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मोदी को लेकर दिग्विजय सिंह का दिया बयान वायरल क्यों हो रहा है?
....में
Author, शुरैह नियाज़ी
पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, भोपाल से
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लेकर एक बयान दिया है जो वायरल हो रहा है.
दिग्विजय सिंह राजधानी भोपाल में कांग्रेस पार्टी के जन जागरण शिविर में उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे कांग्रेस के प्रचार अभियान के बारे में बात कर रहे थे.
उन्होंने कहा, "जो 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं है वो प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित हैं वहीं जो लड़कियां जींस पहनती है वो मोदी से प्रभावित नहीं है."
दिग्विजय सिंह ने बताया कि यह बात उन्हें प्रियंका गांधी ने बताई थी जो उनके दिमाग में कभी नहीं आई.
दिग्विजय सिंह अपने विवादित बयानों के लिये जाने जाते है. इससे पहले वो वीर सावरकर को लेकर भी एक बयान भी दिया.
उन्होंने कहा, “सावरकर ने अपनी क़िताब में साफ तौर पर लिखा है कि हिंदू धर्म का हिंदुत्व से कोई संबंध नहीं है.”
24 कैरेट का कांग्रेसी हूं, 18 कैरेट के कांग्रेसी से मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता: ग़ुलाम नबी आज़ाद
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पिछले कुछ हफ़्तों से कांग्रेस छोड़ने की अटकलों पर विराम सा
लगाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने रविवार को दावा किया कि वे
24 कैरेट (यानी खरा सोना) कांग्रेसी हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जम्मू के सीमावर्ती इलाक़े
में एक रैली को संबोधित करने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातें कीं.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हां, मैं कांग्रेसी हूं. आपको
किसने कहा कि मैं नहीं हूं? 24 'कैरेट' कांग्रेसी हूं. यदि कोई 18 कैरेट, 24 कैरेट
को चुनौती दे तो इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?"
उन्होंने ये भी कहा कि वो पार्टी से नाराज़ नहीं हैं और पार्टी के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर उन्हें एकजुट करने की कोशिशों में जुटे हैं. आज़ाद ने बताया कि सुधार एक गतिशील प्रक्रिया है और हर किसी के लाभ के लिए अनिवार्य है.
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'जी-23 के नेता'
जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री आज़ाद पिछले क़रीब दो महीने से राज्य में लगातार रैलियां कर रहे हैं. उनके साथ उनके प्रति वफ़ादार नेता भी जुटे हुए हैं. उन्होंने कहा कि सुधार लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और ये सभी के लिए ज़रूरी है.
अभी हाल में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष ग़ुलाम अहमद मीर के ख़िलाफ़ बग़ावत करते हुए इनमें से कई नेताओं ने पार्टी के अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था.
इसके पहले, आज़ाद ने केंद्रीय नेतृत्व से मांग की थी कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बदला जाए. इसके लिए वो पत्र लिखने वाले पार्टी के 23 सीनियर कांग्रेसी नेताओं में रहे. कई लोग इस समूह को 'जी-23' कहकर बुलाने लगे.
दुनिया की अर्थव्यवस्था 2022 में पहली बार पहुंचेगी 100 अरब डॉलर के पार
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विश्व का कुल सालाना उत्पादन यानी जीडीपी 2022 में पहली बार
100 अरब डॉलर के पार चला जाएगा. हालांकि पहले की रिपोर्ट में 2024 में इस लक्ष्य को
पाने का अंदाज़ा लगाया गया था.
यह भी अनुमान लगाया गया है कि फ़िलहाल दूसरे नंबर पर मौजूद चीन
अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में अमेरिका को 2030 में पीछे छोड़कर नंबर एक बन जाएगा.
समाचार एजेंंसी रॉयटर्स ने लंदन की कंसल्टेंसी फ़र्म सीईबीआर
के हवाले से रविवार को ये जानकारी दी है.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत 2022 में फ्रांस को और
2023 में ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी. वहीं
जर्मनी 2033 तक जीडीपी आकार के लिहाज़ से जापान को पीछे छोड़ सकता है.
रूस के बारे में बताया गया है कि 2036 के बाद यह दुनिया की टॉप
10 इकोनॉमी नहीं रह जाएगा. वहीं 2034 में इंडोनेशिया दुनिया में नौवें स्थान पर आ सकता
है.
