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सचिन पायलट ने आज़ाद के इस्तीफ़े की टाइमिंग पर उठाए सवाल

सचिन पायलट ने कहा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद ने संघर्ष करने की बजाय अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने का काम किया है

लाइव कवरेज

भूमिका राय and अभिनव गोयल

  1. सचिन पायलट ने आज़ाद के इस्तीफ़े की टाइमिंग पर उठाए सवाल

    राजस्थान से कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफे़ और चिट्ठी की टाइमिंग को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

    उन्होंने कहा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस में तमाम पदों पर रहे. वे यूथ कांग्रेस, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष का पद संभाला है. आज पार्टी और देश को भाजपा शासन के ख़िलाफ़ महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दों को उठाने की ज़रूरत थी.

    सचिन पायलट ने कहा कि जो बातें चिट्ठी में लिखी गई हैं वो सच्चाई से दूर हैं. ग़ुलाम नबी आज़ाद ने संघर्ष करने की बजाय पार्टी को छोड़ने का काम किया है, कहीं ना कहीं वे अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हटे हैं.

    भूपेश बघेल ने क्या कहा

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद के जाने से कांग्रेस को नुकसान नहीं होगा.

    मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "लगातार वो कांग्रेस में रहकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे. अब उनकी लड़ाई समाप्त हो गई है, वो खुद नेपथ्य में चले गए हैं. कांग्रेस ने उन्हें सम्मान दिया. केंद्रीय मंत्री, महासचिव और मुख्यमंत्री तक बनाया. जो किसी एक व्यक्ति को पार्टी से मिल सकता है वो सब उन्हें मिला."

    ग़ुलाम नबी आज़ाद का इस्तीफ़ा

    आज ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है. अपने पाँच पन्नों के इस्तीफ़ा पत्र में ग़ुलाम नबी आज़ाद राहुल गांधी का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की ये हालत इसलिए हुई है क्योंकि पिछले आठ वर्षों से नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे किया, जो कभी गंभीर ही नहीं था.

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री और ख़ासकर जब वर्ष 2013 में जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद पार्टी के अंदर की सलाह लेने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह ख़त्म कर दिया.

  2. चीन की महिला वॉलीबॉल टीम ने मैच के दौरान पहने मास्क, चीनी सोशल मीडिया पर हलचल

    चीन की राष्ट्रीय महिला वॉलीबॉल टीम ने एक मैच को खेलते समय N95 मास्क पहन रखा था, जिसे लेकर चीनी सोशल मीडिया पर लोग काफी गुस्से में हैं.

    इंटरनेट पर कई लोगों ने अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि चीन की जीरो कोविड पॉलिसी के तहत खिलाड़ियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.

    खिलाड़ियों ने बाद में दूसरे मैच के लिए मास्क को हटा दिया और जीत हासिल की.

    चीन के वॉलीबॉल एसोसिएशन ने बाद में माफी मांगते हुए कहा कि ये फैसला अनुभव की कमी के कारण लिया गया था.

    ये मैच फिलीपींस में एशियाई कप में हुआ था, जिसमें चीन की टीम ईरान के ख़िलाफ़ उतरी थी.

    मैच खेलते हुए चीनी खिलाड़ियों की तस्वीरें तेज़ी से वायरल हुई. चीन के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर इस लेकर एक करोड़ 60 लाख से ज़्यादा व्यूज़ थे.

  3. भारतीय मूल के अमेरिकी पत्रकार को दिल्ली हवाई अड्डे से वापस न्यूयॉर्क भेजा, परिवार का दावा

    भारतीय मूल के एक अमेरिकी पत्रकार के परिवार ने आरोप लगाया है कि बुधवार रात दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद उन्हें न्यूयॉर्क डिपोर्ट कर दिया गया.

    पत्रकार अंगद सिंह, वाइस न्यूज़ के लिए डॉक्यूमेंट्री बनाते हैं. अंगद की मां गुरमीत कौर के मुताबिक वे भारत निजी काम से आए थे.

    अंगद सिंह ने भारत में कोविड संकट और सरकार विरोधी किसान प्रदर्शन और शाहीन बाग प्रदर्शन पर डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं. परिवार के मुताबिक अंगद को वापस क्यों भेजा गया उसके लिए कोई कारण नहीं बताया गया है.

