ज्ञानवापी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले की सुनवाई अब
सिविल कोर्ट के बजाय ज़िला अदालत करेगी. साथ ही अदालत ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई
उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के अनुभवी और वरिष्ठ जज को करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे में दख़ल देने से मना करते हुए
यह भी कहा कि हिंदू पक्ष की ओर से दाख़िल मामला सुनवाई के लायक है या नहीं, इसका फ़ैसला
ज़िला अदालत ही करेगी.
अपने फ़ैसले में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इस मामले की जटिलता और संवेदनशीलता
को देखते हुए हमारा मानना है कि इस मामले की सुनवाई अनुभवी और सीनियर जज द्वारा होनी
चाहिए. इसलिए हम इस मामले को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीज़न से लेकर वाराणसी
के ज़िला जज के पास भेजने का आदेश देते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ज़िलाधिकारी को निर्देश देते हैं कि वो नमाज़ अता करने वालों के वज़ू करने के लिए परिसर में पर्याप्त सुविधाओं का इंतज़ाम करें.
फ़ैसले के बाद समाचार एजेंसी एएनआई ने हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन से बातचीत की. एडवोकेट जैन ने बताया है कि परिसर में पाए गए शिवलिंग की सुरक्षा के लिए 17 मई यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को दिया गया अंतरिम फ़ैसला आगे भी बना रहेगा. उन्होंने कहा, 'वज़ू का इंतज़ाम किया जाएगा. हम इस फ़ैसले से बहुत ख़ुश हैं.'
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ़्ते में करेगी. अदालत ने कहा कि अंतरिम आदेश अगले 8 हफ़्तों तक प्रभावी रहेगा.
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. खंडपीठ के बाक़ी दो जज जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस हरसिम्हा हैं.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वाराणसी की ट्रायल कोर्ट के सुनवाई करने पर शुक्रवार तक के लिए रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वाराणसी की अदालत अभी इस मामले पर कोई आदेश न दे.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर मंगलवार यानी 17 मई को सुनवाई शुरू की थी. यह सुनवाई ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण के ख़िलाफ़ मस्जिद प्रबंधन की ओर से दाख़िल याचिका पर हो रही है.
मंगलवार को कोर्ट ने कहा था कि ज्ञानवापी मस्जिद में नमाज़ अता करने और नमाज़ियों की संख्या पर कोई रोक नहीं होगी. साथ ही उस जगह को वाराणसी प्रशासन सुरक्षित रखे, जहाँ शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है.
बनारस कोर्ट में गुरुवार को जमा हुई सर्वे रिपोर्ट
उधर बनारस में गुरुवार को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण की रिपोर्ट बनारस सिविल कोर्ट को सौंप दी गई. एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने गुरुवार सुबह सवा 10 बजे कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी.
विशाल सिंह ने बीबीसी को बताया था कि परिसर की वीडियोग्राफ़ी डेटा मेमोरी कार्ड के रूप में कोर्ट को सौंप दी गई है. उनके अनुसार, सर्वे की रिपोर्ट को दोनों पक्षों की मौजूदगी में खोला भी जा सकता है.
उन्होंने बताया कि दूसरे एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र ने ज्ञानवापी परिसर के बाहर की रिपोर्ट तैयार की है, जबकि उन्होंने उसके अंदर की रिपोर्ट बनाई है.
उनके अनुसार, अजय कुमार मिश्र ने 6 और 7 मई को हुए सर्वेक्षण की रिपोर्ट सौंपी है, जबकि उन्होंने 14, 15 और 16 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट सौंपी.