ज्ञानवापी मस्जिद पर वाराणसी कोर्ट के फ़ैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह इस मामले में विवाद सुलझाए जाने तक यथास्थिति को बनाए रखने का आदेश दे.
इससे पहले वाराणसी की एक अदालत
ने गुरुवार को अहम फ़ैसला देते हुए ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे की
इजाज़त दे दी थी. लेकिन अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा है.
लाइव लॉ की ख़बर के
अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने चीफ़ जस्टिस के सामने वाराणसी कोर्ट के फ़ैसले को लेकर याचिका दायर की है.
अहमदी ने कहा- वाराणसी
के ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर सर्वे कराने का आदेश दिया गया है. यह उपासना स्थलअधिनियम के
तहत आता है.अब कोर्ट ने यहाँ सर्वे कराने के लिए कमिश्नर को आदेश दिया है.
इस पर सीजेआई ने कहा– ठीक है, मैं
देखता हूँ.
अहमदी ने कोर्ट से अपील की कि वे इस
मामले में विवाद सुलझाए जाने तक यथास्थिति को बनाए रखने का आदेश दें.
इस पर सीजेआई एनवी रमन्ना ने कहा कि उन्हें नहीं पता मामला क्या है, क्योंकि उन्होंने
संबंधित मामले के कागज़ात नहीं देख हैं.
सीजेआई ने कहा, “मैं कुछ भी नहीं जानता हूँ,
ऐसे में मै ऑर्डर कैसे पास कर दूं. मुझे देखने दीजिए, मैं पढ़ूँगा और फिर आदेश
दूंगा.”
वाराणसी कोर्ट ने क्या आदेश दिया था
गुरुवार को वाराणसी की अदालत ने मस्जिद में सर्वे करने की इजाज़त दी थी और इसके लिए 17 मई तक का समय तय किया गया है.
वहीं, कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार को हटाने की मांग को भी खारिज कर दिया है.
ज्ञानवापी मस्जिद में पिछले शुक्रवार को सर्वे और वीडियोग्राफी का काम किया जा रहा था, जिसे लेकर विवाद पैदा हो गया था.
मस्जिद के पीछे चबूतरे में माँ श्रृंगार गौरी और दूसरे देवी-देवताओं के सत्यापन और उनके अस्तित्व को स्थापित करने के लिए शुक्रवार दोपहर को कोर्ट से नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर ने निरीक्षण शुरू किया था.
लेकिन शनिवार को एडवोकेट कमिश्नर की निष्पक्षता को लेकर अंजुमन इन्तिज़ामिया मसाजिद के वकीलों ने अदालत में अर्ज़ी दाखिल की थी. उनकी मांग की थी कि अजय कुमार को हटा कर कोर्ट या तो ख़ुद निरीक्षण करे या फिर किसी दूसरे वरिष्ठ वकील से करवाए.
हिंदू याचिकाकर्ताओं के वकील मदन मोहन यादव ने बताया कि सर्वे के लिए दो और वकीलों को कमिश्नर के तौर पर नियुक्त किया गया है. उन्हें 17 मई तक रिपोर्ट सौंपनी होगी.
कोर्ट का कहना है कि अगर मस्जिद का ताला बंद कर दिया गया है तो ज़िला प्रशासन को पूरा अधिकार होगा की वो ताला खुलवाकर या तुड़वाकर कमीशन की कार्रवाई कराए.
निरीक्षण कराने की व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी ज़िला मजिस्ट्रेट, पुलीस कमिश्नर की होगी. उत्तर प्रदेश डीजीपी और मुख्य सचिव को भी निर्देश हैं कि वो कार्रवाई की निगरानी करें.
कोर्ट के आदेश के मुताबिक निरीक्षण का समय सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक तय किया गया है. निरीक्षण रोज़ किया जाएगा.