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रूस के राष्ट्रपति पुतिन बोले- औज़ार की तरह इस्तेमाल हो रहा है यूक्रेन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई. रूस और यूक्रेन के तनाव पर पूरी दुनिया की नज़र बनी हुई है.

लाइव कवरेज

रजनीश कुमार and अभय कुमार सिंह

  1. रूस के राष्ट्रपति पुतिन बोले- औज़ार की तरह इस्तेमाल हो रहा है यूक्रेन

    यूक्रेन संकट के बीच पूरी दुनिया की नज़र रूस पर है. इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई.

    पुतिन ने बैठक में कहा कि यूक्रेन को रूस के ख़िलाफ औज़ार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो देश के लिए बड़ा ख़तरा बन रहा है. व्लादिमीर पुतिन ऐसी सार्वजनिक बैठकों को कभी-कभार ही संबोधित करते हैं.

    बैठक के दौरान वो सुरक्षा परिषद के सदस्यों से दूर बैठे रहे.

    रूस समर्थित अलगाववादी यूक्रेन के दो अलग-अलग क्षेत्रों को मान्यता देने की अपील कर रहे हैं. पुतिन ने परिषद सदस्यों से इस पर भी विचार करने के लिए कहा.उन्होंने कहा कि बैठक के अंत तक ये तय करना है कि किस तरह की कार्रवाई की जानी है.

    बैठक में यूक्रेन के लिए रूस के मुख्य वार्ताकार दमित्रि कोज़ाक से पुतिन ने पूछा कि उन्हें क्या लगता है कि यूक्रेन, मिन्स्क समझौते की शर्तों का पालन करेगा.

    पुतिन ने रूस की सुरक्षा परिषद की बैठक के आख़िर में ये कहा कि अलगाववादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहान्स्क "पीपल्स रिपब्लिक" को स्वतंत्र राज्यों के तौर पर मान्यता देने पर फ़ैसला आज ही किया जाएगा.

    दोनेत्स्क और लुहान्स्क पूर्वी यूक्रेन के इलाके हैं और यहाँ रूस समर्थक अलगाववादियों का दबदबा है.

  2. राना अय्यूब के 'न्यायिक उत्पीड़न' के आरोप आधारहीन: भारत

    भारत ने कहा है कि पत्रकार राना अय्यूब के कथित ‘न्यायिक उत्पीड़न के आरोप आधारहीन और अनुचित हैं.’

    संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा गया है कि ‘ग़लत जानकारी देने वाली सोच को आगे बढ़ाने सेसंयुक्त राष्ट्र @UNGeneva की छवि खराब होगी.’

    इसके पहले संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने मांग उठाई थी कि पत्रकार ‘राना अय्यूब के ख़िलाफ़ लगातार हो रहे सांप्रदायिक हमले बंद होने चाहिए. भारत सरकार को इसकी तत्काल जाँच कर अय्यूब के उत्पीड़न को रोकना चाहिए.’

    यूएन के विशेषज्ञों का आरोप है कि स्वतंत्र खोजी पत्रकार और मानवाधिकार के लिए काम करने वाली राना अय्यूब पर दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी समूह लगातार ऑनलाइन हमले कर रहे हैं और उन्हें धमकियाँ दी जा रही हैं.

    भारत ने इसी पर जवाब दिया है.

    ट्विटर पर दिए गए जवाब में लिखा गया है, “कथित न्यायिक उत्पीड़न के आरोप आधारहीन और अनुचित हैं. भारत में क़ानून का राज है लेकिन ये भी साफ़ है कि कोई भी क़ानून से ऊपर नहीं है. हम सही जानकारी होने की उम्मीद करते हैं. ग़लत सोच को आगे बढ़ाने से सिर्फ़ @UNGeneva की छवि खराब होगी.”

    क्या हैं आरोप?

    इसके पहले यूएन विशेषज्ञों ने कहा था कि राना पर हो रहे ‘हमलों में सरकार की तरफ़ से उचित जाँच की कमी देखी गई.’उन्होंने कहा कि राना अय्यूब को रिपोर्टिंग की वजह से कई बार क़ानूनी उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है.

    पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में राना अय्यूब की 1.77 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली थी.

    अधिकारियों का कहना है कि राना पर दान में ली गई राशि के दुरुपयोग का का आरोप है. हालाँकि राना अय्यूब इन आरोपों से इनकार करती हैं.

    उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर की गई थी.

