंचे जिसे यूक्रेनी सेना ने रूसी कब्ज़े से छुड़ा लिया है.

लाइव कवरेज

कुमारी स्नेहा and शुभम किशोर

  1. 'जब तक आप हिंदू हैं, आप शूद्र रहेंगे' अपने इस बयान पर घिरे डीएमके सांसद ए राजा

    डीएमके के उप महासचिव ए राजा अपने एक बयान को लेकर विवाद में आ गए हैं. भारतीय जनता पार्टी ने उन पर आरोप लगाया है कि वह एक समुदाय के ख़िलाफ़ जहर उगलकर दूसरों का तुष्टिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं.

    नीलगिरि के सांसद ने दावा किया कि मनुस्मृति में ‘शूद्रों’ का अपमान किया गया है और उन्हें न बराबरी, शिक्षा, रोजगार का अधिकार था और न ही वे मंदिरों में प्रवेश कर सकते थे.

    राजा ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘जब तक आप हिंदू हैं, आप शूद्र रहेंगे. आप जब तक शूद्र हैं, वेश्या की संतान हैं. जब तक आप हिंदू हैं, आप पंचमन (दलित) हैं. जब तक आप हिंदू हैं, आप अछूत हैं.’’

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘‘आप में से कितने लोग वेश्या की संतान बने रहना चाहते हैं? आप में से कितने लोग अछूत बने रहना चाहते हैं? अगर हम इन सवालों के प्रति मुखर होंगे तो ये सनातन (धर्म) को तोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे.’’

    पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई ईसाई, मुस्लिम या पारसी नहीं है तो उसे हिंदू होना पड़ेगा.’’

    उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा, ‘‘क्या इस तरह की क्रूरता किसी दूसरे देश में है?

    राजा ने बाद में एक ट्वीट में कहा, ‘‘शूद्र कौन हैं? क्या वे हिंदू नहीं हैं? मनुस्मृति में उनका अपमान क्यों किया गया और क्यों उन्हें बराबरी, शिक्षा, रोजगार और मंदिर में प्रवेश का अधिकार नहीं दिया गया? द्रविड़ आंदोलन (जिसने 90 फ़ीसदी हिंदुओं को बचाया) जिसने इन प्रश्नों को उठाया, उनका हल निकाला, उसे हिंदू विरोधी नहीं कहा जा सकता.’’

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलई ने एक ट्वीट में कहा. ‘‘तमिलनाडु की राजनीति की यह ख़राब स्थिति. डीएमके के एक सांसद ने एक बार फिर एक समुदाय के ख़िलाफ जहर उगला है. उनका लक्ष्य ही दूसरों का तुष्टिकरण करना है. इन नेताओं का यह दुर्भाग्यपूर्ण बयान है, जो यह सोचते हैं कि वह तमिलनाडु के मालिक हैं.’’

  2. बच्चा चोरी के शक में महाराष्ट्र में यूपी के साधुओं से मारपीट, पुलिस ने शुरू की जांच

    महाराष्ट्र के सांगली में उत्तर प्रदेश के चार साधुओं के साथ मारपीट हुई है. हादसे का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें लोगों को साधुओं की पिटाई करते देखा जा सकता है.

    इस घटना के बारे में सांगली के एसपी दीक्षित गेदम ने कहा, ‘‘हमें इस बारे में कोई शिकायत या औपचारिक रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन हम वायरल वीडियो की जांच कर रहे हैं और तथ्यों की पुष्टि कर रहे हैं.’’

    ऐसा कहा जा रहा है कि साधु पंढरपुर दर्शन के लिए जा रहे थे और सांगली से जाते समय यह घटना हुई. लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझकर पीट दिया.

    महाराष्ट्र बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक राम कदम ने इस घटना की कड़ी निंदा की है.

    उन्होंने कहा, "साधु संतों के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार हम कतई बर्दास्त नहीं करेंगे. जो दोषी हैं, उनपर कठोर से कठोर कार्रवाई होगी. पालघर साधु हत्याकांड में उस समय की सरकार ने अन्याय किया था, उनके साथ छलावा किया था पर महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार साधु संतों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देगी. जो दोषी हैं उनपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी."

    पालघर में साधुओं पर हमला

    महाराष्ट्र में साधुओं से मारपीट का एक अन्य मामला 2020 में सुर्खियों में आया था.

    पालघर के गढ़चिंचले गांव में 16 अप्रैल, 2020 को गुजरात के सूरत से जा रहे तीन लोगों को रास्ते में कुछ लोगों ने रोक लिया था और उन्हें गाड़ी से निकाल कर पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी.

