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हरियाणा में करनाल की पुलिस ने चार संदिग्ध चरमपंथियों को हिरासत में लेने का दावा किया है. पुलिस का कहना है कि उनके पास से बड़ी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद किए गए हैं.
करनाल के पुलिस अधीक्षक ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि अभियुक्त पाकिस्तान में एक व्यक्ति से संपर्क में थे, जिसने उन्हें तेलंगाना के आदिलाबाद में ये हथियार और विस्फोटक ले जाने को कहा था. उन्होंने बताया कि इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की गई है. पुलिस अधीक्षक ने ये भी दावा किया है कि अभियुक्त गुरप्रीत को सीमापार से भेजा गया विस्फोटक मिला था. ये विस्फोटक ड्रोन के माध्यम से फ़िरोज़पुर ज़िले में भेजे गए थे.
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उन्होंने ये भी दावा किया कि पहले अभियुक्तों ने नांदेड तक ये विस्फोटक पहुँचाए भी थे. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि अभियुक्त उस समय विस्फोटक के साथ पकड़े गए, जब वे हरियाणा से गुज़र रहे थे. उन्होंने जानकारी दी कि पुलिस इस मामले में विस्तृत जाँच कर रही है.
देशद्रोह क़ानून पर अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को क्या दी है सलाह?
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भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि
देशद्रोह क़ानून को ख़त्म नहीं किया जाना
चाहिए.
हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए दिशा निर्देश जारी करने की आवश्यकता
है.
सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी
जनरल ने कहा कि यह देखने की ज़रूरत
है कि किसकी अनुमति है और किसकी अनुमति नहीं है और इस क़ानून के तहत क्या कुछ ध्यान में रखे जाने की ज़रूरत है.
अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ”आपने
देखा है कि मौजूदा समय में देश में क्या हो रहा है. कल, किसी
को हिरासत में लिया गया था क्योंकि वे हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते थे, अब उन्हें
ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है.''
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वेणुगोपाल ने सांसद नवनीत राणा और उनके पति से जुड़े विवाद के संदर्भ में कोर्ट को सूचित किया.
सॉलिसिटर जनरल ने देशद्रोह क़ानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामले में जवाब पेश करने के लिए कोर्ट से समय मांगा था.
अब सुप्रीम कोर्ट 10 मई को देशद्रोह के अपराध की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच को सौंपे या नहीं, इस पर सुनवाई करेगा.
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को देशद्रोह क़ानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं का जवाब देने के लिए 9 मई तक का समय दिया है.
अशोक गहलोत ने क्यों कहा- अगर अमित शाह जी में दम है....
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश में हुए सांप्रदायिक दंगों के लिए बीजेपी को घेरा है. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीजेपी हर जगह आग लगा रही है.
उन्होंने कहा कि वे किसी भी क़ीमत पर राजस्थान में हिंसा नहीं होने देंगे. राजस्थान के करौली में रामनवमी के दौरान और जोधपुर में ईद के दौरान हिंसा हुई थी.
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अशोक गहलोत ने कहा कि करौली में दंगों के लिए जो तरीक़ा अपनाया गया, वही तरीक़ा सात राज्यों में था. उन्होंने कहा- रामनवमी के जुलूस पर लोगों के फूल बरसाए. सात राज्यों में दंगे हुए. सातों राज्यों में दंगे हुए, फिर बुलडोज़र चले. करौली में दंगों के लिए जो तरीक़ा अपनाया गया, वही तरीक़ा सात राज्यों में था. इसकी भी जाँच होनी चाहिए. अशोक गहलोत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा- अगर अमित शाह जी के अंदर दम है, तो गृह मंत्रालय कमेटी बनाए, उसमें हाई कोर्ट के जज हों, सुप्रीम कोर्ट के जज हों. करौली के बाद जो सात राज्यों में दंगे भड़के, उसकी जड़ में क्या था. क्या भावना थी, क्या प्लानिंग थी- तमाम चीज़ें सामने आ जाएँगी. आगे दंगे होने रुक जाएँगे. ये मेरा मानना है.
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उन्होंने दावा किया कि बीजेपी वाले एजेंडा बना रहे हैं और लड़ने दे रहे हैं. अशोक गहलोत ने कहा- इनकी दंगे भड़काने की योजना थी, करौली, उसके बाद जोधपुर में, राजगढ़ में इनका अपना बोर्ड है वहाँ पर भी. हम लोगों ने पूरा प्रयास करके समय पर कार्रवाई की, गिरफ़्तारियाँ की गईं.
