बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. आरसीपी सिंह ने अपना इस्तीफा जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश अध्यक्ष के नाम भेजा है.
आरसीपी सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा, "मैं रामचन्द्र प्रसाद सिंह, जनता दल (यू) की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र देता हूँ."
गौरतलब है कि पार्टी की ओर से फिर से राज्यसभा न भेजे जाने और बाद में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने को लेकर आरसीपी सिंह के पार्टी से खफा होने की बातें लंबे समय से सामने आ रही थीं.
जब मीडियाकर्मियों ने उनसे नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री बनने को लेकर सवाल किए तो उन्होंने कहा, "सात जन्म में नहीं बनेंगे."
इसके अलावा किसी और पार्टी या भाजपा जाने के सवाल पर उनका कहना है कि वे अभी अपने साथियों से बात करेंगे और उनके पास ऑप्शन्स खुले हैं.
बिहार समेत देश के कई दैनिक अखबारों में आज आरसीपी सिंह द्वारा अकूत संपत्ति जुटाने और जमीन खरीदने के संबंध में खबरें छपी हैं.
वहीं जब मीडियाकर्मियों ने उनसे उन पर लग रहे आरोपों और नीतीश कुमार के रवैये को लेकर सवाल किए तो उन्होंने कहा, "जानबूझकर मेरी इमेज को खराब किया जा रहा है. मैं 40 साल से सेवारत हूं. कई बार आरोप लगे. जालसाजों और साजिशकर्ताओं के पास यही काम बच गया है."
आरसीपी सिंह पर लगे आरोपों के साथ ही उनके इस्तीफे के संदर्भ में पार्टी के प्रवक्ता अरविंद निषाद कहते हैं, "संपत्ति सृजन के मामले में जब पार्टी ने उनसे सवाल किए तो उन्होंने कोई तार्किक जवाब नहीं दिया. ऐसे में जब वे चारों तरफ से घिरते हुए दिख रहे हैं, तो उन्होंने इस्तीफा दिया है."
आरसीपी सिंह ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में जद (यू) को जहां डूबता जहाज कहा, वहीं बेटियों द्वारा संपत्ति के अर्जन को लेकर कहा कि कोई चीज छिपी तो है नहीं. उनके पास पुश्तैनी संपत्ति रही है. बेटियों ने जो कुछ भी खरीदा है, उसका समुचित हिसाब है.
आरसीपी सिंह पर लगे आरोपों के साथ ही उनके इस्तीफे के संदर्भ में पार्टी के प्रवक्ता निखिल मंडल ने बयान जारी करते हुए कहा, "जब प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था, तो निश्चित रूप से उस नोटिस के बाद मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर आरसीपी सिंह की फजीहत हो रही थी. आरसीपी जी को यह बात भलीभांति मालूम है कि जदयू करप्शन को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता है. उन्हें यह बात समझ में आ चुकी थी कि इतनी फजीहत और साक्ष्य-सबूतों के बाद उनके लिए जदयू में कोई जगह नहीं बची थी. तो उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया."
इसके साथ ही निखिल मंडल ने आरसीपी सिंह की ओर से आ रही सफाई पर कहा कि यदि कोई अपराध करता है तो क्या वह खुद को कभी अपराधी मानता है? क्या वह खुद को गलत मानता है? लेकिन साक्ष्य और सबूतों के सामने वे (आरसीपी सिंह) कहां तक भाग पाएंगे?