    भीड़ को इन पर चोर होने का शक था.ये तीनों एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सूरत जा रहे थे.

    दो साधुओं की पहचान 70 साल के महाराज कल्पवृक्षगिरी, 35 साल के सुशील गिरी महाराज और एक उनके ड्राइवर नीलेश तेलगाने के तौर पर गई थी.इस मामले में पुलिस ने 110 लोगों को गिरफ्तार था, जिसमें से 9 नाबालिग़ थे.

  3. रूस-चीन के साथ भारतीय फ़ौज के सैन्य अभ्यास पर बोला अमेरिका, क्या कहा?

    अमेरिकी रक्षा विभाग ने रूस भारत और चीन के संयुक्त सैन्य अभ्यास के बारे में सवालों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उसके भारत के साथ बहुत नज़दीकी सैन्य रिश्ते हैं.

    वॉस्टॉक मिलिट्री एक्सरसाइज़ एक से सात सितंबर के बीच रूस के पूर्वोत्तर हिस्से में हुई थी. इस सैन्य अभ्यास में भारत और चीन समेत कई देशों की सेनाओं ने हिस्सा लिया था.

    पेंटागन के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पेट्रिक राइडर ने एक प्रेसवार्ता में कहा, "भारत एक संप्रभु राष्ट्र है. उन्हें किसके साथ मिलिट्री एक्सरसाइज़ करनी है, इसका फ़ैसला करने का हक़ है."

    प्रवक्ता ने कहा, " बेशक़ हम उस क्षेत्र में भारत के साथ पार्टनरशिप का सम्मान करते हैं. जैसा कि आप जानते ही हैं कि वे हमारे अहम पार्टनर हैं. हम उनके साथ बहुत नज़दीकी तरीके से काम करना जारी रखेंगे."

    पत्रकारों ने प्रवक्ता से भारत के रूस और चीन के साथ सैन्य अभ्यास में शामिल होने के बारे में प्रश्न पूछे थे.

    पेट्रिक राइडर ने कहा, "भारत ने चीन और रूस के साथ वॉर गेम्स में हिस्सा लिया है. अब कुछ लोगों को ये एक परेशान करने वाली ख़बर लग सकती है, लेकिन हमारे भारत के साथ बहुत ही नज़दीकी डिफ़ेंस पार्टनरशिप है. ज़ाहिर है कि हम भारत के साथ मिल कर काम करना जारी रखेंगे ताकि इन रिश्तों को और मज़बूत किया जा सके."

  4. क्या पूर्वी लद्दाख के एक इलाक़े से पीछे हटीं भारत और चीन की सेनाएं? कमांडरों ने किया जायज़ा

    पूर्वी लद्दाख के गोगरा-हॉटस्प्रिंग इलाके के पेट्रोलिंग पॉइंट 15 में भारत और चीन की सेनाओं ने पीछे हटने की प्रक्रिया का जायज़ा लिया है.

    एक निर्धारित समय-सीमा के बीच इस इलाक़े से दोनों सेनाओं को 12 सितंबर तक पीछे हटना था. दोनों सेनाएं ये पक्का कर रही थीं कि वे समझौते के मुताबिक जहाँ तक पीछे हटना था, हटी हैं या नहीं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने लिखा है कि भारत और चीन के लोकल कमांडरों ने पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी होने पर एक बैठक की और हालात का जायज़ा लिया. बीते दो वर्षों से दोनों देशों की सेनाएं इस इलाके में डटी हुई थीं.

    हांलाकि अब भारत और चीन के बीच डेमचोक और डेपसांग क्षेत्र में स्टैंडऑफ़ ख़त्म करने को लेकर कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है.

    आठ सितंबर को भारत और चीन ने ऐलान किया था कि वे दोनों गोगरा-हॉटस्प्रिंग के पीपी-15 इलाक़े में एक क्रमबद्ध तरीके से पीछे हट रहे हैं. यहां शुरुआत में दोनों देशों के तीस-तीस सैनिक एक दूसरे के आमने-सामने थे लेकिन बाद में संबंधों में आई तल्ख़ी के कारण ये संख्या बढ़ती गई और तनाव भी लगातार बढ़ता गया.

    पूर्वी लद्दाख में तनाव पाँच मई, 2020 को शुरू हुआ था जब पैंगोंग झील इलाक़े में दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी.

    उन झड़पों के बाद दोनों देशों ने इस इलाके में हज़ारों सैनिक और सैन्य साज़ो-सामान भेज दिया था. इसके बाद मिलिट्री और कूटनीतिक बैठकों का दौर चला जिसमें सिलसिलेवार तरीके से इस क्षेत्र से सेनाओं को पीछे हटाने की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा हुई.

