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एक ओर जहां महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है वहीं दूसरी ओर राज्यापल कार्यालय से बयान जारी कर कहा गया है कि अभी तक यह तय नहीं है रि राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा या नहीं.
शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विधायकों का एक समूह सूरत से गुवाहाटी पहुंचा है.गुवाहाटी हवाई अड्डे पहुंचे एकनाथ शिंदे ने कहा, ''हमने शिवसेना नहीं छोड़ी है, हम नहीं जाएंगे. बालासाहेब ने देश को हिंदुत्व का आइडिया दिया, हम इससे कोई समझौता नहीं करेंगे.''
एकनाथ शिंदे के 40 विधायकों के समर्थन के दावे के बीच संजय राउत ने विधानसभा भंग होने के दिए संकेत
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शिवसेना नेता संजय
राउत ने महाराष्ट्र में जारी घमासान पर कहा है कि ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा,
सत्ता ही तो जाएगी.
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “एकनाथ शिंदे हमारे बहुत पुराने पार्टी
मेंबर हैं, हमारे दोस्त हैं. हमने दशकों तक साथ काम किया है. एक-दूसरे को छोड़ना
ना तो उनके लिए आसान है और ना ही हमारे लिए. मैंने आज सुबह उनसे बात की
है और पार्टी प्रमुख को इसके बारे में सूचित किया है.”
इस बीच संजय राउत ने एक और ट्वीट किया है और लिखा है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम विधानसभा भंग होने की ओर.
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राउत ने दावा किय कि एकनाथ शिंदे के साथ जो भी विधायक हैं उनके साथ बातचीत चल रही है. हर कोई शिवसेना में ही रहेगा.
राउत ने कहा, “हमारी पार्टी एक योद्धा पार्टी है, हम लगातार संघर्ष करेंगे. ज़्यादा से ज़्यादा यही होगा कि हम सत्ता खो देंगे लेकिन हम लड़ना जारी रखेंगे.”
एकनाथ शिंदे का दावा, उनके साथ हैं 40 विधायक
शिवसेना के बाग़ी नेता एकनाथ शिंदे अपने साथ शिवसेना के अन्य विधायकों के साथ
गुवाहाटी के एक होटल पहुंच चुके हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स में जहां शिंदे के साथ शिवसेना के 30 विधायकों के होने की
संभावना जताई जा रही है, वहीं एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि उनके साथ 40 विधायक हैं.
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क्या सरकार बचा पाएंगे उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र में शहरी विकास मंत्री और शिवसेना के बड़े नेता एकनाथ शिंदे के बागी सुर अपनाने के बाद महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार मुश्किल में है.
महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं. शिवसेना विधायक रमेश लटके के निधन के बाद एक सीट ख़ाली है जिसका मतलब है कि अभी महाराष्ट्र विधानसभा में 287 विधायक हैं.
किसी पार्टी या गठबंधन सरकार को सत्ता में रहने के लिए 144 विधायकों की जरूरत है. इस वक्त महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन की सरकार है जिसमें शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस शामिल है.
गठबंधन सरकार ने 30 नवंबर 2019 को विधानसभा में विश्वास मत जीतकर सरकार बनाई थी. तब 169 विधायकों ने गठबंधन के पक्ष में मतदान किया था.
शिवसेना के पास वर्तमान में 55 विधायक, एनसीपी के 53 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं.
बीजेपी ने 2019 विधानसभा चुनाव में 105 सीटें जीती थीं लेकिन एक पंढरपुर विधानसभा के उपचुनाव में ये सीट बीजेपी ने एनसीपी से जीत ली थी जिसके बाद बीजेपी के 106 विधायक हैं.
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सदन में 13 निर्दलीय हैं. इनमें से तीन विधायक शिवसेना कोटे से गठबंधन सरकार में मंत्री हैं. जिसमें राजेंद्र पाटिल येड्रावकर, शंकरराव गडाख और बच्चू कडू शामिल हैं.
13 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 6 बीजेपी के समर्थक हैं, जबकि पांच ने शिवसेना को और एक एक कांग्रेस और एनसीपी को अपना समर्थन दिया हुआ है.
