ज़ाकिर नाइक की संस्था ने यूएपीए ट्रिब्यूनल के सामने रखा अपना पक्ष

विवादास्पद इस्लामी प्रचारक और उपदेशक ज़ाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फ़ाउंडेशन (आईआरएफ़) ने केंद्र सरकार द्वारा अपनी संस्था को ग़ैरक़ानूनी क़रार देने को मनमाना और अवैध बताया है.

लाइव कवरेज

  1. समाजवादी पार्टी जाति और धर्म की राजनीति कर रही है: राजनाथ सिंह

    राजनाथ सिंह

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    रक्षा मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक जनसभा में समाजवादी पार्टी पर 'तुष्टीकरण की राजनीति' करने का आरोप लगाया है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि केवल बीजेपी ही राज्य का विकास कर सकती है.

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ''वे कहते हैं कि गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में केवल 3 लोग ही मारे गए थे. लेकिन अब आस्ट्रेलिया के एक अख़बार के हवाले से मैं बताना चाहता हूं कि गलवान में चीन के 2 या 4 सैनिक नहीं बल्कि 38 से 50 सैनिक मारे गए थे.''

    राजनाथ सिंह ने दावा किया कि भारतीय सीमा पूरी तरह सुरक्षित हैं. वे मथुरा ज़िले के बलदेव विधानसभा में बीजेपी उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने के लिए वहां आए थे.

    रक्षा मंत्री ने कहा, ''राजनीति लोगों के ​कल्याण और विकास के लिए होनी चाहिए, न कि सरकार बनाने के लिए. राजनीति जाति और धर्म पर आधाति नहीं होनी चाहिए. समाजवादी पार्टी जाति और धर्म आधारित राजनीति कर रही है.''

    उन्होंने दावा किया, ''भारतीय जनता पार्टी जो कहती है, वो करती है. नए भारत का निर्माण उत्तर प्रदेश के विकास से ही हो सकता है. और उत्तर प्रदेश का विकास केवल बीजेपी ही कर सकती है.''

    राजनाथ सिंह ने कहा कि आज़ाद भारत के नेताओं ने लोगों से किए अपने वायदों को नहीं निभाया. पंडित दीनदयाल उपाध्याय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी पंडित जी के बताए रास्तों और सोच पर काम कर रही है.

  2. उत्तराखंड में सभी पार्टियों ने महिलाओं को टिकट देने में की कंजूसी

    कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी

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    उत्तराखंड की राजनीति में महिलाएं हाशिए पर हैं. पिछले चुनाव (2017) में यहाँ की 37 विधानसभाओं में महिला मतदाता पुरुषों के मुक़ाबले अधिक थीं.

    इसके बावजूद वर्तमान विधानसभा चुनाव (2022) में तीनों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, बीजेपी और आप ने कुल मिलाकर 10 फ़ीसद महिलाओं को भी टिकट नहीं दिए हैं.

    इसकी वजह क्या बताई जा रही है? राजनीतिक दलों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में जिताऊ प्रत्याशी की ज़रूरत होती है तो राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि धनबल-बाहुबल की प्रधानता वाली इस राजनीति का स्वरूप ऐसा है कि ज़्यादातर महिलाएं ख़ुद को इसमें अनफ़िट पाती हैं.

    उत्तराखंड में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में राज्य की दो प्रमुख पार्टियों ने हमेशा ही कंजूसी दिखाई है. इसका परिणाम यह हुआ है कि कभी भी पाँच से ज़्यादा महिलाएं चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच पाईं.

    हालांकि चौथी विधानसभा के दौरान बीजेपी विधायक प्रकाश पंत और मगन लाल शाह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नियां क्रमशः चंद्रा पंत पिथौरागढ़ से और मुन्नी देवी थराली से उपचुनाव जीतकर विधायक बनीं.

  3. मुसलमानों से अपने रिश्ते पर बोले योगी आदित्यनाथ

    योगी

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने न्यूज़ चैनल नेटवर्क 18 को दिए इंटरव्यू में कहा है कि मुसलमानों से उनका वही रिश्ता है जो रिश्ता मुसलमानों का उनसे है.

