यूक्रेन में युद्ध की आशंकाओं के बीच कैसे रह रहे हैं आम लोग?

यूक्रेन और रूस के बीच पिछले कई हफ़्तों से तनाव अपने चरम पर है. संभावित युद्ध की लगातार चल रही ख़बरों के बीच आम यूक्रेनवासियों की ज़िंदगी पर इसका क्या असर पड़ रहा है?

लाइव कवरेज

  1. यूक्रेन में युद्ध की आशंकाओं के बीच कैसे रह रहे हैं आम लोग?

    नटालिया साद

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    इमेज कैप्शन, पीआर कार्यक्रम के तहत खींची गई नटालिया साद की एक तस्वीर

    यूक्रेन और रूस के बीच पिछले कई हफ़्तों से तनाव अपने चरम पर है. अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और तमाम दूसरे पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस यूक्रेन पर हमले की योजना बना रहा है.

    इस दिशा में सैनिकों की तैनाती बढ़ने से लेकर युद्ध के पहले की जाने वाली तैयारियों की ख़बरें आ रही हैं.

    हालांकि, रूस लगातार इन ख़बरों का खंडन करते हुए ये कह रहा है कि वह यूक्रेन पर किसी तरह के हमले की योजना नहीं बना रहा है.

    लेकिन सवाल ये उठता है कि तनाव से लेकर युद्ध की ख़बरों के बीच आम यूक्रेनवासियों की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ रहा है.

    बीबीसी यूक्रेन सेवा ने ऐसे मौके पर कुछ यूक्रेनवासियों से बात करके उनके मन की बात समझने की कोशिश की है.

    वलिंटीना कोवाक एक पेशेवर कोरियोग्राफ़र

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    इमेज कैप्शन, वलिंटीना कोवाक एक पेशेवर कोरियोग्राफ़र

    डांस करके तनाव कम करने की कोशिश

    36 वर्षीय वलिंटीना कोवाक एक पेशेवर कोरियोग्राफ़र हैं जोकि यूक्रेन की राजधानी कीव में वलिनडांस नाम से एक डांस स्टूडियो चलाती हैं.

    सामान्य दिनों में सर्दियां कम होने पर उनके स्टूडियों में डांस सीखने वालों की संख्या अच्छी – ख़ासी रहा करती थी.

    लेकिन रूस के साथ युद्ध की आशंकाओं के बीच लोग डांस करके अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने की जगह पैसे बचाने को तरजीह देते दिख रहे हैं.

    डांस स्टूडियों में आने वाले नए ग्राहकों की संख्या पहले से कम हो गयी है. वहीं, कुछ लोगों ने अपने नियमित सब्सक्रिप्शन पैकेज़ को रोक दिया है.

    क्योंकि इस समय तनाव जिस स्तर पर है, उसमें आने वाले कुछ हफ़्तों से आगे की योजना बनाना असंभव सा लगता है.

    हालांकि, अगर हालात बद से बदतर होते हैं तो वलिंटीना के पास एक विकल्प है. अगर यूक्रेन की राजधानी पर हमला होता है तो वह रूस से हज़ारों किलोमीटर दूर अपने माँ – बाप के घर जाकर रह सकती हैं.

    लेकिन फिलहाल वह मौजूदा हालातों में सकारात्मक रहने की कोशिश कर रही हैं.

    रसलान बेलिएव

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    बदलते हालातों में ढलने की कोशिश

    वलिंटीना की तरह एक अन्य यूक्रेनवासी 45 वर्षीय रसलान बदलती परिस्थितियों में खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं.

    कीव में ड्रोन की मदद से हवा में विज्ञापन सेवाएं देने वाले रसलान आने वाले दिनों को देखते हुए अपने व्यापार को ख़ुफिया जानकारी जुटाने की दिशा में मोड़ने पर विचार कर रहे हैं.

    रसलान के साथ काम करने वाले दो लोग इससे पहले पूर्वी यूरोप में हुए संघर्ष में हिस्सा ले चुके हैं. और रसलान इन लोगों के साथ ही अपने ड्रोन में कैमरे लगाकर उनसे ख़ुफिया जानकारी जुटाने के लिए तैयार कर रहे हैं.

    इसके लिए वह सरकार के साथ काम करने की दिशा में बढ़ रहे हैं.

    हालांकि, उन्होंने अपने सात और 11 साल के बच्चे और पत्नी को कीव से बाहर भेज दिया है.

    वह कहते हैं, “मुझे लगता है कि फिलहाल कीव में रहना असुरक्षित है क्योंकि यह रूसी मिसाइलों की जद में आ सकता है. इसी वजह से मैं अपनी पत्नी और बच्चों को रिश्तेदारों के साथ रहने के लिए विदेश भेज रहा हूं.”

