यूक्रेन में युद्ध की आशंकाओं के बीच कैसे रह रहे हैं आम लोग?
यूक्रेन और रूस के बीच पिछले कई हफ़्तों से तनाव अपने चरम पर है. संभावित युद्ध की लगातार चल रही ख़बरों के बीच आम यूक्रेनवासियों की ज़िंदगी पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
लाइव कवरेज
टेलिग्राम ऐप पर महिलाओं की न्यूड तस्वीरों को लेकर विवाद क्यों है?
बीबीसी की एक पड़ताल से पता चला है कि महिलाओं की निजी तस्वीरें उनकी इजाज़त के बिना सोशल मीडिया ऐप टेलिग्राम पर शेयर की जा रही हैं.
इस ऐप के दुनियाभर में पचास करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स हैं.
पड़ताल में सामने आया कि 20 से ज़्यादा देशों में मौजूद टेलिग्राम के चैनलों पर सैकड़ों न्यूड तस्वीरें शेयर की जा रही है और ऐसा तब है जब टेलिग्राम ये दावा करता है कि वो ऐप के पब्लिक स्पेस को कंट्रोल करता है और ग़ैर-कानूनी पोर्नोग्राफ़ी को हटाता है.
चेतावनी- इस रिपोर्ट की कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं.
वीडियो कैप्शन, क्या है टेलिग्राम ऐप पर महिलाओं की न्यूड तस्वीरों का विवाद?
वरिष्ठ पत्रकार रवीश तिवारी की मौत पर पीएम मोदी ने जताया दुख
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सीनियर
पत्रकार और अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के नेशनल ब्यूरो प्रमुख रवीश तिवारी
नहीं रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिवारी की मौत पर गहरा शोक जताया है.
इंडियन एक्सप्रेस ने रवीश तिवारी की मौत से जुड़ी ख़बर में लिखा है कि वह जून 2020 से कैंसर से जूझ रहे थे. उनकी उम्र 40 साल हो रही थी. रवीश तिवारी अपनी पत्नी, माता-पिता और एक भाई के साथ रहते थे.
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में कहा है, "नसीब
ने रवीश तिवारी को बहुत जल्दी ही हमारे बीच से छीन लिया. मीडिया की दुनिया में एक
चमकती प्रतिभा का अंत हो गया. मुझे उनकी रिपोर्ट बहुत अच्छी लगती थी. मैं समय-समय
पर उनसे बात भी करता था. वह गहरी समझ वाले और विनम्र थे. उनके दोस्तों और परिवार
जनों के साथ मेरी संवेदना है. ओम शांति."
टीवी
पत्रकार विकास भदौरिया ने ट्वीट कर कहा है, "गंभीर
पत्रकार, एक अच्छे इंसान और मेरे प्यारे दोस्त
रवीश तिवारी ने पिछली रात दुनिया को अलविदा कह दिया. गुरुग्राम के सेक्टर 20 में आज शाम 3.30 बजे अंत्येष्टि होगी."
पूर्व
केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने लिखा है, "रवीश तिवारी नवोदय विद्यालय, आईआईटी मुंबई और ऑक्सफर्ड से पढ़े थे. वह
पढ़े-लिखे और निष्पक्ष पत्रकारों में से एक थे. जब मैं पर्यावरण मंत्री था तो वह
मेरे काम की आलोचना करते थे लेकिन हम दोनों अच्छे दोस्त थे. महज़ चार दिन पहले
हमने लंबी बातचीत की थी. उनकी असामयिक मौत काफ़ी दुखद है."
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भारत में हिजाब विवाद पर फिर बोला पाकिस्तान
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पाकिस्तान
के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर से भारत में हिजाब विवाद को लेकर अपनी
प्रतिक्रिया दी है.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इफ़्तिखार अहमद ने
शुक्रवार को कहा कि भारत के कर्नाटक राज्य में हिजाब प्रतिबंध को लेकर वह बहुत
चिंतित हैं.