  3. केरल के कन्नूर में CPM कार्यकर्ता की हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण

    केरल के कन्नूर जिले में सोमवार को तड़के एक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. इसके बाद से ही कन्नूर में तनाव के हालात हैं.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के पुलिस ने बताया कि सीपीएम कार्यकर्ता हरिदासन पर सोमवार को सुबह करीब 1.30 बजे अज्ञात हमलावरों ने तब हमला किया जब वो काम से लौटकर वापस घर आ रहे थे.

    ये वारदात हरिदासन के घर के सामने ही हुई, आवाज़ सुनकर उनके पड़ोसी आए और उन्हें नज़दीकी अस्पताल लेकर गए. जहां हरिदासन की मौत हो गई.

    सीपीएम का आरोप है कि इस हत्या के पीछे आरएसएस कार्यकर्ताओं का हाथ है. लेकिन बीजेपी कह रही है कि हत्या की वजह स्थानीय रंजिश हो सकती है, बीजेपी या आरएसएस का इसमें कोई हाथ नहीं है.

    सीपीएम की तरफ़ से आरोप है कि आरएसएस कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से हरिदासन की हत्या की है. पीटीआई के अनुसार कई बार उनपर हमला किया गया और उनका एक पैर काट दिया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि हरिदासन के शरीर पर 20 से अधिक घाव हैं.

    राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस वारदात की कड़ी निंदा की है और पुलिस को इस अपराध में शामिल सभी लोगों के ख़िलाफ मामला दर्ज़ करने का निर्देश दिया है.

    विजयन ने लोगों से बहकावे में न आने की अपील करते हुए ये भी कहा है कि राज्य के शांतिपूर्ण माहल को बिगाड़ने के एजेंडे को हराया जाएगा.

    बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोपों से इनकार करते हुए इस घटना की व्यापक जांच की मांग की.

    विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन का आरोप है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से ख़राब हो गई है.

    पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है.

  4. जातिगत जनगणना की रणनीति तैयार: नीतीश कुमार

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर कहा है कि उनकी सरकार जातिगत जनगणना चाहती है. नीतीश कुमार के मुताबिक पांच राज्यों में चुनाव के बाद जातिगत जनगणना होने की पूरी संभावना है.

    उन्होंने कहा, ''हमने इसको लेकर पूरी रणनीति बनाई है. अगर एक बार जातिगत जनगणना हो जाएगी तो विकास कार्य करने में आसानी होगी.''

    जातिगत जनगणना के मुद्दे पर बिहार में पक्ष और विपक्ष एक साथ ही नज़र आते हैं. राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव भी जातिगत जनगणना के लिए मुख़र हैं.

    14 फ़रवरी को ही तेजस्वी यादव ने एक ट्वीट कर सीएम नीतीश कुमार से पूछा था कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई जा रही है.

    तेजस्वी ने कहा , ''जातीय जनगणना को लेकर अगस्त में PM से मिले.सितंबर में केंद्र ने जातीय जनगणना से मना किया.अक्टूबर में CM ने कहा जल्दी ही सर्वदलीय बैठक बुलायेंगे. दिसंबर में हमने CM से बैठक बुलाने की याद दिला,पुनःआग्रह किया.पता नहीं अब 5 महीनों बाद भी नीतीश जी किस डर से बैठक नहीं बुला पा रहे है?''

    बीजेपी का क्या है रुख?

    नीतीश कुमार जातिगत जनगणना को समाज की एकजुटता बढ़ाने वाला कदम बता चुके हैं. वो कई बार जातिगत जनगणना के पक्ष में बोलते नज़र आए हैं, ये ऐसा मुद्दा है जिस पर बीजेपी विपक्ष की ओर से दबाव झेल रही है. इस मामले में बीजेपी खुलकर कुछ कहने की स्थिति में नहीं दिखती. बिहार में बीजेपी नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ सत्ता में साझेदार है.

    पिछले साल अगस्त में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर राज्य के प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी से मुलाक़ात की थी. प्रतिनिधिमंडल में राज्य की 10 पार्टियों में राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाइटेड, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि शामिल थे.

  5. यूक्रेन पर पुतिन-बाइडन मुलाक़ात की संभावनाओं से क्यों जगी आस?

    यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंका लगातार बनी हुई है. इस बीच एक के बाद एक घटनाक्रम और बयान सामने आ रहे हैं.

    एक तरफ़ व्हाइट हाउस का कहना है कि यूक्रेन संकट पर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के लिए "सैद्धांतिक रूप से" सहमत हैं. हालांकि, फ्रांस द्वारा प्रस्तावित इस वार्ता की शर्त ये है कि रूस, यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा.