    नटालिया साद

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    संयम बरतने की कोशिश

    अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में पढ़ाई करने वाली 35 वर्षीय नटालिया साद इन हालातों में घबराने की जगह संयम बरतने की कोशिश कर रही हैं.

    राष्ट्रीय हथियार निर्माता संस्थान के साथ एक कम्युनिकेशन ऑफिसर के रूप में काम करने वालीं नटालिया मानती हैं कि पिछले दिनों तनाव बढ़ने के बाद से वह रक्षा क्षेत्र से जुड़े अपने काम पर और ज़्यादा ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं.

    वह कहती हैं, “मैं एक मशीन गन नहीं उठा सकती. मुझे नहीं लगता कि मैं इससे ज़्यादा फायदा पहुंचा पाऊंगी.”

    लेकिन वह मानती हैं कि उनकी पढ़ाई और अनुभव उन्हें एक अच्छा रक्षा रणनीतिकार बनने में मदद करेगा. इसके लिए वह आगे की पढ़ाई करने के लिए भी तैयारी कर रही हैं.

    लेकिन अन्य यूक्रेनवासियों की तरह वह भी इन हालातों में घबराहट से बचे रहने पर जोर देती हैं.

    वह कहती हैं, “इस ख़तरे के साथ जीते हुए, मुझे ये अहसास हुआ कि ये काफ़ी अहम है कि हम अपनी ज़िंदगी में एक – एक दिन काटते हुए आगे बढ़ते रहें.”

  2. हरियाणा से तीन संदिग्ध चरमपंथी गिरफ़्तार, पुलिस का दावा- पंजाब में फैलाना चाहते थे हिंसा, सत सिंह, बीबीसी हिन्दी के लिए

    हरियाणा

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    इमेज कैप्शन, हरियाणा में गिरफ़्तार संदिग्ध चरमपंथी

    पंजाब में चुनाव से एक दिन पहले हरियाणा पुलिस ने दावा किया है कि उसने सोनीपत से ख़ालिस्तान चरमपंथी संगठनों से जुड़े तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.

    पुलिस के मुताबिक इन लोगों को पंजाब में लोगों की हत्या कर माहौल ख़राब करने का काम सौंपा गया था. सोनीपत के एसएसपी राहुल शर्मा ने शनिवार को मीडिया के साथ बातचीत में दावा किया कि पुलिस ने सोनीपत जिले के जुआ गांव के तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.

    उनके पास से एक एके-47 राइफ़ल, तीन विदेशी पिस्तौल और बड़ी मात्रा में ज़िंदा कारतूस बरामद किया गया है. इस सिलसिले में पकड़े गए तीनों लोगों के ख़िलाफ़ यूएपीए एक्ट की धारा 17,18,19,20 और 21 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. इन लोगों के ख़िलाफ़ आर्म्स एक्ट की धारा 120B के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान सागर उर्फ़ बिन्नी, सुनील उर्फ़ पहलवान और जतिन उर्फ़ राजेश के तौर पर हुई है. सागर इस गिरोह का सरगना है. ये तीनों सोनीपत ज़िले के रहने वाले हैं.

    एसएसपी राहुल शर्मा ने कहा कि आरोपियों ने यह कुबूल किया है कि आठ दिसंबर 2021 को उन्होंने पंजाब के रोपड़ ज़िले में अवतार सिंह की हत्या की है. उन्हें इस हत्या के लिए एक चरमपंथी संगठन से आदेश मिला है. वो मोहाली में एक और शख्स की हत्या का मौका तलाश रहे थे.

    पुलिस का दावा है कि चरमपंथी संगठनों ने इन आरोपियों को सोशल मीडिया के ज़रिए अपने जाल में फंसाया था. इन संगठनों ने इसी के ज़रिए इन तक हथियार पहुंचवाए.

    एसएसपी राहुल शर्मा ने कहा कि उन्हें पंजाब पुलिस से ख़ुफ़िया जानकारी मिली थी कि सोनीपत में रह रहे आपराधिक रिकॉर्ड वाले कुछ लोग ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के संपर्क में हैं.

    हरियाणा पुलिस के मुताबिक आरोपियों को जल्द ही कोर्ट में पेश कर रिमांड में भेजा जाएगा ताकि उनसे विस्तार से पूछताछ हो सके.

  3. फ़्रांसीसी सेना की वापसी के एलान के बाद माली में संघर्ष तेज़, विद्रोहियों के हमले में आठ सैनिक मरे

    माली

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    इमेज कैप्शन, माली में सैन्य संघर्ष फिर शुरू

    फ़्रांस और सहयोगी देशों की ओर से अपनी सेनाओं की वापसी के एलान के बाद पश्चिमी अफ़्रीकी देश माली में विद्रोहियों और सरकारी सेनाओं के बीच संघर्ष तेज़ हो गया है.