    प्रधानमंत्री मोदी सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा देते हैं लेकिन बीजेपी ने किसी भी मुसलमान को टिकट क्यों नहीं दिया? आपका मुसलमानों से क्या रिश्ता है?

    नेटवर्ट 18 के इस सवाल के जवाब में योगी ने कहा आदित्यनाथ ने कहा, ''मेरा वही रिश्ता उनके साथ में है, जो उनका रिश्ता मुझसे है. उत्तर प्रदेश सरकार में एक मुस्लिम मंत्री हैं. केंद्र सरकार में मंत्री हैं, नक़वी जी. और भी इस प्रकार के चेहरे हैं. आरिफ़ मोहम्मद ख़ान जी केरल के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. किसी व्यक्ति, जाति या मज़हब से विरोध नहीं है. लेकिन हाँ, जिसका विरोध भारत से है, भारतीयता है, स्वाभाविक रूप से हमारा उससे विरोध है.''

    ''जो भारत से प्यार करता है, हम उससे प्यार करते हैं. जो भारत के मूल्यों, सिद्धांतो में रचा-बसा है, उसको गले से लगाते हैं, सम्मान भी देते हैं. सबका साथ, सबका विकास अगर आज़ादी के बाद किसी ने ईमानदारी से किया है तो वो भारतीय जनता पार्टी ने किया है. आप देख सकते हैं, जो लोग ग़रीबी हटाओ का नारा देते थे, सामाजिक न्याय की बात करते थे उन्होंने कौन सामाजिक न्याय दिया? ग़रीबों की पेंशन हड़प जाना क्या सामाजिक न्याय है?''

    योगी ने कहा, ''हम तुष्टीकरण किसी का नहीं करते हैं. हम व्यवस्था को भारत के संविधान के अनुरूप चलाएंगे. सेक्युलरिज़म का मतलब हिन्दू विरोध नहीं हो सकता और इसका मतलब तुष्टीकरण भी नहीं हो सकता. सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ रही है.''

  4. सपा-आरएलडी के उम्मीदवार पर राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज

      • Author, अनंत झणाणे
      • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, यूपी से
    नीरज चौधरी

    इमेज स्रोत, चुनाव आयोग

    इमेज कैप्शन, नीरज चौधरी

    उत्तर प्रदेश के चुनाव में बिजनौर से आरएलडी और सपा के संयुक्त प्रत्याशी डॉ नीरज चौधरी के खिलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया गया है.

    दर्ज एफआईआर में नीरज चौधरी पर आरोप है की तीन फ़रवरी को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमे वो अपने 20-25 समर्थकों के साथ ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाते हुए और बिना मास्क पहने एक समूह में जाते हुए दिख रहे हैं.

    इलाक़े के सब इंस्पेक्टर की तहरीर पर दर्ज हुई एफ़आईआर में लिखा हुआ है की डॉ नीरज चौधरी के इस वायरल वीडियो में की गई नारेबाजी से "सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की पूर्ण सम्भावना है और एक वर्ग विशेष की भावनाएं आहात हुई हैं."

    एफ़आईआर में इस वायरल वीडियो में दिए गए कथित बयान को "देश विरोधी और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला" बताया गया है.

    कोतवाली शहर में दर्ज हुई इस एफ़आईआर में डॉ नीरज चौधरी पर कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन का भी आरोप है और डॉ नीरज चौधरी को नामज़द किया गया है.

    डॉ नीरज ने अपनी सफ़ाई में एक वीडियो बीबीसी के साथ शेयर किया, जिसमे उन्होंने कहा कि, "आप उस वीडियो को ध्यान से सुनिए,उस कार्यक्रम के आयोजक आकिब अंसारी थे और उस वीडियो को अगर आप ध्यान से सुनेंगे तो उसमे ‘नीरज भाई ज़िंदाबाद,आकिब भाई ज़िंदाबाद’ के नारे लग रहे हैं. आईटी सेल में हम लोग इस बात की तहरीर दे रहे हैं, कि इस तरीके से भ्रामक प्रचार को रोका जाये. जिस प्लेटफार्म से यह वीडियो वायरल हुई है,जिस तरह से की गयी है,उस पर ध्यान दिया जाये.''