    भारत सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

    गुरमीत कौर ने बीबीसी पंजाबी को बताया कि दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के करीब 15 मिनट बाद अंगद का पासपोर्ट को इमिग्रेशन अधिकारियों ने ज़ब्त कर लिया. पासपोर्ट ज़ब्त करने के बाद उन्हें वापिस अमेरिका भेज दिया गया.

    परिवार के मुताबिक अंगद ने कई देशों में चल रहे आंदोलनों पर डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं.

  4. गुलाम नबी आज़ाद का रिमोट कंट्रोल नरेंद्र मोदी के हाथ में है- पवन खेड़ा

    वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद के कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने पर पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने इसे बीजेपी की मिलीभगत बताई है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पवन खेड़ा ने कहा, "पार्टी का कार्यकर्ता इस धोखे को अच्छी तरह से जानता है. वो जानता है कि जो व्यक्ति आज इस मौके पर पार्टी को धोखा देता है, उस आदमी का रिमोट कंट्रोल नरेंद्र मोदी के हाथ में है. नरेंद्र मोदी और गुलाम नबी आज़ाद जी का प्रेम हमने खुद देखा, संसद में भी देखा. इस पत्र में उस प्रेम की परिणिति आज हुई है."

    उन्होंने कहा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद की राज्यसभा सदस्यता पूरी होते ही वे तड़पने लगे. ये चुनौती का समय है, हमें सबको मिलकर लड़ना था.

    पवन खेड़ा ने ग़ुलाम नबी आज़ाद पर पार्टी को कमज़ोर करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद का इस्तीफ़ा

    आज ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. अपने पाँच पन्नों के इस्तीफ़ा पत्र में ग़ुलाम नबी आज़ाद राहुल गांधी का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की ये हालत इसलिए हुई है क्योंकि पिछले आठ वर्षों से नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे किया, जो कभी गंभीर ही नहीं था.

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री और ख़ासकर जब वर्ष 2013 में जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद पार्टी के अंदर की सलाह लेने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह ख़त्म कर दिया.

  5. 26 अगस्त 2022 का दिनभर- पूरा दिन पूरी ख़बर सुनिए मानसी दाश और अंजुम शर्मा के साथ

  6. ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफे़ पर बोले असम के मुख्यमंत्री, कहा राहुल बीजेपी के लिए वरदान हैं

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफे़ को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सभी जानते हैं कि राहुल गांधी अपरिपक्व हैं. सोनिया गांधी पार्टी को नहीं चला पा रही हैं, वे सिर्फ़ अपने बेटे को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं. इसकी वजह से पार्टी के प्रति वफादार लोग छोड़कर जा रहे हैं.

    हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि एक समय आएगा जब कांग्रेस पार्टी में सिर्फ़ गांधी परिवार के लोग ही बचेंगे और वो अब हो रहा है.

    उन्होंने राहुल गांधी को बीजेपी के लिए वरदान बताया है.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद का इस्तीफ़ा

    आज ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. अपने पाँच पन्नों के इस्तीफ़ा पत्र में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस के साथ अपने लंबे संबंधों का ज़िक्र किया है, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपने रिश्तों को भी याद किया है.

    आज़ाद ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस पार्टी में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ से वापस लौटना मुश्किल है.

    राहुल गांधी का ज़िक्र करते हुए ग़ुलाम नबी आज़ाद ने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की ये हालत इसलिए हुई है क्योंकि पिछले आठ वर्षों से नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे किया, जो कभी गंभीर ही नहीं था.

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री और ख़ासकर जब वर्ष 2013 में जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद पार्टी के अंदर की सलाह लेने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह ख़त्म कर दिया.

  7. ग़ुलाम नबी आज़ाद बीजेपी और आरएसएस के ख़िलाफ़ लड़ाई से भाग रहे हैं: मल्लिकार्जुन खड़गे

    कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि राहुल गांधी पर हमला उचित नहीं है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा- आप उस परिवार के हर व्यक्ति को निजी तौर पर जानते हैं. सोनिया गांधी ने हमेशा आपसे सलाह ली है. आप कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक और कोर कमेटी की बैठक का हिस्सा रहे हैं.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा देते हुए सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने उस पत्र में ख़ास तौर पर राहुल गांधी की कार्यप्रणाली की काफ़ी आलोचना की थी.

