चीन ने ताइवान के
मसले पर घरेलू और विदेशी मीडिया से बात की है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने
ताइवान में अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर के दौरे को एक बड़ी ग़लती और साज़िश बताया है.
साथ ही
ताइवान को चेतावनी दी है कि वो अमेरिकी सहयोग से आज़ादी पाने का भ्रम ना पाले.
चीन ने इस बात पर
भी ज़ोर दिया है कि वो पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन कर रहा है.
कंबोडिया में
आसियान की मंत्रीस्तरीय बातचीत के बाद वांग यी ने मीडिया को संबोधित किया जिसमें
उन्होंने कहा कि अमेरिका भ्रामक सूचना और झूठ फ़ैला रहा है. ऐसे में हमारे लिए
स्थितियों को साफ़ करना और तथ्यों को सामने रखना ज़रूरी हो जाता है.
वांग यी ने कहा, ''अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंनी पेलेसी ने चीन के
कड़े विरोध के बावजूद ताइवान का दौरा किया. अमेरिका के इस लापरवाह क़दम ने चीन की
संप्रभुता को गंभीर रूप से कमज़ोर किया और चीन के आंतरिक मामलों में दखल दिया है.
इससे अमेरिकी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन हुआ है और ताइवान में शांति और स्थिरता
ख़तरे में पड़ गई है.''
''चीन इसका कड़ा जवाब देता
है तो ये सामान्य बात है. हमारी स्थिति उचित और क़ानूनी है. हमारे क़दम मज़बूत और
नपे-तुले हैं और हमारे सैन्य अभ्यास खुले, पारदर्शी और
पेशेवर हैं. वो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के मुताबिक़ हैं. उनका उद्देश्य
अपराधी को चेतावनी और "ताइवान के स्वतंत्रता" बलों को सज़ा देना है.''
'अमेरिका ने अपने पैर पर मारी कुल्हाड़ी'
वांग यी ने कहा, ''हम चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करेंगे. चीन को नियंत्रित करने के लिए ताइवान कार्ड का इस्तेमाल करने की अमेरिकी कोशिशों को दृढ़ता से रोकेंगे. वहीं, अमेरिका की मदद से ताइवान की स्वतंत्रता को आगे ले जाने वाले ताइवान के अधिकारियों के भ्रम को मज़बूती से तोड़ देंगे.''
उन्होंने कहा कि अगर आंतरिक मामलों में दखल ना देने के संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांत का उल्लंघन किया जाएगा तो जंगल राज की स्थिति बन जाएगी और अमेरिका दूसरे देशों को धमकाने में और बेशर्म हो जाएगा.
वांग यी ने नैंसी पेलोसी की यात्रा को अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाला बताते हुए कहा कि अमेरिका के इस क़दम से 100 से ज़्यादा देशों ने वन-चाइना नीति को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई है. इससे वन-चाइना नीति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति मज़बूत हुई है.
वांग यी ने ज़ोर दिया कि ये दौरा ताइवान की अपनी मातृभूमि में वापसी को नहीं रोक सकता और न ही यह चीनी राष्ट्र के महान कायाकल्प की ऐतिहासिक प्रक्रिया को रोक सकता है.
"ताइवान के स्वतंत्रता बलों की अमेरिका की मदद से आज़ादी पाने की कोशिश सिर्फ़ एक भ्रम है, जिसे अंत में टूटना ही है और इससे उनके गले में फंदा और कसता जाएगा.
उन्होंने कहा कि इससे पहले अमेरिकी स्पीकर न्यूट गिंगरिच की ताइवान यात्रा बहुत बड़ी ग़लती थी.
चीनी सरकार ने उस वक़्त इसका पुरजोर विरोध किया था. अमेरिका को वो ग़लती दोहराने का कोई अधिकार नहीं है और वो पुरानी ग़लतियों को बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकता.
वांग यी ने क्षेत्र में सैन्य तैनाती के कथित अमेरिकी विस्तार के ख़िलाफ़ सभी पक्षों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की है.
उन्होंने कहा, ''अमेरिकी प्लेबुक के मुताबिक़ पहले एक समस्या पैदा की जाती है और फिर उस समस्या का इस्तेमाल अपने उद्देश्य हासिल किए जाते हैं. लेकिन चीन के सामने, यह काम नहीं करेगा! यह अमेरिका के लिए हमारी कड़ी चेतावनी है. लापरवाही ना बरतें या इससे भी बड़ा संकट पैदा न करें.''
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बैठकों में कहा है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय क़ानून का पालन करना चाहता है और राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखना चाहता है.
वांग यी ने जवाब दिया कि हमने अमेरिकी पक्ष को लंबे समय ऐसा बोलते हुए नहीं सुना. अगर अमेरिका अपनी गलतियों को गंभीरता से सुधार रहा है, तो हम उन्हें ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे. लेकिन, ठोस कार्रवाई होना ज़रूरी है. पहली प्राथमिकता है कि ताइवान के सवाल पर अमेरिका अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करे, चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करे, चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करे और "ताइवान स्वतंत्रता" बलों का समर्थन और साठगांठ रोक दे.