    ''इस तरीके से माहौल बिगाड़ने की कोशिश नहीं की जाये. मेरी लोगों से विनती है उस वीडियो को दोबारा सुनें,उसमे ‘नीरज चौधरी ज़िंदाबाद,जयंत चौधरी ज़िंदाबाद और आकिब भाई ज़िंदाबाद’ के नारे लग रहे हैं."

    51 साल के डॉ नीरज चौधरी के नामांकन से जुड़े हलफ़नामे के मुताबिक़ इस एफआईआर के पहले कोई भी आपराधिक मामला उन पर दर्ज नहीं है. नीरज चौधरी ने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की है और वो मेडिसिन में एमडी हैं, वह बतौर जनरल फिजिशियन और डायबिटोलॉजिस्ट बिजनौर में प्रैक्टिस करते हैं.

    आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने भी इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा, "मतदाताओं को सतर्क रहना है. ये चुनाव भाईचारा बनाम भाजपा है.नए भारतमें'आकिफ भाईज़िंदाबाद’ को पाकिस्तान जिंदाबाद बताया जाता है"

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    इससे पहले उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि, "हमारे बिजनौर के प्रत्याशी,चौधरी नीरज एक डॉक्टर हैं,नेक इंसान हैं. उन्हें ये मूर्ख,वीडियो से छेड़छाड़कर के देशद्रोही साबित करने में लग रहे हैं."

    नीरज चौधरी ने यह मामला बिजनौर के चुनाव निरीक्षक के संज्ञान में भी लाया है..

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    3 फरवरी को बिजनौर के पुलिस अधीक्षक नगर प्रवीण रंजन सिंह की ओर से एक बयान जारी हुआ जिसमे वो नीरज चौधरी के ख़िलाफ़ दर्ज हुई एफआईआर की जानकारी देते हुए कह रहे हैं कि"सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है,जिसमे बिजनौर सदर से गठबंधन प्रत्याशी की मौजूदगी में आपत्तिजनक नारे लगाए जा रहे हैं,इसका संज्ञान लेते हुए तत्काल पुलिस ने कोतवाली नगर बिजनौर में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत करा दिया गया है."

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    बीबीसी ने फ़ोन पर बिजनौर पुलिस अधीक्षक नगर प्रवीण रंजन सिंह से मामले के बारे में ताज़ा जानकारी लेने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका

  5. कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद पर बोले राहुल गांधी

    राहुल गांधी

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    कर्नाटक के उडुपी में जूनियर कॉलेज में हिजाब पहनने को लेकर जारी विवाद के मामले पर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हिजाब को लड़कियों की शिक्षा के आड़े मत आने दीजिए.

    शनिवार को सरस्वती पूजा के मौक़े पर राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा, ‘’छात्राओं के हिजाब को उनकी शिक्षा में आड़े लाकर हम भारत की बेटियों का भविष्य छीन रहे हैं.‘’

    ‘’मां सरस्वती सभी को ज्ञान देती हैं, वह भेद नहीं करतीं.’’

    कर्नाटक के उडुपी में जूनियर कॉलेज में लड़कियों के हिजाब पहनने को लेकर विवाद चल रहा है, कॉलेज प्रबंधन ने हिजाब पहनने वाली छात्राओं का प्रवेश रोक दिया है.

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    इसके बाद कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ़ छात्राओं ने अपना रुख़ कड़ा कर लिया है. वहीं दूसरी ओरछात्रों के दो गुटों के बीच हिजाब और भगवा शॉल पहनने का मुक़ाबला भी शुक्रवार को नज़र आया.

    ये विवाद बीते महीने शुरू हुआ जबएक प्री-यूनिवर्सिटी गवर्नमेंट कॉलेज की लगभग आधा दर्जन छात्राएं मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा में आईं.