    उन्होंने यहाँ तक कहा था कि राहुल गांधी ने कांग्रेस में फ़ैसला लेने वाली प्रक्रिया को समाप्त कर दिया. ग़ुलाम नबी आज़ाद ने ये भी कहा कि पार्टी में वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर दिया गया और कम अनुभवी और चाटुकारों को प्राथमिकता दी जाने लगी.

    अपनी प्रतिक्रिया में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- जब कांग्रेस मुश्किल में है, अल्पसंख्यकों, दलितों, पत्रकारों और लोकतंत्र की बात करने वाले लोगों पर हमला किया जा रहा है, हमें मिल-जुलकर बीजेपी और आरएएस से लड़ना है. अगर आप इस लड़ाई से भाग जाओगे, तो आप पार्टी को धोखा दे रहे हैं. आप मोदी जी की ओर से बनाए गए डर के माहौल में भाग रहे हैं.

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वे ख़ुद फ़ैसला लेते थे और हर चीज़ का हिस्सा होते थे, ऐसे में ये कहना कि पार्टी अच्छी नहीं चल रही है, सही नहीं है. उन्होंने कहा- वे आरएसएस के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई का हिस्सा नहीं हैं. ये उनका नुक़सान है. मैं दुखी हूँ. उन्हें अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करना चाहिए.

  8. ग़ुलाम नबी आज़ाद ने अपने त्यागपत्र में जो कहा

  9. अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी को कहा 'सीरियल किलर', सरकारों को गिराने का लगाया आरोप

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज विधानसभा में बीजेपी पर आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड़ने और दिल्ली में आप सरकार गिराने का आरोप लगाया.

    उन्होंने कहा, "शहर में एक सीरियल किलर आया हुआ है, जो एक के बाद एक मर्डर करता जा रहा है. जनता सरकार चुनती है, ये (बीजेपी) सरकार गिरा देते हैं....जैसे सीरियल किलर का पैटर्न होता है, वैसा ही पैटर्न है इनका (बीजेपी)."

    अरविंद केजरीवाल ने कहा, "देश में ये लोग कई सरकार गिरा चुके हैं. गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, मध्य प्रदेश, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मेघालय की सरकार गिरा चुके हैं."

    दिल्ली में फेल हुआ ऑपरेशन लोटस

    अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी ने जो ऑपरेशन लोटल चलाया था, वो दिल्ली में आकर ऑपरेशन कीचड़ बन गया है.

    उन्होंने बीजेपी पर कुछ सालों में 5,500 करोड़ रुपS में 277 विधायकों को ख]रीदने का आरोप लगाया. साथ ही कहा कि बीजेपी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 40 विधायकों को 20-20 करोड़ रुपए में ख़रीदना चाहती थी, इसके लिए 800 करोड़ रुपए रखे हुए हैं, लेकिन ये किसी को भी नहीं तोड़ पाए.

    रेड में गद्दे, तकिए तक फाड़ दिए

    अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मनीष सिसोदिया के घर पर 14 घंटे की रेड चली.

    "चार पाँच कमरे में सारा कुछ छान मारा. बहुत गहन जाँच की, दीवारों को देखा कि कहीं खोखली तो नहीं है. जैसे फ़िल्मों में दिखाते हैं कि कहीं इन दीवारों में जेवर तो नहीं रखे. फिर उन्होंने गद्दे फाड़ फाड़ कर देखे, तकिए फाड़कर देखे, अलमारी, कपड़े सब कुछ देख लिया. शाम को निकल गए. अठन्नी भी नहीं मिली, चवन्नी भी नहीं मिली."

    उन्होंने कहा कि रेड के लिए 30 से 35 लोग आए थे लेकिन उनके खाने पीने का ख़र्चा भी नहीं निकल पाया.

    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आबकारी नीति में बदलाव में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई जाँच का सामना कर रहे हैं.

    सीबीआई ने 19 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी और 15 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है.

  10. ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर सुनील जाखड़ ने कहा- ये कांग्रेस के अंत की शुरुआत

    ग़ुलाम नबी आज़ाद के कांग्रेस से इस्तीफा देने पर पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस छोड़ते हुए जो शिकायत उन्होंने रखी थी, उन्हीं शिकायतों पर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने मुहर लगाई है.