इसके अलावा जनसुराज्य शक्ति पार्टी के विनय कोरे और राष्ट्रीय समाज पक्ष के रत्नाकर गुट्टे भी भाजपा के समर्थक हैं. वहीं स्वाभिमानी पक्ष के देवेंद्र भुयार और पीडब्ल्यू के श्यामसुंदर शिंदे एनसीपी की तरफ हैं.
एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी के दो-दो विधायक हैं जो गठबंधन सरकार की तरफ हैं. जबकि बहुजन विकास अघाड़ी के तीन विधायक बीजेपी की तरफ हैं.
वहीं माकपा के पास एक, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पास एक और प्रहार जनशक्ति पक्ष पार्टी के पास एक विधायक है.
अग्निपथ योजना के विरोध में ‘महागठबंधन’ ने निकाला राजभवन तक मार्च
....में
Author, विष्णु नारायण
पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
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केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ योजना’ को लेकर जहाँ बिहार में सत्ता पक्ष के अहम दलों के बीच तल्खियां बढ़ गई हैं वहीं विपक्ष (महागठबंधन) में शामिल राजद और वामपंथी दलों के तमाम विधायकों ने आज बिहार विधान सभा से राजभवन तक मार्च किया.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सदन में भाकपा (माले) के नेता व विधायक महबूब आलम, राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा, हसनपुर विधायक तेज प्रताप यादव के साथ कुल 11 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल फागू चौहान से मुलाकात की.
हालांकि कांग्रेस इस मार्च में साथ नहीं दिखी.
इससे पहले बिहार के वामपंथी छात्र व युवा संगठनों के आह्वान पर बीते 18 मार्च को बुलाए गए ‘बिहार बंद’ को भी बिहार के तमाम विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया था.
नेता प्रतिपक्ष ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘कई लोगों की सिर्फ़ ज्वाइनिंग रह गई थी, उन्हें फिर से पूरी प्रक्रिया से गुज़रना होगा. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि चार साल बाद नौजवान क्या करेंगे? जैसा कि भाजपा के नेता कह रहे हैं कि वे उन्हें अपने दफ़्तर में चौकीदार बनाकर नौकरी पर रखेंगे, क्या यह बात सही है? हम किसी भी हालत में नौजवानों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे.’
ब्रेकिंग न्यूज़, अफ़ग़ानिस्तान में आए शक्तिशाली भूकंप में 920 की मौत, सैकड़ों घायल
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अफ़ग़ानिस्तान में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 920 लोगों की मौत हो गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए हैं.
सोशल मीडिया पर आ रही तस्वीरों से घायलों की संख्या का अंदाज़ा हो रहा है. सबसे ज़्यादा नुक़सान पक्तिका प्रांत में हुआ है.
इस प्रांत में बड़ी संख्या में घर मलबे में तब्दील हो गए हैं. यहाँ से आ रही तस्वीरों में घायलों को स्ट्रेचर में ले जाते देखा जा सकता है. एक स्थानीय अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका है.
उन्होंने कहा कि घायलों की संख्या 150 से अधिक है. जानकारी के मुताबिक़ भूकंप का केंद्र दक्षिणी पूर्वी शहर ख़ोस्त से 44 किलोमीटर दूर स्थित था. भूकंप के झटके अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत तक महसूस किए गए. जानकारी के मुताबिक़ भूकंप के झटके अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक महसूस किए गए.
द्रौपदी मुर्मू को केंद्र ने Z+ सुरक्षा दी
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केंद्र सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति पद की
उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को ज़ेड प्लस सुरक्षा दी गई है.
मंगलवार
को एनडीए ने द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा की थी.
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आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा करते हुए मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया कि पहली बार किसी आदिवासी महिला उम्मीदवार को प्राथमिकता दी गई है. अगर द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतती हैं तो वे देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी.
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मुर्मू को उम्मीदवार बनाए जाने पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ख़ुशी ज़ाहिर की है. उन्होंने ट्वीट किया है- “देश के सर्वोच्च पद के लिए एनडीए की उम्मीदवार के तौर पर द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा किये जाने पर उन्हें बहुत-बहुत बधाई. मुझे बहुत खुशी हुई थी जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझसे उनके नाम को लेकर चर्चा की थी. यह ओडिशा के लिए वाकई गर्व का पल है.”
कैसी होती है ज़ेड प्लस सुरक्षा?
भारत में नेताओं या बड़ी शख्सियतों को आम तौर पर ज़ेड प्लस, ज़ेड, वाई और एक्स श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाती है.
