गुजरात टाइटंस आईपीएल के फ़ाइनल में, राजस्थान को हराया

डेविड मिलर और हार्दिक पांड्या की बदौलत गुजरात फ़ाइनल में, राजस्थान को एक मौक़ा और मिलेगा.

लाइव कवरेज

प्रियंका झा, रजनीश कुमार and अभिनव गोयल

  1. पाकिस्तान भी क्या डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुँच गया है?

    पाकिस्तान

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    दक्षिण एशिया के कई देशों की आर्थिक हालत लगातार बदतर हो रही है. श्रीलंका आधिकारिक रूप से डिफॉल्ट हो चुका है. विदेशी क़र्ज़ चुकाने की तारीख़ निकल गई लेकिन उसने अदायगी से हाथ खड़ा कर दिया.

    श्रीलंका में लोग सड़क पर हैं और कई ज़रूरी सामान नहीं हैं. यहाँ तक कि पेट्रोल और डीज़लभी नहीं हैं. दक्षिण एशिया के एक और देश पाकिस्तान की भी हालत पस्त है. विदेशी मुद्रा भंडार यहाँ भी ख़ाली है.

    आयात कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पाकिस्तान ने पिछले हफ़्ते ही सभी ग़ैर-ज़रूरी लग्ज़री सामानों के आयात पर पाबंदी लगा दी थी. पाकिस्तान में इस स्थिति को आर्थिक आपातकाल कहा जा रहा है.

    पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 17 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16 अरब डॉलर तक सिमट गया है और वहाँ की मुद्रा रुपया भी एक डॉलर की तुलना में 200 रुपए तक पहुँच गया है.

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    पाकिस्तान की सूचना और प्रसारण मंत्री मरियम औरंगज़ेब ने पत्रकारों से कहा था कि जिन लग्ज़री सामानों के आयात पर पाबंदी लगाई गई है, उनका इस्तेमाल बहुत ही कम लोगों के बीच होता है.

    पाकिस्तान की वित्तीय मामलों की जांच एजेंसी फ़ेडरल बोर्ड ऑफ़ रेवेन्यू यानी एफ़बीआर के पूर्व चेयरमैन सैयद शब्बर ज़ैदी ने 15 मई को ट्वीट कर कहा था कि पाकिस्तान की हालत श्रीलंका से अलग नहीं है.

    ज़ैदी ने कहा था, ''क्या यह शर्मनाक नहीं है कि 22 करोड़ की आबादी वाले परमाणु शक्ति संपन्न देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, सऊदी अरब, यूएई और चीन से भीख मांग रहा है. हम इस स्थिति में कैसे पहुँचे? हमें आत्मवालोकन करना चाहिए. 1947 के बाद से ऐसी क्या ग़लती हुई है कि चीज़ें ठीक नहीं हो रही हैं. हमें सत्य का अन्वेषण करने की ज़रूरत है.''

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    ज़ैदी ने ट्वीट कर कहा है, ''इकनॉमिस्ट मैग्ज़ीन ने अनुमान लगाया है कि भारत तेज़ गति से विकास करेगा. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 650 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है. बांग्लादेश भी विकाशील देशों की श्रेणी में आ गया है. पाकिस्तान में आख़िर क्या समस्या है?''

    पाकिस्तान के जाने-माने आर्थिक स्तंभकार फ़ारुख़ सलीम ने पाकिस्तानी वेबसाइट द न्यूज़ में एक लेख लिखा है, जिसमें बताया है कि गया है कि पाकिस्तान भी डिफॉल्ट होने की कगार पर है.

    फ़ारुख़ सलीम ने लिखा है, ''अगस्त 2021 में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 20 अरब डॉलर था लेकिन पिछले नौ महीनों में इस में 10 अरब डॉलर की गिरावट आई है. पिछले आठ हफ़्तों में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को छह अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है. यह साफ़ है कि एसबीपी के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा नहीं है कि क़र्ज़ों का भुगतान समय पर कर सके.''

    बांग्लादेश में भी विदेशी मुद्रा भंडार कम होकर 42 अरब डॉलर हो गया है. कहा जा रहा है कि यह सात महीनों के आयात बिल से ज़्यादा नहीं है. नेपाल की हालत भी ठीक नहीं है और मालदीव पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा था.

