दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने नई शराब पॉलिसी को बंद करने का फैसला लिया है. दिल्ली में 1 अगस्त 2022 से पुरानी आबकारी नीति के तहत शराब की बिक्री होगी.
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि 31 जुलाई को आबकारी पॉलिसी 2021-22 खत्म हो रही है. सरकार ईडी और सीबीआई के नाम पर प्राइवेट शराब दुकानदारों और अफसरों को डरा रही है जिसके चलते कोई अधिकारी पॉलिसी को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है.
उन्होंने कहा, "हमने पुरानी पॉलिसी के तहत सरकारी दुकानें खोलने के आदेश दिए हैं. नई पॉलिसी को बंद करके सरकारी दुकानों के ज़रिए अब शराब बेची जाएगी."
हाल ही में दिल्ली के उप राज्यपाल ने नई शराब पॉलिसी के ख़िलाफ़ सीबीआई जांच की सिफ़ारिश की थी. हालांकि बीजेपी लंबे समय से दिल्ली में नई शराब पॉलिसी का विरोध कर रहा है.
दिल्ली बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल पर नई शराब पॉलिसी के तहत कई हज़ार करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया है.
दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और दिल्ली की जनता के दबाव में केजरीवाल सरकार ने शराब नीति को वापस लेने का फैसला किया है.
मनीष सिसोदिया ने बीजेपी पर पुरानी शराब पॉलिसी के ज़रिए भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "पहले ज्यादातर सरकारी दुकानों के ज़रिए शराब बेची जाती थी. प्राइवेट दुकानों के लाइसेंस इन्होंने अपने यार दोस्तों, ड्राइवरों के नाम पर दिए हुए थे, जो हमने बंद कर दिए."
'नई शराब नीति से सालाना 3500 करोड़ का फायदा'
मनीष सिसोदिया ने कहा, "हमने बहुत पारदर्शी तरीके से शराब की दुकानों की नीलामी की. पहले दिल्ली में 850 शराब की दुकानें होती थीं. नई पॉलिसी में हमने तय किया कि कोई नई दुकान नहीं खोली जाएगी. पहले इन दुकानों से सरकार को करीब 6 हज़ार करोड़ का रेवेन्यू मिलता था."
"जब हमने पारदर्शी तरीके से इन दुकानों की नीलामी पूरी की तब पूरे साल में 850 दुकानों से 9500 करोड़ का रेवेन्यू आना था. इस हद तक ऑक्शन गया हमारा. 6 हज़ार करोड़ रुपये की जगह 9500 करोड़ रुपये. इस तरह एक साल में नई पॉलिसी के तहत सरकार की आय डेढ़ गुणा से ज्यादा बढ़ जाती. भ्रष्टाचार खत्म हो जाता लेकिन नई पॉलिसी आने से इन लोगों ने जो भ्रष्टाचार फैला रखा था वो रुक गया."
मनीष सिसोदिया ने बीजेपी सरकार पर सरकारी जांच एजेंसियों के गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा, "एक एक करके इन लोगों ने प्राइवेट दुकान वाले जो आए थे उन्हें ईडी, सीबीआई की धमकी दी. बहुत सारे शराब दुकान वाले तो दुकान छोड़कर चले गए और आज दिल्ली में नई पॉलिसी में जो 850 शराब की दुकानें हो सकती थीं वो सिर्फ 468 बची हैं, बाकी सब छोड़कर चले गए हैं."
दिल्ली में शराब दुकानों की कमी
मनीष सिसोदिया ने शराब की दुकानों को लेकर दिल्ली की तुलना बीजेपी शासित राज्यों से की.
उन्होंने कहा, "गुरुग्राम में जहां बीजेपी की सरकार है वहां 4166 लोगों पर शराब की एक दुकान है, नोएडा में 1390 लोगों पर एक शराब की दुकान है. बेंगलुरु में 12 हजार 179 लोगों पर एक दुकान है. बीजेपी का गोवा है, वहां 761 लोगों पर एक दुकान है."
"नई पॉलिसी के हिसाब से दिल्ली में ज्यादा से ज्यादा दुकानें भी खुल जातीं तो यहां 22 हजार 707 लोगों पर एक दुकान होती हैं. आज जब 468 दुकानें हैं तो 41 हजार 192 लोगों पर एक दुकान है."