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रूस के साथ 'स्थायी सामान्य व्यापार संबंधों' को रद्द करेगा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि यूक्रेन पर हमला करने की सज़ा में रूस के साथ "स्थायी सामान्य व्यापार संबंधों" को रद्द करेगा अमेरिका.

लाइव कवरेज

रजनीश कुमार, विभुराज, कमलेश मठेनी and अभय कुमार सिंह

  1. इंटरपोल से रूस को निकालने की मांग ख़ारिज, पर एजेंसी ने लिया बड़ा फ़ैसला

    दुनिया भर की पुलिस एजेंसियों के संगठन इंटरपोल ने कहा है कि अन्य देशों में मौजूद अपने वॉन्टेड अपराधियों को हिरासत में लिए जाने के रूस के अनुरोध पर विशेष प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की जाएगी.

    बीबीसी रूसी सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के आवेदन पर केवल इंटरपोल के महासचिव का कार्यालय ही निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगा. वहां से मंज़ूरी मिलने के बाद ही रूस के अनुरोध को अन्य देशों को भेजा जाएगा.

    इस फ़ैसले का मक़सद इंटरपोल का इस्तेमाल रूस राजनीतिक मक़सद से न कर पाए, इसे सुनिश्चित करना बताया जा रहा है.

    इंटरपोल ने एक बयान में कहा है, "इंटरपोल के कामकाज की बुनियाद तटस्थता पर आधारित है."

    रूस को इंटरपोल से बाहर निकालने की कई देशों ने अपील की थी लेकिन अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी ने उसे खारिज कर दिया.

  2. पंजाब: गवर्नर से मिलने से पहले भगवंत मान की दिल्ली में होगी केजरीवाल से मुलाकात

    पंजाब में आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मिलने दिल्ली आएंगे.

    भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल की ये मुलाकात आम आदमी पार्टी को पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक कामयाबी के बाद हो रही है.

    संगरूर में संवाददाताओं से बात करते हुए भगवंत मान ने कहा कि पंजाब चुनाव में पार्टी की जबर्दस्त जीत पर बधाई देने के लिए अरविंद केजरीवाल से मिलने जा रहे हैं.

    सरकार गठन के सवाल पर उन्होंने कहा कि "मैं पंजाब के गवर्नर से कल मिलूंगा. आज उनसे मिलने के लिए समय मांगूंगा."

    भगवंत मान ने कहा है कि उनका शपथ ग्रहण समारोह नवांशहर में भगत सिंह के पैतृक गांव खटकर कलां में आयोजित किया जाएगा."

  3. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत, योगी की है या मोदी की?

    37 साल बाद उत्तर प्रदेश में ऐसा हो रहा है कि लगातार दूसरी बार बीजेपी सत्ता में आती दिख रही है.

    यूपी का ये चुनाव भले ही बीजेपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ा हो, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने भी चुनाव प्रचार में कमी नहीं की.

    एक तरफ़ योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों का दौरा किया और चुनाव के दौरान 200 से ज़्यादा रैलियां की, वहीं पीएम मोदी ने 27 चुनावी रैलियों को संबोधित किया.

    बीजेपी ने जितने ज़ोर-शोर से सीएम योगी के 'बुलडोज़र बाबा' की छवि को भुनाने की कोशिश की उतना ही केंद्र के फ्री राशन की स्कीम और नमक को भी भुनाया.

    पाँच साल से सत्ता में होने के बावजूद, बढ़े हुए वोट शेयर के साथ बीजेपी अगर सत्ता में वापसी करती है, तो सेहरा किसके सिर बांधा जाएगा - अब चर्चा इसी बात की हो रही है.

  4. ब्रेकिंग न्यूज़, यूपी, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में बीजेपी की कामयाबी के बाद अहमदाबाद में पीएम मोदी का रोड शो

    उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक कामयाबी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात के अहमदाबाद में शुक्रवार को रोड शो कर रहे हैं.

    सामाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम मोदी दो दिनों की गुजरात यात्रा पर हैं. वे गुजरात में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.

    पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "गुजरात के लिए निकल रहा हूं. जहां आज और कल मैं कई कार्यक्रमों में शिरकत करूंगा. शाम चार बजे मैं पंचायत महासम्मेलन को संबोधित करूंगा, जहां पंचायती राज संस्थाओं के कई प्रतिनिधि शामिल होंगे."

  5. मायावती यूपी और पंजाब में एक-एक सीट जीतने के बाद बोलीं

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को महज़ एक सीट पर जीत मिली है.

    2007 में बहुजन समाज पार्टी अपने दम पर उत्तर प्रदेश की सत्ता में आई थी. 2017 में बीएसपी का वोट शेयर 22 फ़ीसदी था जो इस बार कम होकर 12.8% हो गया है.

    पंजाब में बीएसपी का शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन था. बीएसपी को पंजाब में एक सीट मिली है और वोट शेयर 1.7% रहा. पंजाब में भारत के सभी राज्यों की तुलना में दलितों का वोट शेयर सबसे ज़्यादा है. चुनाव के दौरान भी बीएसपी कैंपेन से बाहर रही थी.

    यूपी में बीजेपी का वोट शेयर 2017 में 39.7% था जो इस बार के चुनाव में बढ़कर 42% हो गया है. कहा जा रहा है कि बीएसपी का दलित वोट बीजेपी में शिफ़्ट किया है. 2007 में यूपी विधानसभा चुनाव में बीएसपी को 206 सीटों पर जीत मिली थी.

    यूपी चुनाव में क़रारी हार के बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को बयान जारी किया. अपने बयान में मायावती ने कहा, ''उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा की उम्मीद के विपरीत जो नतीजे आए हैं, उससे घबराकर पार्टी के लोगों को टूटना नहीं है. उसके सही कारणों को समझकर और सबक सीखकर हमें अपनी पार्टी को आगे बढ़ाना है और आगे चलकर सत्ता में जरूर आना है.''

    मायावती ने कहा, ‘’पूरी प्रदेश से मिले फीडबैक के अनुसार, जातिवादी मीडिया ने अपनी अनवरत गंदी साज़िशों और प्रायोजित सर्वे के साथ नकारात्मक प्रचार के ज़रिए मुस्लिम समाज के अलावा भाजपा विरोधी हिन्दू समाज को भी गुमराह किया है. ये प्रचार किया कि बीएसपी बीजेपी की बी टीम है. मीडिया ने प्रचार किया कि हम मज़बूती से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं.''

  6. ओवैसी बोले- यूपी में जीत 80-20 की है और यह माहौल लंबे समय तक रहेगा

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी इस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में ज़ोर शोर से लगे हुए थे. लेकिन उनकी पार्टी को मुसलमानों का भी वोट नहीं मिला.

    ओवैसी की पार्टी को महज़ 0.49% वोट मिला है. ओवैसी के ज़्यादातर उम्मीदवारों को पाँच हज़ार वोट भी नहीं मिले हैं.

    ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में कुल 100 उम्मीदवार उतारे थे. उन्होंने कोशिश की थी कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में दलित-मुसलमान फॉर्म्युला बन सके लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली.

    ओवैसी ने चुनावी नतीजे के बाद कहा, ''उत्तर प्रदेश की जनता ने बीजेपी को सत्ता सौंपी है और हम इसका सम्मान करते हैं. हमारी पार्टी के लोगों ने यूपी चुनाव में जो कड़ी मेहनत की, उनको धन्यवाद देता हूँ. उत्तर प्रदेश के जिन लोगों ने हमें वोट किया, उनके प्रति आभार जताते हैं. जो भी नतीजे आए हैं, वे हमारी चाहत के हिसाब से नहीं हैं. लेकिन हमारी कोशिश जारी रहेगी.''