लालू यादव ने लाउडस्पीकर मामले पर कहा- हनुमान चालीसा पढ़ना है, तो मंदिर में पढ़ो
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एम्स से छुट्टी मिलने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने लाउडस्पीकर मामले में बीजेपी पर निशाना साधा है.
पिछले दिनों लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के एक मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने ज़मानत दे दी थी.
लेकिन तबियत ख़राब होने के कारण वे एम्स में भर्ती थे.
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एम्स से छुट्टी मिलने के बाद लालू यादव अपने बेटी मीसा भारती के दिल्ली स्थित आवास पर पहुँचे. बाद में पत्रकारों के साथ बातचीत में लाउडस्पीकर मामले में लालू प्रसाद यादव ने कहा- ये बहुत ग़लत बात है. ये देश का टुकड़ा करने के बराबर है. आप क्यों जा रहे हो मस्जिद के पास. हनुमान चालीसा पढ़ना है, तो मंदिर में पढ़ो. लोगों को इरिटेट किया जा रहा है कि लोग रिएक्ट करें और देश में दंगा फसाद हो. देश के लिए ये बहुत ख़राब हो रहा है. पिछले कई महीनों से देश के कई राज्यों में लाउडस्पीकर को लेकर विवाद चल रहा है.
जोधपुर में हो रहे हैं हालात सामान्य, लेकिन इंटरनेट सेवाएँ अभी रहेंगी बंद
....में
Author, मोहर सिंह मीणा
पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
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राजस्थान के जोधपुर में अब हालात सामान्य होते नज़र आ रहे हैं. यहाँ ईद से पहले की देर रात और फिर ईद की
नमाज़ के बाद हिंसा हुई थी.
हालाँकि, अगले आदेश तक
इंटरनेट सेवाएँ बंद रहेंगी और 10 पुलिस थानों के इलाकों में कर्फ़्यू की अवधि बढ़ा
कर 6 मई मध्यरात्रि तक कर दी गई है.
आला अधिकारियों की एक टीम अभी भी जोधपुर में
हैं.
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर हवा सिंह घुमरिया ने बीबीसी
को बताया, "कर्फ़्यू उल्लंघन में पकड़े
गए लोगों को ज़मानत पर छोड़ा गया है. उपद्रव करने वालों में से किसी
की ज़मानत नहीं हुई है. कुछ अभियुक्तों को जेल भेजा गया है."
जोधपुर पश्चिम के एसीपी चक्रवर्ती सिंह ने 4 मई
को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बताया था कि सीसीटीवी फुटेज और अभय कमांड सेंटर की फुटेज के
आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों को चिन्हित कर गिरफ्तार जा रहा है.
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एसीपी चक्रवर्ती ने बताया कि बीती रात से लेकर सुबह तक 20 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
राज्य के पुलिस महानिदेशक मोहन लाल लाठर ने 4 मई को बयान जारी कर बताया कि अब तक कुल 141 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इनमें से 133 को धारा 151 में और आठ को अन्य मुक़दमों में गिरफ़्तार किया गया है.
जोधपुर में हुए उपद्रव में नौ पुलिसकर्मी चोटिल हुए हैं.
आपसी सौहार्द के लिए दोनों पक्षों के लोगों की बैठक जारी हैं और शहर में शांति के बावजूद एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है.
प्रशांत किशोर राजनीतिक पार्टी बनाने के मामले पर क्या बोले?
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बिहार की राजधानी पटना में पत्रकारों से मुख़ातिब हुए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी आगे की योजना पर विस्तार से बात रखी.
प्रशांत किशोर बीजेपी, तृणमूल कांग्रेस, जदयू जैसी पार्टियों के लिए काम कर चुके हैं.
अपने संबोधन में प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार को
अग्रणी बनाने के लिए एक नई सोच और प्रयास की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि ऐसा कोई
दावा नहीं कर सकता है कि कोई एक ही व्यक्ति इसे अमल में ला सकता है. मैं ऐसा मानता
हूँ कि जो लोग बिहार के मुद्दों को समझते हैं और जिनमें इम मुद्दों को सुलझाने की क्षमता है, वे सारे
लोग एक साथ आएँ और साथ में प्रयास करने की ज़रूरत है."
राजनीतिक दल बनाने की बात पर प्रशांत किशोर ने कहा कि आज वे किसी राजनीतिक दल की घोषणा नहीं करने जा रहे.
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उन्होंने कहा, "मैं आज कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बना रहा हूँ. लेकिन जिन लोगों को मैं संबोधित कर रहा हूँ, मेरा प्रयास है कि मैं उन सभी लोगों से मिलूँ."