    उन्होंने कहा- आज न सिर्फ़ कांग्रेस के एक मज़बूत स्तंभ ने इस्तीफा दिया है बल्कि मुझे लगता है कि ये एक शुरुआत है. ये कांग्रेस के लिए अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए बहुत कठिन समय होने जा रहा है.

    इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस स्थिति के लिए ख़ुद कांग्रेस ज़िम्मेदार है. उन्होंने अपने नेताओं की नहीं सुनी, जिसके चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह और जितिन प्रसाद जैसे नेताओं ने पार्टी छोड़ी और ग़ुलाम नबी आज़ाद ने अपना इस्तीफा दे दिया.

    तीन महीने पहले सुनील जाखड़ ने अपने फेसबुक पेज से लाइव होकर कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की थी. उन्होंने उस समय अंबिका सोनी के साथ सोनिया गांधी पर भी कई सवाल उठाए थे. कांग्रेस छोड़कर सुनील जाखड़ बीजेपी में शामिल हुए थे.

    कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित भी कांग्रेस के जी-23 ग्रुप का हिस्सा थे. इस ग्रुप ने अगस्त 2020 में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को संगठन में बड़े बदलावों के लिए कहा था और अपनी नाराज़गी व्यक्त की थी.

    अगस्त 2020 में लिखे पत्र का जिक्र करते हुए संदीप दीक्षित ने कहा- हमने सुधार करने के लिए आवाज़ बुलंद की थी ना कि विद्रोह के लिए.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद का इस्तीफा

    आज ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. अपने पाँच पन्नों के इस्तीफ़ा पत्र में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस के साथ अपने लंबे संबंधों का ज़िक्र किया है, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपने रिश्तों को भी याद किया है.

    आज़ाद ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस पार्टी में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ से वापस लौटना मुश्किल है.

    राहुल गांधी का ज़िक्र करते हुए ग़ुलाम नबी आज़ाद ने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की ये हालत इसलिए हुई है क्योंकि पिछले आठ वर्षों से नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे किया, जो कभी गंभीर ही नहीं था.

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री और ख़ासकर जब वर्ष 2013 में जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद पार्टी के अंदर की सलाह लेने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह ख़त्म कर दिया.

  11. किस हाल में हैं रोहिंग्या मुसलमान

    रोहिंग्याओं को ज़्यादातर मामलों में नागरिकता और दूसरे अधिकार नहीं मिलते. भारत और बांग्लादेश दोनों उन्हें वापस म्यांमार भेजना चाहते हैं, लेकिन ये विकल्प है ही नहीं, क्योंकि अब वहां सत्ता की कमान सेना के हाथ में है.

    एक अनुमान के मुताबिक, 95% रोहिंग्या शरणार्थी युवा बेरोज़गार हैं और इसकी वजह से वो गहरे तनाव से जूझ रहे हैं. बीबीसी संवाददाता रजनी वैद्यनाथन की रिपोर्ट.

  12. ग़ुलाम नबी आज़ाद पर आक्रामक हुई कांग्रेस, जयराम रमेश ने कहा- उन्होंने अपना असली चरित्र दिखाया

    वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद के कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. शुरू में तो कांग्रेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण कहते हुए बहुत आक्रामक रुख़ नहीं अपनाया, लेकिन अब पार्टी के कई नेताओं ने ग़ुलाम नबी आज़ाद पर सवालों की झड़ी लगा दी है. कांग्रेस ने जब प्रेस कॉन्फ़्रेंस की, जो उसमें जयराम रमेश भी थे. लेकिन उस समय अजय माकन ने मोर्चा संभाला था और नपे-तुले शब्दों में प्रतिक्रिया दी थी.

    लेकिन अब जयराम रमेश ने ट्वीट करके ग़ुलाम नबी आज़ाद के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल लिया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा- जिस व्यक्ति को कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज़्यादा सम्मान दिया, उसी व्यक्ति ने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत आक्रमण करके अपने असली चरित्र को दर्शाया है. पहले संसद में मोदी के आंसू, फिर पद्म भूषण, फिर मकान का एक्सटेंशन. यह संयोग नहीं सहयोग है !

