भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दूसरे हफ़्ते बढ़कर 600 अरब डॉलर हुआ
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे हफ़्ते में बढ़ोतरी हुई है. भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक 27 मई को ख़त्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 3.854 अरब डॉलर बढ़कर 601.363 अरब डॉलर हो गया है.
लाइव कवरेज
कीर्ति दुबे and कमलेश मठेनी
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दूसरे हफ़्ते बढ़कर 600 अरब डॉलर हुआ
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भारत के विदेशी
मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे हफ़्ते में बढ़ोतरी हुई है. भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक 27 मई को ख़त्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा
भंडार 3.854 अरब डॉलर बढ़कर 601.363 अरब डॉलर हो गया
है.
इससे पिछले सप्ताह में भंडार 4.230 बिलियन अमरीकी डॉलर बढ़कर 597.509 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया।
भारतीय रिज़र्व
बैंक के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफ़सीए) और गोल्ड रिज़र्व में हुई
बढ़ोतरी के कारण पिछले हफ़्ते विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ा है.
27 मई को ख़त्म हुए
सप्ताह में एफ़सीए 3.61 अरब डॉलर बढ़कर 536.988 अरब डॉलर हो गया
है. वहीं, गोल्ड रिज़र्व 40.917
अरब डॉलर बढ़कर 94
अरब डॉलर हो गया है.
क्या ऑक्सफ़ोर्ड और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने वाक़ई दिया था विवेक अग्निहोत्री को न्यौता?
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'द कश्मीर फ़ाइल" फ़िल्म के निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री का एक वीडियो मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ-साथ न्यूज़ चैनलों पर भी प्राइम टाइम चर्चा का विषय बना हुआ है.
31 मई की शाम क़रीब पांच बजे विवेक अग्निहोत्री अपने सोशल मीडिया ट्विटर और फ़ेसबुक पर दो मिनट 14 सेकंड का एक वीडियो पोस्ट करते हैं जिसमें वे ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में होने वाले अपने कार्यक्रम के रद्द होने और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हुए अपने एक सेशन में वीडियो रिकॉर्डिंग ना होने पर अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर करते हैं.
वीडियो में विवेक अग्निहोत्री कहते हैं, "जैसा की आप सब जानते है कि मैं इस समय यूरोप में 'ह्यूमैनिटी टूर' पर हूँ. मुझे कई प्रतिष्ठित संस्थानों, जैसे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश संसद ने बोलने के लिए आमंत्रित किया है. पर जब मैं कैंब्रिज यूनिवर्सिटी पहुँचा तो आख़िरी समय पर मुझे बताया गया कि आप कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं कर सकते."
अग्निहोत्री कहते हैं कि "ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कुछ पाकिस्तानी और मुस्लिम छात्रों ने मेरे कार्यक्रम के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया क्योंकि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक हूँ."
हैदराबाद में नाबालिग के साथ कथित गैंग रेप का मामला, बीजेपी-टीआरएस के बीच बयानबाज़ी शुरू
तेलंगाना की
राजधानी हैदराबाद में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन अपराध का मामला सामने आया
है. मामले के सामने आते ही हंगामा हो गया और राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई.
ये घटना के जुबली
हिल्स पर इंसोमनिया पब के पास 28 मई की है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक लड़की के साथ यौन अपराध होने
की पुष्टि नहीं की है लेकिन, बीजेपी का आरोप
है कि टीआरएस और एआईएमआईएम के समर्थकों के बच्चे इस अपराध में शामिल है इसलिए
मामले को गुमराह किया जा रहा है.
पीड़िता के पिता
ने पुलिस के पास घटना की शिकायत दर्ज कराई है. पिता की शिकायत के मुताबिक उनकी
बेटी 28 मई की दोपहर एमनेसिया और
इंसोमनिया पब में गई थी. लड़की के दोस्त सूरज और हैदी ने उसे पार्टी के लिए बुलाया
था. उन्होंने लड़की को टीएस 09 एफ़एल 6460 नंबर वाली एक लाल बेंज़ कार में बैठाया और वो
उसे घर भी छोड़ने वाले थे. कुछ और लोग भी इनोवा में उनसे मिले.
शिकायत के अनुसार जब लड़की घर आई तो उसके गले पर लगी चोटों के बारे में पूछा. तब लड़की ने बताया कि कुछ लोगों ने उसके साथ रेप किया है. लड़की तब से सदमे में है और ये नहीं बता पा रही है कि असल में क्या हुआ था.
इस मामले में आईपीसी की धारा 354, 323 और पोक्सो एक्ट की धारा 9 और 10 के तहत मामला दर्ज किया गया है. शिकायत में जिस बेंज़ कार का ज़िक्र किया गया है वो पुलिस की कस्टडी में है लेकिन इनोवा नहीं मिली है.
लड़की ने पुलिस को बताया, ''मैं शाम 5:30 बजे पब गई थी. वापस आते हुए मैं उन लड़कों साथ लौटी क्योंकि उन्होंने कहा था कि वो मुझे घर छोड़ देंगे. तब तक अंधेरा हो रहा था और वो मुझे किसी अंधेरी जगह ले गए.''
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बीजेपी के आरोप
इस मामले पर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. बीजेपी का आरोप है कि इस मामले के सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेताओं से जुड़े होने के कारण मामले को हल्का करने और अभियुक्तों को बचाने की कोशिश की जा रही है.
बीजेपी विधायक रघुनंदन राव ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पार्टी नेता जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन के सामने धरना देंगे.
बीजेपी तेलंगाना अध्यक्ष बंडी संजय एक प्रेस रिलीज़ ज़ारी कर आरोप लगाए, ''एआईएमआईएम और टीआरएस के नेता इसमें शामिल हैं. अपराधियों को तुरंत पकड़ा जाना चाहिए और कड़ी सज़ा होनी चाहिए. अभियुक्तों को पांच दिनों से पकड़ा नहीं गया. तुम इंसान नहीं राक्षस हो. क्या अभियुक्तों के नाम एफ़आईआर में दर्ज किए गए हैं? आपके पास सीसीटीवी कैमरा क्यों हैं? टीआरएस और एआईएमआईएम नेता राज्य में कुछ भी कर सकते हैं.''