    माली की सेना ने बताया है कि उत्तर-पूर्वी अरचम इलाके में विद्रोहियों के हमले में उसके आठ सैनिकों की मौत हो गई. पांच सैनिक लापता हैं. जबकि माली की एयरफोर्स के जवाबी हमले में 57 चरमपंथियों की मौत हो गई.

    माली की सेना के मुताबिक विद्रोहियों को छिपने की जगह की तलाशी के दौरान दूसरी तरफ़ से हथियारबंद लोगों ने हमले शुरू कर दिए. फ़्रांस की सेना की वापसी के बाद माली में अस्थिरता को लेकर क्षेत्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि इलाके में रूसी लड़ाकों की मौजूदगी बढ़ती जा रही है.

    स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी सप्ताह इस्लामी स्टेट समेत विरोधी इस्लामी समूहों की लड़ाई में 40 नागरिकों की मौत हो चुकी है. माली में जिहादियों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है. तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम बबुकर कीटा के ख़िलाफ़ 2020 में भारी विद्रोह हुआ था.

    विद्रोहियों ने देश में स्थिरता लाने का दावा करते हुए इब्राहिम का तख़्तापलट दिया था. इसके बाद नए सैन्य नेताओं के फ़्रांस से मतभेद होते रहे. माली फ़्रांस का उपनिवेश रहा है.

    इन नेताओं ने इस साल चुनाव के लिए आपसी सहमति कायम कर ली. इसके बाद फ़्रांस के राजदूत को यहां से निकाल दिया गया. इस मामले के बाद माली ने फ़्रांस की सेना को वापस जाने के लिए कह दिया.

  4. यूक्रेन के पूर्वी हिस्सों में बढ़ी हिंसा, सैन्य तैनाती के आदेश जारी

    रूसी सेना

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    यूक्रेन से टूटकर अलग हुए रूस समर्थित पूर्वी क्षेत्रों में संघर्ष बढ़ने के बाद सैन्य तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए हैं.

    स्वघोषित गणराज्यों डोनेत्स्क और लुहंस्क में ऐसे सभी युवाओं, जिनकी उम्र लड़ने के लिए योग्य हैं, को तैयार रहने के लिए कह दिया गया है.

    बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि उन्हें यकीन है कि रूस यूक्रेन पर हमला करेगा.

    हालांकि, रूस इस आरोप का खंडन करता रहा है. और यूक्रेन-रूस के बीच पिछले कई हफ़्तों से तनाव अपने चरम स्तर पर है.

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    फर्जी संकट खड़ा करने का आरोप

    इसके साथ ही पश्चिमी देश लगातार रूस पर पूर्वी क्षेत्रों में एक फर्जी संकट खड़ा करने की कोशिश करने का आरोप लगा रहे हैं जिसके बहाने से हमला किया जा सके.

    और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालातों पर नज़र रखने वाली संस्थाएं यूक्रेन सरकार और विद्रोहियों के बीच हमलों में नाटकीय बढ़त देख रही हैं.

    शनिवार सबह गोला बारी की एक घटना में यूक्रेन के एक सैनिक की मौत हो गई जो कि पिछले कई हफ़्तों में सामने आया पहला ऐसा मामला है.

    बाइडन के रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने बताया है कि रूसी सेना धीरे-धीरे यूक्रेन की सीमा की ओर बढ़ रही है.

    इसी बीच जर्मनी के शहर म्युनिख़ में अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने एक सुरक्षा कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अगर रूस ने हमला किया तो अमेरिका और उसके सहयोगी उसकी वित्तीय संस्थाओं और मुख्य उद्योगों के साथ-साथ इस हमले में मदद और इसके लिए उकसाने वालों पर भारी आर्थिक हर्जाना लगाएंगे.

  5. बंटवारे में बिछड़ों को क़रीब ला रहा करतारपुर कॉरिडोर, 74 साल बाद भाइयों के परिवारों का मिलन, अली काज़मी, बीबीसी संवाददाता, लाहौर से

    करतारपुर साहिब
    इमेज कैप्शन, करतारपुर साहिब में दो परिवारों का मिलन

    करतारपुर साहिब में शनिवार को विभाजन के दौरान बिछड़े दो और भाइयों के परिवारों का मिलन हुआ.

    पिछले महीने ही 1947 में बिछड़ गए दो और भाई मोहम्मद सिद्दिक और मोहम्मद हबीब का मिलन करतारपुर में हो चुका है.

    शनिवार को करतारपुर साहिब में मिल रहे परिवारों के मिलन का दृश्य भावुक कर देने वाला था. दोनों भाइयों के परिवार के सदस्य गले मिलते वक़्त रो रहे थे. दरअल मट्टो खानदान के दो भाई विभाजन के दौरान बिछड़ गए थे.