    राज्यसभा में ग़ुलाम नबी आजाद के विदाई संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी भावुक हो गए थे, इसी का ज़िक्र उन्होंने अपने ट्वीट में किया है. बाद में मोदी सरकार ने आज़ाद को पद्म भूषण भी दिया था. जयराम रमेश ने इसे संयोग नहीं सहयोग कहा है. कांग्रेस के एक और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी ट्वीट करके ग़ुलाम नबी आज़ाद को घेरा है. उन्होंने कहा है कि जब वे सब फ़ैसले ले रहे थे, तो वे गर्व के साथ कोर ग्रुप से जुड़े थे.

    पवन खेड़ा ने कहा- अब जब दूसरे फ़ैसला ले रहे हैं, तो वे उन्हें चाटुकार कह रहे हैं. आज कांग्रेस को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वो उनके जैसे नेताओं के कारण है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कहा है कि ग़ुलाम नबी आज़ाद के शब्द अनुचित हैं और उनकी समझ से परे हैं.

    उन्होंने कहा- ग़ुलाम नबी आज़ाद जी के फ़ैसले और वक्तव्य को पढ़कर मुझे अफ़सोस है. कांग्रेस ने उनको सम्मान और पहचान दी. 42 साल से वे बिना पद के नहीं रहे. उनके शब्द अनुचित हैं, मेरी समझ से परे हैं. कांग्रेस की एक और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने ग़ुलाम नबी आज़ाद की चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं.

    उन्होंने ट्वीट करके लिखा है- ग़ुलाम नबी आज़ाद जी ने मात्र 2 गठबंधन की राज्य सरकारों का ज़िक्र किया है. संभवतः झारखंड और तमिलनाडु. वे बिहार का ज़िक्र करना भूल गए या यह चिट्ठी 9 अगस्त के पहले ही लिख ली गई थी और अब भारत जोड़ो यात्रा के पहले सार्वजनिक की जा रही है?

  13. ग़ुलाम नबी आज़ाद के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के पांच कांग्रेसी नेताओं ने दिया इस्तीफा

    वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के पांच नेताओं ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.

    इस्तीफ़ा देने वालों में जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक जीएम सरूरी, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल राशिद, राज्य के यूथ कांग्रेस प्रेसिडेंट रह चुके मोहम्मद अमीन भट, अनंतनाग ज़िले के अध्यक्ष गुलज़ार अहमद वानी और एसटी सेल के चेयरमेन चौधरी मोहम्मद अकरम शामिल हैं.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद का इस्तीफा

    अपने पाँच पन्नों के इस्तीफ़ा पत्र में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस के साथ अपने लंबे संबंधों का ज़िक्र किया है, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपने रिश्तों को भी याद किया है.

    आज़ाद ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस पार्टी में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ से वापस लौटना मुश्किल है.

    इस्तीफे में राहुल गांधी पर उठाए सवाल

    राहुल गांधी का ज़िक्र करते हुए ग़ुलाम नबी आज़ाद ने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की ये हालत इसलिए हुई है क्योंकि पिछले आठ वर्षों से नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे किया, जो कभी गंभीर ही नहीं था.

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री और ख़ासकर जब वर्ष 2013 में जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद पार्टी के अंदर की सलाह लेने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह ख़त्म कर दिया.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि पार्टी में सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को किनारे कर दिया गया और ग़ैर अनुभवी और चापलूसों को पार्टी के मामलों में प्राथमिकता दी जाने लगी.

    सोनिया गांधी को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा है कि वो ये इस्तीफ़ा बहुत भारी मन से दे रहे हैं.

  14. मौत से पहले सोनाली फोगाट की ड्रिंक में केमिकल मिलाया गया- गोवा पुलिस

    बीजेपी नेता और टिक टॉक स्टार सोनाली फोगाट की मौत पर गोवा पुलिस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर नए तथ्य सामने रखे हैं.

    गोवा के आईजी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी फ़ुटेज की जांच की है. फ़ुटेज को देखने से पता चलता है कि कथित सुधीर सांगवान और उनके सहयोगी सुखविंदर सिंह, सोनाली फोगाट के साथ क्लब में पार्टी कर रहे थे.