    वहीं दूसरी तरफ़ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के एक प्रवक्ता का कहना है कि रूसी राष्ट्रपति यूक्रेन पर हमले का इरादा रखते हैं और हमले की योजना शुरू हो चुकी है.

    हाल ही में ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बीबीसी से कहा था कि सभी सबूत ये संकेत दे रहे हैं कि रूस यूरोप में "1945 के बाद सबसे बड़ी जंग" की तैयारी कर रहा है.

    24 फ़रवरी को अमेरिका-रूस के विदेश मंत्रियों की बैठक?

    दशकों के बाद यूरोप पर ऐसा सुरक्षा संकट आया है. ऐसी उम्मीद है कि बाइडन और पुतिन के बीच बैठक के जरिए इस समस्या का डिप्लोमेटिक रास्ता निकाला जा सकता है.

    इस बैठक का ऐलान फ्रांस ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पुतिन और बाइडेन से बातचीत के बाद किया था.

    मैक्रों के कार्यालय की तरफ़ से बताया गया है कि इस संभावित बैठक को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच 24 फ़रवरी को बैठक है.

    यूक्रेन पर हमले का प्लान शुरू हो चुका है- ब्रिटेन

    इधर, बैठक की बातचीत चल रही है, उधर मीडिया ब्रीफ़िंग में ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के एक प्रवक्ता का कहना है कि खुफ़िया रिपोर्टों से पता चलता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर हमले का इरादा रखते हैं. प्रवक्ता ने कहा, "जो खुफिया जानकारी हम देख रहे हैं, उससे पता चलता है कि रूस आक्रमण शुरू करने का इरादा रखता है और राष्ट्रपति पुतिन की ये योजना शुरू हो चुकी है."

    इस बीच ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने कहा है कि ब्रिटेन और उसके सहयोगी देश यूक्रेन में "सबसे खराब स्थिति के लिए तैयारी कर रहे हैं."

  6. 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों के लिए कोविड वैक्सीन Corbevax को डीसीजीआई ने दी मंज़ूरी

    ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने 12 से 18 साल के बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन Corbevax को अंतिम मंज़ूरी दे दी है.

    न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक़,बायोलॉजिक ई नाम की देसी कंपनी ने Corbevax को तैयार किया है. कंपनी का कहना है कि वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल (ईयूए) की अनुमति मिल गई है.

    बता दें कि भारत में इस साल 3 जनवरी से ही 15 साल से 18 साल की उम्र के बच्चों का कोविड वैक्सीनेशन शुरू किया गया था. सोमवार तक इस कैटेगरी में 7 करोड़ से ज़्यादा डोज़ दिए जा चुके हैं.

  7. राना अय्यूब का उत्पीड़न रोका जाए, संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने भारत सरकार से कहा

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है कि भारतीय महिला पत्रकार राना अय्यूब के ख़िलाफ़ लगातार हो रहे सांप्रदायिक हमले बंद होने चाहिए. भारत सरकार को इसकी तत्काल जाँच कर अय्यूब पर हो रहे उत्पीड़न को रोकना चाहिए.

    यूएन के विशेषज्ञों का कहना है कि स्वतंत्र खोजी पत्रकार और मानवाधिकार के लिए काम करने वाली राना अय्यूब पर दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी समूह लगातार ऑनलाइन हमले कर रहे हैं और उन्हें धमकियाँ दी जा रही हैं.

    विशेषज्ञों ने कहा कि ये हमले राना पर इसलिए हो रहे हैं क्योंकि वो भारत में अल्पसंख्यक मुसलमानों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर रिपोर्टिंग करती हैं. साथ ही कोरोना महामारी के दौरान सरकार के रवैए की राना आलोचक रही हैं, हाल ही में कर्नाटक में हिजाब पर हुए विवाद पर उनकी टिप्पणियों की वजह से भी ये हमले हो रहे हैं.

    ''कानून उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं अय्यूब''

    यूएन के विशेषज्ञों की तरफ़ से कहा गया है कि राना पर हो रहे ऐसे हमलों में सरकार की तरफ़ से उचित जाँच की कमी देखी गई. साथ ही अय्यूब का क़ानूनी उत्पीड़न भी किया जा रहा है.

    उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग की वजह से राना अय्यूब को कई बार क़ानूनी उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है.

    11 फ़रवरी को छह महीने में दूसरी बार उनके बैंक अकाउंट और दूसरे एसेट को फ्रीज़ कर दिया गया. राना अय्यूब पर मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स फ्रॉड के निराधार आरोप लगाए गए.