राज्य सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री केसीआर के बेटे केटी रामा राव ने ट्वीट करके इस मामले पर दुख और गुस्सा ज़ाहिर किया है.
उन्होंने कहा, ''एक नाबालिग के साथ रेप की घटना से सदमे में और गुस्से में हूं. राज्य के गृह मंत्री, तेलंगाना डीजीपी और कमिश्नर हैदराबाद सिटी से तुरंत कार्रवाई करने और कड़े कदम उठाने का अनुरोध करता हूं. कृपया स्टेटस या पहुंच के बावजूद इसमें शामिल किसी को भी न बख्शें.''
इस मामले में ये भी कहा जा रहा है कि दो लोगों को गिरफ़्तार किया है लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्ट नहीं की है.
कर्नाटक में हिजाब विवाद फिर से गरमाया, छह लड़कियां कॉलेज से निलंबित
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कर्नाटक में हिजाब विवाद एक बार फिर से तूल पकड़ता हुआ दिख रहा है. इस बार दक्षिण कन्नड़ ज़िले के एक सरकारी कॉलेज में छह लड़कियों को हिजाब के कारण कॉलेज से निलंबित कर दिया गया है.
एक दूसरे कॉलेज में कुछ लड़कियों ने क्लास में दाखिल होते वक़्त हिजाब हटाने से मना किया तो उन्हें वापस घर भेज दिया गया.
दक्षिण कन्नड़ ज़िले के सरकारी कॉलेज में निलंबित की गई छह लड़कियों समेत मुस्लिम समुदाय की 40 लड़कियां ने क्लासरूम में कथित रूप से हिजाब पहना था.
जबकि कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन सब को ऐसा नहीं करने की 'पर्याप्त रूप से चेतावनी' दी थी. इस कॉलेज के कैंपस में तो हिजाब पहनने की अनुमति है लेकिन क्लासरूम, लैबोरेटरी और लाइब्रेरी में ये मना है.
कॉलेज की डेवलपमेंट कमेटी के चेयरमैन और पुत्तुर विधानसभा सीट से एमएलए संजीत मतनडूर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हिजाब के मुद्दे पर कर्नाटक हाई कोर्ट के फ़ैसले के आधार पर राज्य सरकार ने कुछ निर्देश दिए थे. इन आदेशों का उल्लंघन करने पर उन लड़कियों को दो या तीन बार चेतावनी दी गई थी."
पीएम किसान सम्मान निधि के लिए नहीं जाना होगा बैंक, घर पर निकलेगा पैसा
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अब किसान
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का पैसा घर पर ही निकाल सकेंगे. इसमें उनकी मदद डाक विभाग के ज़रिए की जाएगी.
डाक विभाग एक
अभियान की शुरुआत कर रहा है, 'आपका बैंक,
आपके द्वार' जिससे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने
वाले अधिकतम किसानों को फायदा दिया जा सके.
वारणासी क्षेत्र
के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा, ''किसान अपने आधार लिंक किए हुए बैंक अकाउंट से
आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के ज़रिए अपने घर पर ही किसान सम्मान निधि की रकम प्राप्त कर
सकते हैं. एक डाकघर प्रतिनिधि उन किसानों के घर पहुंचेगा जो पैसा निकालना चाहते
हैं और फिगरप्रिंट के ज़रिए काम करने वाली डिवाइस से पैसा निकालकर किसान को
देगा.''
पोस्टमास्टर जनरल
के अनुसार इस अभियान की शुरुआत 4 जून से होगी जो
कि 13 जून तक चलेगा.
उन्होंने कहा,
''किसानों को किसान सम्मान
निधि का पैसा निकालने के लिए बैंक की शाखा या एटीएम में जाना पड़ता था जिनकी
गांवों में संख्या बहुत कम है. हम इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक और आधार एनेबल्ड
पेमेंट सिस्टम के ज़रिए इसे आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं.''
पीएम किसान
सम्मान निधि योजना के तहत योग्य किसानों को हर साल 6000 रुपये मिलते हैं जिसे सीधा उनके बैंक अकाउंट
में पहुंचाया जाता है. ये पैसा 2000 रुपये की तीन किश्तों में दिया जाता है.
श्याम रंगीलाः पीएम मोदी की मिमिक्री से आप पार्टी में जाने तक
वीडियो कैप्शन, श्याम रंगीलाः पीएम मोदी की मिमिक्री से आप पार्टी में जाने तक
श्याम रंगीला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करके अपनी ख़ास पहचान बनाई.
उन्होंने कई मुद्दों पर कॉमेडी वाले वीडियो भी बनाए जो काफी वायरल हुए.
अब श्याम रंगीला राजस्थान में आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं.
देखिए श्याम रंगीला के साथ बीबीसी संवाददाता विदित मेहरा की ख़ास बातचीत.
ईपीएफ़ पर सरकार ने घटाई ब्याज़ दर, चार दशकों में सबसे कम
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सरकार ने
कर्मचारी भविष्य निधि फंड के लिए ब्याज़ दर में कटौती की है. वर्ष 2021-22 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि फंड (ईपीएफ़) में
8.1 प्रतिशत ब्याज़ दर को
मंज़ूरी दी है.
वर्ष 2020-21 में ईपीएफ़ पर 8.5 प्रतिशत की दर ये ब्याज़ दिया जा रहा था लेकिन
इस साल के लिए तय हुई ब्याज़ पिछले चार दशकों में सबसे कम है. कर्मचारी भविष्य
निधि फंड के पांच करोड़ ग्राहक हैं.
इस साल मार्च की
शुरुआत में कर्मचारी भविष्य निधि फंड संगठन (ईपीएफ़ओ) ने फ़ैसला किया था कि 2020-21 की 8.5 प्रतिशत ब्याज़ दर को 2021-22 में 8.1 प्रतिशत किया जाएगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य निधि फंड
पर 1977-78 से ये अब तक की
सबसे कम ब्याज़ दर है. उस दौरान ब्याज़ दर आठ प्रतिशत तय की गई थी.