    आईजी ओमवीर सिंह बिश्नोई ये भी कहा कि सीसीटीवी फ़ुटेज में दिख रहा है उनमें से एक सोनाली फोगाट को ज़बर्दस्ती कोई पदार्थ दे रहा है. पुलिस की पूछताछ में सुखविंदर और सुधीर ने बताया कि उन्होंने जान-बूझ कर एक केमिकल को ड्रिंक में मिला दिया था और उस ड्रिंक को सोनाली फोगाट को पिला दिया था.

    सोनाली फोगाट की 22 अगस्त को उत्तरी गोवा के अंजुना में मौत हो गई थी. पहले सोनाली फोगाट की मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई थी, लेकिन अब गोवा पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) भी जोड़ी है.

    सुधीर और सुखविंदर, सोनाली फोगाट के साथ 22 अगस्त को गोवा में मौजूद थे.अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ सोनाली फोगाट के परिवार ने अंजुना पुलिस थाने में लिखित शिकायत की थी. इस शिकायत में परिवार ने सुधीर और सुखविंदर पर सोनाली की हत्या का आरोप लगाया है.

    चार पन्नों में दी गई इस शिकायत पर सोनाली के भाई ने हस्ताक्षर किए हैं और कहा है कि उनकी बहन की संपत्ति हड़पने के इरादे से सुखविंदर और सुधीर ने सोनाली की हत्या की.

    कौन थीं सोनाली फोगाट

    सोनाली फोगाट हरियाणा के फतेहाबाद के भुथन गांव की रहने वाली थीं. सोनाली फोगाट साल 2008 में बीजेपी में शामिल हुईं. उन्होंने आदमपुर से साल 2019 हरियाणा विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन कांग्रेस पार्टी के नेता कुलदीप बिश्नोई से हार गई थीं.

    राजनीति से अलग सोनाली ने कई हरियाणवी और पंजाबी फ़िल्मों में अभिनय किया है. वे टिक टॉक पर काफी मशहूर थीं.

  15. एनडीटीवी के शेयर न ट्रांसफ़र करने के बयान पर आया अडानी ग्रुप का ताज़ा बयान

    अडानी ग्रुप के एनडीटीवी में क़रीब 30 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीदने के मामले में सवाल और जवाब का सिलसिला अभी थमा नहीं है. एक दिन पहले ही एनडीटीवी ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बयान जारी किया था और कहा था कि सेबी के एक पुराने फ़ैसले के कारण अडानी ग्रुप ये शेयर नहीं ख़रीद सकता.

    एनडीटीवी ने अपने बयान में कहा था कि एनडीटीवी के संस्थापक प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर साल 2020 से शेयर ख़रीदने और बेचने पर प्रतिबंध लगा हुआ है,

    इसलिए वे लोग अडानी समूह को उन शेयरों का ट्रांसफ़र नहीं कर सकेंगे जिनके आधार पर अडानी ग्रुप एनडीटीवी की हिस्सेदारी ख़रीद रहा है.

    इसे एनडीटीवी की ओर से इस डील को रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. अब अडानी ग्रुप ने एनडीटीवी के सवाल को लेकर ताज़ा बयान जारी किया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अडानी ग्रुप का कहना है कि होल्डिंग कंपनी आरआरपीआर सेबी के आदेश की पार्टी नहीं है. इसलिए वीसीपीएल को शेयर ट्रांसफ़र करने के मामले में कोई रोक नहीं है.

    अडानी ग्रुप का ये भी कहना है कि वारंट एक्सरसाइज नोटिस वीसीपीएल ने जारी किया है, जो एक अनुबंध के तहत है और आरआरपीआर इसे मानने को बाध्य है और उसे अनुबंध की शर्तों को मानना पड़ेगा.

    पिछले दिनों अडानी ग्रुप ने एनडीटीवी में परोक्ष रूप से क़रीब 30 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीदने की घोषणा की थी. इसके साथ ही अडानी ग्रुप ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज़ (एनएसई) को बताया कि वह एनडीटीवी में 26 फ़ीसदी हिस्सेदारी और ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र भी लाएगा.