    ये कार्रवाई राना के एक क्राउड फंडिंग कैंपेन को लेकर किया गया है, जिसे उन्होंने महामारी के दौरान लोगों की मदद के लिए चलाया था.

    विशेषज्ञों की तरफ़ से कहा गया है कि भारत सरकार एक पत्रकार के तौर पर राना अय्यूब की रक्षा करने के अपने दायित्व को निभाने में नाकाम रही है. साथ ही सरकारी जाँच की वजह से अय्यूब के सामने और ख़तरा पैदा हुआ है.

    विशेषज्ञों ने ये मांग की है कि भारत सरकार को राना अय्यूब की धमकियों और ऑनलाइन हमलों से रक्षा के लिए तत्काल क़दम उठाने चाहिए और उनके ख़िलाफ चल रही जांच को रोकना चाहिए.

    पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में राना अय्यूब की 1.77 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली थी.

    अधिकारियों का कहना है कि राना पर दान में ली गई राशि के दुरुपयोग का का आरोप है. हालाँकि राना अय्यूब इन आरोपों से इनकार करती हैं.

    उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर की गई थी.

  8. कर्नाटक के शिमोगा में बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या के मामले में तीन गिरफ़्तार, कुछ इलाक़ों में हिंसा

    कर्नाटक के शिमोगा में बजरंग दल के कार्यकर्ता की हत्या के बाद तनाव है और कुछ इलाक़ों से हिंसा की भी रिपोर्ट है. हत्या के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हुए हैं. कुछ गाड़ियों में आग लगा दी गई.

    हालाँकि राज्य के गृह मंत्री ने कहा है कि इस मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि इस मामले में पाँच लोग शामिल थे. कुछ इलाक़ों में हिंसा को देखते हुए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.

    राज्य के गृह मंत्री अगरा ज्ञानेंद्र ने बताया, "इस समय शिमोगा में स्थिति नियंत्रण में हैं. बेंगलुरू से 200 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को भेजा गया है. इस समय वहाँ 1200 पुलिसकर्मी पहले से ही तैनात हैं. आरएएफ़ भी वहाँ मौजूद है. हमने अन्य राज्यों के पुलिस अधीक्षकों से भी कहा है कि वे स्थिति पर नज़र रखें.

    शिमोगा में रविवार रात 26 वर्षीय बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की हत्या कर दी गई थी. कर्नाटक के गृह मंत्री ने बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा के माता-पिता और बहन से मुलाक़ात की. उन्होंने बाद में बताया कि उन्होंने न्याय की मांग की और उन्होंने इसके लिए उन्हें आश्वस्त किया है.

  9. मुलायम के बारे में मोदी की टिप्पणी पर अखिलेश ने कहा- बीजेपी कंफ्यूज पार्टी है

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चौथे चरण की वोटिंग 23 फ़रवरी को है. इससे पहले आज समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हरदोई, रायबरेली, सुल्तानपुर, अमेठी जैसे ज़िलों में जनसभा को संबोधित किया.

    हरदोई में अपने संबोधन के दौरान वो बीजेपी के अलावा बीएसपी पर भी निशाना साधते नज़र आए. अखिलेश यादव का दावा है कि बीएसपी के ''गुरू'' बीजेपी में बैठे हुए हैं.

    उन्होंने कहा, ''ये जो हाथी पर बैठे हैं, वो कहाँ जा सकते हैं... इनके गुरू कहााँ हैं... वो पहले ही बीजेपी में हैं, ये बात यहाँ की जनता समझती है.''

    बीजेपी के नेताओं पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव का कहना है कि योगी सरकार के कार्यकाल में किसानों की मदद के लिए कोई नहीं आ रहा है. बीजेपी के छोटे से लेकर सबसे बड़े नेता तक लगातार झूठ बोल रहे हैं.

    अखिलेश ने कहा, ''जो इनका छोटा नेता है वो छोटा झूठ बोल रहा है, जो बड़ा नेता है वो बड़ा झूठ बोल रहे हैं, और जो सबसे बड़े हैं वो सबसे बड़ा झूठ बोल रहे हैं.''

    जनता दे रही है गठबंधन को समर्थन- अ्खिलेश यादव

    हरदोई में अखिलेश यादव ने दावा किया कि उनकी पार्टी को पहले, दूसरे और तीसरे चरण के मतदान में जनता लगातार समर्थन दे रही है. अखिलेश ने कहा कि पहली बार ऐसा लग रहा है कि हर चरण में जनता आपस में मुकाबला कर रही है.