मंदी की चेतावनी
ब्लूमबर्ग ने इस रिपोर्ट के हवाले से
बताया है कि कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था भले ही लगातार मजबूत हो रही है, पर महंगाई
दर पर जल्दी क़ाबू न किया गया तो पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी की सूरत बन सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलहाल सबसे बड़ी चुनौती महंगाई दर पर नियंत्रण
करना है, जो अमेरिका में अभी 6.8 प्रतिशत तक जा पहुंची है.
इन अनुमानों को जारी करने वाली संस्था के उपाध्यक्ष डगलस मैकविलियम्स
ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित क़दम नहीं उठाए गए तो दुनिया को 2023 या
2024 में आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है.
कोरोना: दिल्ली में सोमवार से फिर लौट रहा है रात का कर्फ़्यू
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दिल्ली में कोरोना के मामलों में हो रही लगातार वृद्धि को देखते
हुए राज्य सरकार ने फिर से रात का कर्फ़्यू लगाने का एलान किया है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने दिल्ली सरकार के हवाले से बताया है कि
सोमवार (27 दिसंबर) से रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला लिया
गया है.
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जानकारों के अनुसार, नए साल के मौक़े पर होने वाले जश्न और भीडभाड़ से बचने के लिए सरकार ने एहतियाती तौर पर ये क़दम उठाए हैं.
पिछले 24 घंटों के दौरान दिल्ली में कोरोना के 290 नए मरीज़ सामने आए. इस साल 10 जून के बाद दिल्ली में कोरोना के नए संक्रमणों की यह सबसे अधिक संख्या है.
हालांकि इस दौरान दिल्ली में केवल एक मरीज़ की मौत हुई. वैसे दिल्ली में सक्रिय मरीज़ों की तादाद 1,103 तक जा पहुंची है.
पिछले 24 घंटे में देश में क़रीब सात हज़ार नए मामले देखने को मिले हैं.
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बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 26 दिसंबर 2021, सुनिए वात्सल्य राय से
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ज़रूरत पड़ी तो उस पार जाकर भी मार सकता है भारत- राजनाथ सिंह
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नाम लिए बिना पाकिस्तान को आगाह किया और कहा कि ज़रूरत पड़ी तो भारत उस पार भी जाकर
मार सकता है.
राजनाथ सिंह अपने संसदीय क्षेत्र
लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल बनाने की यूनिट के शिलान्यास के मौक़े पर बोल रहे थे.
इस दौरान उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान को चेतावनी दी.
उन्होंने कहा मौजूदा सरकार भारत की ताक़त का प्रदर्शन कर चुकी है. वो बता चुकी है कि अगर चुनौती दी जाएगी तो भारत सीमा पार जाकर जवाब देने की ताक़त रखता है.
उन्होंने कहा, "एक हमारा पड़ोसी देश है जो कुछ ही समय पहले भारत से अलग हुआ है. पता नहीं क्यों भारत को लेकर उसकी नीयत ख़राब रहती है. उसने उरी और पुलवामा में जिस प्रकार की आंतकवादी घटना को अंजाम दिया उसके बाद हमारे प्रधानमंत्री ने फ़ैसला लिया था, हमने उस देश की धरती पर जा कर आतंकवादी ठिकानों का सफाया किया था."
"हमने ये संदेश दे दिया कि, हमारे ऊपर कोई बुरी नज़र डालकर देखने की कोशिश करेगा तो हम केवल इस पार ही नहीं, ज़रूरत पड़ी उस पार भी जाकर मार सकते हैं. ये भारत की ताकत है."
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अपने संसदीय क्षेत्र लखनऊ में ब्रह्मोस
मिसाइल बनाने की यूनिट के शिलान्यस मौक़े पर कहा कि भारत को हथियार बनाने की ज़रूरत क्यों है.
उन्होंने कहा, "हम अगर हथियार बना रहे हैं तो किसी पर आक्रमण करने के लिए नहीं बना रहे हैं. इतिहास को देखें तो पता चलता है कि भारत ने न तो दुनिया के किसी देश पर कभी आक्रमण किया है और न ही किसी देश की एक इंच ज़मीन पर कब्ज़ा किया है.