    ओवैसी ने कहा, ''जो राजनीतिक पार्टी अपनी नाकामी छुपाने के लिए ईवीएम-ईवीएम कर रहे हैं. मैंने 2019 में भी कहा था कि ग़लती ईवीएम की नहीं है बल्कि लोगों के दिमाग़ में जो चिप डाल दी गई है, उसकी बड़ी भूमिका है. उन्हें कामयाबी ज़रूर मिली है लेकिन यह 80 और 20 की कामयाबी है. हम अपना काम पहले से करते आए हैं और करते रहेंगे. मैं अपनी पार्टी के लोगों से अपील करता हूँ कि हौसला बुलंद रखें.''

    80 बनाम 20 को लेकर ओवैसी ने कहा, ''जो नतीजे आए हैं, उनसे तो यही लगता है कि कोई वोट ट्रांसफर नहीं हुआ है. उत्तर प्रदेश में जो अल्पसंख्यक समाज है, उनको केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया है. आप जो भीड़ दिखा रहे थे, उसका क्या हुआ? मैंने पहले भी कहा था कि समाजवादी गठबंधन बीजेपी को नहीं हरा सकता है. मैं दोबारा ये उम्मीद करूंगा कि उन्हें कोई नहीं ठगेगा. अबकी बार चुनाव होगा तो हमारी बात पर लोग ग़ौर करेंगे.''

    ओवैसी ने कहा कि उन्होंने एक ख़ास समुदाय का वोट ले लिया लेकिन ये बहुरंगी गठबंधन की बात कर रहे थे. ओवैसी ने कहा कि यह 80 बनाम 20 मामला हुआ है और 80 बनाम 20 का माहौल भारत में बहुत लंबे समय से रहने वाला है.

  7. अरविंद केजरीवाल क्या कांग्रेस की जगह ले लेंगे?

    अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने पंजाब में प्रचंड जीत दर्ज की है. पंजाब की कुल 117 सीटों में से आप को 91 सीटों पर जीत मिली है.

    इस जीत के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आप की जीत इंक़लाब है और यह इंक़लाब पूरे देश में फैलेगा. केजरीवाल ने कहा कि अब देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है. अरविंद केजरीवाल ने साफ़ कहा कि उनकी पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपना विस्तार करेगी.

    केजरीवाल ने कहा, ''हमने 75 साल बर्बाद किए हैं. अब और समय बर्बाद करने का नहीं है. सभी को आम आदमी पार्टी में शामिल होना चाहिए. आप पार्टी नहीं इंक़लाब है. आम आदमी पार्टी भगत सिंह का सपना पूरा कर रही है.''

    आम आदमी पार्टी की पंजाब में जीत के बाद पार्टी नेता राघव चड्ढा ने कहा कि आप कांग्रेस की जगह लेगी. पंजाब में कांग्रेस को ही हराकर आप ने सत्ता हासिल की है. गोवा में भी आम आदमी पार्टी को दो सीटों पर जीत मिली है. कहा जा रहा है कि गोवा में भी आप ने कांग्रेस के वोट में ही सेंध लगाई है.

    पंजाब में जीत के बाद अरविंद केजरीवाल दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर आए थे. उनके साथ उनके कैबिनेट के मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन थे. हालांकि इससे पहले भी आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की थी लेकिन बहुत कामयाबी नहीं मिली थी.

    लेकिन इस बार पंजाब में आप की प्रचंड जीत के बाद पार्टी का हौसला बुलंद है. पहली बार आप की सरकार किसी ऐसे राज्य में बनी है, जहाँ केंद्र का दख़ल दिल्ली की तरह नहीं होगा.

    'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' ही 2012 में आम आदमी पार्टी बनी थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में आप ने 400 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. ख़ुद केजरीवाल भी नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बनारस से मैदान में थे. लेकिन आम आदमी पार्टी को केवल पंजाब में चार सीटों पर जीत मिली थी. इसके बाद से आम आदमी पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर आना ठहर गया था.

