कज़ाख़स्तान
में सरकार के ख़िलाफ़ हिंसक विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए रूसी सेना को बुलाने
का अमेरिका ने कड़ा विरोध करते हुए इस पर कई सवाल खड़े किए हैं.
अमेरिका के
विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि इतिहास दिखाता है कि एक बार रूसी जब आपके
घर में घुसते हैं तो फिर उन्हें बाहर निकालना बहुत मुश्किल होता है.
वहीं रूस ने
कह दिया है कि उसके सुरक्षाबलों की तैनाती एक साझा सुरक्षा समझौते के तहत है जो कि
अस्थाई है.
दूसरी ओर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी कज़ाख़स्तान में स्थिरता कायम करने के लिए ‘कड़े क़दम’ उठाने का समर्थन किया है.
चीन का कज़ाख़स्तान में भारी निवेश
है और चीन के शिंजियांग प्रांत से कज़ाख़स्तान की सीमा लगती है. शिंजियांग में ही
चीन को वीगर मुसलमानों के व्यवहार के प्रति वैश्विक आलोचनाओं का सामना करना पड़ता रहा
है.
महंगाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
देश में बढ़ते तेल के दामों के
ख़िलाफ़ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी
है.
कज़ाख़स्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्त
तोकाएव ने बताया है कि सुरक्षाबलों ने अल्माटी शहर को वापस अपने नियंत्रण में ले
लिया है.
शहर में मौजूद बीबीसी संवाददाता ने तबाही
के मंज़र के बारे में बताया है कि कैसे इमारतों को आग लगाई गई है और लूटा गया है
और क्षतिग्रस्त कारों में शव पड़े हुए हैं.
रूस की सेना पहुंची
कज़ाख़स्तान
राष्ट्रपति तोकाएव ने इस
हिंसा के लिए विदेशों में ट्रेनिंग लेने वाले ‘आतंकियों’ को ज़िम्मेदार ठहराया है.
हालांकि, उन्होंने ये नहीं स्पष्ट किया है कि वे इस नतीजे पर कैसे पहुंचे.
इसी बीच कज़ाख़स्तान के अनुरोध पर रूस के नेतृत्व वाली सेना
कज़ाख़्स्तान पहुंच चुकी है.
कज़ाख़स्तान के गृह मंत्रालय
का कहना है कि 26 हथियारबंद अपराधियों को मार दिया गया है और हिंसा में
18 सुरक्षा अधिकारी भी मारे गए हैं.
गृह मंत्रालय का कहना है कि
तीन हज़ार से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
हालांकि, प्रभावित क्षेत्र में इंटरनेट बंद है और बहुत कम जानकारी सामने आ रही है.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक़
पूरे देश में 70 चेक प्वाइंट्स लगाए गए हैं.