    शाहिद मट्टो के मुताबिक पाकिस्तान में रहने वाले उनके दादा ने पंजाबी चैनल लहर को बताया था कि विभाजन के दौरान उनका एक भाई बिछड़ गया था. वह भारत में ही रह गया था. बाद में उन्हें भारत में रहने वाले अपने भाई से संपर्क कायम करने में कामयाबी मिल गई. हालांकि दोनों भाइयों की पिछले दो महीने के अंतराल में मौत हो चुकी है.

    लेकिन रविवार को जब मरहूम भाइयों के परिवारों के सदस्य करतारपुर मिले तो दृश्य बेहद भावुक हो गया. दोनों परिवार के सदस्य बार-बार एक दूसरे को गले लगा रहे थे. सभी रो रहे थे.

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    इससे पहले इस साल जनवरी में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त दो और भाई मोहम्मद सिद्दीक़ और मोहम्मद हबीब उर्फ सिका ख़ान करतारपुर में मिल चुके थे.

    नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ने सिका ख़ान को उनके भाई से मिलने के लिए वीज़ा जारी कर दिया है. वीज़ा मिलने के बाद मोहम्मद सिका ख़ान पाकिस्तान में अपने परिजनों से मिलने के लिए वहां जा सकेंगे.

    दोनों भाइयों की जनवरी 2022 में करतारपुर दरबार साहिब में 74 साल बाद थोड़ी देर के लिए मुलाक़ात हुई थी.

    पाकिस्तानी उच्चायोग ने मोहम्मद सिका ख़ान को वीज़ा जारी किए जाने की सूचना देते हुए कहा था कि दोनों भाइयों की कहानी ये बताती है कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर को नवंबर, 2019 में खोले जाने से किस तरह से लोग एक दूसरे के क़रीब आ रहे हैं.

  6. बीबीसी हिंदी का साप्ताहिक कार्यक्रम 'इंडिया बोल', सुनिए वात्सल्य राय से

    चुनाव में क्या हाशिए पर हैं जनसरोकार के मुद्दे?

    'इंडिया बोल' में इस पर हो रही है चर्चा, रखिए अपनी राय.

    कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मुफ़्त फ़ोन कीजिए 1800-11-7000 और 1800-102-7001 पर

  7. भारत को मिली 2023 के ओलंपिक समिति सत्र की मेजबानी, पीएम मोदी ने जताई प्रसन्नता

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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    इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम भारत को साल 2023 के ओलंपिक समिति सत्र की मेजबान बनाए जाने पर अपनी प्रसन्नता ज़ाहिर की है.

    प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने ट्विटर हैंडल पीएम मोदी का बयान जारी किया है.

    इस बयान में पीएम मोदी के हवाले से लिखा गया है कि, “ये काफ़ी प्रसन्नता देने वाली बात है कि भारत को साल 2023 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति सेशन के लिए चुना गया है."

    "मुझे विश्वास है कि ये अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति का एक यादगार सेशन रहेगा. और वैश्विक खेल के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा.”

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  8. शिव सेना ने कहा- जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में संशोधन ख़ारिज हो वरना बच्चों पर होगा गंभीर असर

    प्रियंका चतुर्वेदी

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    शिव सेना ने केंद्र से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2021 में उस संशोधन को वापस लेने की मांग की है, जिसके मुताबिक बच्चों के ख़िलाफ़ गंभीर अपराध के मामलों में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की विशेष अनुमति के बग़ैर एफ़आईआर दर्ज नहीं कराई जा सकेगी.

    शिव सेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले को लेकर केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी को लिखी चिट्ठी में कहा है कि इस संशोधन को रद्द किया जाए. उन्होंने कहा है कि ऐसे अपराध का संज्ञेय दर्जा बरकरार रखा जाना चाहिए.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चतुर्वेदी ने कहा कि इस संशोधन की वजह से बच्चों के ख़िलाफ़ गंभीर अपराध में एफ़आईआर नहीं हो पाएगी. इससे अपराधियों के ख़िलाफ़ जांच शुरू नहीं होगी. अगर इस संशोधन को रद्द नहीं किया गया तो बच्चों पर इसका गंभीर असर पड़ेगा. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट उन तत्वों से बच्चों की सुरक्षा करता है, जो उन्हें भीख मांगने, मज़दूरी या ड्रग स्मलिंग के काम में लगा देते हैं.

    चतुर्वेदी ने कहा, ''एक तरफ़ केंद्र सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा' देती है और दूसरी ओर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में ऐसे संशोधन लाती है, जो बच्चों के ख़िलाफ़ गंभीर अपराध में बग़ैर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अनुमति के एफ़आईआर दर्ज करने से रोकता है.''

    केंद्र सरकार ने 2021 में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 में संशोधन कर दिया था. इसमें बच्चों के ख़िलाफ़ गंभीर अपराधों को ग़ैर-संज्ञेय बना दिया गया था. बच्चों के ख़िलाफ़ गंभीर अपराध में तीन से सात साल की जेल का सज़ा का प्रावधान है.