    अखिलेश ने कहा, ''बीजेपी कहती है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन तीसरे चरण में कई बूथों पर बीजेपी को एक भी शख्स मक्खी मारने वाला नहीं मिला.''

    बीजेपी ख़ुद कंफ्यूज़ है- अखिलेश यादव

    उन्नाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि अखिलेश ने अपने पिता को अपमानित करके पार्टी पर क़ब्ज़ा जमाया था.

    रायबरेली की एक जनसभा में अखिलेश यादव ने इसके जवाब में कहा, ''बीजेपी खुद कंफ्यूज पार्टी है, नेताजी साथ हैं तो उन्हें तकलीफ है, नेताजी दूर हैं तो उन्हें तकलीफ है. वो हमारे परिवार के बारे में कह रहे हैं, उन्हें मुझे धन्यवाद देना चाहिए कि मैं उनके परिवार के बारे में कुछ नहीं कह रहा हूँ.''

  10. रायबरेली में चुनाव से पहले सोनिया गांधी ने मोदी-योगी सरकार पर क्या-क्या कहा?

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चौथे चरण की वोटिंग 23 फ़रवरी को होनी है. इस चरण में रायबरेली में भी चुनाव होंगे. इससे पहले आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ज़िले के लोगों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया.

    इस दौरान सोनिया गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार पर रायबरेली के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई योजनाएं लेकर आई थी लेकिन मोदी-योगी सरकार ने सभी योजनाओं पर रोक लगा दी.

    सोनिया गांधी ने बीजेपी सरकार पर अलगाव पैदा करने का आरोप लगाया, साथ ही ये भी कहा कि सरकार बेरोज़गारी को दूर नहीं करना चाहती.

    उन्होंने कहा, ''आपने पाँच साल ऐसी सरकार देखी, जिसने आपके बीच अलगाव पैदा करने के अलावा कुछ काम नहीं किया.12 लाख से ज़्यादा सरकारी नौकरियों के पद खाली हैं लेकिन सरकार उन पदों को नहीं भर रही है. पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस सिलेंडर के दाम इतने बढ़ गए हैं की घर चलाना मुश्किल हो गया है.''

    सोनिया गांधी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने सरकारी कंपनियों को कौड़ियों के दामपर अपने करीबियों को बेच दिया.

    उन्होंने कहा, ''आपने देखा होगा कि किस तरह सरकार ने आपका बोझ हल्का करने की बजाए, आपकी मेहनत से बनाई गई सरकारी कंपनियों को कौड़ियों के दाम अपने चहेतों को बेच दिया, लिहाज़ा बेरोज़गारी बढ़ गई.

    मनरेगा का बजट केंद्र सरकार ने कम कर दिया: सोनिया गांधी

    सोनिया गांधी का कहना है कि कांग्रेस की राजनीति सेवा और लोगों को अधिकार देने की राजनीति है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मनरेगा जैसे कानून बनाए जिससे लोगों को रोज़गार का अधिकार मिल सके.

    सोनिया ने आरोप लगाया कि संकट के समय मनरेगा का बजट बढ़ाने की बजाए केंद्र सरकार ने कम कर दिया.

    18000 कार्यकर्ता जेल भेजे गए- सोनिया गांधी

    सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस कोरोना महामारी और लॉकडाउन के वक्त भी कांग्रेस लोगों के हक़ के लिए काम कर रही थी. उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश के हक की लड़ाई लड़ते हुए हमारे 18,000 कार्यकर्ता जेल भेजे गए.''

    कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रियंका गांधी का ज़िक्र करते हुए कहा कि यूपी में 40% टिकट महिलाओं को दी गई हैं और कांग्रेस ने महिलाओं के लिए शक्ति विधान, युवाओं के लिए भर्ती विधान और उत्तर प्रदेश के विकास के लिए उन्नति विधान तैयार किया है.

  11. यूपी चुनाव Live: बांदा में कैसा है चुनावी माहौल?

    आम लोगों से बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा.

  12. OIC के नाम पर निकाले जा रहे हैं फ़र्ज़ी स्कॉलरशिप और जॉब के विज्ञापन, संगठन ने दी ये चेतावनी

    इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने ये जानकारी दी है कि कुछ देशों में ओआईसी के नाम से स्कॉलरशिप और नौकरियों के विज्ञापन संज्ञान में आए हैं जो पूरी तरह से फ़र्ज़ी हैं.

