पाकिस्तान के
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अगर सही फ़ैसला नहीं लिया गया तो
पाकिस्तान जल्द ही डिफॉल्टर हो जाएगा. उन्होंने कहा कि देश ख़ुदकुशी की तरफ़ बढ़ रहा
है.
पाकिस्तानी पर विदेशी क़र्ज़ों की कई देनदारियां हैं और क़र्ज़ समय पर नहीं चुकाने वाले को ही डिफॉल्टर कहा जाता है. कोई डिफॉल्टर घोषित होता है कि उसकी सारी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग ख़राब होती है और नया क़र्ज़ मिलना मुश्किल हो जाता है.
इमरान ख़ान ने एक निजी
न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, ''अगर सेना इस वक़्त सही फ़ैसला नहीं करेगी तो वह ख़ुद पहले तबाह होगी. मैं यह
लिखित में दे सकता हूँ. ये जब से आए हैं, रुपया गिर रहा है, शेयर बाज़ार गिर
रहा है, चीज़ें महंगी हो रही हैं.
डिफॉल्टर होने की ओर पाकिस्तान बढ़ रहा है.''
''अगर हम डिफॉल्ट
करेंगे तो इसका मतलब यह हुआ कि हम दिवालिया होने की ओर जाएंगे. सबसे बड़ी संस्था
पाकिस्तानी सेना है और वही प्रभावित होगी. जब फौज हिट होगी तो उसके बाद हमसे सबसे
बड़ी छूट ली जाएगी जो यूक्रेन से ली गई थी. हमें परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए मजबूर
किया जाएगा.''
जिस समय इमरान
ख़ान का ये बयान आया तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ तुर्की के तीन
दिवसीय दौरे पर हैं. यहां प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार
बढ़ाने पर ज़ोर दिया. साथ ही पाकिस्तान-तुर्की बिज़नस काउंसिल को संबोधित करते हुए
उन्हें व्यापार बढ़ाने के लिए हर संभव क़दम उठाने का आश्वासन दिया.
शहबाज़ शरीफ़ ने
ट्वीट करके इमरान ख़ान के बयान पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, ''मैं तुर्की में समझौते कर रहा हूँ और दूसरी ओर
इमरान नियाज़ी देश के ख़िलाफ़ धमकी दे रहे हैं. इससे पता चलता है कि नियाज़ी किसी
ज़िम्मेदारी वाले पद पर रहने के क़ाबिल नहीं हैं. उनके हालिया इंटरव्यू से साफ़
है. आप अपनी राजनीति कीजिए लेकिन हदें पार मत कीजिए और न ही पाकिस्तान को तोड़ने
की बात कीजिए.''
लेकिन, पाकिस्तान की ख़राब आर्थिक स्थिति की ओर इशारा वित्त मंत्री मिफ़्ताह इस्माइल भी कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि कुछ देशों ने पाकिस्तान को क़र्ज़ देने से इनकार कर दिया है.
मिफ़्ताह इस्माइल का कहना था, ''हमने सऊदी अरब, दुबई और कुछ अन्य देशों से बात की. वो पैसे देने को तैयार हैं लेकिन उनका कहना है कि हमें पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के पास जाना चाहिए.''
इन देशों ने पाकिस्तान को ऐसे समय में कर्ज़ देने से इनकार किया है, जब पाकिस्तान बुरे आर्थिक दौर से गुज़र रहा है. डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपए की क़ीमत अब तक सबसे निचले स्तर 200 तक पहुँच चुकी है.
शहबाज़ शरीफ़ ने 11 अप्रैल को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. तब स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान के पास सिर्फ़ 10.5 अरब डॉलर का रिज़र्व बचा था.
इससे ज़्यादा से ज़्यादा सात हफ़्तों का आयात हो सकता था. तब पाकिस्तान डिफॉल्ट होने से लगभग 80 दिन दूर था. अप्रैल और जून के अंत के बीच पाकिस्तान को 4.9 अरब डॉलर का भुगतान करना था. इस दौरान पाकिस्तान का करंट अकाउंट डेफिसिट 4 अरब डॉलर था. पाकिस्तान के इतिहास में ऐसी स्थिति पहली बार थी.
पाकिस्तान के डिफॉल्ट होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय निवेशक पाकिस्तान सरकार की गारंटी वाले बॉन्ड बेच रहे हैं. पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज 3500 प्वाइंट नीचे गिर गया.
27 मई को शहबाज़ शरीफ़ के प्रधानमंत्री बनने के 46 दिनों बाद पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हुआ. पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड में तेज़ी आई और स्टॉक एक्सचेंज 319 प्वाइंट बढ़ा. इस दौरान रुपया भी डॉलर के मुक़ाबले 2.40 रुपए मजबूत हो गया.
लेकिन, इससे एक दिन पहले 26 मई को सरकार ने पेट्रोल के दाम 30 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए. इससे महंगाई बढ़ गई और व्यापार घाटा कुछ कम हुआ. लेकिन, इसके बाद भी जानकार मानते हैं कि स्थितियां सिर्फ़ आईएमएफ़ का सहयोग मिलने से ठीक नहीं हो सकतीं.
पाकिस्तान को विश्व बैंक, एशियन डिवेलपमेंट बैंक, नए यूरोबॉन्ड, सऊदी अरब और चीन से सहयोग की ज़रूरत होगी.