    इसका मतलब ये है कि अडानी समूह का इरादा एनडीटीवी में मालिकाना हिस्सेदारी हासिल करने का है. अगर अडानी का ओपन ऑफ़र कामयाब रहा तो एनडीटीवी में उसकी कुल हिस्सेदारी 55 फ़ीसदी से अधिक हो जाएगी. एनडीटीवी प्रबंधन ने अडानी समूह के इस क़दम पर हैरानी जताई है और कहा है कि उसे इस डील के बारे में कुछ भी पता नहीं था.

  16. ग़ुलाम नबी आज़ाद ऐसा पत्र लिखेंगे, ये उम्मीद नहीं थी: अशोक गहलोत

    वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया दी है.

    अशोक गहलोत ने कहा है कि कांग्रेस ने ग़ुलाम नबी आज़ाद को हर चीज़ दिया. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा- आज वे अगर चर्चित नेता हैं तो ये इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी की वजह से है.

    शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे अपने पत्र में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस नेतृत्व ख़ासकर राहुल गांधी पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं.

    अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा- ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर मैं क्या सोचता हूँ, ये बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. उन्होंने पार्टी में कई पदों पर काम किया है. उन्होंने कहा कि किसी ने ये उम्मीद नहीं की थी कि ग़ुलाम नबी आज़ाद ऐसा पत्र लिखेंगे.

    अशोक गहलोत ने कहा- पहले भी उन्होंने सोनिया गांधी को उस समय पत्र लिखा था, जब वे मेडिकल चेकअप के लिए अमेरिका गई थी.

    अपने पाँच पन्नों के इस्तीफ़े में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस के साथ अपने लंबे संबंधों का ज़िक्र किया है, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपने रिश्तों को भी याद किया है.

    आज़ाद ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस पार्टी में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ से वापस लौटना मुश्किल है.

    राहुल गांधी का ज़िक्र करते हुए ग़ुलाम नबी आज़ाद ने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की ये हालत इसलिए हुई है क्योंकि पिछले आठ वर्षों से नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे किया, जो कभी गंभीर ही नहीं था.

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री और ख़ासकर जब वर्ष 2013 में जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद पार्टी के अंदर की सलाह लेने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह ख़त्म कर दिया.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि पार्टी में सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को किनारे कर दिया गया और ग़ैर अनुभवी और चापलूसों को पार्टी के मामलों में प्राथमिकता दी जाने लगी.

    सोनिया गांधी को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा है कि वो ये इस्तीफ़ा बहुत भारी मन से दे रहे हैं.

  17. गुजरात दंगों के चश्मदीद क्यों ख़ौफ़ में हैं

    बहुचर्चित बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले के 11 दोषियों की रिहाई के बाद गुजरात दंगों के चश्मदीद डरे हुए हैं. उन्हें राज्य सरकार पर भरोसा नहीं है. बिलकिस के गांव के कई लोग अपना घरबार छोड़ रहे हैं.

    इस मामले में 11 दोषियों की रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार और केंद्र को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या गुजरात सरकार इन दोषियों को माफ़ी दे सकती है या नहीं.

  18. ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर आई बीजेपी की प्रतिक्रिया, जानिए क्या कहा है पार्टी ने

    वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद के कांग्रेस पार्टी छोड़ने पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी ने कांग्रेस पर तंज़ करते हुए ट्वीट किया है

    बीजेपी ने लिखा है, “देश हम जोड़ रहे हैं, आप कांग्रेस जोड़ो दरबारियों.”

    बीजेपी ने अपने ट्वीट में ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े की प्रति को भी संलग्न किया है.

    बीजेपी की ओर से इस पत्र की एक लाइन को हाइलाइट भी किया है. जिसके मुताबिक़, “भारत जोड़ो यात्रा से पहले लीडरशिप को कांग्रेस जोड़ो करना चाहिए.”

    बीजेपी नेता शहनवाज़ हुसैन ने ट्वीट करके गुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने लिखा है, “कांग्रेस से बिछड़े सब बारी बारी !आज़ादी की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाली कांग्रेस से उसके वरिष्ठ नेता ही आज़ाद होना चाहते हैं.ग़ुलाम नबी साहब,आज कांग्रेस से आजाद हो गए.”

    बीजेपी नेता कुलदीप बिश्नोई ने भी ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर टिप्पणी की है.