    ओआईसी के महासचिव की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ''कुछ देशों में सोशल मीडिया, कुछ समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और पत्रिकाओं में विज्ञापनों की जानकारी मिली है, जिसमें ओआईसी की तरफ़ से स्कॉलरशिप या जॉब दिए जाने की बात है. या ओआईसी के नाम पर अंतरराष्ट्रीय या क्षेत्रीय सम्मेलन और कार्यक्रम आयोजित करने की बात है. इसके बदले में रजिस्ट्रेशन फ़ीस भी मांगी जा रही है. इस संबंध में ओआईसी की तरफ़ से ये पुष्टि की जा रही है कि ऐसे विज्ञापन और घोषणाएँ फ़र्ज़ी और निराधार हैं.''

    ओआईसी की तरफ़ से जारी बयान में आगे लिखा गया है कि संगठन की आधिकारिक वेबसाइट (http://oic-oci.org) या आधिकारिक डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म के अलावा कहीं और अगर ऐसे ऐलान किए गए हैं तो इसे नहीं माना जाना चाहिए.

    ओआईसी का कहना है कि जो लोग इस तरह की धोखाधड़ी में पाए जाएँगे, उनके ख़िलाफ़ संगठन क़ानूनी कार्रवाई करेगा.

    ओआईसी क्या है?

    ओआईसी के दुनिया भर के 57 मुसलमान बहुल देश सदस्य हैं. ओआईसी पर सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का दबदबा है.

    ओआईसी का उद्देश्य दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बनाए रखते हुए मुसलमानों के हितों की सुरक्षा करना है.

    इस समूह के सदस्य केवल मुस्लिम देश ही हो सकते हैं. सदस्य देशों के अलावा रूस, थाइलैंड और कुछ दूसरे छोटे देशों को आब्ज़र्वर का स्टेट्स मिला हुआ है.

  13. आशीष मिश्र की ज़मानत के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुँचे पीड़ित परिवार

    उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पीड़ित लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. इन लोगों ने इस मामले के मुख्य अभियुक्त और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्र की ज़मानत याचिका रद्द करने की मांग की है.

    पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष मिश्र को ज़मानत दे दी थी. इसके कुछ दिनों बाद वे जेल से भी छूट गए थे. विपक्षी पार्टियों और किसान नेताओं ने इसे लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरा था. उनका कहना था कि योगी सरकार ने इस मामले में ठीक से पैरवी नहीं की. दूसरी ओर बीजेपी नेताओं का कहना था कि ये फ़ैसला अदालत का है और सरकार न्यायालय के काम में दखल नहीं देती.

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र और 12 अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ तीन अक्तूबर को लखीमपुर खीरी में गाड़ियों से रौंद कर 4 किसानों और एक पत्रकार की हत्या करने का आरोप है. बाद में उग्र भीड़ ने तीन लोगों को पीट-पीट कर मार डाला था. आशीष मिश्र इस मामले में मुख्य अभियुक्त हैं.

  14. लालू यादव की सज़ा पर तेजस्वी यादव की आई प्रतिक्रिया

    राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के पाँचवें मामले में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने पाँच साल की सज़ा सुनाई है. इतना ही नहीं अदालत ने उन पर 60 लाख का जुर्माना भी लगाया है.

    अब उनके बेटे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि ऐसा लगता है कि देश में चारा घोटाले के अलावा कोई और घोटाला हुआ ही नहीं है.

    उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा- बिहार में क़रीब 80 घोटाले हुए हैं, लेकिन सीबीआई, ईडी और एनआईए कहाँ हैं? तेजस्वी ने कहा कि इस देश में एक ही स्कैम है और एक ही नेता हैं. उन्होंने कहा- सीबीआई विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को भूल गई.

  15. प्रयागराज से LIVE: इलाहाबाद में मायावती की रैली में कैसा है माहौल?

    ज़्यादा जानकारी के साथ हैं बीबीसी संवाददाता सलमान रावी

  16. सज़ा के बाद लालू यादव का आया ट्वीट, जानिए क्या लिखा है उन्होंने

    लालू यादव का ट्वीट- साथ है जिसके जनता, उसके हौसले क्या तोड़ेंगी सलाखें झारखंड की विशेष सीबीआई अदालत की ओर से सज़ा सुनाए जाने के बाद लालू यादव के ट्विटर हैंडल ने ट्वीट किया गया है. चारा घोटाले के पाँचवें मामले में अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू यादव को पाँच साल की सज़ा के साथ-साथ 60 लाख का जुर्माना भी लगाया है.

