नेताजी होते तो क्या हरिद्वार धर्म संसद को मंज़ूरी देते? संसद में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का सवाल

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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर संसद में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने बयान दिया कि क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस हरिद्वार की उस धर्म संसद को मंज़ूरी देते जहां मुस्लिमों के नरसंहार का आह्वान किया गया.
महुआ मोइत्रा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में स्वतंत्रता सेनानियों के ज़िक्र को भी केवल "दिखावटी" करार दिया.
टीएमसी सांसद ने कहा, "राष्ट्रपति के अभिभाषण में कई जगह नेताजी का उल्लेख़ था. मैं इस गणतंत्र को याद दिलाना चाहती हूं कि ये वही नेताजी हैं जिन्होंने कहा था भारत सरकार को सभी धर्मों के प्रति एकदम निष्पक्ष और तटस्थ रवैया अपनाना चाहिए."
महुआ मोइत्रा ने पूछा, "क्या नेताजी हरिद्वार की उस धर्म संसद को मंज़ूरी देते जो जहां मुस्लिमों के नरसंहार के लिए ख़ून-ख़राबे का आह्वान किया गया."
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संसद में तेज़तर्रार भाषणों के लिए मशहूर मोहुआ मोइत्रा ने सुबह ही ट्वीट कर अपने इस भाषण के बारे में विवादास्पद बयान दे दिया था.
वे अपने उस ट्वीट के लिए ट्रोल भी हुईं.
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संसद के बाहर मोइत्रा ने कहा कि उन्हें स्पीकर उनके जवाब के लिए तय 13 मिनट का वक्त भी नहीं दिया.
मोहुआ ने पत्रकारों को बताया, "क्या स्पीकर मुझे ये बताने के अधिकार है कि मुझे अपना भाषण कैसे देना चाहिए. उन्होंने मुझसे कहा कि इतना गुस्से में न बोलिए. मैं गुस्से में बोलूं या प्यार से- ये मेरा फ़ैसला है. दूसरी बात मुझे 13 मिनट नहीं बोलने दिया गया. मुझे एक पैरा और बोलना था."
स्पीकर अनुपस्थिती में बिहार के शिवहर से सांसद रमा देवी लोकसभा की कार्यवाही को संचालित कर रही थीं.
भाषण के बीच में रमा देवी ने मोइत्रा से कहा, "मोहुआ जी थोड़ा-सा प्रेम से बोलिए. इतना गुस्सा नहीं करिए."
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