    2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को 70 में से 67 सीटों पर जीत मिली थी. इस जीत के बाद आप की उम्मीद बढ़ी थी लेकिन कुछ ही समय में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद से आम आदमी पार्टी कई राज्यों में चुनाव लड़ी लेकिन 2017 में केवल पंजाब में ही खाता खोलने में कामयाबी मिली थी. पंजाब में 2017 में आप को 20 सीटों पर जीत मिली थी.

    2020 में के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 62 सीटों पर जीत मिली थी. कहा जा रहा है कि पार्टी रातोरात कांग्रेस की जगह नहीं ले सकती है लेकिन कांग्रेस की जगह ख़ाली है और उसे आप भरने की क्षमता रखती है.

    आप की इस जीत के बाद कहा जा रहा है कि 2024 में विपक्ष की जगह क्या अरविंद केजरीवाल ले लेंगे? कांग्रेस की मनमोहन सरकार में क़ानून मंत्री रहे अश्विनी कुमार ने द हिन्दू से कहा है कि आप और टीएमसी वैकल्पिक राजनीतिक संवाद के अहम खिलाड़ी बन गई हैं.

  8. उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे पर पहली बार बोले अखिलेश

    उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे आने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया का इंतज़ार सबको था. इस बार समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में 111 सीटों पर जीत मिली है जबकि बीजेपी के खाते में 255 सीटें गई हैं. अखिलेश यादव को इस बार सत्ता का दावेदार माना जा रहा था. अखिलेश यादव ने एक दिन बाद शुक्रवार को ट्वीट कर नतीजे पर प्रतिक्रिया दी है.

    अखिलेश ने कहा, ''उत्तर प्रदेश की जनता को हमारी सीटें ढाई गुनी और मत प्रतिशत डेढ़ गुना बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद! हमने दिखा दिया है कि भाजपा की सीटों को घटाया जा सकता है. भाजपा का ये घटाव निरंतर जारी रहेगा. आधे से ज़्यादा भ्रम और छलावा दूर हो गया है बाक़ी कुछ दिनों में हो जाएगा. जनहित का संघर्ष जीतेगा!''

    बीजेपी का वोट शेयर 41.29% है जबकि समाजवादी पार्टी 32.06% है.

  9. पश्चिम उत्तर प्रदेश में क्या जाट-मुसलमान एकता काम आई?

    राष्ट्रीय लोकदल इस बार के चुनाव में अपना अस्तित्व बचाने में कामयाब रहा है. राष्ट्रीय लोकदल ने 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे आठ सीटों पर कामयाबी मिली है.

    राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी में गठबंधन था. जयंत सिंह के आरएलडी का प्रभाव जाट बहुल इलाक़े पश्चिम उत्तर प्रदेश में है और उम्मीद की जा रही थी कि किसान आंदोलन के कारण आरएलडी को अच्छी ख़ासी क़ामयाबी मिल सकती है.

    आरएलडी का वोट शेयर कांग्रेस से भी ज़्यादा है. कांग्रेस का वोट शेयर 2.33% जबकि आरएलडी का वोट शेयर 2.85% है. समाजवादी पार्टी और आरएलडी गठबंधन को मुज़फ़्फ़रनगर की कुल छह सीटों में से चार पर जीत मिली है. मुज़फ़्फ़रगनर किसान आंदोलन का केंद्र रहा था.

    चार में से तीन सीट पर आरएलडी को जीत मिली है. शामली में इस गठबंधन ने सभी तीन सीटें जीती हैं. वहीं बागपत की कुल तीन सीटों में एक पर ही जीत मिली है. चुनाव से पहले बीजेपी ने जयंत सिंह पर डोरे डालने की कोशिश की थी.

    बागपत में सिवाल ख़ास सीट पर ग़ुलाममोहम्मद की जीत हुई है और कहा जा रहा है कि जाटों ने मुस्लिम उम्मीदवार को भी वोट किया है. लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और आरएलडी के आक्रामक चुनाव प्रचार के कारण जो बीएसपी को वोट करते थे वे बीजेपी के साथ आ गए.