  5. इशरत जहां मामले की जांच करने वाला आईपीएस अधिकारी बर्ख़ास्त, सुप्रीम कोर्ट पहुँचे

    इशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच करने वाले आईपीएस अधिकारी सतीश चंद्र वर्मा को सेवा से बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

    उन्होंने सेवा से बर्खास्त करने के गृह मंत्रालय के निर्णय को लागू करने की अनुमति देने वाले हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

    गृह मंत्रालय ने 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी को बर्ख़ास्त करने के आदेश दिए थे. उन पर गलत व्यवहार करने के आरोप लगे थे और अनुशासनात्मक जांच के बाद यह कार्रवाई की गई.

    यह आदेश 30 सितंबर को उनकी सेवानिवृत्ति से क़रीब एक महीने पहले आया है. वर्मा फ़िलहाल कोयंबटूर में सीआरपीएफ में कार्यरत हैं.

    वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं.

    हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय को विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद वर्मा के ख़िलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दे दी. वर्मा पर कई आरोपों में से यह आरोप भी था कि उन्होंने नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पॉवर कॉर्पोरेशन, शिलांग के सतर्कता अधिकारी (चीफ विजिलांस ऑफिसर) रहते हुए 'मीडिया' से बात की.

    हाई कोर्ट ने 30 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि वर्मा के ख़िलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं लागू की जानी चाहिए. इस आदेश के बाद, केंद्र ने अपनी कार्रवाई को लागू करने के लिए एक बार फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद कोर्ट ने गृह मंत्रालय को अनुमति दे दी.

    कोर्ट की खंड पीठ ने केंद्र को आदेश लागू करने की अनुमति देते हुए कहा कि यह निर्देश दिया जाता है कि आदेश को 19 सितंबर तक लागू न किया जाए ताकि याचिकाकर्ता को उपलब्ध कानूनी रास्ता उठा सकें.

  6. अमेरिका का दावा, रूस ने विदेशों में नेताओं को प्रभावित करने के लिए ख़र्चे करोड़ों डॉलर

    अमेरिका ने रूस पर यह आरोप लगाया है कि उसने दुनिया के 24 से ज़्यादा देशों के नेताओं को प्रभावित करने के लिए गुप्त रूप से 2014 से अब तक 30 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं.

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय का यह आरोप मंगलवार को अमेरिकी ख़ुफिया विभागों की ओर से जारी किए गए आकलन के आधार पर है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''हमारा मानना है कि यह तो इस बारे में मिली बहुत कम जानकारी है.''

    रूस ने अब तक इस पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं की है. रूस भी बार-बार अमेरिका पर विदेशी मामलों में दख़ल देने का आरोप लगाता रहा है.

    बाइडन प्रशासन के अधिकारी ने फ़ोन पर बताया कि बताया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने आकलन किया है कि ये न्यूनतम आंकड़े हैं और ऐसा संभव है कि रूस ने गुप्त तरीके से ऐसे मामलों में अतिरिक्त राशि भेजी होगी, जिसके बारे में पता नहीं चला.

    अमेरिकी अधिकारी नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बात कर रहे थे.

    हालांकि इस जानकारी में ख़ास देशों या अधिकारियों के नाम नहीं है, जिनके बारे में यह माना जा रहा है कि रूस ने उन पर अपना निशाना लगाया था.

    अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस इस बारे में चुनिंदा देशों को निजी तौर पर जानकारियां दे रहा है. हालांकि, यह जानकारी गोपनीय रहेंगी.

    एएफपी न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस मामले के बारे में जानकारी रखने वाले प्रशासन से संबंधित सूत्र ने आरोप लगाया कि रूस ने अल्बानिया में 2017 के चुनाव में सेंटर-राइट डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने के लिए 500,000 डॉलर ख़र्च किए और बोस्निया, मोंटेनेग्रो और मेडागास्कर में पार्टियों या उम्मीदवारों की आर्थिक मदद की.

  7. नमस्कार, बीबीसी हिंदी के लाइव पेज में आपका स्वागत है. अभिवादन स्वीकार करें स्नेहा और पवन का. बीबीसी हिंदी के इस लाइव पेज में आपको दिनभर देश और दुनिया की ताज़ा और अहम ख़बरें दी जाएंगी. ये लाइव पेज 24 घंटे उपलब्ध रहेगा. 12 सितंबर के अपडेट्स के लिए आप यहां क्लिककर सकते हैं.