  9. कवियों के समूह ने केजरीवाल को लिखी चिट्ठी, कहा-हमारा अपमान हुआ है, माफ़ी मांगें

    अरविंद केजरीवाल

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    40 कवियों के एक समूह ने आम आदमी पार्टी के संस्थापकों में से एक कवि कुमार विश्वास का कथित अपमान करने के ख़िलाफ़ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से माफ़ी की मांग की है.

    इस समूह का कहना है कि कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ ख़ालिस्तान समर्थक होने का आरोप लगाया था.

    लेकिन इसके बाद केजरीवाल ने विश्वास को जो जवाब दिया, उसमें कवियों का अपमान किया गया.

    अरविंद केजरीवाल को लिखी एक खुली चिट्ठी में इन कवियों ने कहा है कि दिल्ली के सीएम ने कुमार विश्वास के जवाब में कवियों का मजाक उड़ाया है.

    उनका कहना है कि उन्हें कवियों का ''मजाक'' उड़ाने के बजाय तथ्यों का इस्तेमाल कर अपनी बात करनी चाहिए थी.

    जिन 40 कवियों ने इस मुद्दे पर केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है, उनमें गजेंद्र सोलंकी और दिनेश रघुवंशी जैसे कवि शामिल हैं.

    इन कवियों ने कुमार विश्वास के उस आरोप को भी दोहराया है, जिसके मुताबिक पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केजरीवाल एक कथित ख़ालिस्तानी समर्थक चरमपंथी के घर पर ठहरे थे.

    उन्होंने उस कथित चिट्ठी का भी हवाला दिया है, जिसमें 'सिख फॉर जस्टिस' नाम के एक संगठन की ओर पंजाब के मौजूदा चुनाव में आम आदमी पार्टी को समर्थन देने की बात कही गई है.

    केजरीवाल ने कुमार विश्वास के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा था कि ये उन्हें कॉमेडी लगते हैं. केजरीवाल ने कहा था कि उन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है. अगर ऐसा है तो वह दुनिया के सबसे 'स्वीट आतंकवादी' हैं, जो अस्पताल और स्कूल बनाता है.

    इसी बीच ख़बर आ रही है कि केंद्र सरकार ने कुमार विश्वास को वाई केटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला किया है.

    इस फैसले के तहत उन्हें सीआरपीएफ़ जवानों की ओर से सुरक्षा दी जाएगी.

  10. भारत-श्रीलंका सीरीज: रोहित बने टेस्ट कप्तान; पुजारा, रहाणे टीम से बाहर

    रोहित

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    रोहित शर्मा आधिकारिक रूप से भारतीय टीम के टेस्ट कप्तान बन गये हैं. उन्हें आगामी श्रीलंका टेस्ट सीरीज के लिए कप्तान नियुक्त किया गया है, जबकि बुरे फॉर्म से जूझ रहे चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्य रहाणे को टीम में जगह नहीं मिल पाई है.

    सेलेक्शन कमेटी के चीफ़ चेतन शर्मा के मुताबिक केएल राहुल, वाशिंगटन सुंदर को पूरी सीरीज से बाहर रखा गया गया है. शार्दुल ठाकुर को आराम दिया गया है.

    चेतन शर्मा ने टीम का एलान करते हुए कहा गया कि दोनों को सिर्फ श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर किया गया है. वे रणजी ट्रॉफी खेल रहे हैं. ये अच्छी बात है कि भारत के दो बड़े खिलाड़ी रणजी में खेल रहे हैं.

    चेतन शर्मा के मुताबिक केएल राहुल, ऋषभ पंत और जसप्रीत बुमराह को रोहित शर्मा की निगरानी में भविष्य के कप्तान के तौर पर तैयार किया जाएगा.

    श्रीलंका की टीम भारत के दौरे पर तीन टी20 और दो टेस्ट मैच खेलेगी. पहला टी20 मैच लखनऊ में 24 फरवरी होगा. धर्मशाला में 26 और 27 फरवरी को दो टी20 मैच खेले जाएंगे.

    टेस्ट सीरीज का पहला मैच मोहाली में होगा. यह चार मार्च से आठ मार्च तक होगा. बेंगलुरु में दूसरा और अंतिम टेस्ट 12 से 16 मार्च तक होगा.

  11. योगी-शाह के बाद गोंडा में राजनाथ सिंह बोले, ‘हम हैं असली समाजवादी’

    केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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    केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को गोंडा में एक जनसभा के दौरान बीजेपी नेताओं को असली समाजवादी बताते हुए अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया है.

    बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान रविवार यानी 20 फ़रवरी को होना है.

    और इस चरण में उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर, हाथरस, कन्नौज, इटावा और झांसी समेत कुल 16 ज़िलों की 59 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है.

    इस चरण से पहले बीजेपी की ओर से अखिलेश यादव को अपराध से लेकर परिवारवाद के मुद्दे पर घेरा जाना जारी है.