    स्कूल प्रबंधन ने हिजाब पहनकर छात्राओं के क्लास में आने पर रोक लगा दी लेकिन इन छात्राओं ने हिज़ाब उतारने से इनकार कर दिया है.

    दूसरे वर्ष की इन छात्राओं ने हिजाब उतारकर क्लास में बैठने की अपीलों को ख़ारिज कर दिया. सेकेंड्री स्कूल में 12वीं क्लास के स्तर की इन छात्राओं से ज़िले के अधिकारियों के समूह ने हिजाब उतारकर क्लास में हिस्सा लेने का आग्रह किया था. ज़िले के असिस्टेंट कमिश्नर ने छात्राओं से कहा था कि वो सिर्फ़ क्लास में हिस्सा लेने के लिए हिजाब उतारें और कैंपस में हिजाब पहने रहें.

    स्कूल प्रशासन का तर्क है कि ये कॉलेज सिर्फ़ महिलाओं के लिए है और छात्राओं को हिजाब पहनने कि ज़रूरत नहीं है. वो भी तब जब उन्हें पढ़ाया जा रहा हो.

  6. मनोज झा का संसद में दिया गया भाषण चर्चा में

    मनोज झा

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    संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर शुक्रवार को आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा के दिए भाषण की चर्चा सोशल मीडिया पर ख़ूब हो रही है.

    मनोज झा ने अपनी बात रखते हुए सदन में कहा कि पाकिस्तान में चुनाव हमारे नाम पर नहीं लड़े जाते लेकिन हमारे यहाँ चुनाव पाकिस्तान के नाम पर लड़े जा रहे हैं. मनोज झा ने कहा कि आज जिन्ना जहाँ भी होंगे, सोचते होंगे जो जीते जी ना मिला वो भाजपा ने मरने के बाद दे दिया.

    राज्यसभा में मनोज झा ने कहा, ''राष्ट्रपति का अभिभाषण देश को दिशा और दशा देने की कोशिश होती है, देश का एक ब्लूप्रिंट होता है. अगर हम देश की दशा से चिंचिंत हैं, तो ये चिंता की लक़ीरें अभिभाषण में क्यों नज़र नहीं आतीं. क्या राष्ट्रपति महोदय को सलाहकारों से बात करने, न्यूज़ देखते ये हालात नहीं दिख रहे होंगे.''

    राष्ट्रपति का भाषण दलीय धारा से ऊपर हो

    छात्रों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा, ‘’ छात्र नौकरी मांग रहे थे, कोई चांद नहीं मांग रहे थे, वो दो करोड़ वाली नौकरी भी नहीं मांग रहे थे, कह रहे थे बाक़ी बची हुई नौकरियां दे दो, लेकिन आपने (सरकार) ने लाठियां बरसाई.''

    ''मैं सोचता हूं महामहिम के भाषण में अगर इन सबका ज़िक्र ना हो तो वो अभिभाषण नहीं कागज़ का पुलिंदा लगता है. सन 1950 से लेकर अब तक मुझे पता है की राष्ट्रपति का अभिभाषण लिखा कहां जाता है लेकिन मैं आग्रह करूंगा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष अगर सोच सकें तो राष्ट्रपति के भाषण को दलीय धाराओं से ऊपर रखना चाहिए.‘’

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    बौनी समझ वाले लोग लंबा इतिहास नहीं लिख सकते

    मनोज झा ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘’इतिहास की अपनी स्मृति होती है और स्मृतियों का एक इतिहास होता है और विश्व इतिहास गवाह है कि जिस किसी ने भी अतीत की स्मृतियों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश है, वह इतिहास के फुटनोट में चला गया इतिहास नहीं बन सका.''

