आम आदमी पार्टी ने कहा है कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के घर से ईडी को नकद नहीं मिला है और इसकी पुष्टि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के ही कागज़ात कर रहे हैं.
पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज़ पोस्ट किया है जिसमें लिखा है "सत्येंद्र जैन के राज निवास स्थित घर पर छह जून को सवेरे 07.10 पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू की गई थी."
"ये कार्रवाई दोपहर 01.55 बजे ख़त्म हुई. इस दौरान वहां से 2,79,200 रूपये का कैश मिला लेकिन उसे ज़ब्त नहीं किया गया."
इस ट्वीट के बाद शाम को पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जहां प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि "ईडी के मेमो में साफ़-साफ़ लिखा है, उन्हें वहां से केवल 2.79 लाख का कैश मिला था और चूंकि वो अकाउंटेड था इसलिए उसे ज़ब्त नहीं किया गया."
उनका आरोप था कि ईडी के छापे में कुछ नहीं मिला इसलिए बीजेपी ने झूठ फ़ैलाया कि उनके घर से करोड़ों रुपए और सोने के सिक्के मिले हैं.
वहीं दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक ट्वीट कर लिखा है, "सत्येंद्र जैन के घर पर सिर्फ़ 2 लाख 79 हज़ार रूपए मिले हैं. घंटो की तलाशी पर एक सबूत नहीं मिला. अब किसी को भी सत्येंद्र जैन का क़रीबी बताकर बीजेपी उनपर झूठे आरोप लगा रही है."
इससे पहले ने ईडी ने सत्येंद्र जैन और उनसे जुड़े लोगों के यहां रेड को लेकर ट्वीट कर जानकारी दी थी कि "कई ठोस दस्तावेज़, डिज़िटल रिकॉर्ड, 2.85 करोड़ कैश, सोने के 133 सिक्के, जिनका वजन 1.80 किलो है; को ज़ब्त किया गया है. इनके स्रोत की सही जानकारी उपलब्ध नहीं हैं."
प्रवर्तन निदेशालय ने 30 मई को सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया था. उन्हें हवाला लेन-देन से जुड़े एक मामले में गिरफ़्तार किया गया था.
ईडी ने दिल्ली में सत्येंद्र जैन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के बाद गिरफ़्तार किया था.
ईडी ने पिछले महीने कहा था कि जैन परिवार द्वारा नियंत्रित और उनके स्वामित्व वाली अकिंचन डेवलेपर्स प्राइवेट लिमिटेड और इंडो मेटल इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां ज़ब्त की गई हैं.
जैन को 2017 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग से जु़ड़े एक केस में गिरफ्तार किया गया था. ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून के तहत उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.उनके ख़िलाफ़ चार कंपनियों के ज़रिये पैसे के अवैध लेन-देने का आरोप है.
जैन के खिलाफ़ पहले भी भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए हैं. सीबीआई ने 2018 में पीडब्ल्यूडी की एक क्रिएटिव टीम को टेंडर देने में कथित अनियमितता के मामले में भी उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था. इस मामले में सीबीआई ने हाल ही में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की है.