    राजनाथ सिंह ने कहा, “समाजवादी वो होता है जो जनता को भय और भूख से छुटकारा दिलाए, भय से योगी जी और भूख से मोदी जी ने छुटकारा दिलाया है. असली समाजवादी हम हैं और नकली वो हैं, जो भय और भूख का समाधान करे वो ही सच्चा समाजवादी है.”

    इससे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव में आयोजित एक रैली के दौरान इसी तरह का बयान दिया था.

    उन्होंने कहा था कि, “ये ख़ुद को समाजवादी कहते हैं लेकिन ये समाजवादी नहीं हैं. इनका नाम समाजवादी है लेकिन काम तो तमंचावादी है और सोच परिवारवादी है.”

    इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शिकोहाबाद में एक रैली के दौरान कह चुके हैं कि "सपा कहने के लिए ही समाजवादी पार्टी है. SP के दो सूत्र हैं. S से संपत्ति इकट्ठा करना और P से परिवारवादों को सत्ता देना. जब सपा की सरकार थी तब अखिलेश के परिवार से 45 लोग अलग-अलग पद पर थे."

  12. शाह का समाजवादी पार्टी पर हमला, बोले-साइकिल आई तो पूरे देश में फैलेगा आतंकवाद

    अमित शाह

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    गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान शनिवार को समाजवादी पार्टी पर तीखे हमले किए. उन्होंने कहा कि अगर यूपी में किसी भी तरह साइकिल आ गई तो पूरे देश में यहां से आतंकवाद की सप्लाई होने लगेगी.

    किसानों की बदहाली के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को घेरते हुए शाह ने कहा कि अखिलेश सरकार के दौरान यूपी में 2000 किसान अकाल की वजह से मौत के मुंह में चले गए.

    शाह बांदा जिले की तिंडवारी सीट में एक चुनावी रैली में बोल रहे थे. यहां से पिछली बार बीजेपी के बृजेश कुमार विधायक चुने गए थे. तिंडवारी विधानसभा में लगभग 3 लाख 10 हज़ार मतदाता हैं. तिंडवारी विधानसभा सीट में निषाद, प्रजापति, दलित और ठाकुर वोटरों की संख्या अधिक है.

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    यूपी विधानसभा चुनाव के तीरे चरण में 20 फ़रवरी को 16 ज़िलों- हाथरस, फ़िरोज़ाबाद, एटा, कासगंज, मैनपुरी, फ़र्रुख़ाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा की 59 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी.

    इस चरण के प्रमुख उम्मीदवारों में समाजवादी पार्टी के चीफ़ अखिलेश यादव का नाम प्रमुख है. वो मैनपुरी ज़िले की करहल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. बीजेपी ने यहां से केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को उतारा है.

  13. केंद्र सरकार ने सरकारी आंकड़ों से अधिक कोविड-19 मौतों से जुड़ी रिपोर्ट्स को बताया 'आधारहीन'

    दिल्ली का निगमबोध घाट

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    इमेज कैप्शन, दिल्ली के निगमबोध घाट पर कोविड - 19 से मरने वाले एक शख़्स की अंत्येष्टि के लिए लकड़ियां ले जाता हुआ एक व्यक्ति

    केंद्र सरकार ने शनिवार को हाल ही में प्रकाशित उन मीडिया रिपोर्ट्स को आधारहीन करार दिया है जिनमें एलआईसी आईपीओ डेटा के आधार पर दावा किया गया है कि साल 2021 में कोविड- 19 से हुई मौतों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में कहीं ज़्यादा थी.

    भारत में साल 2021 की दूसरी तिमाही में कोरोना महामारी का घातक रूप सामने आया था जिसमें से अप्रैल और मई में हालात काफ़ी ख़राब रहे थे.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने शनिवार को बताया कि भारत में ग्राम पंचायत के स्तर से लेकर ज़िला और राज्य स्तर पर कोविड-19 से होने वाली मौतों के रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया काफ़ी पारदर्शी है.

    इसके साथ ही कोविड-19 से मरने वालों की संख्या को रिकॉर्ड करने का काम काफ़ी पारदर्शिता के साथ किया जाता है.

    सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एलआईसी की ओर से प्रस्तावित आईपीओ से जुड़ी जानकारियों में पॉलिसी और क्लेम का डेटा दिया गया है.

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    लेकिन इस डेटा के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचना, कि कोविड 19 से मरने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों की तुलना में अधिक थी, अटकलबाजी और पक्षपातपूर्ण है.

    बता दें कि एक अन्य अध्ययन में भी ये सामने आया है कि भारत में कोविड -19 से मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में छह से आठ गुना अधिक है.

    शोध में कहा गया है कि मौतों के आंकड़ों की संख्या कम गिन कर कोरोना की दूसरी लहर के भयंकर प्रभाव को कम करके पेश किया गया.