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  2. ज्ञानवापी मस्जिद मामले में पहले किस याचिका पर होगी सुनवाई, आज ज़िला कोर्ट करेगा फै़सला

    ज्ञानवापी केस

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    ज्ञानवापी मस्जिद मामले में किस याचिका पर पहले सुनवाई होगी, इसको लेकर वाराणसी की ज़िला अदालत आज फैसला सुनाएगी. कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई शुरू की थी और फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

    सोमवार को ज़िला जज एके विश्वेस ने सुनवाई पूरी की थी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा. इसके बाद ज़िला अदालत ने सोमवार को सुनवाई शुरू की थी. सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला अदालत से ही कहा था कि वह हिन्दू पक्ष की याचिका पर ख़ुद फ़ैसला करे.

    कोर्ट रूम में केवल 23 लोगों को शामिल होने की अनुमति थी. इनमें 19 वकील और चार याचिकाकर्ता शामिल थे. ज़िला अदालत के पूर्व कमिश्नर अजय मिश्रा को कोर्टरूम में नहीं आने दिया गया था.

    अदालत नियम सात और 11 आवेदन के तहत सुनवाई पर आज फ़ैसला करेगी. बनारस की ज़िला अदालत हिन्दू महिला की उस यचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा करने के अधिकार देने की मांग की गई है.

    ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन देखने वाली अंजुमन इंतेज़ामिया मसाजिद कमिटी ने आग्रह किया है कि अदालत पहले हिन्दू याचिकाकर्ताओं की याचिका पर फ़ैसला करे कि यह केस वर्शिप एक्ट, 1991 के तहत सुनने लायक है या नहीं. अंजुमन इंतेज़ामिया मसाजिद कमिटी ने ये भी कहा कि यहाँ मुसलमान 1936 से ही नमाज़ पढ़ रहे हैं.

  3. पाकिस्तान: लॉन्ग मार्च से पहले इमरान ख़ान की पार्टी के नेताओं के घर पर पुलिस की छापेमारी

    इमरान ख़ान

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    पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की ओर इमरान ख़ान के लॉन्ग मार्च को मंज़ूरी देने के बाद सोमवार देर रात पंजाब प्रांत के अलग-अलग शहरों में पीटीआई कार्यकर्ताओं के घरों पर पुलिस ने छापेमारी की.

    इमरान ख़ान की सरकार में मंत्री रह चुके हम्द इज़हार, फ़वाद चौधरी और शेख राशिद के घरों के बाहर भी बीती रात पुलिस की एक टुकड़ी मौजूद दिखी.

    इसके अलावा राजा बशारत, उस्मान डार, मियां असलम इक़बाल, फयाज़-उल-हसन चौहान, फ़िरदौस राय, रशीदा खानम, यासिर गिलानी और अन्य पीटीआई नेताओं ने भी दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें परेशान किया है.

    छापेमारी

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    इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई के प्रवक्ता फ़वाद चौधरी ने कहा है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ अलग-अलग शहरों में अभियान चलाए गए हैं. फ़ैसलाबाद, लाहौर, मुल्तान, सियालकोट और झेलम सहित अन्य शहरों में कार्यकर्ताओं और नेताओं पर छापेमारी की खबरे हैं.

    छापेमारी पर इमरान ख़ान ने कहा, "इस्लामाबाद और पंजाब में पीटीआई कार्यकर्ताओं और नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई ने पीएमएल-एन की असल प्रवृत्ति ज़ाहिर कर दी है. ये कार्रवाई करने वालों पर गंभीर सवाल खड़े करता है."

  4. ज़ेलेंस्की ने कहा युद्ध ख़त्म करने के लिए सिर्फ़ पुतिन से ही करूंगा बातचीत

    ज़ेलेंस्की

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    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ही अकेले वो नेता हैं, जिनसे वो युद्ध ख़त्म करने के बारे में चर्चा करने के लिए तैयार हैं.

    ज़ेलेंस्की, दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस की कार्रवाई को देखते हुए उससे किसी भी तरह की वार्ता करना मुश्किल होता जा रहा है.

    रूस अब तक यूक्रेन के नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने के दावों को खारिज करता आया है. रूस अपने हमले को यूक्रेन में 'विशेष अभियान' कहता है.

