इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने भारत
के अंग्रेज़ी दैनिक अख़बार 'द हिन्दू' को दिए
इंटरव्यू में भारत से जुड़ी कई बातों पर अपनी राय दी है. इंडोनेशिया में दुनिया की
सबसे ज़्यादा मुस्लिम आबादी रहती है.
इंडोनिशियाई राष्ट्रपति से द हिन्दू की
डिप्लोमैटिक अफ़ेयर्स एडिटर सुहासिनी हैदर ने पूछा कि इंडोनेशिया और भारत दोनों ने
यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं की और न ही रूस के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों की
पाबंदी में दोनों देश शामिल हुए.
इसी साल नवंबर में इंडोनेशिया में जी-20 देशों की
बैठक होने वाली है. क्या इस बैठक में भी रूस-यूक्रेन संघर्ष पर गुटनिरपेक्ष दिखेगा?
इस सवाल के जवाब में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने
कहा, ''पहली बात तो यह कि हमें साथ बैठने की ज़रूरत है. चाहे कोई देश किसी
भी खेमे का हो. सबसे ज़रूरी बात है कि हम अपना अहम कम करें. हमें मानवता को
प्रोत्साहित करने की ज़रूरत है. खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता में
रखने की ज़रूरत है.''
द हिन्दू ने पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के
बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले दो से ज़्यादा सालों से जारी तनाव का हवाला
देते हुए पूछा कि इंडोनेशिया में जी-20 की बैठक में क्या चीनी राष्ट्रपति शी
जिनपिंग और भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी मिलेंगे?
इस सवाल के जवाब में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने
कहा, ''अगर भारत और चीन जैसी दो शक्तियों में बात होती है तो अच्छी बात है.
इंडोनेशिया इस मामले में मध्यस्थता के लिए तैयार है. हम हमेशा उस काम के लिए तैयार
होते हैं, जिनसे लोगों के जीवन-यापन को सुधारने में मदद मिलती हो.''
द हिन्दू ने पूछा कि पिछले महीने जर्मनी में
आपकी मुलाक़ात पीएम मोदी से हुई थी. उन्होंने आपको ईद की बधाई भी दी थी. जी-20 की
बैठक से पहले आप दोनों के बीच कितना समन्वय है?
इस सवाल के जवाब में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको
विडोडो ने कहा, ''हमने अर्थव्यवस्था, निवेश और दोनों
देशों के द्विपक्षीय संबंधों जैसे कई मुद्दों पर बात की थी. हमने इंडोनेशिया से
भारत में जाने वाले खाद्य तेल को लेकर भी बात की थी. मैंने पीएम मोदी से कहा था कि मई महीने में पाम तेल के आयात से पाबंदी हटा दी
थी और अब इसके आयात में कोई दिक़्क़त नहीं होगी.''
पिछले महीने आपकी सरकार ने भारत सरकार के सामने
पैग़ंबर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर विरोध दर्ज कराया था. इसके अलावा इसे लेकर
इंडोनेशिया में भी विरोध हुआ था. क्या आपने इस पर भी पीएम मोदी से बात की थी?
इस सवाल के जवाब में जोको विडोडो ने कहा,
''इंडोनेशिया
में विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा था. हम इस पर कभी भी पाबंदी
नहीं लगा सकते. नियम के तहत विरोध-प्रदर्शन में कोई दिक़्क़त नहीं है. मैं भारत के
बारे में नहीं बोलना चाहता.''
द हिन्दू ने पूछा कि दोनों देशों में धार्मिक
उग्रता, बहुसंख्यकवाद का ज़ोर और हिंसा जैसी चीज़ें देखने को मिल रही हैं. आप
उग्र विचारधारा और अतिवाद की बीच एक गणतंत्र में बने रहने की चुनौती को कैसे मैनेज
करते हैं?
इसके जवाब में जोको विडोडो ने कहा, ''मेरा
मानना है कि यहाँ अलग-अलग धर्मों के बीच कोई बुनियादी समस्या नहीं है. मेरी
कैबिनेट और सरकार में अलग-अलग मज़हब के लोग हैं. ईसाई, हिन्दू और
मुस्लिम सभी हमारी कैबिनेट में हैं. हाँ कुछ समस्याएं हैं लेकिन हम साथ बैठकर इसे
सुलझाने में सक्षम हैं.''
आप और प्रधानमंत्री मोदी दोनों 2014 में सत्ता
में आए. आप दोनों अपने इलाक़े के नेता रहे हैं. आप सोलो में मेयर थे और मोदी
गुजरात के मुख्यमंत्री. आप दोनों की नेतृत्व शैली में क्या कोई और समानता है?
इस सवाल को जवाब में विडोडो ने कहा, ''मेरा
मानना है कि अपने अतीत के ट्रैक रिकॉर्ड्स के कारण हममें कुछ समानताएं हैं.''
प्रधानमंत्री पद पर 2024 में 10 साल की सीमा
पूरी हो जाएगी. आपने कहा है कि अब और टर्म नहीं चाहते हैं, इसलिए संविधान
में कोई संशोधन का इरादा नहीं है. प्रधानमंत्री से छुट्टी के बाद आप क्या करेंगे?
इसके जवाब में विडोडो ने कहा, ''मैं
वापस अपना शहर सोलो जाऊंगा और पर्यावरण की रक्षा को लेकर कुछ सोचूंगा.''