जब 2020-21
में वित्त मंत्रालय ने 8.5
प्रतिशत की ब्याज़ दर को
मंज़ूरी दी थी तब ईपीएफ़ओ के ट्रस्टी के ई रघुनाथन ने कहा था कि श्रम और वित्त
मंत्रालय ने जिस गति से ब्याज़ दर को मंज़ूरी दी है वो तारीफ़ के काबिल है.
उन्होंने कर्मचारियों के लिए फंड की ज़रूरत को ध्यान में रखा है और इससे वो बच्चों
की पढ़ाई जैसी अन्य ज़रूरतों को पूरा कर पाएंगे.
पिछले कुछ सालों में ब्याज़ दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है..साल 2018-19 में ईपीएफ़ पर ब्याज़ दर 8.65 प्रतिशत थी जिसे 2019-20 में घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया गया. 2020-21 में इसे इतने पर ही बरकरार रखा गया लेकिन इस साल फिर इसे घटा दिया गया है.
क्या महंगाई अब हमारे काबू से बाहर हो गई है? Duniya Jahan
वीडियो कैप्शन, क्या महंगाई अब हमारे काबू से बाहर हो गई है? Duniya Jahan
भारत समेत पूरी दुनिया में लोग महंगाई से परेशान हैं. कई विशेषज्ञों की राय है कि इसकी एक बड़ी वजह यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध है.
चीन में कोरोना महामारी की हालिया लहर पर काबू पाने के लिए की गई सख्ती को भी मंहगाई बढ़ने एक अहम कारण बताया जा रहा है.
कई देशों में हालात नियंत्रण के बाहर हैं और ये सवाल किया जा रहा है कि क्या महंगाई बेकाबू हो गई है? इस बार दुनिया जहान में पड़ताल इसी सवाल की.
ओपेक प्लस देश तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए क्यों हुए तैयार
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इमेज कैप्शन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
सऊदी अरब के
नेतृत्व में प्रमुख तेल उत्पादकों का समूह ओपेक प्लस तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए
तैयार हो गया है. कई महीनों के दबाव के बाद ओपेक प्लस आख़िरकार तेल उत्पादन में
लगभग 50 प्रतिशत बढ़ोतरी कर सकता
है.
समाचार एजेंसी
रॉयटर्स के अनुसार ओपेक के सूत्रों का कहना है कि ओपेक ने जुलाई और अगस्त में 6,48,000 बैरल प्रति दिन तक उत्पादन बढ़ाने को लेकर
सहमति जताई है. ये बढ़ोतरी सामान्य तरीक़े से ही ओपेक प्लस देशों के बीच अनुपात
में विभाजित की जाएगी.
जो देश अपना
उत्पादन बढ़ाने में सक्षम नहीं है जैसे अंगोला, नाइजीरिया और रूस, उन्हें भी कोटा बढ़ाने के लिए कहा गया है. इसका
मतलब ये है कि आपूर्ति में आधिकारिक आंकड़ों जितनी बढ़ोतरी नहींहोगी.
तेल उत्पादन को
लेकर ओपेक प्लस के रुख में ये बड़ा बदलाव माना जा रहा है. अमेरिका लंबे समय से तेल
उत्पादन बढ़ाने के लिए ज़ोर दे रहा था. लेकिन ओपेक प्लस देश इसके लिए तैयार नहीं
थे.
इसी साल फरवरी में सऊदी अरब ने तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए तेल
उत्पादन बढ़ाने के अमेरिकी अनुरोध को ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि इससे तेल
बाज़ार में अस्थिरता आ सकती है.
रूस-यूक्रेन
युद्ध शुरू होने के बाद भी तेल उत्पादक देश धीरे-धीरे ही मासिक आपूर्ति बढ़ाने की
योजना पर कायम थे. इस समूह ने कई बैठकों में तेल के संकट और बढ़ते दामों पर यह कर
बात करने से इनकार किया है कि ये बाज़ार से ज़्यादा राजनीति का मामला है.
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लेकिन, अब इस बदलाव के पीछे रूस पर लगे प्रतिबंधों से तेल की बढ़ती कीमतों को भी एक वजह माना जा रहा है.
रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लगाने, शिपिंग में मुश्किल आने और कुछ पारंपरिक ग्राहकों के इनकार करने के बाद रूस के तेल उत्पादन में कमी आई है.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, इसका उत्पादन अप्रैल में अपने ओपेक प्लस लक्ष्य से 1.3 मिलियन बैरल प्रति दिन कम था.
अमेरिका से पड़ रहे राजनीतिक दबाव के कारण भी सऊदी अरब को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ा. सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने पिछले हफ़्ते कहा था कि तेल बाजारों को नियंत्रित करने के लिए और ज़्यादा कुछ नहीं किया जा सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है.
ओपेक प्लस तेल उत्पादन में जो बढ़ोतरी करेंगे वो कुछ ही देशों से होने वाली है. सिर्फ़ सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में ही अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने की क्षमता है. कई अन्य सदस्य महीनों से अपने उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, 03 जून 2022, सुनिए अंजुम शर्मा से
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ब्रेकिंग न्यूज़, कानपुर में दो समुदायों के बीच झड़प, पुलिस ने किया लाठीचार्ज, अरुण अग्रवाल और रवि, कानपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज कैप्शन, कानपुर में पथराव
उत्तर प्रदेश में कानपुर के
बेकनगंज इलाक़े में जुमे की नमाज के बाद दो समुदायों के बीच पथराव की घटना से इलाक़े में तनाव की स्थिति है.
कानपुर की ज़िलाधिकारी
नेहा शर्मा ने मौके पर पहुंच कर मीडिया को बताया, "दो पक्षों के बीच पथराव की घटना हुई है,
जिसके बाद पुलिस और
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है."
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उन्होंने कहा, "इस घटना के पीछे जो भी ज़िम्मेदार होंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी."
उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनियोजित घटना थी या अचानक हुई है, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन लोगों से पूछताछ जारी है.
कानपुर के पुलिस कमिश्नर विजय शंकर मीणा ने बताया, "घटना की जानकारी मिलते ही दस मिनट के अंदर मैं खुद यहां पहुंच गया था. उपद्रवियों पर क़ाबू पा लिया गया है. हमने पूछताछ के लिए करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया है."
इमेज स्रोत, Arun Agarwal
इमेज कैप्शन, कानपुर के पुलिस कमिश्नर विजय शंकर मीणा
पुलिस कमिश्नर ने इस घटना को लेकर स्पष्ट किया है कि उपद्रवियों की तरफ़ से ना तो गोली चली है और ना कोई बमबाजी हुई है, केवल पत्थरबाज़ी हुई थी. पथराव की घटना में कुछ लोग घायल भी हुए हैं और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
स्थानीय पुलिस ने लाठीचार्ज करके लोगों को तितर-बितर किया.
पुलिस ने पूरे इलाक़े की घेराबंदी की है. संदेह के आधार पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. हालात को क़ाबू में रखने के लिए इलाक़े में एक दर्जन थाने की पुलिस को तैनात किया गया है.
इस घटना को लेकर अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा, ''कानपुर नगर के बेकनगंज थाना क्षेत्र के नई सड़क इलाक़े में आज जुमे की नमाज के बाद से कुछ लोगों ने वहां की दुकानों को बंद करने का प्रयास किया जिसका विरोध दूसरे पक्ष के लोगों ने किया. इस बात को लेकर आपस में टकराव हुआ और पत्थरबाजी की घटना हुई. इस सूचना पर तत्काल पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया. घटना के तुरंत बाद ही वहां पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकार पहुंच गए. आवश्यक बल प्रयोग करके स्थिति को नियंत्रण में किया गया.''
उन्होंने कहा, ''इस घटना को शासन ने बहुत गंभीरता से लिया है. इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल को वहां भेजा गया है. इसमें आज कुल 12 कंपनी एक प्लाटून पीएसी को वहां रवाना किया गया है. कुछ अधिकारी भी भेजे जा रहे हैं. वहां जिन भी लोगों ने पथराव किया है उसकी पहचान की जा रही है. अब तक 18 लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं. हमें पर्याप्त मात्रा में वीडियो फुटेज मिल गए हैं जिसके आधार पर हम आगे की कार्रवाई करेंगे. पथराव करने वालों के साथ-साथ साजिशकर्ताओं के साथ गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी.
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इस मामले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ट्वीट किया है.
उन्होंने कहा, ''महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नगर में रहते हुए भी पुलिस और ख़ुफ़िया-तंत्र की विफलता से भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा दिए गए भड़काऊ बयान से, कानपुर में जो अशांति हुई है, उसके लिए भाजपा नेता को गिरफ़्तार किया जाए. हमारी सभी से शांति बनाए रखने की अपील है.''
अमित शाह और मनोज सिन्हा की मुलाक़ात के बाद क्या थम जाएंगी कश्मीर में हो रही घटनाएं
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जम्मू और कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की.
ये बैठक हाल के दिनों में लोगों को निशाना बनाकर की गई हत्याओं के बाद केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी.
शुक्रवार को ये बैठक तकरीबन तीन बजे शुरू हुई जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, भारतीय सेना के प्रमुख मनोज पांडे, गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के अलावा जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी शामिल हुए.
अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ़ के महानिदेशक कुलदीप सिंह और बीएसएफ़ के प्रमुख पंकज सिंह और जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह भी इस मीटिंग में शामिल थे.
मई में जम्मू और कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों की हत्या कर दी गई थी. मरने वालों में कश्मीरी हिंदू भी शामिल थे.
मुसलमानों के हिन्दू पूर्वज वाले बयान पर बोले ओवैसी
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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन
भागवत ने गुरुवार को नागपुर में तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग समापन समारोह को संबोधित
करते हुए ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर भी बोला था.
मोहन भागवत ने कहा था, ''ज्ञानवापी का
मुद्दा चल रहा है. यह इतिहास है जिसे हम बदल नहीं सकते. इसे न आज के हिंदुओं ने
बनाया और न ही आज के मुसलमानों ने, ये उस समय घटा."
"इस्लाम हमलावरों के ज़रिए बाहर से आया
था. उन हमलों में भारत की आज़ादी चाहने वालों का मनोबल गिराने के लिए देवस्थानों
को तोड़ा गया. हिंदू समाज का ध्यान जिन पर है, विशेष श्रद्धा
जिन पर है, उसके बारे में मामले उठते हैं. लेकिन हिंदू,
मुसलमानों
के विरुद्ध नहीं सोचता है. आज के मुसलमानों के उस समय पूर्वज भी हिंदू थे. उन सबको
स्वतंत्रता से चिरकाल तक वंचित रखने के लिए उनका मनोधैर्य दबाने के लिए ऐसा किया
गया इसलिए हिंदुओं को लगता है कि इन्हें (धार्मिक स्थलों को) पुनर्स्थापित किया
जाना चाहिए."
उन्होंने कहा था, "आपस में मिल बैठ
कर सहमति से कोई रास्ता निकालिए. लेकिन हर बार नहीं निकल सकता. इसमें कोर्ट में
जाते हैं. जाते हैं तो फिर कोर्ट जो निर्णय देगा उसको मानना चाहिए. अपनी संविधान
सम्मत न्याय व्यवस्था को सर्वश्रेष्ठ मानकर, उसके फ़ैसले
मानने चाहिए, उनके निर्णयों पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाना
चाहिए."
इस दौरान संघ प्रमुख ने कहा था कि रोज़-रोज़ एक
नया मुद्दा नहीं निकालना चाहिए. उन्होंने कहा था, "ठीक है कि ऐसे
कुछ प्रतीकात्मक स्थानों के बारे में हमारी कुछ विशेष श्रद्धा थी. लेकिन रोज़ एक
नया मामला निकालना, ये भी नहीं करना चाहिए. हमको झगड़ा क्यों
बढ़ाना है. ज्ञानवापी के बारे में हमारी कुछ श्रद्धाएं हैं परंपरा से चलती आई हैं,
हम
कर रहे हैं ठीक है. परंतु हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना?"