    आरएलडी को वैचारिक सलाह देने वाले सोमपाल शास्त्री ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू से कहा है, ''हमारे लिए यह चुनावी नतीजा निराशाजनक है. हम 20 से ज़्यादा सीटों पर जीत की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन जयंत पश्चिम उत्तर प्रदेश में एक अहम हस्ती के तौर पर उभरे हैं.''

    उन्होंने कहा कि जाट-मुस्लिमों का साथ काम किया है. आरएलडी ने सत्ताधारी पार्टी के कई अहम चेहरों को हराया है. योगी सरकार में गन्ना मंत्री रहे सुरेश राणा को थाना भवन से आरएलडी के मुस्लिम उम्मीदवार असरफ़ अली ने हरा दिया.

    बीजेपी के जाट चेहरे संजीव बालियान के विश्वासपात्र माने जाने वाले फायरब्रैंड विधायक उमेश मलिक को भी बुधना में हार का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा मेरठ की सरधाना सीट पर भी आरएलडी की मदद से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अतुल प्रधान ने हिन्दुत्व के मुखर चेहरा माने जाने वाले संगीत सोम को हरा दिया.भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने कहा है कि किसान आंदोलन का असर पश्चिम उत्तर प्रदेश में दिखा है लेकिन दलित वोट बीजेपी के पीछे लामबंद हो गया.

  10. पाकिस्तान का दावा- भारत से उसके इलाक़े में सुपरसोनिक ऑब्जेक्ट आया

    पाकिस्तान की सेना ने गुरुवार को दावा किया कि बहुत ज़्यादा ऊंचाई से एक सुपरसोनिक ऑब्जेक्ट भारत से आया और पाकिस्तानी इलाक़े में क्रैश कर गया. पाकिस्तान ने कहा कि यह ऑब्जेक्ट ख़ुद गिरा है और लेकिन पाकिस्तान की वायु सेना इसकी निगरानी कर रही थी.

    पाकिस्तान की सेना ने कहा है कि यह पैसेंजर उड़ानों के लिए बेहद ख़तरनाक था. पाकिस्तान ने भारत से इस पर जवाब भी मांगा है. पाकिस्तान के इस दावे पर भारत की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

    पाकिस्तान के डायरेक्टर-जनरल इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन यानी आईएसपीआर के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने कहा, ''9 मार्च भारतीय क्षेत्र से तेज़ गति से उड़ता हुआ एक ऑब्जेक्ट आया. यह पाकिस्तान के मियां चन्नू के पास दिखा था. लेकिन यह नाकाम रहा और इससे आम जनों की संपत्ति को नुक़सान पहुँचा है. इसने पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था. पाकिस्तानी एयरफ़ोर्स की नज़र इस पर बनी हुई थी. यह भारत के सिरसा से आया था. पाकिस्तान इसकी कड़ी निंदा करता है.''

    पाकिस्तानी सेना ने कहा कि इस मामले में जो कुछ भी हुआ है, भारत इस पर स्पष्टीकरण दे. बाबर इफ़्तिख़ार ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तानी सेना जाँच कर रही है. जनरल बाबर ने कहा कि पाकिस्तान भारत की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी क्षेत्र में यह तीन मिनट तक रहा है.

    अभी पाकिस्तान की राजनीति में भारी उठा-पटक की स्थिति है. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रहा है. इसे लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष में जुबानी हमले जारी है. जनरल बाबर से पूछा गया कि इमरान ख़ान कहते हैं कि सेना और सरकार साथ हैं, इस पर सेना का क्या कहना है? इस सवाल के जवाब में जनरल बाबर ने कहा कि सेना का सियासत से कोई लेना-देना नहीं है.

  11. नमस्कार! बीबीसी हिन्दी के इस लाइव पन्ने में आप सबका स्वागत है. हम यहाँ दिन भर देश दुनिया की अहम ख़बरों और अपडेट्स से आपको अवगत कराते रहेंगे. पिछले 24 घंटों के अपडेट्स के लिए यहाँ क्लिक करें.