उन्होंने कहा, "मीडिया में कयास लगाए जा रहे है कि मैं पार्टी बना रहा हूँ, मैं ऐसा कुछ नहीं करने जा रहा हूँ. मैं यहाँ के मुद्दे समझने वाले, यहाँ की मिट्टी को समझने वालों को एक मंच पर खड़ा करना मेरा पहला काम होगा. आने वाले तीन-चार महीनों में इनमें से ज़्यादातर लोगों से मिलने वाला हूँ. गुड गवर्नेंस की सोच को बिहार में ज़मीन पर लाने के लिए जो ज़रूरत है, उस संबंध में मैं उनसे मिलने वाला हूँ. इस संबंध में मैंने पिछले तीन दिनों में क़रीब 150 लोगों से मुलाक़ात की है. मेरी पहली घोषणा ये है कि अगले तीन से चार महीनों के अंदर 17-18 हज़ार लोगों से मिलना मेरा लक्ष्य है."
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर इन सब लोगों से मिलकर कोई पार्टी बनती भी है, तो वो सिर्फ़ प्रशांत किशोर की पार्टी नहीं होगी.
प्रशांत किशोर ने बताया कि वह पश्चिमी चंपारण से 3000 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू करेंगे.
यूक्रेन को लेकर रूस ने इस दावे को किया ख़ारिज
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रूस ने उन अटकलों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है
कि रूस आने वाले दिनों में यूक्रेन पर ‘पूरा-हमला’ यानी चौतरफ़ा युद्ध की घोषणा कर देगा.
रूस ने इस दावे को पूरी तरह से ‘बकवास’ क़रार दिया है.
हालांकि दो महीने से अधिक समय से जारी यूक्रेन हमले को भी रूस ‘युद्ध’ मानने से इनकार करता रहा है.
रूस यूक्रेन पर अपने जारी हमले को विशेष सैन्य अभियान बताता है. लेकिन पश्चिमी देशों के अधिकारियों का अनुमान है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 9 मई को विक्ट्री-परेड के दिन सैन्य कार्रवाई को बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने यह स्पष्ट किया है कि ‘इन अफ़वाहों में कोई सच्चाई नहीं’ है.
ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने बीते सप्ताह कहा था कि विक्ट्री परेड के दिन यूक्रेन में नए सिरे से सैन्य कार्रवाई की घोषणा की जा सकती है.
एलबीसी रेडियो से उन्होंने कहा था, “मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा और मुझे इस संबंध में कोई जानकारी भी नहीं है. इस संबंध में जो भी स्पष्ट होना है वो आने वाली मई की तारीख़ को साफ़ हो जाएगा.”
कई रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि वार्षिक परेड के दिन मॉस्को दक्षिणी यूक्रेन के मारियुपोल में अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई की भी योजना बना रहा है.
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन बातों पर विराम लगाने की कोशिश की है, जिसमें कहा जा रहा था कि रूस 9 मई को यूक्रेन के ख़िलाफ़ पूरी तरह से जंग छेड़ देगा. नौ मई 1945 को ही रूस को नाज़ी जर्मनी पर फतह हासिल हुई थी.
लेकिन ख़बरें हैं कि रूस उस दिन मारियोपोल में विजय दिवस के समारोह का आयोजन कर सकता है.
कोरोना अपडेट- भारत में बीते 24 घंटों में तीन हज़ार से अधिक नए मामले
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भारत में बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 3275 नए मामले
सामने आए हैं. इसके अलावा बीते एक दिन में 3010 लोग इलाज के बाद ठीक हुए हैं.
इस दौरान 55 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो गयी है.
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देश में कुल एक्टिव केस- 19719
कुल मौतें- 523975
कुल वैक्सीन- 1,89,63,30,362
इलाज के बाद कुल ठीक हुए लोग- 42547699
फ्रांस पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय
दौरे के आख़िरी दिन फ्रांस पहुंचे थे. जहाँ उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल
मैक्रों से मुलाक़ात की. हालांकि दोनों नेताओं के बीच यह मुलाक़ात बेहद संक्षिप्त
थी.
पीएम मोदी ने ट्वीट किया है- “मेरी फ्रांस की यात्रा हालांकि बहुत संक्षिप्त थी लेकिन यह बेहद उपयोगी रही.
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और मुझे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला.
जिस गर्मजोशी से उन्होंने और उनकी सरकार ने मेरा स्वागत किया मैं उसके लिए उन्हें
धन्यवाद कहता हूँ.”