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मोहन भागवत के इस बयान पर अब ऑल इंडिया
मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद
असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है.
ओवैसी ने एक साथ 17 ट्वीट किए हैं. अपने ट्वीट
में ओवैसी ने लिखा है, ''ज्ञानवापी पर मोहन भागवत के भाषण को
नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बाबरी पर आंदोलन ऐतिहासिक
कारणों से ज़रूरी था. आरएसएस सुप्रीम कोर्ट का सम्मान नहीं करता है और बाबरी
मस्जिद के विध्वंस में शामिल था. इसका मतलब यह हुआ कि क्या ज्ञानवापी के साथ भी वे
ऐसा ही कर सकते हैं?''
''मोहन भागवत और नड्डा ज्ञानवापी मुद्दे पर
आश्वासन देने वाले कौन होते हैं? इनके पास कोई संवैधानिक पद नहीं है.
प्रधानमंत्री को स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि वह 1991 के क़ानून के साथ हैं.
उन्होंने संविधान की शपथ ली है. अगर वह इस क़ानून के साथ खड़े रहते हैं तो
हिन्दुत्व के इस उत्साह को रोका जा सकता है.''
ओवैसी ने कहा है, ''विश्व हिन्दू
परिषद के बनने से पहले अयोध्या संघ के एजेंडे में भी नहीं था. यह 1989 में पालनपुर
में बीजेपी के प्रस्ताव में आया. इसी दौरान बीजेपी के एजेंडे में अयोध्या आया.
आरएसएस राजनीतिक रूप से एक साथ दो बातें करता है. सभी जोकर काशी, मथुरा,
क़ुतुब
का मुद्दा उठा रहे हैं और इनका जुड़ाव सीधे संघ से है. यह संघ की पुरानी रणनीति है
कि जब चीज़ें अलोकप्रिय हों तो उससे ख़ुद को अलग रखो और बाद में उसे अपना लो. यहाँ
तक कि बाबरी आंदोलन के दौरान भी ये कहते थे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन
करेंगे और दूसरी तरफ़ यह भी कहते थे कि यह आस्था का मुद्दा है और इस पर कोर्ट
फ़ैसला नहीं कर सकता.''
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''कोई कहता था कि केवल बाबरी दे दो उसके बाद कोई
मस्जिद नहीं टच किया जाएगा.कुछ कहते हैं
कि केवल अयोध्या, काशी और मथुरा. कई लोग मध्यकाल की सभी मस्जिदों
की बात करते हैं. बीजेपी तेलंगाना प्रमुख ने कहा है कि प्रदेश की सभी मस्जिदों की
खुदाई करनी चाहिए.''
''मोहन भागवत कह रहे हैं कि कोर्ट के फ़ैसले का
सम्मान करेंगे. क्या सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद की सुरक्षा का आश्वासन नहीं
दिया था? लेकिन हज़ारों की भीड़ ने मस्जिद तोड़ दी. आडवाणी इसे दुखद दिन बताते
हैं लेकिन फडणवीस, ठाकरे और अन्य तोड़ने का श्रेय लेते हैं. इनके
मन में अदालत के प्रति कोई सम्मान नहीं है. दूसरी व्याख्या है कि संघ परिवार के
गुंडे मोदी या भागवत की नहीं सुनते हैं. दोनों ने लिंचिंग की निंदा की थी. क्या
लिंचिंग थमी? हमने रामनवमी के जुलूस के दौरान भी देखा. इसका
मतलब है कि ये सब थमेगा नहीं बस रोकने का ये ढोंग करेंगे.''
ओवैसी ने कहा, ''मोहन भागवत कहते
हैं कि इस्लाम आक्रांताओं के ज़रिए आया. सच यह है कि इस्लाम व्यापारियों, स्कॉलर्स
और सूफ़ियो के ज़रिए आया. भारत में मुस्लिम आक्रांता के आने से पहले इस्लाम आ चुका
था. मोहन भागवत मुसलमानों के हिन्दू पूर्वज की बात करते हैं. क्या हमें65000 साल पीछे जाकर देखना चाहिए जब पहली बारी
भारतीय अफ़्रीका से आए? या जब भारतीयों के पूर्वज पूर्वी एशिया,
मध्य
एशिया और ईरान से आए? जबरन धर्मांतरण एक झूठ है. समस्या यह है कि
भागवत और उनके जमात के लोगों को आधुनिक भारत में जन्मे लोग स्वीकार नहीं कर सकते.
यह अप्रसांगिक है कि किसके पूर्वज कौन थे और कहाँ से आए थे?''
नीतीश कैबिनेट ने जातिवार जनगणना को दी मंज़ूरी
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बिहार के
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट ने राज्य में जाति आधारित जनगणना को मंज़ूरी
दे दी है. इस बारे में मुख्य सचिव आमिर सुभानी ने जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि
जातिगत जनगणना के दौरान आर्थिक आधार पर सर्वे कराने का प्रयास किया जाएगा. इसके
लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित
होंगे और इसे 2023 तक पूरा करने का
लक्ष्य रखा गया है.
इससे पहले बुधवार
को सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में जातिगत जनगणना
कराने की घोषणा की थी.
आमिर सुभानी ने
कहा, ''राज्य स्तर पर सामान्य
प्रशासन विभाग नोडल एजेंसी होगा और ज़िला स्तर पर ज़िला मजिस्ट्रेट नोडल अधिकारी
होंगे.''
जनगणना कब तक
शुरू होगी, इसके जवाब में
आमिर सुभानी ने कहा, ''इसे लेकर ग्राउंड
वर्क तुरंत शुरू हो जाएगा और गणना का काम दो-तीन महीनों बाद या उससे जल्दी भी शुरू
हो सकता है. ''
मुख्य सचिव ने
कहा कि जिला मजिस्ट्रेट इसे लेकर एक विस्तृत योजना तैयार करेंगे कि इस काम में कौन
शामिल होगा. जाति आधारित इस जनगणना में सभी जातियों और उनकी उप-जातियों को कवर किया
जाएगा.