    ज़ेलेंस्की ने कहा, "रूस के राष्ट्रपति ही हर फ़ैसला करते हैं. अगर हम इस उनके बिना इस युद्ध को समाप्त करने की बात कर रहे हैं, तो ये निर्णय नहीं लिया जा सकता है."

    उन्होंने कहा, "मैं सिवाय राष्ट्रपति के रूसी संघ के किसी भी अधिकारी के साथ बातचीत नहीं करूंगा वो भी तब जब वार्ता सिर्फ़ एक मुद्दे पर हो, कि युद्ध कैसे रोका जाए. इसके अतिरिक्त किसी अन्य मुद्दे पर वार्ता का कोई अर्थ नहीं."

    बीते सप्ताह ही ज़ेलेंस्की ने यूक्रेनी टेलीविज़न चैनल पर कहा था कि बिना कूटनीति के इस युद्ध पर विराम लगाना असंभव है.

  5. जापान में 'क्वॉड' देशों की बैठक शुरू होने पर क्या बोले पीएम मोदी

    नरेंद्र मोदी

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    जापान में क्वॉड देशों की बैठक शुरू हो गई है. शुरुआती भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस समूह ने बहुत कम समय में अपनी अहम जगह बना ली है.

    इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "इतने कम समय में क्वॉड समूह ने विश्वस्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है. आज क्वॉड का दायरा व्यापक हो गया है और स्वरूप प्रभावी हो गया है. हमारा आपसी विश्वास, दृढ़ संकल्प लोकतांत्रिक शक्तियों को नई ऊर्जा और उत्साह दे रहा है."

    "क्वॉड के स्तर पर हमारे आपसी सहयोग से एक मुक्त, खुला और समावेशी हिंद प्रशांत क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल रहा है, जो हम सभी का साझा उद्देश्य है."

    पीएम मोदी ने क्वॉड समूह की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, "कोविड-19 की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमने टीका वितरण, जलवायु कार्रवाई, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, आपदा में प्रतिक्रिया, आर्थिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में आपसी समन्वय बढ़ाया है. इसने हिंद-प्रशांत में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित हो रही है."

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    क्वॉड चार देशों का समूह है जिसमें भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं. चीन की आक्रामकता के मद्देनज़र मूल तौर पर ये समूह खुले और मुक्त हिंद प्रशांत क्षेत्र पर ज़ोर देता है.

  6. यूक्रेन को हाई-टेक हथियार भेजने पर राज़ी हुए US सहित 20 से अधिक देश

    लायड ऑस्टिन

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    अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि यूक्रेन की सेना की मदद के लिए करीब 20 देश अतिरिक्त हथियार देने के लिए आगे आए हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सोमवार को दुनियाभर के करीब 50 देशों के नेताओं ने वर्चुअल बैठक की और यूक्रेन को हरपून लॉन्चर-मिसाइल समेत कई एडवांस्ड हथियार देने पर सहमति जताई है.

    बैठक के बाद ऑस्टिन ने मीडिया के सामने डेनमार्क के प्रति आभार जताया, जिसने यूक्रेन को हरपून ऐंटी शिप मिसाइलें देने का वादा किया है. ऐसा माना जा रहा है कि इससे यूक्रेन की हमला करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

    अमेरिका के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल मार्क मिली ने भी कहा कि अधिकारियों के बीच अमेरिकी हथियार ट्रेनरों को यूक्रेन भेजने पर विचार-विमर्श जारी है. हालाँकि, उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि फिलहाल अमेरिका अपने सैनिकों को युद्ध के लिए नहीं भेजेगी.

    यूक्रेन में रूसी हमले से पहले ही अमेरिका ने वहां मौजूद अपने कुछ सैनिकों को वापस बुला लिया था. हालाँकि, मिली ने ये भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन में अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा के लिए कुछ सैनिकों को कीएव भेजा जा सकता है.

    अमेरिका ने कीएव में अपने दूतावास को आंशिक तौर पर खोला है. तबसे ही ये सवाल किए उठ रहे हैं कि इसकी सुरक्षा के लिए क्या अमेरिका समुद्री सुरक्षा बल को वापस यूक्रेन भेजेगा. यूक्रेन में स्पेशल ऑपरेशन फोर्स भेजे जाने की संभावना से भी जनरल मिली ने इनकार किया.

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