इफ़्तिखार
अहमद ने कहा, "भारत के कर्नाटक राज्य में मुस्लिम
लड़कियों के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को लेकर पाकिस्तान चिंतित है और इसकी निंदा
करता है. इस मामले में हमने नौ फ़रवरी को इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग को तलब
किया था और पाकिस्तान की चिंताओं से अवगत कराया था. हिजाब विरोधी कैंपेन आरएसएस और
बीजेपी चला रहे हैं. यह उनकी बहुसंख्यकवाद की राजनीति का हिस्सा है."
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इससे
पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भी भारत में हिजाब विवाद को
लेकर मोदी सरकार की आलोचना की थी.
कर्नाटक
में हिजाब विवाद पर विदेशों से आई प्रतिक्रिया को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने
भी जवाब दिया था.
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बयान जारी
कर कहा था, ''कर्नाटक के कुछ शिक्षण संस्थानों में
ड्रेस कोड का मामला प्रदेश के हाई कोर्ट में विचाराधीन है. हमारे संवैधानिक ढांचे
और तंत्र के साथ ही लोकतांत्रिक स्वभाव और नीति के ज़रिए इस मुद्दे का समाधान
होगा. जो भारत को ठीक से जानते हैं, उन्हें
सच्चाई पता है. हमारे आंतरिक मुद्दों पर राजनीति से प्रेरित टिप्पणियां स्वागत
योग्य नही हैं.''
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इससे
पहले कर्नाटक में हिजाब विवाद को लेकर अमेरिका के इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम
(आईआरफ़) ने भी 11 फ़रवरी को बयान जारी किया था. आईआरएफ़ ने कहा था कि कर्नाटक में
हिजाब पर प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है और इससे मुस्लिम महिलाएं
मुख्यधारा से कट जाएंगी.
इस्लामिक
देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने भी सोमवार को भारत
में हिजाब विवाद पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी.
बिल गेट्स बोले- कोरोना का ख़तरा कम हुआ, पर दूसरी महामारी की आशंका
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माइक्रोसॉफ्ट
कंपनी के सह संस्थापक बिल गेट्स ने शुक्रवार को कहा है कि कोविड-19 महामारी का
ख़तरा नाटकीय रूप से कम हो गया है लेकिन एक और महामारी तय है.
सीएनबीसी
से बात करते हुए बिल गेट्स ने कहा कि एक और महामारी आ सकती है और इस बार कोई और
वायरस होगा.
हालाँकि
बिल गेट्स ने कहा कि आधुनिक मेडिकल टेक्नॉलजी से इससे लड़ने में मदद मिलेगी लेकिन इसके
लिए अभी से ही निवेश की ज़रूरत है.
बिल
गेट्स ने कहा कि दो सालों से कोरोना वायरस के कारण वैश्विक आबादी में कई स्तरों पर
इम्युनिटी विकसित हुई है. इसी वजह से कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का
ख़तरा भी कम हो गया.
बिल
गेट्स ने कहा, ''बुज़ुर्गों, मोटापे के शिकार और डायबिटीज से पीड़ित लोगों
के लिए यह महामारी ज़्यादा ख़तरनाक थी लेकिन अब यह ख़तरा कम हो गया है. ऐसा
इम्युनिटी के कारण हुआ है. वैश्विक टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने में पहले से ही
देर हो चुकी है.''
अभी
61.9% वैश्विक आबादी को कम से कम कोविड वैक्सीन की एक डोज़ लग चुकी है. बिल गेट्स
ने कहा कि भविष्य में वैक्सीन का वितरण और तेज़ी से हो इसे सुनिश्चित करने की
ज़रूरत है. बिल गेट्स ने सरकारों को इसमें अभी से ही निवेश करने के लिए कहा
है.