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कार्ति चिदंबरम की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम ज़मानत ख़ारिज
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम
मनी लॉन्ड्रिंग
के मामले में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और दो अन्य की अग्रिम ज़मानत को ख़ारिज कर दिया है. कार्ति चिदंबरम के साथ एस भास्कर रमन
और विकास मखारिया ने अग्रिम ज़मानत की अर्जी दी थी जिस पर कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित कर
लिया था.
इससे पहले सीबीआई
ने कार्ति चिदंबरम के चेन्नई और देश में अलग-अलग जगहों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की थी.
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय ने भी कार्ति चिदंबरम और कुछ
अन्य लोगों के ख़िलाफ़ वीज़ा घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज
किया है.
कार्ति चिदंबरम पर चीनी
नागरिकों से पैसा लेकर वीज़ा दिलाने का आरोप है. उस समय उनके पिता पी चिदंबरम
कांग्रेस सरकार में गृह मंत्री थे.
इस मामले में
आरोप है कि वेदांता ग्रुप की कंपनी तलवांडी साबो पावर लिमिटेड के एक उच्च अधिकारी
ने कार्ति चिदंबरम और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) एस. भास्कर रमन को 50 लाख रुपए रिश्वत दी गई थी. कंपनी पंजाब में एक
पावर प्लांट बनाना चाहती थी.
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रूस को लेकर एस जयशंकर ने यूरोप को फिर सुनाई खरी-खरी
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि
भारत की नीति शायद कुछ देशों से सहमत नहीं है, इसलिए हमारी
विदेशी नीति बाड़ पर नहीं बैठी है.
एस जयशंकर ने कहा, ''मैं आपसे सहमत
नहीं हूँ, इसलिए मैं बाड़ पर नहीं बैठा हूँ. इसका मतलब यह हुआ कि मैं अपनी
ज़मीन पर हूँ.''
भारतीय विदेश मंत्री ने यह बात शुक्रवार को
स्लोवाकिया की संस्था ग्लोबसेक में कही है. एस जयशंकर इंडो-पैसिफिस के सहयोगियों
के बीच अगले स्तर की दोस्ती पर बोल रहे थे.
इसी में भारतीय विदेश मंत्री से यूक्रेन-रूस
जंग में भारत के रुख़ को लेकर सवाल पूछा गया था. एस जयशंकर से पूछा गया था कि क्या
भारत उभरते हुए विश्व नेता के रूप में बाड़ पर बैठा रह सकता है? यानी भारत बिना
कोई पक्ष लिए इस भूमिका में कैसे आएगा?
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जयशंकर
ने कहा, ''हम एक टकराव में इसलिए आएं कि दूसरे में मदद मिलेगी, यह अब काम नहीं कर
सकता. चीन के साथ हमारी कई समस्याएं हैं और इसका यूक्रेन, रूस के साथ कुछ
लेना-देना नहीं है. ऐसे कई विषय हैं, जिन पर यूरोप ने नहीं
बोला.''
''यूरोप को इस मानसिकता से बाहर आना चाहिए कि उसकी समस्या पूरी दुनिया की
समस्या है. सच यह है कि यूरोप की समस्या पूरी दुनिया की समस्या नहीं है.
यूक्रेन और रूस को लोग चीन से जोड़ रहे हैं. लेकिन वे भूल जाते हैं कि चीन और भारत
के बीच जो कुछ चल रहा है, वह
यूक्रेन के पहले से है.''
''मैं इस दलील को बहुत चालाक दलील नहीं मानता हूँ. आज दुनिया
जिन सभी बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है, उन सबका समाधान किसी ने
किसी रूप में भारत से आ रहा है.''
रूस
से तेल ख़रीदने पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, ''देखिए मैं इसमें बहुत
दलील नहीं देना चाहता हूँ. क्या रूस से गैस ख़रीदना युद्ध का वित्तपोषण नहीं है? केवल भारतीय पैसा और
रूसी तेल जो भारत आ रहा है, वह
युद्ध का वित्तपोषण है और रूस की गैस जो यूरोप जा रही है, वह युद्ध का वित्तपोषण
नहीं है?''
एस
जयशंकर ने कहा, ''भारत में दुनिया की 20 फ़ीसदी आबादी है. भारत
दुनिया की पाँचवीं या छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. आप इतिहास और सभ्यता तो छोड़
ही दीजिए. इसे हर कोई जानता है. हम अपना पक्ष लेने के लिए स्वतंत्र हैं. हम अपने
हितों का पक्ष लेने के लिए स्वतंत्र हैं. हम अपने हिसाब से चुनाव के लिए स्वतंत्र
हैं. मेरी पसंद जोड़तोड़ वाली नहीं होगी. यह हमारे मूल्यों और हितों के बीच
संतुलित होगी. दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जो अपने हितों की उपेक्षा करता है.''
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काबुल में भारतीय अधिकारियों से मिलने के बाद बोला तालिबान
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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आने के बाद पहली बार भारत की ओर से आधिकारिक दौरा हुआ है. इसे भारत के रुख़ में आए परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है. पिछले साल अगस्त में तालिबान ने जब अफ़ग़ानिस्तान को अपने नियंत्रण में लिया था, तब भारत ने सारे राजनयिक संबंध ख़त्म कर लिए थे.
गुरुवार भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव जे.पी. सिंह ने काबुल में अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुतक्क़ी से मुलाक़ात की.
विदेश मंत्रालय के संयुक्त
सचिव जे.पी. सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भी काबुल गया था.
अफ़ग़ानिस्तान के न्यूज़ चैनल टोलो न्यूज़ के मुताबिक़ भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस यात्रा का
उद्देश्य "अफ़ग़ानिस्तान में हमारी मानवीय सहायता की डिलीवरी ऑपरेशन" की
देखरेख पर बात करना था.
तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल क़हर बाल्खी ने जेपी सिंह दौरे और हुई बातचीत की जानकारी दी है.
बाल्खी ने कहा कि उनके विदेश मंत्री ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल की काबुल यात्रा को अफ़ग़ानिस्तान-भारत संबंधों में 'एक अच्छी शुरुआत' कहा है.
बाल्खी ने कहा, "बैठक भारत-अफ़ग़ान राजनयिक संबंधों, द्विपक्षीय व्यापार और मानवीय सहायता पर केंद्रित थी."
इस बैठक को लेकर बाल्खी ने
कई ट्वीट किए हैं. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “जेपी सिंह ने दोनों देशों के बीच संबंधों को ऐतिहासिक
बताते हुए कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान की आधारभूत ढांचागत, छोटी परियोजनाओं, क्षमता निर्माण, शैक्षिक छात्रवृत्ति
और मानवीय सहायता के लिए मदद करना चाहता है.”
तालिबान ने मानवीय सहायता की पेशकश करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया और भारतीय प्रतिनिधिमंडल
को आश्वासन दिया कि अफ़ग़ानिस्तान अपनी संतुलित विदेश नीति को ध्यान में रखते हुए, भारत के साथ एक
महत्वपूर्ण क्षेत्रीय देश के रूप में राजनीतिक, आर्थिक और
सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाना चाहता है.
बाल्खी मे ये भी कहा है कि “भारतीय
प्रतिनिधिमंडल ने अफ़ग़ानिस्तान के प्रति अपनी ग़ैर-हस्तक्षेप नीति का आश्वासन दिया
और कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा.”
“तालिबान सरकार में उप-विदेश मंत्री स्टानिकज़ई ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि अफ़ग़ान-भारत संबंध आपसी सम्मान
और संयुक्त द्विपक्षीय हितों के आधार पर आगे बढ़ेंगे, और अन्य देशों की
अंतर-प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित नहीं होंगे.”
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तुर्की में सालाना महंगाई दर 73 फ़ीसदी के पार पहुँची
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तुर्की में मई महीने में वार्षिक महंगाई दर
पिछले 24 सालों में सबसे ऊंचाई पर पहुँच गई. तुर्की की 790 अरब डॉलर वाली
अर्थव्यवस्था को लेकर राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन की अपारंपिक नीतियां लगातार
बैकफायर कर रही हैं.
तुर्की की सांख्यिकी एजेंसी के डेटा के अनुसार,
मई
महीने में तुर्की का सालाना कंज्युमर प्राइस इंडेक्स 73.5 फ़ीसदी पर पहुँच गया. यह
1998 में तुर्की की राजनीतिक अस्थिरता के दौर से भी ऊपर है.
तुर्की में खाने-पीने के सामान की क़ीमत लगातार
बढ़ रही है. पिछले साल अर्दोआन ने बढ़ती महंगाई के बावजूद ब्याज दरों में कटौती की
थी. सामान्य तौर पर महंगाई बढ़ने पर ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सामानों
की ढुलाई के अलावा खाद्य सामग्री की लागत में 108% की बढ़ोतरी हुई है. इस साल
तुर्की में चुनाव होने वाला है और अर्दोआन के लिए बेतहाशा बढ़ती महंगाई मुश्किलें
खड़ी कर सकती हैं.पिछले साल तुर्की की
मुद्रा लीरा में डॉलर की तुलना में44% की
गिरावट आई थी.
कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि अगर महंगाई बढ़
रही है तो आप ब्याज दरें बढ़ाकर इसे नियंत्रित कर सकते हैं. लेकिन अर्दोआन ब्याज
दरों में बढ़ोतरी को एक ऐसी बुराई के तौर पर देखते हैं जो अमीर को और अमीर जबकि
ग़रीब को और ग़रीब बनाती है.
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बांग्लादेश को चीन ने कहा- इस राजनीति से अलग रहो
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बांग्लादेश से चीन ने कहा है कि वह गुट और
खेमों वाली राजनीति को ख़ारिज करे. कहा जाता है कि बांग्लादेश पर जापान, अमेरिका,
ऑस्ट्रेलिया
और भारत वाले गुट क्वॉड में शामिल होने का दबाव था लेकिन उसने ख़ुद को दूर रखा. ये
बात भी कही जाती है कि बांग्लादेश चीन के नाराज़ हो जाने की आशंका से क्वॉड में
शामिल नहीं हुआ.
चीनी विदेश मंत्रालय में एशिया मामलों के
निदेशक जनरल लियु जिनसोंग ने चीन में बांग्लादेश के राजदूत महबूब उज़ ज़ामन से
बुधवार को कहा, ''चीन का मानना है कि इस इलाक़े में बांग्लादेश
समेत सभी देशों को अपने हितों का ख़याल रखते हुए शीत युद्ध वाली मानसिकता से दूर
रहना चाहिए. इस इलाक़े के देशों को गुट वाली राजनीति से दूर रहना चाहिए.''
चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज
के अनुसार, लियु ने कहा कि इस इलाक़े के देशों को स्थिरता
और शांति के लिए गुटों वाली राजनीति को ख़ारिज कर देना चाहिए. पिछले साल 10 मई को
बांग्लादेश में चीन के राजदूत ली जिमिंग ने कहा था कि बांग्लादेश को क्वॉड में
शामिल नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा था कि अगर बांग्लादेश क्वॉड में शामिल होता
है तो चीन से संबंध ख़राब होंगे. चीनी राजदूत ने क्वॉड को चीन विरोधी गुट बताया
था.
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चीनी राजदूत की इस टिप्पणी पर बांग्लादेश के
विदेश मंत्री डॉ अब्दुल मोमेन ने कहा था कि बांग्लादेश की विदेश नीति गुट-निरपेक्ष
और संतुलनवादी सिद्धांत पर आधारित है और इसी के हिसाब से वह आगे बढ़ते हैं.