    इस अध्ययन में कहा गया है कि नवंबर 2021 की शुरुआत तक 30.2 लाख से 30.7 लाख लोगों की मौत कोविड से हुई थी. जबकि सरकारी आंकड़ों में मरने वालों की संख्या लगभग 4 लाख 60 हज़ार थी.

    वहीं, एक फ़्रांसीसी शैक्षणिक संस्थान के डेमोग्राफ़र क्रिस्टोफ़ गुइलमोटो के अनुमान के मुताबिक़, जुलाई 2021 तक 30.2 लाख लोगों की कोविड से मौत हुई.

  14. रूस-यूक्रेन संकट: क्या है 'फॉल्स फ्लैग' अभियान जिसकी आशंका जताई जा रही है

  15. पंजाब के मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ बिहार में दर्ज हुआ मामला, नीरज सहाय, बीबीसी हिंदी के लिए

    चरणजीत सिंह चन्नी

    पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की ओर से बिहार के लोगों पर की गई टिपण्णी का बिहार में पुरजोर विरोध हो रहा है.

    उनके बयान के ख़िलाफ़ पटना के कदमकुआँ थाने में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष कुमार ने आवेदन दिया है और विभिन्न धाराओं के तहत सख्त कारवाई की मांग की है.

    इस संबंध में थानाध्यक्ष विमलेन्दु ने बताया कि “आवेदन प्राप्त हुई है और उसकी जांच की जा रही है. फिलहाल कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है.”

    वहीं मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला अदालत में सामाजिक कार्यकर्त्ता तमन्ना हाशमी ने उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज कराया है.

    इस मामले की सुनवाई के लिए अदालत ने अगली तारीख़ 24 फ़रवरी मुक़र्रर की है.

  16. इमरान ख़ान का आगामी रूस दौरा इसलिए है ख़ास

    इमरान ख़ान

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    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अगले हफ़्ते रूस के दौरे पर जाएंगे.

    रूस और पाकिस्तान के रिश्ते में गर्मजोशी कभी नहीं रही है. शीत युद्ध के दौरान पाकिस्तान रूस के विरोधी अमेरिकी खेमे में था.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता असीम इफ़्तिखार ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि इमरान ख़ान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बुलावे पर रूस जाएंगे.

    इस दौरे से जु़ड़ी और जानकारी उन्होंने साझा नहीं की. हालांकि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सही समय पर दौरे से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी.

    पाकिस्तान के अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि इमरान ख़ान 23 फ़रवरी को मॉस्को के लिए रवाना होंगे.

    पिछले 23 सालों में किसी भी चुने हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का यह पहला आधिकारिक द्विपक्षीय रूस दौरा होगा.

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    आख़िरी बार 1999 में नवाज़ शरीफ़ रूस दौरे पर गए थे. पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़, पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़क़ान अब्बासी भी रूस गए थे लेकिन इनमें से कोई भी आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा नहीं था.

    रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री चौधरी फ़वाद हुसैन ने कहा है कि इमरान ख़ान का रूस दौरा गेमचेंजर साबित होगा और इससे दोनों देशों के संबंध मज़बूत होंगे.

    इमरान ख़ान

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    व्लादिमीर पुतिन पिछले 21 सालों से रूस की सत्ता पर क़ाबिज़ हैं, लेकिन वो कभी पाकिस्तान नहीं गए. इसी दौरान वो कई बार भारत आ चुके हैं.

    अक्सर ऐसा होता है कि कोई अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आता है तो पाकिस्तान भी चला जाता था, मगर पुतिन ने ऐसा कभी नहीं किया.

    बात केवल पुतिन की नहीं है. रूस का कोई भी राष्ट्रपति आज तक पाकिस्तान नहीं गया. रूस जब सोवियत संघ का हिस्सा था तब भी किसी राष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा नहीं हुआ. सोवियत संघ के पतन के 16 सालों बाद 11 अप्रैल, 2007 को रूस के प्रधानमंत्री मिख़ाइल फ़्रादकोव पाकिस्तान गए थे.

  17. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अहमद हसन नहीं रहे

    अहमद हसन

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    पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता अहमद हसन शनिवार को निधन हो गया है. वो उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी थे.

    अहमद हसन बीते कुछ वक्त से बीमार थे और लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती थे.

    अहमद हसन अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले पुलिस अधिकारी बने. बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा. उन्हें मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता है.

    उत्तर प्रदेश के मुखंयमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी मौत पर दुख जताया है.

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  18. योगी बोले- अहमदाबाद धमाके में सज़ा पाने वाले एक दोषी का परिवार सपा प्रमुख के साथ दिखा था

    योगी

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत के पूरनपुर में शनिवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी आतंकवादियों से सहानुभूति रखती है.