    ''नेता जी सुभाष चंद्र बोस देश के नेता जी हैं. आपने उन्हें इंपीरियल कैनोपी में रखने का फ़ैसला लिया. वो जिंदा होते तो कहते कैनोपी में नहीं दिलों में रखो. मैंने नेता जी की चिट्ठियां पढ़ी हैं नेहरू जी के नाम, मैंने नेता जी की चिट्ठियां पढ़ी हैं बापू के नाम और उस दौर के तमाम नेताओं के नाम.''

    ''कहाँ क़द था नेता जी का नेहरू का, बापू का और पटेल का और समीक्षा कौन लोग कर रहे हैं. बौनी समझ के लोग लंबा इतिहास नहीं लिख सकते, लंबी लकीर नहीं खींच सकते.‘’

    ‘’हमने 1952 में पहला चुनाव लड़ा, हम विभाजन से निकल कर आए थे, बँटवारे पीड़ा और दर्द था, लाखों लोग दोनों ओर मारे गए, लेकिन 1952 का चुनाव हमने समावेशी विकास और रोज़गार पर लड़ा.''

    ''70 साल बाद हम किस चीज़ पर चुनाव लड़ रहे हैं देख लीजिए. मुझे ताज्जुब होता है कि पाकिस्तान में चुनाव हमारे नाम पर नहीं होता लेकिन हमारे यहां चुनाव पाकिस्तान के नाम पर होता है. जिन्ना कहीं भी होंगे सोचते होंगे कि जो जीते जी मुझे नहीं मिल सका वो मरने के बाद भाजपा वालों ने मुझे दे दिया.‘’

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    मनोज झा के इस भाषण की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ़ की जा रही है.

    इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब ने इस भाषण का लिंक साझा करते हुए लिखा,‘’ मनोज झा ने अपने भाषण दिल में बिलकुल दिल से बात कही है.‘’

    पत्रकारउमाशंकर सिंह ने भाषण का वीडियो शेयर करते हुए एक हिस्से का ज़िक्र किया, ‘’राष्ट्रपति का अभिभाषण देश का ब्लू प्रिंट होता है…छात्र चाँद नहीं रोज़गार मांग रहे थे और आपने लाठियां बरसायी... और जब इस तरह की चिंता राष्ट्रपति के अभिभाषण में नज़र नहीं आती है तो ये काग़ज़ का पुलिंदा लगता है और अच्छा नहीं लगता है अभिभाषण को कागज़ का पुलिंदा कहते”.

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    लेखक और पत्रकार रोहिन कुमार ने भाषण के साथ ही मनोज सिन्हा के कश्मीरी वेशभूषा पर लिखा,‘’कितना सुखद हैये मनोजसर,हां,कश्मीर को हमारा ध्यान चाहिए. कश्मीरियों को धैर्य से सुनने की जरूरत है. इसे हीलिंग टच की जरूरत है. ये कोई एहसान नहीं होगा,वे इसके लायक हैं.’’

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  7. लद्दाख में चीन कब्ज़े वाली ज़मीन पर पुल बना रहा है- केंद्र सरकार

    लद्दाख

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    पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर चीन अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्र में पुल बना रहा है. ये बात केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया.

    विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने संसद में लिखित जवाब देते हुए बताया,‘ चीन की ओर से पैंगोंग झील पर पुल बनाया जा रहा है, जिसका भारत सरकार ने संज्ञान लिया है. इस पुल का निर्माण उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जो 1962 से चीन के अवैध क़ब्जे में हैं.‘’

    ‘’भारत सरकार ने इस अवैध क़ब्ज़े को कभी स्वीकार नहीं किया है. सरकार ने कई मौक़ों पर यह स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न अंग हैं और हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे.‘’

    बयान में कहा गया कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर शांति बनाए रखने के लिए भारत चीन के साथ कूटनीति और सैन्य स्तर पर बातचीत जारी रखे हुए है.

    सरकार ने बताया, ‘’हमारी ये बातचीत हमेशा से तीन बिंदुओं पर केंद्रित रही हैं और आगे भी रहेंगी. ये तीन बिंदु हैं: 1- दोनों ही पक्षों को एलएसी का कड़ाई से पालन और सम्मान करना होगा. 2- दोनों ही पक्ष यथास्थिति बरकरार रखेंगे, 3- कोई भी समझौता दोनों पक्षों के पूर्ण सहमति के साथ ही होगा.’’