डॉ मोमेन ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते
हुए कहा था, ''हम स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र हैं. हम अपनी
विदेश नीति पर ख़ुद फ़ैसला करेंगे. लेकिन हाँ, कोई देश अपनी
स्थिति स्पष्ट कर सकता है. अगला क्या कहता है, हम इसका आदर
करते हैं लेकिन हम चीन से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं करते हैं.''
डॉ मोमेन ने कहा था, ''स्वाभाविक रूप
से चीनी राजदूत अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं. वे जो चाहते हैं, उसे
कह सकते हैं. शायद वो नहीं चाहते हैं कि हम क्वॉड जॉइन करें. लेकिन हमें किसी ने
क्वॉड में शामिल होने के लिए संपर्क नहीं किया है. चीन की यह टिप्पणी एडवांस में आ
गई है.''
बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा था,
''चीन
सामान्य तौर पर किसी दूसरे देश के मामले में हस्तक्षेप नहीं करता है. मैंने ऐसे आक्रामक
तेवर में किसी को ऐसा कहते देखा भी नहीं. यह बहुत ही अफ़सोसनाक है. चीन अपनी
स्थिति स्पष्ट कर सकता है और बांग्लादेश दूसरों के कहे का हमेशा सम्मान करता है.
दूसरे क्या कह रहे हैं, हम इसका सम्मान करते हैं. लेकिन हमारे लिए क्या
अच्छा है, इसका फ़ैसला हम ख़ुद करेंगे.''
ज्ञानवापी पर मोहन भागवत के बयान की कई लोग कर रहे तारीफ़
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर दिया बयान काफ़ी चर्चा में है.
गुरुवार को मोहन भागवत ने कहा था कि ‘हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों खोजना है?’
नागपुर में संघ शिक्षा
वर्ग, तृतीय वर्ष 2022 के समापन समारोह के दौरान भागवत ने कहा कि इतिहास हम बदल नहीं सकते. उन्होंने कहा कि रोज़-रोज़ एक नया मुद्दा
नहीं निकालना चाहिए.
उन्होंने कहा, "ज्ञानवापी के बारे में हमारी कुछ श्रद्धाएं हैं, जो परंपरा से चलती आई हैं, हम जो कर रहे हैं, ठीक है.
लेकिन हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना?"
इस्लाम और इस मज़हब को मानने वाले लोगों पर मोहन भागवत ने कहा कि इस्लाम धर्म के तहत की जाने वाली उपासना भी एक तरह की पूजा है, भले ही वह देश के बाहर से आई है लेकिन उसे मानने वाले अगर ऐसा कर रहे हैं, ये अच्छी बात है.
उन्होंने कहा, "वो भी एक पूजा है, ठीक है बाहर से आई है. लेकिन जिन्होंने अपनाई है, वो मुसलमान, वो बाहर से संबंध नहीं रखते. ये उनको भी समझना चाहिए. यद्यपि पूजा उनकी उधर की
है, लेकिन वो करना चाहते हैं तो अच्छी बात है. हमारे यहाँ किसी पूजा का विरोध नहीं
है. सबकी मान्यता और सबके प्रति पवित्रता की भावना है. लेकिन हम समान पूर्वजों के
वंशज हैं. परंपरा हमको समान मिली है."
मोहन भागवत के इस बयान पर
खूब चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया ट्विटर पर इसके पक्ष और विपक्ष में लोग अपनी राय
रख रहे हैं.
पत्रकार शीला भट्ट ने आरएसएस
प्रमुख के इस बयान पर लिखा, “ये एक बड़ा बयान है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ज्ञानवापी
के मुद्दे पर ये कहते हुए फुलस्टॉप लगा दिया है कि अब इस मामले पर कोई विरोध नहीं
होगा. उनका ये बयान एक गेमचेंजर है.”
“उन्होंने (भागवत) कहा कि ज्ञानवापी जैसे मुद्दे को बातचीत से
सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए. सभी मस्जिदों में शिवलिंग क्यों खोजते रहते हैं? आरएसएस सुप्रीमो मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुओं को किसी
से डरना नहीं चाहिए और न ही किसी को डराना चाहिए. उनका कहना है कि हमें झगड़ा नहीं बढ़ाना है.”
शीला भट्ट ने लिखा है, ''भले ही यह आरएसएस की रणनीति है. इसका स्वागत करना चाहिए क्योंकि
मंदिर-मस्जिद के लिए सड़क पर उतरना ठीक नहीं है जबकि हमारे पास महंगाई और रोज़गार
जैसे मुद्दे मौजूद हैं. कट्टरपंथियों को वाराणसी से बाँटने बयान देना बंद कर देना
चाहिए.”
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पोस्ट X समाप्त, 1
पत्रकार सबा नक़वी ने इस बयान पर ट्वीट किया, “बिना किसी संदेह के ये आरएसएस प्रमुख का महत्वपूर्ण बयान है. अब देखना होगा कि इसका असर क्या होगा. हर मस्जिद में शिवलिंग खोजने की ज़रूरत नहीं है.”
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पोस्ट X समाप्त, 2
अरविंद देव नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा है, “मोहन भागवत का ये बयान ज्ञावनापी मामले में याचिकाकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगा या इसे कमज़ोर करेगा? मुझे लगता है उनका मनोबल घटेगा.”
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पोस्ट X समाप्त, 3
हिंदू मनीष पालीवाल नाम के एक यूजर्स ने लिखा- मोहन भागवत, मोदी जी को कड़ा कॉम्पीटिशन दे रहे हैं कि कौन पहले नोबेल का शांति पुरस्कार जीतेगा.
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पोस्ट X समाप्त, 5
विद्योत्मा नाम की एक यूज़र लिखती हैं- आरएसएस अपने स्टैंड से 180 डिग्री टर्न ले रहा है. विदेश में तेजस्वी सूर्या और विवेक अग्निहोत्री के व्याख्यान रद्द होने के बाद, कश्मीर में की गई कार्रवाई के विपरीत असर होने के बाद वो हिंदू समर्थक खोने लगे हैं. अमेरिका ने खुले तौर पर अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की बात कही है और अब वे समझौता करना चाहते हैं .संध और बीजेपी के बीच मतभेद होता दिख रहा है?