जेडीयू के राष्ट्रीय सचिव राजीव रंजन प्रसाद ने न्यूज़
एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि जनादेश से चुनी हुई सरकारों को
पांच साल काम करने देना चाहिए.
उन्होंने कहा, "शिवसेना में यह पहली बार नहीं हुआ है. लेकिन यह प्रकरण थोड़ा ज्यादा गंभीर है. जनादेश से चुनी हुई सरकारों को 5 साल काम करने देना चाहिए."
महाराष्ट्र में मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर उन्होंने कहा कि महा अघाड़ी के नेताओं की बैठकें हो रही हैं लेकिन इस विद्रोह को नियंत्रित करना उनके लिए एक चुनौती होगी.
उन्होंने कहा कि फ़िलहाल उनके लिए हालात बहुत अच्छे नहीं दिख रहे हैं.
बीजेपी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में तख़्तापलट की तैयारी में बीजेपी भी शामिल है, नैतिक पक्ष ये है कि जनादेश से चुनी सरकारों को पाँच साल काम करने देना चाहिए. उनके अंदरुनी द्वंद्व को और मुखर बनाकर राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना, ये एक ऐसी परिपाटी है जो पहले कांग्रेस ने अपनाई और अब इसकी पुनरावृत्ति नई व्यवस्था में भी की जा रही है."
अग्निपथ योजना पर भी जेडीयू बनाम बीजेपी
अग्निपथ योजना को लेकर बिहार में सबसे उग्र प्रदर्शन देखने को मिले.
अग्निपथ योजना को लेकर सत्ताधारी पार्टियों बीजेपी और जेडीयू के बीच भी मतभेद देखने को मिल रहे हैं.
जेडीयू के कई नेता इस योजना पर पुनर्विचार की बात कह चुके हैं.
जदयू नेता और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष अंजुम आरा ने बीबीसी से कहा था, "हम लोगों का यही कहना है कि सही में इस योजना पर पुनर्विचार होना चाहिए. क्योंकि जिन लोगों के लिए यह योजना लायी गयी है, वही इसके पक्ष में नहीं हैं."
जदयू जहां अग्निपथ योजना पर गठबंधन में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार से अलग रुख़ अपना रही है वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता और मंत्री इस योजना का खुलकर समर्थन कर रहे हैं.
राजीव रंजन प्रसाद ने अपने ताज़ा बयान में अग्निपथ को लेकर हुई हिंसा पर कहा, “पूरे देश में जो तांडव मचा है, ये नहीं होता अगर एनडीए सरकार ने राजनीतिक दलों एवं युवाओं को विश्वास में लिया होता. अगर इस योजना को किस्तों में लाने के बजाए एकमुश्त लाया गया होता तो शायद हालात ऐसे नहीं होते.”