उन्होंने कहा, "हम ब्रह्मोस इसलिए बनाना चाहते हैं कि भारत के पास ऐसी ताकत हो कि दुनिया का कोई देश भारत की तरफ बुरी नज़र उठाकर न देखे, भारत के पास डेटेरेंट (रक्षात्मक हथियार) होने चाहिए ताकि दुनिया का कोई देश भारत पर आक्रमण न करे."
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हालिया
दिनों में लगातार पाकिस्तान को निशाने पर लेते रहे हैं.
बीते दिनों राजनाथ सिंह के
ऐसे ही एक बयान को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी थी और आरोप
लगाया था कि बीजेपी और आरएसएस उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में चुनाव जीतने को लेकर
हताश है, और इसलिए वो अति
राष्ट्रवाद को भड़का रहे हैं.
ब्रह्मोस
मिसाइल भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है.
म्यांमार: सेना पर सहित 35 से ज़्यादा मासूमों की हत्या का आरोप, सेव द चिल्ड्रेन के दो स्टाफ़ लापता
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बच्चों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी संस्था
'सेव द चिल्ड्रेन' का कहना है कि म्यांमार में उसके दो कर्मचारी पिछले दो दिनों से लापता
है.
लंदन स्थित मुख्यालय वाली इस संस्था का आरोप है कि म्यांमार
की सेना ने शुक्रवार को काया राज्य में 35 से अधिक आम लोगों को चरमपंथी बताकर मार दिया.
सेना पर शव जलाने के भी आरोप लगाए गए हैं.
चैरिटी संस्था का दावा है कि इस घटना में कम से कम 38 लोग मारे
गए हैं. इनमें से अधिकांश के शव बरामद हो गए हैं.
संस्था ने अपने बयान में कहा है, काया राज्य में सेना ने लोगों
को उनकी कारों से निकालकर, गिरफ़्तार कर और उन्हें मारकर उनके शव जला दिए. मरने वालों
में बच्चों और महिलाओं के भी होने का दावा किया गया है.
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इमेज कैप्शन, आंग सान सू ची
'घर लौट रहे थे दोनों कर्मचारी'
बयान के अनुसार, उनके दोनों लापताकर्मचारी संस्था के मानवीय काम पूरा करने के बाद छुट्टी बिताने अपने घर जा रहे थे.
संस्था ने बताया कि वे दोनों सेना की कार्रवाई में पकड़े गए और तभी से लापता हैं. संस्था का दावा है कि उनकी निजी गाड़ियों पर हमले हुए और उनमें आग लगा दी गई.
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सेव द चिल्ड्रेन का कहना है कि वो आम बेक़सूर लोगों और उनके कर्मचारियों के साथ हुई हिंसा की इन घटनाओं से हतप्रभ है.
हालांकि म्यांमार की सेना का दावा है कि मरने वाले सभी चरमपंथी थे. सेना ने बताया कि उसने इलाक़े में कई हथियारबंद चरमपंथियों को मारा है.
ग़ौरतलब है कि इस साल फ़रवरी में सेना ने अचानक से चुनी हुई नेता आंग सान सू ची को हिरासत में लेकर देश में तख़्तापलट कर दिया.
उस समय से पूरे म्यांमार में आम लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है. इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सेना ने काफ़ी बल प्रयोग किया. सेना पर तब से कई लोगों की हत्या करने के आरोप लगाए गए हैं.
इसी महीने आंग सान सू ची को चार साल की सज़ा सुनाई गई. बाद में उसे घटाकर दो साल कर दिया गया.
मलेशिया: भीषण बाढ़ के कारण 46 की मौत, कई लापता
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मलेशिया में पिछले कई दशक में आई सबसे भीषण बाढ़ में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
समाचार एजेंसी एफ़पी ने अधिकारियों के अनुसार, मलेशिया में पिछले कुछ सालों की सबसे
भीषण बाढ़ से शनिवार तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है. वहीं पांच लोग अभी
तक लापता हैं.
यह आपदा लगातार हुई मूसलाधार बारिश से नदियों के उफान पर पहुंच जाने
से आई है. इस आपदा के चलते यहां हज़ारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है. साथ
ही, कई शहरों में पानी भर गया और प्रमुख सड़कों के बह जाने से संपर्क कट गया है.