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कनाडा: ओटावा पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी शुरू की
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कनाडा
की राजधानी ओटावा में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई है. पुलिस पिछले
तीन हफ़्तों से जारी वैक्सीन विरोधी प्रदर्शन ख़त्म कराने की कोशिश कर रही है. इस सिलसिले में अब
तक 100 प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी की गई है.
सरकार ने प्रदर्शन ख़त्म कराने के
लिए यहां आपातकालीन स्थिति लागू की है. इसी
के तहत पुलिस प्रदर्शनकारियों को वापस भेजने की कोशिश कर रही है.
शुक्रवार की सुबह
पुलिस ने अभियान शुरू किया तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया. इसके बाद
सुरक्षाबलों ने उन्हें ज़मीन पर गिरा दिया और उनके हाथ पीछे से बाँध दिए. पुलिस का
आरोप है कि प्रदर्शनकारी बच्चों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
शहर
में प्रदर्शनकारियों का एक समूह अब भी है और वह सरकारी आदेश को मानने से इनकार कर
रहा है.
वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि सैकड़ों पुलिस अधिकारी प्रदर्शन स्थल पर
मौजूद हैं. कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों के क़रीब एक लाइन बना रखी है.
सभी आपस में एक दूसरे के हाथ पकड़े हुए हैं और कनाडा का राष्ट्रगान गा रहे हैं.
समाचार
एजेंसी एपी से केविन हॉमंड नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ''आज़ादी कभी मुफ़्त में नहीं मिलती. अगर वे हमें
हथकड़ी लगा जेल में भी डाल देंगे तो क्या हुआ?''
ओटावा
पुलिस ने मुख्य प्रदर्शन स्थल के चारों ओर लगभग 100 चेक पॉइंट्स बनाए हैं ताकि
प्रदर्शन स्थल तक और लोग नहीं पहुँच पाएं.
ओटावा
पुलिस ने ट्विटर पर लिखा है, ''आपको यहाँ से वापस चले जाना चाहिए. जो भी ग़ैर-क़ानूनी विरोध प्रदर्शन में शामिल
होंगे, उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है.''
पुलिस
ने प्रदर्शन ख़त्म कराने वाले अभियान के तहत 21 गाड़ियों को ज़ब्त किया है. कोई भी
प्रदर्शनकारी ज़ख़्मी नहीं हुआ है. जिन्हें गिरफ़्तार किया गया है, उन कई तरह के मामले दर्ज किए गए हैं.
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बाडइन बोले- मुझे यक़ीन है कि रूस ने हमले का फ़ैसला ले लिया है
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि उन्हें इस बात को लेकर
पूरा यक़ीन है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का फ़ैसला
ले लिया है.
बाइडन ने कहा कि आने वाले दिनों में यह हमला कभी भी हो सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका यह मूल्यांकन अमेरिकी ख़ुफ़िया
सूचना पर आधारित है. हालांकि रूस हमले की तैयारी से इनकार करता है.
पश्चिमी देशों को डर है कि रूस यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में एक
फ़र्ज़ी संकट खड़ा करना चाहता है, जिससे हमले का बहाना मिल सके. अमेरिका
का अनुमान है कि 169,000-190,000 रूसी सैनिक यूक्रेन की सीमा पर जमा हैं. इनमें
पूर्वी यूक्रेन में स्वघोषित रिपब्लिक डोनेस्क और लुहंस्क के रूस समर्थित लड़ाके
भी शामिल हैं.
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व्हाइट हाउस से एक टेलीविज़न संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन
ने कहा कि आने वाले हफ़्तों या दिनों में रूसी बलों की यूक्रेन पर हमले की योजना
है या हमले का इरादा रखते हैं, पर यक़ीन करने के कारण हैं.
अमेरिकी
राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस बात को लेकर आशवस्त हैं कि रूस ने हमले का फ़ैसला ले
लिया है. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके अधिकारी इस पर स्पष्ट नहीं थे.
हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये भी कहा कि रूस अब भी डिप्लोमैसी का रास्ता चुन सकता है और अब भी तनाव को कम करने के लिए वार्ता की मेज में आने में देर नहीं
हुई है.
इससे पहले शुक्रवार को यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों के नेताओं
ने वहाँ के निवासियों को कहीं और ले जाने की घोषणा की थी और कहा था कि यूक्रेन ने
गोलीबारी तेज़ कर दी है और हमले की योजना बना रहा है.
हालाँकि यूक्रेन लगातार कह रहा है कि हमले की कोई योजना नहीं है.
यूक्रेन के विदेश मंत्री दमित्रो कुलेबा ने इसे ख़ारिज करते हुए कहा था कि यह रूस
की फ़र्जी रिपोर्ट है.
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इस इलाक़े में लाखों लोग रहते हैं और यहाँ से लोगों को निकालना एक
बहुत बड़ा अभियान होगा. अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि इन इलाक़ों से बड़े
पैमाने पर लोगों को निकाला जा रहा है. लेकिन रूस के सरकारी मीडिया में रिपोर्ट छपी
है कि कई बसें वहाँ के स्थानीय लोगों को रूस लेकर आ रही हैं.
डोनेस्क पीपल्स रिपब्लिक (डीएनआर) के प्रमुख डेनिस पुशिलिन ने
शुक्रवार को एक वीडियो संदेश में लोगों को वहाँ से हटाने की घोषणा की थी. हालाँकि
बीबीसी एनलिसिस से पता चलता है कि इस वीडियो को रिकॉर्ड दो दिन पहले ही किया गया
था और तब तनाव भी नहीं था.
वहीं रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय का कहना है कि राष्ट्रपति पुतिन ने
सरहद के पास शरणार्थी कैंप बनाने का आदेश दिया है और अलगाववादी इलाक़ों से आने
वाले लोगों को आपातकालीन मदद पहुँचाने की बात भी कही है. रूस 2014 से पूर्वी
यूक्रेन के डोनबास इलाक़े में एक सशस्त्र विद्रोह का समर्थन कर रहा है. इसमें कम
से कम 14000 लोगों की मौत हुई है. मरने वालों में बड़ी संख्या में आम लोग भी शामिल
हैं.
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि पिछले 48 घंटों में
रूस ने उकसावे की कई फ़र्ज़ी कोशिशें की हैं ताकि अगली आक्रामकता को सही ठहराया जा
सके. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि लोगों को निकालने की घोषणा रूसी की
चालाकी है ताकि दुनिया का ध्यान इस तथ्य से हटाया जा सके कि रूस हमले की तैयारी कर
रहा है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि लोगों को निकालने की
घोषणा इस बात की मिसाल है कि रूस ग़लत सूचनाओं का इस्तेमाल युद्ध के उपकरण के तौर
पर कर रहा है.
शुक्रवार की रात यूक्रेन की सेना की ख़ुफ़िया सेवा ने कहा था कि
उन्हें डोनेस्क में विस्फोटक सामग्री प्लांट करने की सूचना मिली थी. इसमें कहा गया
है कि इन विस्फोटकों के ज़रिए लोगों में ग़लत सूचना फैलाई जाएगी कि यूक्रेन ने
हमला कर दिया है.
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यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय की ख़ुफ़िया सेवा ने ट्विटर पर कहा,
''ये
सारी कोशिशें अस्थायी रूप से हमारे देश के क़ब्ज़े वाले इलाक़े को अस्थिर करने की
लिए हो रही हैं ताकि यूक्रेन पर आतंकवादी हमले का आरोप लगाया जा सके.''
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि पूर्वी यूक्रेन में
हालात बदतर हो रहे हैं. पुतिन ने कहा है कि वह अब भी बातचीत के लिए तैयार हैं
लेकिन पश्चिम के नेता रूस की सुरक्षा चिंताओं की उपेक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा
है कि नेटो का विस्तार पूर्वी यूरोप में थमना चाहिए.
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