झारखंड में जारी सियासी ऊहापोह के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया. मुख्यमंत्री ने सदन की कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद अपनी सरकार के पक्ष में एक पंक्ति का विश्वास मत पेश किया था.
इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार देश के आधे राज्यों की सरकारों को गिराने में लगी है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “विपक्ष ने देश में लोकतंत्र ख़त्म कर दिया है. तंत्र ख़त्म हो गया है, सिर्फ़ लोग बचे हैं. विधायकों को ख़रीदने की बात सिर्फ़ बीजेपी करती है. अब आज हाउस के अंदर ताक़त दिखाएंगे.”
“इस राज्य में अनिश्चितता का माहौल खड़ा किया जा रहा है राज्यपाल के द्वारा. यूपीए के डेलीगेशन को महामहिम के द्वारा कहा गया कि वे चुनाव आयोग के पत्र पर 2-3 दिन में निर्णय लेंगे. लेकिन वे पिछले दरवाज़े से दिल्ली चले गए. इसलिए हम विश्वासमत लाए कि देखो हमारे पास जनता का विश्वास है.”
“आपको लगता है कि जो चाहेंगे कर लेंगे लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है.”
राज्य की मौजूदा सरकार में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायकों के अलावा सीपाआई (एमएल) के विधायक ने भी विश्वास मत के पक्ष में वोट किया.
इससे पहले विधानसभा में इस प्रस्ताव पर एक घंटे तक बहस हुई. इसमें पक्ष-विपक्ष के विधायक शामिल हुए. राज्य की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. लेकिन, उनके विधायक वोटिंग से पहले वाकआउट कर सदन से बाहर चले गए.
झारखंड में सियासी सस्पेंस की स्थिति चुनाव आयोग द्वारा राज्यपाल रमेश बैस को बंद लिफ़ाफ़े में भेजी गई उस चिट्ठी के बाद उत्पन्न हुई है, जिसमें आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में राज्यपाल को अपना मशविरा भेजा है.
मीडिया में चर्चा है कि चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री की विधायकी रद्द करने की सिफ़ारिश की है.
चुनाव आयोग ने पिछले 25 अगस्त को राज्यपाल रमेश बैस को यह पत्र भेजा था. उन्होंने इसपर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है.
इस मुद्दे पर उनसे 1 सितंबर को मिलने राजभवन गए यूपीए के एक प्रतिनिधिमंडल से राज्यपाल ने कहा था कि उन्हें आयोग का पत्र मिला है और वे इसपर 1-2 दिनों में निर्णय ले लेंगे.
इसके अगले ही दिन वे दिल्ली चले गए. वे अभी दिल्ली से वापस रांची नहीं लौटे हैं. उनकी दिल्ली यात्रा निजी वजहों से बतायी जा रही है. नतीजतन चुनाव आयोग के पत्र पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है. इस कारण झारखंड में सियासी हलचल है.
इसके अगले ही दिन वे दिल्ली चले गए. वे अभी दिल्ली से वापस रांची नहीं लौटे हैं. उनकी दिल्ली यात्रा निजी वजहों से बतायी जा रही है. नतीजतन चुनाव आयोग के पत्र पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है. इस कारण झारखंड में सियासी हलचल है.
क्यों बुलाया गया विशेष सत्र
झारखंड विधानसभा के प्रभारी सचिव सैयद जावेद हैदर द्वारा 2 सितंबर को जारी पत्र के मुताबिक़ झारखंड विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन के नियम 15 के तहत विधानसभा का एक दिनी विशेष सत्र बुलाया गया ताकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी सरकार का विश्वास मत पेश कर सकें. इसके बाद 5 सितंबर को जारी विधानसभा सत्र की कार्यसूची में भी मुख्यमंत्री के विश्वास मत का ज़िक्र किया गया.
विशेष सत्र में शामिल होने के लिए यूपीए के अधिकतर विधायक रांची के सर्किट हाउस से कड़ी सुरक्षा के बीच विधानसभा पहुँचे. इससे एक दिन पहले 4 सितंबर की शाम इंडिगो के एक विशेष विमान से वे रायपुर से रांची आए थे. इसके बाद सभी विधायकों ने अपने-अपने घर जाने के बजाय सर्किट हाउस में अपनी रात गुज़ारी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी उनसे मिलने सर्किट हाउस गए थे.
ये सबलोग पिछले कुछ दिनों से रायपुर के एक रिजार्ट में रह रहे थे. इन विधायकों ने कहा था कि वे अपने खर्च पर रायपुर आए हैं ताकि बीजेपी द्वारा सरकार गिराने की कोशिशें नाकाम कर सकें.
विश्वास मत जीतने के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए अपनी जीत को शान भरा बताया है.