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सबसे प्रभावित राज्य सेलंगोर
राजधानी कुआलालंपुर के चारों ओर फैला, मलेशिया का सबसे घनी आबादी वाला सेलंगोर राज्यइस बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है. बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला दूसरा राज्य पहांग है.
बाढ़ के कारण हज़ारों लोग पानी में घिर गए हैं. बचाव टीम कई लोगों को बचाने में सफल रही है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि, कई लोग अभी भी लापता हैं.
बाढ़ की चेतावनी जारी करने में विफल रहने और राहत और बचाव प्रयासों के धीमा रहने के लिए मलेशिया की सरकार की काफ़ी आलोचना हो रही है.
दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में नवंबर से फरवरी के बीच मानसून के चलते अच्छी बारिश होती है. यही वजह है कि इस दौरान देश में बाढ़ आती है. जानकारों के अनुसार, इस ताज़ा आपदा की वजह ग्लोबल वार्मिंग हो सकती है.
नगालैंड से AFSPA वापस लेने की मांग पर जांच समिति बनाने पर सहमत हुआ केंद्र
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देश के पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड में पिछले छह दशक से भी लंबे
समय से लागू 'सशस्त्र बल विशेष अधिकार क़ानून (AFSPA)' को वापस लेने की मांग की समीक्षा
करने पर केंद्र सरकार सहमत हो गई है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने नगालैंड सरकार की ओर से रविवार को जारी
एक पत्र के हवाले से यह जानकारी दी है.
इस पत्र पर नगालैंड के मुख्यमंत्री निफ़्यू रियो, उपमुख्यमंत्री
वाई पैट्टन और नगा पीपुल्स फ्रंट लेजिस्लेटिव पार्टी (NPFLP) के नेता टीआर ज़ेलियांग
के हस्ताक्षर हैं.
एएनआई ने नगालैंड सरकार के हवाले से कहा, ''केंद्रीय गृह मंत्री
अमित शाह ने 23 दिसंबर को नगालैंड के मौजूदा हालात पर चर्चा के लिए बैठक की. उस बैठक
में नगालैंड और असम के मुख्यमंत्रियों सहित और लोगों ने भी भाग लिया. उस बैठक में ये
फ़ैसला हुआ कि नगालैंड से आफ़्स्पा वापस लेने के लिए एक जांच समिति बनाई जाएगी.''
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45 दिनों में आएगी रिपोर्ट
इस पत्र में बताया गया है कि समिति की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्वोत्तर मामलों के अतिरिक्त सचिव करेंगे. समिति में नगालैंड के मुख्य सचिव और डीजीपी सदस्य होंगे. इसमें असम रायफ़ल्स के आईजी (उत्तरी) और सीआरपीएफ़ के एक प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे.
बयान में यह भी बताया गया कि समिति अपनी रिपोर्ट अगले 45 दिनों में सरकार को देगी और इस रिपोर्ट के आधार पर ही ये तय होगा कि नगालैंड के किन-किन इलाक़ों से ये क़ानून हटेगा या नहीं.
राज्य से AFSPA हटाने की मांग ने हाल में तब ज़ोर पकड़ा, जब क़रीब तीन हफ़्ते पहले सुरक्षाबलों की फ़ायरिंग में कथित रूप से 14 आम मज़दूरों की मौत हो गई थी.
इसे लेकर नगालैंड सहित पूरे पूर्वोत्तर में आक्रोश का माहौल बन गया था. इस वक्त केंद्र ने आश्वासन दिया था कि वो लोगों की इस क़ानून को वापस लेने की मांग पर विचार करेगा.
ब्रेकिंग न्यूज़, दक्षिण अफ्रीका: नोबेल पुरस्कार विजेता मुख्य पादरी डेसमंड टूटू का निधन
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद को ख़त्म करने में अहम भूमिका निभाने
वाले और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आर्कबिशप डेसमंड टूटू का 90 साल की आयु में निधन
हो गया है.
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि डेसमंड टूटू की मौत
"दक्षिण अफ्रीका के शानदार लोगों की एक पूरी पीढ़ी के प्रति शोक का एक और अध्याय" है.
उन्होंने कहा कि "मुक्त दक्षिण
अफ्रीका" बनाने में मुख्य पादरी डेसमंड टूटू का बड़ा योगदान था.