    जवाब में ये भी कहा गया कि ‘’ सरकार ने इस बात का भी संज्ञान लिया है कि चीन की ओर से भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों का नाम बदला गया है लेकिन इस निरर्थक प्रयास से ये तथ्य नहीं बदल जाएगा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा ‘’

    चीन का ये आठ मीटर चौड़ा पुल पैंगोंग के उत्तरी तट पर एक चीनी सेना के मैदान के ठीक दक्षिण में स्थित है,जहाँ 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध के दौरान चीनी सेना के फील्डअस्पताल और आवास देखे गए थे.

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    साल 2020 में गालवान घाटी में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच हुई हिंसक मुठभेड़ के बाद से ही भारत और चीन के बीच इस इलाके् में गतिरोध बना हुआ है.

    गलवान में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे. तब से लेकर अब तक दोनों पक्षों के 50,000 से अधिक सैनिकों को पूर्वी लद्दाख में तैनात किया गया है.

  8. उत्तर प्रदेश चुनाव: अलीगढ़ में बीजेपी भारी या अखिलेश-जयंत गठबंधन

  9. चीन दौरे पर इमरान ख़ान लेकिन ट्विटर से निशाना भारत पर

    पीएम इमरान ख़ान

    इमेज स्रोत, REUTERS

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चार दिवसीय दौरे पर चीन में हैं लेकिन ट्विटर से निशाना भारत पर साध रहे हैं.

    शुक्रवार को इमरान ख़ान ने कई ट्वीट किए हैं.

    इन ट्वीट में उन्होंने कश्मीर को लेकर भारत पर निशाना साधा है. उन्होंने भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है.

    इमरान ख़ान ने लिखा, ‘‘कश्मीर में निष्पक्ष जनमत संग्रह सुनिश्चित कराना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ज़िम्मेदारी है. दुनिया को भारत के कश्मीर में लोगों की दुर्दशा और भारत के कठोर सैन्य कब्ज़े से ख़ुद को आज़ाद करने की उनकी इच्छा को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए.’’

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    उन्होंने लिखा, ‘‘यह समय है जब दुनिया IIOJK में भारत के गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान दे जिनमें मानवता के ख़िलाफ़ अपराध, युद्ध अपराध और नरसंहार के साथ-साथ जबरन जनसांख्यिकीय परिवर्तन का ख़तरा शामिल है. ये सभी जिनेवा कन्वेंशन का पूरी तरह उल्लंघन है.’’

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    इमरान ख़ान ने ट्वीट किया, ‘‘पाकिस्तान हमारे कश्मीरी भाइयों और बहनों के साथ खड़ा है और आत्मनिर्णय के लिए उनके वैध संघर्ष को लेकर प्रतिबद्ध है. मोदी की दमन और हिंसा की फासीवादी नीतियां आईआईओजेके में कश्मीरी विरोध की भावना को कुचलने में विफल रही हैं.’’

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  10. पाकिस्तान की दलित हिन्दू सीनेटर कृष्णा कुमारी कोहली चर्चा में

  11. फ़िलीपींस स्थित रूसी दूतावास में लगी आग में कोई हताहत नहीं

    फ़िलीपींस स्थित रूसी दूतावास

    इमेज स्रोत, Bureau of Fire Protection-Makati

    इमेज कैप्शन, फ़िलीपींस स्थित रूसी दूतावास

    रूस के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि फ़िलीपींस स्थित रूसी दूतावास की इमारत में लगी आग में कोई हताहत नहीं हुआ है. दूतावास के सभी कर्मचारियों और उनको परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है.

    रूस की समाचार एजेंसी ताश के मुताबिक़, मंत्रालय से जुड़े विभाग के टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान में कहा गया, "इस दुर्घटना में कोई घायल नहीं हुआ है. दूतावास में स्थित कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. मनीला में रूसी दूतावास में लगी आग पर काबू पा लिया गया है."