    हालाँकि उनके वकील का कहना है कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट जाएँगे. इस मामले में अन्य लोगों को 15 फरवरी को ही सज़ा सुना दी गई थी. सज़ा सुनाए जाने के बाद लालू प्रसाद यादव के ट्वीट में लिखा गया है- अन्याय असमानता से तानाशाही ज़ुल्मी सत्ता से लड़ा हूँ लड़ता रहूँगा डाल कर आँखों में आँखें सच जिसकी ताक़त है साथ है जिसके जनता उसके हौसले क्या तोड़ेंगी सलाख़ें

    पिछले दिनों सज़ा सुनाए जाने के बाद उनके बेटे तेजस्वी यादव ने कहा था कि ये आख़िरी फ़ैसला नहीं है. उन्हें पूरी उम्मीद है कि लालू जी इस केस में बरी हो जाएँगे. तेजस्वी ने कहा था कि वे हाई कोर्ट में अपील करेंगे और हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट भी है.

  17. LIVE: पीलीभीत में कैसा है चुनावी माहौल?

    ज़्यादा जानकारी के साथ हैं बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव

  18. लालू यादव की सज़ा पर क्या बोले नीतीश कुमार और सुशील मोदी?

    लालू यादव को चारा घोटाले के एक मामले में पाँच साल की सज़ा सुनाए जाने पर बिहार से सीएम नीतीश कुमार और बीजेपी नेता सुशील मोदी ने प्रतिक्रिया दी है. नीतीश कुमार ने कहा है कि उन्होंने लालू यादव के ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं कराया था. पत्रकारों के साथ बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा- हमने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं किया है. जो लोग उनके साथ हैं, ये वही लोग हैं, जिन्होंने उनके ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए हैं. वे लोग मेरे पास भी आए थे, लेकिन मैंने कहा था- नहीं. मैंने कहा था कि अगर आप मामला दर्ज करना चाहते हैं, तो आप कर सकते हैं. लेकिन ये मेरा काम नहीं है.

    दूसरी ओर नीतीश सरकार में लंबे समय तक उप मुख्यमंत्री रहे और अब बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने लालू यादव को दोषी ठहराए जाने पर ख़ुशी ज़ाहिर की थी. अब सुशील मोदी का कहना है कि लालू यादव को पाँच साल की सज़ा और 60 लाख के जुर्माने से किसी को आश्चर्च नहीं हुआ है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है- ये तो होना था. लालूजी का चार्जशीट देवेगौड़ा जी के समय और पहली सज़ा मनमोहन सिंह जी के समय हुआ. फिर भी फँसा दिया गया यही राग अलापा जाएगा.

    पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लालू प्रसाद यादव का बचाव किया था और कहा था कि बीजेपी के सामने जो झुकता नहीं है, उसे प्रताड़ित किया जाता है. इस पर भी सुशील कुमार मोदी ने नाराज़गी जताई थी और कहा था कि प्रियंका गांधी पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के बिहार और यूपी वाले बयान से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कह रही हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ख़ुद घोटालों की जननी है.

  19. ब्रेकिंग न्यूज़, लालू यादव को पाँच साल की सज़ा और 60 लाख जुर्माना भी, हाई कोर्ट में होगी अपील

      • Author, रवि प्रकाश
      • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, रांची से

    बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड में सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के पाँचवें मामले में पाँच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई है. उन पर 60 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है.

    लालू यादव के वकील का कहना है कि वो हाई कोर्ट में सज़ा के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.

    झारखंड से जुड़ा चारा और पशुपालन घोटाले का यह आख़िरी और पाँचवाँ मामला था.15 फ़रवरी को कोर्ट ने लालू यादव को इस मामले में दोषी ठहराया था.

    2017 में सज़ा चारा और पशुपालन घोटाले के अन्य मामलों में सज़ा मिलने के बाद से लालू यादव कुल आठ महीने जेल में रहे हैं और 31 महीने हॉस्पिटल में. आठ महीने रांची स्थित होटवार के बिरसा मुंडा जेल में रहे हैं. अभी वह ज़मानत पर बाहर हैं.

    टाइम्स ऑफ इंडिया से लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने कहा है, ''लालू यादव 30 अगस्त, 2018 को रांची के राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस यानी रिम्स में शिफ़्ट किए गए थे और 13 फ़रवरी 2021 तक रहे थे. बाद में उन्हें दिल्ली स्थित एम्स शिफ़्ट कर दिया गया था.''

    लालू यादव को पिछले साल अप्रैल में एम्स से छुट्टी मिली थी और फिर उन्हें ज़मानत मिल गई. 15 फ़रवरी को चारा घोटाले के आख़िरी मामले में जब दोषी क़रार दिया गया तो उन्हें जेल प्रशासन से रिम्स में भर्ती होने की अनुमति मिल गई.