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राष्ट्रपति रामफोसा ने डेसमंड टूटू को "एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक नेता, रंगभेद विरोधी कार्यकर्ता और मानवाधिकार का वैश्विक प्रचारक" क़रार दिया है और कहा है कि वो देश और दुनिया में दक्षिण अफ्रीका की सबसे मशहूर शख़्सियतों में शामिल रहे हैं.
उन्हों टूटू को बेजोड़ देशभक्त, सिद्धांत वाले और व्यावहारिक नेता बताया है, जिन्होंने बाइबल की उस भावना को एक अर्थ दिया कि बिना काम के धर्म का कोई मतलब नहीं होता.
डेसमंड टूटू की मौत दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद-शासन के अंतिम राष्ट्रपति रहे एफडब्ल्यू डी क्लार्क की मौत के कुछ ही सप्ताह बाद हुई है. क्लार्क का 85 साल की आयु में इस साल 11 नवंबर को निधन हो गया था.
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कौन थे डेसमंड टूटू?
डेसमंड टूटू दुनिया में रंगभेद विरोध के प्रतीक रहे नेल्सन मंडेला के समकालीन थे. वो नस्ल आधारित भेदभाव और अलगाव की नीति ख़त्म करने के आंदोलन के पीछे की मुख्य प्रेरक शक्तियों में शामिल थे.
दक्षिण अफ़्रीका की अंतरात्मा कहलाने वाले डेसमंड टूटू उस दौर में देश की मुखर आवाज़ थे जब 1948 से 1991 के बीच दक्षिण अफ़्रीका में अल्पसंख्यक श्वेत लोगों का शासन था.
गोरे शासक वहां की काली बहुसंख्यक जनता के ख़िलाफ़ नस्ल के आधार पर बांटने वाली भेदभाव पूर्ण नीति लागू करते रहे. डेसमंड टूटू ने ऐसी नीति का जमकर विरोध किया. उन दिनों से लेकर अब तक कई क्षेत्रीय झड़पों में वो मिलाप का स्वर बने.
अपनी सत्यनिष्ठा और ईमानदारी की वजह से आर्कबिशप डेसमंड टूटू को दक्षिण अफ़्रीका की नैतिक धुरी के तौर पर देखा जाता है. वो देश और दुनिया में दक्षिण अफ्रीका की सबसे मशहूर शख़्सियतों में शामिल रहे.
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित
रंगभेद व्यवस्था ख़त्म करने में उनके संघर्ष को देखते हुए उन्हें 1984 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया.
1970 के दशक में एक युवा पादरी के तौर पर वो दक्षिण अफ़्रीका की रंगभेदी सरकार के प्रखर आलोचकों में से एक थे. 1980 के दशक के मध्य में जब दक्षिण अफ़्रीका में अल्पसंख्यक श्वेत शासन कर रहे थे, उस दौरान टूटू उनके ख़िलाफ़ छोटे शहरों मे जाकर प्रचार करते थे.
लेकिन जब एक बार भीड़ ने एक ऐसे पुलिसवाले को जलाने का प्रयास किया जिस पर संदेह था कि वो गुप्त तौर पर पुलिस का काम कर रहा था तो उस ग़ुस्साई हुई भीड़ के बीच में घुसकर टूटू ने उसका बचाव किया.
1986 में डेसमंड टूटू केप टाउन के आर्कबिशप बने और क़रीब इसके एक दशक बाद उन्होंने उस 'ट्रुथ एंड रिकंशिलिएशन कमीशन' की अध्यक्षता की जिसे रंगभेद सरकार के समय हुए अपराधों की जाँच करने के लिए गठित किया गया था.
हरिद्वार 'धर्म संसद' को लेकर ओवैसी का अखिलेश पर निशाना
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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर तक अतिवादी हिन्दुओं की 'धर्म संसद' में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत और हिंसा के उकसावे मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. ओवैसी ने ट्वीट कर कहा है, ''अखिलेश यादव चुप्पी तोड़ो, कुछ तो बोलो.''
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भारत बनाम दक्षिण अफ़्रीका टेस्ट मैच आज: विवादों के बीच मैदान में कोहली
चीन के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों को एकजुट होने की ज़रूरत: ट्रूडो
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि पश्चिम के देशों को चीन के ख़िलाफ़ एकजुट होने के ज़रूरत है.
ट्रूडो ने कहा कि चीन पश्चिमी देशों में अपने आर्थिक हितों को साधने के लिए जोड़ तोड़ करता है और उसे रोकने के लिए एकजुट होना ज़रूरी है.