    न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार कुलदीप बिश्नोई ने कहा, “ये कहते हुए ग़लत नहीं हूँ कि कांग्रेस ख़ुद को बर्बाद करने की दिशा में है. वह सुसाइड मोड में है. यह सुझाव है कि राहुल गांधी अपने अहंकार को किनारे रखें. ग़ुलाम नबी आज़ाद का बीजेपी में स्वागत है.”

    उन्होंने कहा- अगर पार्टी मुझसे कहती है तो मैं उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश कर सकता हूँ.

    ग़ुलाम नबी आज़ाद ने पांच पन्नों में लिखा इस्तीफ़ा

    कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने अपनी नाख़ुशी और मायूसी ज़ाहिर करते हुए जिस तरह पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है उससे एक बार फिर पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है.

    जम्मू इलाक़े से आने वाले ग़ुलाम नबी आज़ाद पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता रहे हैं, वे पिछले साल फ़रवरी महीने तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं.

    आज़ाद को पिछले कुछ समय से नाराज़ बताया जा रहा था, उन्होंने जिस तरह पांच पन्ने की चिट्ठी लिखी है उसमें उन्होंने अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त किया है.

  19. ग़ुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर क्या कहा है कांग्रेस पार्टी ने

    ग़ुलाम नबी आज़ाद के कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफ़ा देने के बाद कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और अजय माकन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

    अजय माकन ने कहा- इससे पहले हम ये प्रेस कॉन्फ्रेंस दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार और शराब नीति को लेकर करने वाले थे लेकिन जैसे ही हम यहाँ पहुँचे, तो हमें पता चला कि गुलाम नबी आज़ाद ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

    अजय माकन ने बताया कि उन्हें भी मीडिया में आए उनके इस्तीफ़े के बाद ही उनके इस क़दम के बारे में पता चला.

    उन्होंने कहा, “मीडिया में ग़ुलाम नबी आज़ाद का जो पत्र आया है वो हमने देखा है. आज़ाद साहब कांग्रेस पार्टी के बहुत ही वरिष्ठ नेता थे और कांग्रेस पार्टी के अंदर और प्रशासन में देश और प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के माध्यम से उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदो को सुशोभित किया. ये बहुत दुख की बात है कि जिस समय कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी के नेतृत्व में, अध्यक्षा सोनिया गांधी के नेतृत्व में, पूरा संगठन महंगाई, बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है, राष्ट्रीय रैली निकालने वाले हैं और भारत जोड़ो यात्रा निकालने वाले हैं, ऐसे समय में दुख की बात है कि गुलाम नबी आज़ाद ने ऐसे समय में कांग्रेस पार्टी को छोड़ने का और इस लड़ाई को छोड़ने का फ़ैसला किया है."

    उन्होंने कहा, "हम ये उम्मीद कर रहे थे कि ये लड़ाई जो हम जनता के मुद्दों के लिए लड़ रहे थे और कांग्रेस पार्टी सबसे प्रमुख विपक्षी पार्टी होने के नाते लड़ रही है, इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि राहुल गांधी जी विपक्ष की ओर से सबसे मुखर नेता के तौर पर हैं, तो हम ये उम्मीद कर रहे थे कि ग़ुलाम नबी आज़ाद जनता की आवाज़ को अपना बल देते. लेकिन ये दुख की बात है कि वो इस आवाज़ का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं. ये बहुत दुख की बात है.”

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी गुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफ़े पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा- हमने वह पत्र पढ़ा है.

    उन्होंने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और साथ ही खेदजनक भी. जिस समय पर कांग्रेस की अध्यक्ष, राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस बीजेपी से महंगाई, बेरोज़गारी के मुद्दे पर लड़ रही है, ऐसे समय में उन्होंने यह फ़ैसला लिया.”

    उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब कांग्रेस का देश स्तर पर हर एक सदस्य महंगाई और बेरोज़गारी के मुद्दे पर राहुल गांधी के साथ जुड़ रहा है, तो उन्होंने अपनी इस्तीफ़ा दिया है.

  20. गुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस से तोड़ा नाता. क्या कहा और इसके मायने क्या हैं?

    LIVE: गुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस से तोड़ा नाता. क्या कहा और इसके मायने क्या हैं? दिल्ली में बीबीसी की सरोज सिंह और पंकज प्रियदर्शी की बातचीत.