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पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल से एक अन्य ट्वीट में लिखा गया है कि मेरे दोस्त और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलकर हमेशा ही अच्छा लगता है. हमने विस्तार से द्विपक्षीय मामलों और वैश्विक मुद्दों पर बात की. भारत और फ्रांस विकास के साथी हैं और हमारी साझेदारी अलग-अलग सेक्टर्स में फैली हुई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र के फ्रांस दौरे और उनके साथ मुलाक़ात पर मैक्रों ने भी ट्वीट किया है.
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मैक्रों ने ट्वीट किया, “हमने हाल में चल रहे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों पर चर्चा की.साथ ही अपनी रणनीतिक साझेदारी पर भी. फ़ूड सिक्यॉरिटी के मुद्दे पर भी बात हुई. ”
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प्रधानमंत्री मोदी इस साल की अपनी पहली विदेश यात्रा से वापस लौट आए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन यूरोपीय देशों- जर्मनी, डेनमार्क, फ्रांस की तीन दिनों की यात्रा के पहले चरण में सोमवार को जर्मनी पहुँचे थे, उसके बाद डेनमार्क और अंतिम दिन फ्रांस.
पीएम की ये यात्रा ऐसे वक़्त हुई, जब यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर पश्चिमी देश लगातार रूस की आलोचना कर रहे हैं.
यूक्रेन को हथियार भेज रहे हैं और भारत पर दबाव बना रहे हैं कि वो भी आलोचना का हिस्सा बने. इसके अलावा जर्मनी सहित पश्चिमी देश रूस के तेल, कोयले और गैस पर भारी निर्भरता कम करने के लिए क़दम भी उठा रहे हैं.
मांसाहार पर भारत में हमले को लेकर सिविल सोसाइटी की ओर से जताई गई चिंता
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कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों, पोषण-विज्ञानी, अभिभावकों, वकीलों और शोधकर्ताओं के एक समूह ने हाल में खान-पान से जुड़ी आदतों को लेकर हुए विवाद और हमलों पर चिंता ज़ाहिर की है.
इस समूह ने मांस खाने को लेकर हुए हालिया विवाद, मीट बेचने को लेकर हुए हमलों और संबंधित दुकानों को बंद करने के लिए लागू किए गए क़ानून को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर की है.
इस समूह का दावा है कि खाने-पीने को लेकर लोगों की पसंद और उनकी आजीविका में हस्तक्षेप के गंभीर सामाजिक, आर्थिक और सेहत संबंधी परिणाम हो सकते हैं.
यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है
जबकि दो दिन पहले ही, तीन मई को मध्य प्रदेश में गोहत्या के
आरोप में उग्र भीड़ ने आदिवासियों के एक गाँव पर हमला बोल दिया था. इस हमले में दो
लोगों की मौत हो गई जबकि एक अन्य शख़्स गंभीर रूप से घायल भी हुआ है.
इससे पहले अप्रैल महीने की शुरुआत में, हिंदुओं के पर्व नवरात्रि के दौरान दक्षिणी दिल्ली में मीट
की दुकानों को बंद करने का आदेश जारी किया गया था.
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'ज़रूरी है मांसाहार'
पत्र में कहा गया है कि अगर भारत में लोगों के पोषण के आधार पर बात करें तो जानवरों का मांस भारत के लोगों की पोषण संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने का एक अहम साधन है.
मौजूदा केंद्र सरकार, इससे जुड़ी दूसरी शाखाएं-दल, संबंधित मीडिया, न्यायपालिका और पुलिस इस प्रमुख पोषक खाद्य को आम लोगों की थाली से दूर करने के लिए प्रतिबद्ध नज़र आती है.
इस समूह ने चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई के कई मायनों में प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं.
मीट की दुकानों पर प्रतिबंध की मांग अब देशव्यापी होती जा रही है. एक अप्रैल 2022 को उत्तर प्रदेश में नवरात्रि के दौरान, पूरे नौ दिन के लिए मीट की दुकानों को बंद रखने की मांग की गयी. साथ ही यह धमकी भी दी गयी कि जो इस आदेश का पालन नहीं करेगा, उसकी दुकान को बुलडोज़र से तोड़ डाला जाएगा.
बीजेपी सासित योगी आदित्यनाथ की सरकार वाले उत्तर प्रदेश में पहले दिन से मीट की दुकानों पर हमले होते रहे हैं, झारखंड और कर्नाटक में भी ऐसे मामले सुनने में आते रहे हैं लेकिन हाल के हफ़्तों में इस तरह की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही है. देश के दूसरे हिस्सों से भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं.