    नब्बे के दशक के चर्चित करोड़ों रुपये के पशुपालन घोटाले में सीबीआई ने तब कुल 66 मामले दर्ज किए थे.

    इनमें से छह मामलों में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भी अभियुक्त बनाया गया था. बिहार विभाजन के बाद इनमें से पाँच मामले झारखंड में ट्रांसफ़र कर दिए गए थे.

    इन पाँच मामलों में से चार में लालू यादव पहले ही दोषी क़रार दिए जा चुके हैं. हालाँकि, इन मामलों में उन्हें ज़मानत मिल गई थी.

    आरसी 47-ए/96 पाँचवा और अंतिम मामला था. इसमें साल 1990-91 और 1995-96 के बीच फ़र्ज़ी बिल्स पर अवैध निकासी के आरोप हैं.

    पैसों की निकासी के लिहाज से भी यह सबसे बड़ी निकासी का मामला है. इसमें लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून-1998 की धाराओं 13(2) आर डब्ल्यू 13(1) (सी), (डी) के अंतर्गत आरोप तय किए गए थे.

    उन पर आरोप था कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया. कई विधायकों और सांसदों ने क्रमशः विधान परिषद और लोकसभा में यह मामला उठाते हुए कहा था कि पशुपालन विभाग में गड़बड़ियाँ की जा रही हैं और फ़र्ज़ी बिल्स के ज़रिए अवैध निकासी करायी जा रही है.

    साल 1996 में घोटाले के पर्दाफ़ाश के बाद तत्कालीन बिहार के डोरंडा थाना में 17 फ़रवरी को इसकी एफ़आइआर (नंबर 60/96) दर्ज कराई गई थी. इनमें से 55 अभियुक्तों की मौत ट्रायल के दौरान ही हो गई. आठ दूसरे अभियुक्त सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता 1973) के प्रावधानों के मुताबिक़ सरकारी गवाह (अप्रूवर्स) बन गए. दो अभियुक्तों ने पहले ही दोष स्वीकार कर लिया था.

  20. योगी आदित्यनाथ ने कहा- पहले तो बिजली की भी जाति होती थी, मजहब होता था

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौथे दौर के मतदान से पहले समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने न सिर्फ़ आतंकवाद का मुद्दा उठाया, बल्कि बिजली देने में भेदभाव का भी आरोप लगाया.

    हरदोई के शाहाबाद में एक चुनौती रैली के दौरान उन्होंने कहा- पहले तो बिजली की भी जाति होती थी और मजहब होता था. याद कीजिए पहले ईद और मोहर्रम होता था, तो बिजली आएगी. और होली और दीपावली में नहीं आएगी. अब कोई भेदभाव नहीं. योगी आदित्यनाथ ने कहा, "अब होली हो या दीपावली. ईद हो या मोहर्रम. क्रिसमस हो या जन्माष्टमी या शिवरात्रि- आपको बिजली मिलती है. पर्याप्त बिजली देने का काम डबल इंजन की सरकार कर रही है. जहाँ आज़ादी के बाद बिजली नहीं गई थी, वहाँ अब बिजली की लाइन दिखाई देने लगी है."

    उन्होंने आतंकवादियों का मुद्दा उठाया और कहा कि 2013 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार आई थी, तो उन्होंने पहला काम आतंकवादियों पर से मुक़दमों को वापस लेने का किया था. योगी आदित्यनाथ ने अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में आए फ़ैसले का फिर ज़िक्र किया और अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की. उन्होंने कहा- अभी गुजरात की एक न्यायालय ने 38 आतंकवादियों को फाँसी की सज़ा दी है, उनमें से आठ आतंकवादियों का संबंध आज़मगढ़ से है. इनमें से एक आतंकवादी का अब्बा समाजवादी पार्टी का प्रचारक है आज़मगढ़ में. समाजवादी पार्टी के मुखिया को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए. और जनता जर्नादन से माफ़ी मांगनी चाहिए.

    योगी आदित्यनाथ ने साइकिल और आतंकवादियों का ज़िक्र भी किया. पीएम मोदी ने रविवार को इसकी तुलना की थी. समाजवादी पार्टी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि ये कहना देश का अपमान है. योगी आदित्यनाथ ने कहा-हमारे प्रदेश की माताओं बहनों ने शपथ खा ली है कि कुछ भी हो जाए जिन साइकिलों पर बैठकर जगह-जगह विस्फोट होते हैं, बमबाज़ी होती थी, उन साइकिलों को पंचर करके ही रहेंगी.