इनमें केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, मशहूर नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं.
भारत सरकार की तरफ़ से मुहैया की जाने वाली सभी तरह की सुरक्षा में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी), नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (एनएसजी), इंडियन-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स(सीआरपीएफ) एजेंसियां शामिल होती हैं.
ज़ेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देश की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. यह वीवीआईपी श्रेणी की सुरक्षा मानी जाती है. इस श्रेणी की सुरक्षा में 36 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. इसमें एनएसजी और एसपीजी के कमांडो शामिल रहते हैं.
इस सुरक्षा में पहले घेरे की ज़िम्मेदारी एनएसजी की होती है जबकि दूसरी परत एसपीजी कमांडो की होती है. इसके अलावा आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी ज़ेड प्लस सुरक्षा श्रेणी में शामिल रहते हैं.
ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा में सुरक्षाकर्मियों की संख्या 22 होती है. इस श्रेणी में आईटीबीपी (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल) के जवान और अधिकारी सुरक्षा में लगाए जाते हैं.
इस श्रेणी की सुरक्षा में एस्कॉर्ट और पायलट वाहन भी दिए जाते हैं.
महाराष्ट्र में बीजेपी का आख़िर प्लान क्या है?
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शिव सेना के अपने ही घर में संग्राम छिड़ा हुआ है और ऐसे में शिव सेना हर उस विकल्प पर विचार कर रही है, जिससे महाराष्ट्र में सरकार बचाई जा सके.
एक ओर जहाँ बीजेपी का मानना है कि शिव सेना में फूट उसके हित में काम कर सकती है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र रखने वाले बीजेपी के नेताओं का मानना है कि उन्हें पूरी सावधानी से आगे बढ़ने की ज़रूरत है.
उन्हें इस बात की आशंका है कि एक भी ग़लत क़दम से साल 2019 में सरकार बनाने की नकाम कोशिश का दोहराव हो सकता है.
बीजेपी के एक नेता ने मीडिया को बताया कि हम सिर्फ़ एक प्लान पर काम नहीं कर रहे हैं. हम प्लान ए और प्लान बी दोनों लेकर चल रहे हैं.
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उन्होंने बताया, “हमारे पहले प्लान के मुताबिक़, अगर शिव सेना सीधे तौर पर विभाजित हो जाती है, तो बाजेपी के पास एक अच्छा मौक़ा होगा कि वो बाग़ी नेताओं के साथ गठबंधन करके सरकार बना ले. यहाँ मामला ये है कि शिव सेना के बाग़ी नेता एकनाथ शिंदे को अपने पास दो-तिहाई बहुमत बनाए रखना होगा. वैकल्पिक तौर पर हम शिव सेना में पड़ी फूट का फ़ायदा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में चुनावी लाभ के लिए लेने की योजना बना रहे हैं.”
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि राज्य विधानमंडल का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होगा इसलिए बीजेपी महाविकास अघाड़ी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी.
मीडिया रिपोर्ट्स की ख़बर के अनुसार, उम्मीद जताई जा रही है कि शिंदे अपने साथ शिवसेना के 30-35 विधायकों को बनाए रखने में कामयाब रहेंगे.
एक सूत्र ने बताया, "अगर शिंदे ऐसा करने में कामयाब रहते हैं तो इससे बीजेपी के साथ जाने की उम्मीद भी प्रबल बनी रहेगी. हालांकि अंतिम फ़ैसला क्या होगा यह अभी तय होना बाक़ी है."
106 विधायकों वाली बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है. कुछ छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार मिलाकर उसके पास 27 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन है. इस तरह बीजेपी के 133 विधायक और शिव सेना के 37 बाग़ी विधायक मिलकर इस संख्या को 170 कर देंगे. सरकार बनाने के लिए 145 विधायक ही चाहिए.
शिव सेना के बाग़ी एकनाथ शिंदे विधायकों के साथ गुवाहाटी पहुंचे
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महाराष्ट्र का
राजनीतिक संकट बढ़ता ही जा रहा है. ख़बर है कि शिव सेना के
क़रीब 30 विधायक, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में सूरत में अपना होटल छोड़कर तड़के सुबह असम
के गुवाहाटी के लिए रवाना हुए.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के के मुताबिक़, बाग़ी नेताओं का ये दल गुवाहाटी पहुुँच चुका है.