    योगी ने कहा, "गुजरात के एक न्यायालय ने अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में 38 आतंकवादियों को फांसी के साथ उम्र क़ैद की भी सज़ा दी है. इनमें उत्तर प्रदेश के भी कुछ आतंकवादी थे और इनमें से एक आतंकवादी का परिवार तो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ समाजवादी पार्टी के लिए वोट मांगते हुए दिखा है. समाजवादी पार्टी का प्रचार कर रहा है."

    योगी ने कहा, "आप अनुमान कर सकते हैं कि नई हवा है, वही सपा है. सपा का हाथ आतंकवादियों के साथ. ये एक बार फिर से साबित हो गया है. 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी थी तो उसने पहला काम आतंकवादियों के केस वापस लेने का काम किया था. ये आतंकवादी संकटमोचन, रामजन्मभूमि और सीआरपीएफ़ कैंप पर हमला करने वाले थे."

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, "न्यायालय के फ़ैसले से एक बार फिर साबित हो गया है कि समाजवादी पार्टी का हाथ आतंकवादियों के साथ है. यही समाजवादी पार्टी और बीजेपी में फ़र्क़ है."

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  19. इमरान ख़ान ने रैली में अमेरिका पर साधा निशाना

    इमरान ख़ान

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    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शुक्रवार को पंजाब प्रांत के मंडी बहाउद्दीन में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए अमेरिका पर बिना नाम लिए निशाना साधा है.

    इमरान ख़ान ने कहा, "पहली दफ़ा पाकिस्तान में एक आज़ाद विदेश नीति बनी है. अब पाकिस्तान किसी दूसरे मुल्क के दबाव में नहीं आता. पिछली सरकारों में पाकिस्तान में ड्रोन अटैक होते थे. हमारा जो सहयोगी था, वही हम पर बमबारी करता था. पहले की सरकारें इसलिए नहीं बोलती थीं क्योंकि उनके पैसे वहीं पड़े थे. ये उनके ग़ुलाम थे."

    अमेरिका की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "मैं एक सुपरपावर को कह सकता हूँ कि उन्हें एयरबेस नहीं दूंगा."

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिका पाकिस्तान में एक सैन्य अड्डा चाहता था लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.

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    विपक्ष ने इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फ़ैसला किया है. विपक्ष की इसी तैयारी के ख़िलाफ़ इमरान ख़ान ने जनसभाएं शुरू कर दी हैं.

    एक जनसभा को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के सुप्रीमो नवाज़ शरीफ़ को पाकिस्तान से जाने देना उनकी सरकार की सबसे बड़ी ग़लती थी.

    इमरान ख़ान ने कहा कि पीएमएल-एन, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और अन्य विपक्षी नेता मुल्क की संपत्ति लूट विदेशों में भेज देते हैं.

    इमरान ख़ान ने कहा, ''पहले शहबाज़ शरीफ़ ने अपने बेटे को लंदन भगाया. अपने दामाद को बाहर भेजवाया. ख़क़्क़ान अब्बासी जब प्रधानमंत्री थे, उन्होंने कई लोगों को बाहर जाने दिया. जनरल मुशर्रफ़ से जिस तरह से एनआरओ लिया था, उस तरह अब किसी को एनआरओ नहीं मिलेगा. जब तक कौम का पैसा वापस नहीं करेंगे तब तक मैं इन्हें छोड़ूंगा.''

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    शहबाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के छोटे भाई हैं और पाकिस्तान के प्रमुख विपक्षी नेता हैं. इमरान ख़ान ने कहा कि शहबाज़ शरीफ़ अगर भ्रष्टाचार में बेकसूर हैं तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहना चाहिए कि वह हर दिन केस की सुनवाई करे.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा, "मरियम नवाज़ भी जजों से डरी हुई हैं. उनकी पार्टी चाहती है कि जल्दी से मेरी सरकार जाए. लेकिन मैं हर चुनौती के लिए तैयार हूँ. शरीफ़ खानदान मेरा पैग़ाम है, आपका जो भी आपका प्लान है, कप्तान उसके लिए तैयार बैठा है. आपकी हार ही नहीं होगी, जेल में जाएंगे."

  20. यूक्रेन की फ्रंटलाइन से ग्राउंड रिपोर्ट

    रूस-यूक्रेन संकट के कारण पैदा हुआ तनाव कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा है. इन दोनों मुल्कों के बीच जो हो रहा है उस पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं.

    आरोप-प्रत्यारोप के बीच सुलह के लिए राजनयिक प्रयास भी जारी हैं लेकिन फ़िलहाल उससे बात बनती नहीं दिख रही.

    देखिए यूक्रेन की फ्रंटलाइन से यह ख़ास कवर स्टोरी.

    वीडियो कैप्शन, COVER STORY: यूक्रेन फ्रंट लाइन से ग्राउंड रिपोर्ट