झारखंड में सत्तारूढ़
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और आरजेडी
के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेश बैस से मिलकर उनके कार्यालय की गतिविधियों पर
सवाल उठाए हैं.
इसके साथ ही सरकार ने पांच सितंबर को दिन के 11 बजे विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है.
यूपीए विधायकों और नेताओं ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की
विधानसभा सदस्यता रद्द किए जाने की कथित खबरों को लेकर राजभवन की चुप्पी संवैधानिक
संकट की स्थिति पैदा कर रही है.
इस प्रतिनिधिमंडल
ने राज्यपाल को पांच पन्नों का एक पत्र भी सौंपा है, जिसपर कई विधायकों,
सांसदों और नेताओं के दस्तख़त
हैं.
बीबीसी को इस पत्र की एक प्रति मिली है.
इसमें लिखा है : “राष्ट्रीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा गुरुवार, 25 अगस्त 2022 से महामहिम के कार्यालय के सूत्रों का हवाला देते हुए व्यापक रूप से यह प्रसारित किया जा रहा है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत चुनाव आयोग से बरहेट विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री हेमंत सोरेन जी और वर्तमान में झारखंड राज्य के माननीय मुख्यमंत्री को भारत के संविधान के अनुच्छेद 192 (1) के तहत जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9-ए के तहत अयोग्य घोषित करने संबंधी पत्र महामहिम के कार्यालय को प्राप्त हुआ है.”
“हमें यह जानकर और भी आश्चर्य हुआ कि सभी समाचारों में प्रकाशित किया जा रहा है कि झारखंड के माननीय राज्यपाल द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 192(1) के तहत श्री हेमंत सोरेन जी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अंतर्गत अयोग्य घोषित करने का निर्णय संभावित है, इससे संबंधित जानकारी राजभवन द्वारा जल्द जारी की जायेगी.”
“इस तरह की खबरों को स्थानीय और राष्ट्रीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सनसनीखेज बनाया जा रहा है, जिससे बहुत सारी अनिश्चितता पैदा हो रही है और अफवाहों को बढ़ावा मिल रहा है.”
“इन सभी समाचारों का महामहिम के कार्यालय से लीक होने की सूचना दी जा रही है और यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि राज्यपाल का कार्यालय एक संवैधानिक कार्यालय है और जनता की नजरों में इसके प्रति अत्यंत सम्मान रहता है. तथा महामहिम के कार्यालय से झूठी खबरों का निकलना भी सच माना जाता है.”
“ऐसे में महामहिम के कार्यालय से झूठी अफवाह का प्रसारित होना राज्य में अराजकता और भ्रम की स्थिति पैदा कर राज्य के प्रशासन और शासन को प्रभावित कर रहा है.”
“यह मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए राजनीतिक द्वेष को भी प्रोत्साहित करता है.”
“यद्यपि महामहिम द्वारा चुनाव आयोग से प्राप्त गोपनीय राय को अभी सार्वजनिक किया जाना है, राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी, भाजपा द्वारा मध्यावधि चुनाव, माननीय मुख्यमंत्री के इस्तीफे, आदि की मांग सार्वजनिक रूप से की जा रही है. जो कि अवांछित है.”
अपने पत्र में यूपीए ने दावा किया है कि अगर मुख्यमंत्री की विधायकी से जुड़ी अयोग्यता सामने भी आती है, तो सरकार पर कोई इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा. क्योंकि झामुमो-कांग्रेस-आरजेडी-निर्दलीय गठबंधन को अभी भी राज्य विधानसभा में प्रचंड बहुमत प्राप्त है.
इसी पत्र की एक पंक्ति में लिखा है कि चुनाव आयोग से प्राप्त राय को सार्वजानिक करने में हो रहा विलम्ब राज्यपाल कार्यालय के संवैधानिक कर्तव्यों और मूल्यों के विपरीत होगा.
राज्य में जारी सियासी हलचल इस पत्र के बाद और तेज हो गई है. इससे सरकार और राजभवन की तनातनी और मुखर हुई है.