भारत का तेल आयात बिल एक साल में 62 से 119 अरब डॉलर पहुँचा

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भारत कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर 85.5% है.
31 मार्च को ख़त्म हुए वित्तीय साल में भारत का कच्चे तेल का आयात बिल लगभग दोगुना हो गया है. ये बिल 119 अरब डॉलर पहुँच गया है. कच्चे तेल की मांग और यूक्रेन में युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर क़ीमतों में उछाल आया है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आँकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल खपत और आयात करने वाला देश है.
भारत ने अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक 119.2 अरब डॉलर ख़र्च किए हैं, वहीं पिछले साल ये ख़र्च 62.2 अरब डॉलर था.

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मार्च महीने में तेल की क़ीमतें 14 साल में सबसे अधिक थीं. ऐसे में भारत ने इस महीने में तेल आयात पर 13.7 अरब डॉलर ख़र्च किए. अगर मार्च 2021 से तुलना की जाए, तो उस समय ये खर्च 8.4 अरब डॉलर था.
कच्चे तेल की क़ीमतें जनवरी में बढ़ने लगीं और मार्च महीने में 140 डॉलर प्रति बैरल को पार गईं. इसके बाद क़ीमतों में कमी आई हैं. फ़िलहाल कच्चे तेल की क़ीमत 106 डॉलर प्रति बैरल है.
PPAC के अनुसार, भारत ने 2021-22 में 21.2 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया, जो 2020-21 में 19.6 करोड़ टन था.



