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महाराष्ट्र के बाग़ी नेता एकनाथ शिंदे और शिवसेना के लगभग 30 बाग़ी विधायक गुजरात के सूरत शहर में डुमास रोड पर स्थित एक होटल में रुके हुए थे. ये लोग सोमवार रात से ही सूरत के इस होटल में ठहरे हुए थे.
हालांकि एकनाथ शिंदे का दावा है कि उनके साथ 40 विधायक हैं.
अभी इन विधायकों के गुवाहाटी जाने का कारण बहुत अधिक स्पष्ट नहीं है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बुधवार तड़के सुबह ही ये विधायक होटल में एक लग्ज़री बस में बैठकर हवाई अड्डे ले जाए गए. पहले गुजरात और अब उन्हें आनन-फानन में एक और बीजेपी शासित राज्य में शिफ़्ट किया गया है.
हालांकि मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के नेता मिलिंद नार्वेकर और रवींद्र फाटक को इन बाग़ी नेताओं से चर्चा करने के लिए भेजा था. लेकिन बातचीत से संभवत: कोई हल नहीं निकल सका है.
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बीजेपी के एक नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया है कि टकराव की स्थिति से बचने के लिए इन नेताओं को गुवाहाटी ले जाया गया है.
इन बाग़ी नेताओं का नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं.
शिंदे के क़रीबी सूत्रों का दावा है कि उनके साथ क़रीब 30 बाग़ी विधायक हैं.
महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने सोमवार देर रात न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को बताया, "सुरक्षा कारणों से विधायकों को गुवाहाटी स्थानांतरित किया जा रहा है. सूरत, मुंबई से काफी नज़दीक है, इसलिए शिवसेना कार्यकर्ताओं की ओर से कुछ टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है."
हज से पहले दुनिया भर से एक लाख 72 हज़ार से अधिक लोग मदीना पहुँचे
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सऊदी की सरकारी समाचार एजेंसी
एसपीए ने मंगलवार को बताया कि अभी तक दुनिया भर से मदीना आने के लिए एक लाख 72
हज़ार 562 तीर्थ यात्रियों का पंजीकरण किया गया है.
हज और उमराह मंत्रालय
ने मदीना में आने वाले और लौटने वाले लोगों का आंकड़ा जारी किया है. इन आंकड़ों के मुताबिक़, क़रीब 1,56, 828 लोग प्रिंस मोहम्मद बिन अब्दुलअज़ीज़
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मदीना पहुंचे.
लैंड-इमिग्रेशन सेंटर पर 13,097 लोगों
का रजिस्ट्रेशन हुआ. ये वो लोग हैं जो लैंड बॉर्डर के ज़रिए सऊदी अरब पहुँचे हैं.
ये आंकड़े मदीना में रह रहे तीर्थ-यात्रियों की
राष्ट्रीयता भी बताता है. इसमें इंडोनेशिया से मदीना पहुंचे तीर्थ-यात्रियों की
संख्या सबसे अधिक (24,478) है. इसके अलावा भारत, बांग्लादेश, इराक़ और ईरान के
हज-यात्री भी शामिल हैं.
कोरोना महामारी के बाद
से लगे प्रतिबंधों के बाद इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब ने तीर्थ-यात्रियों के
पहले जत्थे का स्वागत किया है. हज यात्रियों के लिए कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर
जारी ग्लोबल हेल्थ गाइडलाइन्स के दिशा-निर्देशों का सख़्ती से पालन किया जा रहा है.
देश के हज मंत्रालय
के मोहम्मद अल-बिजावी ने एक चैनल से बातचीत में कहा कि आज हमने इस साल के
तीर्थ-यात्रियों के पहले जत्थे, जो कि इंडोनेशिया से है, उसका स्वागत किया है. दूसरे देशों से जैसे भारत और मलेशिया से विमान आना जारी रहेंगे.
साल 2019 में सबसे
बड़ी संख्या में क़रीब 25 लाख लोगों ने दुनिया की इस सबसे बड़ी तीर्थ यात्रा में हिस्सा
लिया था. कोरोना महामारी के कारण 2020 में कई तरह के प्रतिबंध लगाते हुए
तीर्थ-यात्रियों की संख्या को सीमित कर दिया गया था.
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