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'स्वच्छता अभियान'
मीट और मीट बेचने वालों को गंदगी, बीमारी और अस्वच्छता से जोड़कर देखा जाता है और इसीलिए इससे जुड़ी दुर्भावना लोगों को बहुत जल्दी प्रबावित करती है, ख़ासतौर पर एक विशिष्ट वर्ग को और समुदाय को. ऐसे में जब मीट खाने वालों और बेचने वालों के साथ जब मॉब लिंचिंग, हिंसा, दुकानों को नष्ट करने और दुकानदार को प्रताड़ित करने जैसी किसी घटना को अंजाम दिया जाता है तो उसे ‘स्वच्छता’ का नाम दे दिया जाता है. हमला करने वाले इस स्वच्छता अभियान के तौर पर जताते हैं.
मीट पर प्रतिबंध लगाने की मांग या दुकानों को बंद किये जाने का असर लगभग हर वर्ग पर ही होता है लेकिन इससे सबसे अधिक वह वर्ग प्रभावित होता है जो पहले से आर्थिक स्तर पर पिछड़ा हुआ है. कई राज्यों में मवेशियों को मारे जाने को लेकर कड़े प्रतिबंध लगा दिये गए हैं और इसे अवैध करार दिया गया है, जिससे एक वर्ग के लिए संकट गहराता जा रहा है.
मांस खाने को लेकर और बेचने को लेकर सरकार और उससे जुड़ी संस्थाओं के हस्तक्षेप को लेकर 102 लोगों के इस समूह ने अपनी चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि यह हस्तक्षेप नागरिकों के भोजन और पोषण के अधिकार पर हमला है. इस समूह में ज्यां ड्रेज़, सेंटर फ़ॉर हिस्टोरिकल स्टडीज़(जेएनयू) की रिटायर्ड प्रोफ़ेसर जानकी नायर, आईआईटी बॉम्बे के न्यूट्रीशन रिसर्चर डी पार्थासारथी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ हैदराबाद के देशदीप धनकर, एडवोकेट अवनी चोकसी जैसे कई नाम शामिल हैं.
102 लोगों के इस समूह के अलावा पांच संस्थाओं ने भी इस पत्र को अपना समर्थन दिया है.
इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ ईशनिंदा के मामले से पार्टी नेता चिंतित
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पाकिस्तान की पूर्व
मानवाधिकार मंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) की नेता शिरीन मज़ारी ने संयुक्त राष्ट्र से देश
के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ ईशनिंदा के मामले में दख़ल देने की मांग
की है. पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार डॉन और एक्सप्रेस ट्रिब्यून इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है.
पिछले महीने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ सऊदी अरब के दौरे पर गए थे. इस दौरे में शहबाज़ शरीफ़ और उनके प्रतिनिधिमंडल के ख़िलाफ़ मदीना
में नारेबाज़ी हुई थी. नारेबाज़ी का आरोप इमरान ख़ान के समर्थकों पर है.
इस मामले मामले में पाकिस्तान की फ़ैसलाबाद पुलिस ने देश के पूर्व
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और उनकी पार्टी पीटीआई के मुख्य नेताओं समेत अन्य 100 लोगों पर ईशनिंदा का मामला दर्ज किया है.
शिरीन मज़ारी ने कहा कि जब से इमरान ख़ान सरकार को ‘योजना के तहत’ सत्ता से हटाया गया है और शहबाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता पर काबिज़
हुई है, तभी से पाकिस्तान गंभीर राजनीतिक संकट से जूझ रहा है.
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की ख़बर के अनुसार, मज़ारी ने कहा कि
शहबाज़ शरीफ़ के ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के कई मामले हैं और वह ज़मानत
पर बाहर हैं.
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संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैशलेट को लिखे एक पत्र में मज़ारी ने राना सनाउल्लाह को गृह मंत्री के रूप में नियुक्त करने के सरकार के फ़ैसले पर विरोध जताते हुए उन्हें "आतंकवादी समूहों का सहयोगी" बताया है.
डॉनकी ख़बर के अनुसार, यह पत्र दो मई को लिखा गया है.
मज़ारी ने अपने पत्र में बीते हफ़्तों में पाकिस्तान के राजनीतिक उथल-पुथल का भी ज़िक्र किया है.
उन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव, नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर द्वारा प्रस्ताव को अस्वीकार करने और मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप का भी ज़िक्र किया है.
पत्र में यह भी लिखा गया है कि उस वक़्त से पाकिस्तान में इमरान ख़ान की पार्टी की रैलियों में जुट रही भीड़ से जनता का ग़ुस्सा दिखाई देता है, जो इमरान ख़ान के प्रति जनाधार का सूचक है.
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