ब्रेकिंग न्यूज़, FATF की ग्रे लिस्ट से नहीं निकल सका पाकिस्तान, आगे क्या होगा

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फ़ाइनेन्शियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने शुक्रवार को कहा है कि वो पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से अभी बाहर नहीं करेगा लेकिन आने वाले वक्त में एफ़एटीएफ़ की टीम के पाकिस्तान दौरे के बाद इस पर विचार किया जाएगा.
दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीति बनाने वाली इस संस्था ने कहा है कि पाकिस्तान ने मनी लॉड्रिंग ओर टेरर फंडिंग के क्षेत्रों में सुधार करने से जुड़े दो एक्शन प्लान पर अच्छा काम किया है.
लेकिन सुधारों का काम वाकई में हो रहा है और इस दिशा में भविष्य में काम करने के लिए मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति भी है, इसकी पुष्टि करने के लिए टीम वहां का दौरा करेगी जिसके बाद ही फ़ैसला लिया जाएगा.
पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी ख़ार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर कहा है कि एफ़एटीएफ़ की प्लेनरी बैठक में एक्शन प्लान के प्वाइंट पर पाकिस्तान के प्रदर्शन को संतोषजनक पाया गया है.
उन्होंने कहा है कि इसके साथ एफ़एटीएफ़ की ग्रे लिस्ट से पाकिस्तान के बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, इसके तहत एफ़एटीएफ़ की एक टीम पाकिस्तान का दौरा करेगी.
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस साल अक्तूबर को होने वाली बैठक से पहले टीम का काम पूरा होगा और पाकिस्तान के इस लिस्ट से निकलने की प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी."
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार एफ़एटीएफ़ के अध्यक्ष मार्कस प्लेयर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं किया जा रहा है. अगर ऑनसाइट दौरे में सब कुछ सही रहा तो उसे इस लिस्ट से बाहर किया जाएगा."
एफ़एटीएफ़ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसकी स्थापना G7 देशों की पहल पर 1989 में की गई थी. ये संस्था दुनिया भर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीतियां बनाती है.
पाकिस्तान इन संस्थाओं के निशाने पर तब आया जब 2018 में उसे आतंकवादियों को फ़ंड करने और मनी लॉन्ड्रिंग के ख़तरे को देखते हुए 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया गया था.
इस संस्था की ग्रे लिस्ट में होने के कारण पाकिस्तान को आईएमएफ़, वर्ल्ड बैंक और एशिया डिवेलपमेंट बैंक से मदद लेने में मुश्किल होती है.
आर्थिक संकट झेल रहा पाकिस्तान लंबे समय से आईएमएफ़ से कर्ज़ लेने की कोशिश कर रहा है और जानकार मानते हैं कि अगर वो इस ग्रे लस्ट से बाहर जाता है तो ये आईएमएफ़ के लिए इशारा होगा कि वो पाकिस्तान को ऋण देने जैसे कदमों के साथ आगे बढ़ सकता है.






