    इससे पहले शुक्रवार को फिलीपींस के न्यूज़ चैनल रैपलर मीडिया ने मनीला स्थित रूसी दूतावास में आग लगने की सूचना दी थी. चैनल ने अपने यूट्यूब अकाउंट पर जलती हुई इमारत का वीडियो शेयर किया था.

  12. द कश्मीर वाला के संपादक फ़हाद शाह गिरफ़्तार

    फ़हाद शाह

    इमेज स्रोत, Fahad ShahTwitter

    पत्रकार फ़हाद शाह को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. उन्हें एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण गिरफ़्तार किया गया है.

    बीबीसी के सहयोगी पत्रकार माजिद जहांगीर के अनुसार, पुलिस ने आरोप लगाया है कि फ़हाद ने सोशल मीडिया पर ‘देश-विरोधी’ पोस्ट शेयर की थी.

    फ़हाद ऑनलाइन मैगज़ीन द कश्मीर वाला के संपादक हैं.

    अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि ‘’ सोशल मीडिया पोस्ट में आतंकवादी गतिविधियों का महिमामंडन करने का आरोप है और क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों की छवि को नुक़सान पहुँचाया गया है. साथ ही यह पोस्ट देश के ख़िलाफ़ दुर्भावना और असंतोष पैदा करने वाला था."

    पुलवामा पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि “कुछ फ़ेसबुक यूज़र्स और पोर्टल जनता के बीच भय पैदा करने के लिए आपराधिक इरादे से तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट सहित राष्ट्र विरोधी सामग्री अपलोड कर रहे हैं और इस तरह अपलोड की गई सामग्री जनता को नियम-कानून तोड़ने के लिए उकसा सकती हैं.’’

    इस मामले की एफ़आईआर 19/2022 के तहत जांच के दौरान शाह को गिरफ़्तार कर पुलिस रिमांड में रखा गया है. मामले की जांच जारी है.

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    जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्विटर लिखा, “सच्चाई के लिए खड़े होना राष्ट्रविरोधी माना जाता है. एक असहिष्णु और तानाशाही सरकार को आईना दिखाना भी राष्ट्रविरोधी है. फ़हाद की पत्रकारिता मुखर आवाज़ है और भारत सरकार की ज़मीनी वास्तविकता को जनता के सामने लाती है.आप कितने फ़हाद को गिरफ्तार करेंगे?”

  13. पंजाब चुनाव:ग़ुलाम नबी आज़ाद और मनीष तिवारी का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट से ग़ायब

    गुलाम नबी आज़ाद

    इमेज स्रोत, Getty Images

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद और मनीष तिवारी का नाम पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सूची में नहीं है.

    शुक्रवार को जारी 15 स्टार प्रचारकों की सूची में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी,प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह,कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी,पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम शामिल हैं.

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    आज़ाद का नाम प्रचारकों की लिस्ट से बाहर होना महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका नाम यूपी के पहले चरण के चुनाव के लिए जारी की गई स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल था.

    लेकिन इसके ठीक एक दिन बाद आज़ाद का नाम केंद्र सरकार की ओर से पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने के लिए चुना गया.

    मनीष तिवारी

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, मनीष तिवारी

    लेकिन मनीष तिवारी को इस लिस्ट से हटाने का फ़ैसला और भी हैरान करने वाला है क्योंकि वह न केवल वर्तमान में सांसद हैं बल्कि राज्य में सक्रिय रूप से प्रचार भी कर रहे हैं.

    पंजाब में लगभग 40% मतदाता हिंदू हैं और तिवारी इस समुदाय के एक प्रमुख नेता हैं.

    हालाँकि,दोनों ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से असहमति जताने वाले ग्रुप-23 के भी हिस्सा हैं. इस ग्रुप ने अगस्त 2020 में कांग्रेस हाईकमान को पत्र लिखकर पार्टी में सुधार के लिए कहा था.

  14. नमस्कार!

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