बिलकिस बानो गैंगरेप के दोषियों को मिली रिहाई, लेकिन 17 महिलाएं कर रहीं इंतज़ार...
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए

इमेज स्रोत, Gauri Lankesh Memorial Trust
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा है कि बिलकिस बानो गैंगरेप के दोषियों को जेल से रिहाई मिल गई है लेकिन स्वतंत्रता दिवस के दिन अपनी रिहाई का इंतज़ार कर रही 17 महिला अपराधियों को अब तक रिहाई नहीं मिल पाई है.
साबरमति आश्रम जेल से जमानत पर बाहर आने के दो दिन बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जेल में क़ैद 17 महिलाएं भी अपनी रिहाई का इंतज़ार कर रही थीं, लेकिन उनकी बजाय बिलकिस बानो मामले से जुड़े 11 दोषियों को छोड़ा गया जो 'चौंकाने वाला' था.
गौरी लंकेश हत्या की पांचवीं वर्षगांठ पर तीस्ता ने एक वीडियो संदेश के ज़रिए ये बात कही है. उन्होंने वीडियो में कहा कि जेल सुधारों के मुद्दे को लेकर गंभीरता से अभियान चलाने की ज़रूरत है. तीस्ता गौरी लंकेश मेमोरियल ट्रस्ट की चेयरपर्सन हैं.
वीडियो में उन्होंने कहा, "ये सभी महिला अपराधी 14 साल से अधिक वक्त जेल में बिता चुकी हैं और अपनी रिहाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हैं. हमारे पास उनके नामों की लिस्ट है और हम उनकी रिहाई के लिए अभियान चलाएंगे क्योंकि इसी साल 15 अगस्त को उन्हें आज़ादी मिलनी चाहिए थी."

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अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर के तीस्ता के ख़िलाफ़ एक एफ़आईआर दर्ज करवाने के बाद गुजरात एटीएस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. तीस्ता सीतलवाड़ दो जुलाई से लेकर तीन सितंबर तक साबरमति जेल में रहीं. इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम ज़मानत दी थी.
उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि जेल में कम से कम झंडा फहराने का काम तो होगा, साबरमति जेल में हमारे लिए कुछ नहीं था."
उन्होंने कहा, "नागरिक होने, सिविल सोसाइटी का सदस्य होने और मानवाधिकार कार्यकर्ता होने के नाते हमें ये देखने की ज़रूरत है कि जेल में महिला कैदियों के साथ कैसा व्यवहार होता है, वहां कैसी स्थिति है. साबरमति जेल का पूरा काम 20 महिला कैदी करती हैं. वो रसोई करती हैं, साफ़-सफ़ाई करती हैं लेकिन उन्हे बदले में बेहद कम पैसा मिलता है."
उन्होंने कहा कि जेल में उन्होंने गौरी लंकेश को याद किया. उन्होंने कहा कि गौरी जेल में बंद महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार के बारे में चर्चा करना चाहती थीं और उन महिलाओं के बारे में बात करना चाहती थीं जो ग़लत कारणों से जेल तक पहुंच गईं.
जेल के दिनों के अपने अनुभव के बारे में उन्होंने कहा कि "एक क़ैदी को एक मुलाक़ात की इजाज़त होती है लेकिन वो केवल अपने रिश्तेदारों से मिल सकता है. जैसे अगर क़ैदी महाराष्ट्र या पंजाब या तेलंगाना से है तो वो अहमदाबाद के अपने किसी दोस्त से मिलने के लिए क़ानूनी तौर पर मुलाक़ात का इस्तेमाल नहीं कर सकता, ख़ासकर अगर वो उसका रिश्तेदार नहीं है."
उन्होंने कहा, "अगर आप जेल की लाइब्रेरी या स्टडी सेन्टर में जाना चाहते हैं तो आपको अधिकारी बार-बार जेल मैनुअल के बारे में याद दिलाते हैं. वहां पर एक अच्छी लाइब्रेरी है. किताबें बढ़िया नहीं हैं लेकिन अगर आप शांति से बैठकर कुछ पढ़ना चाहते हैं तो वो एक अच्छी जगह है."


