ग्लोबल चैनल को दिए इंटरव्यू में कनाडा के पीएम ने कहा कि चीन आर्थिक मौक़ों को हासिल करने के लिए कुछ भी कर रहा है.
ट्रूडो ने कहा, ''हम मुक़ाबला कर रहे हैं और चीन समय-समय पर बहुत चालाकी से मुक्त बाज़ार में सबके साथ अपना खेल खेल रहा है. हमें इस मामले में और बेहतर करने की ज़रूरत है. हमें मज़बूती से एकजुट होने की ज़रूरत है ताकि चीन हमें आपस में बाँट ना सके.''
2018 के बाद से चीन और कनाडा के रिश्ते ख़राब हैं. ख़्वावे की चीफ़ फ़ाइनैंशियल ऑफिसर मेंग वांचोऊ के गिरफ़्तारी के जवाब में चीन ने कनाडा के दो लोगों को गिरफ़्तार कर लिया था.
नरेंद्र सिंह तोमर ने अटकलों के बाद अपने बयान पर दी सफ़ाई
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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को कहा कि कृषि क़ानून फिर से लाने का कोई विचार नहीं है. इससे पहले शनिवार को नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तोमर ने कहा था कि 'हम एक क़दम पीछे हटे हैं, आगे फिर बढ़ेंगे क्योंकि हिन्दुस्तान का किसान इस मुल्क की रीढ़ की हड्डी है. जब हमारी रीढ़ मज़बूत होगी तो निश्चित रूप से देश मज़बूत होगा.'
नरेंद्र तोमर के इस बयान का मतलब निकाला गया कि मोदी सरकार फिर से कृषि क़ानून फेरबदल के साथ ला सकती है. विपक्षी पार्टियों ने तोमर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि मोदी सरकार ने किसानों के आंदोलन को ख़त्म करने के लिए साज़िश की है.
अब रविवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट कर कहा, ''कृषि कानून पुनः लाने का सरकार का कोई विचार नहीं है. किसानों का मान रखने के लिए प्रधानमंत्री श्री
नरेंद्र मोदी जी ने कृषि सुधार क़ानूनों को वापस लेने का निर्णय किया था. कांग्रेस अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने के लिए भ्रम फैलाने का नकारात्मक कार्य करती है, इससे किसानों को सावधान रहना चाहिए.''
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चीनी कंपनियों ने भारत से जताई नाराज़गी, लिखा पत्र
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चीनी चेंबर्स ऑफ़ कॉमर्स ने भारत से कहा है किवह अनियमित टैक्स जाँच में बदलाव करे.
चीनी चेंबर्स ऑफ और इंडिया चाइना मोबाइल फ़ोन इंटरप्राइज असोसिएशन ने भारत सरकार
से कहा है कि चीनी कंपनियों के लिए भारत में भेदभाव रहित कारोबारी माहौल होना
चाहिए.
चीनी चेंबर्स ऑफ और इंडिया चाइना मोबाइल फ़ोन इंटरप्राइज असोसिएशन के
लिखे पत्र को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने-जाने वाला अख़बार ग्लोबल
टाइम्स ने ट्वीट किया है.
इस पत्र में लिखा है, ''हाल ही में चीनी मोबाइल फ़ोन कंपनियों
को भारत में अप्रत्याशित मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. कुछ कंपनियों को अचानक
भारत सरकार से जुड़ी एजेंसियों की जाँच का सामना करना पड़ा है. इसका नतीजा यह हुआ
कि कंपनिया अपना उत्पादन सामान्य करने में असमर्थ हैं. विकाशील भारत में हमारा
भरोसा कमज़ोर हुआ है. ऐसा करने से भारत में निवेश पर बुरा असर पड़ेगा.''
ग्लोबल टाइम्स ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''इन चीनी फर्मों
का भारत में तीन अरब डॉलर का निवेश है और पाँच लाख भारतीयों को रोज़गार मिला हुआ
है.''
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भारत में ओमिक्रॉन के 422 मामले, कई संक्रमितों को लगी थी वैक्सीन
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भारत में कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का संक्रमण हर
दिन बढ़ता ही जा रहा है. भारत में अब तक ओमिक्रॉन से संक्रमित 422
लोगों की पहचान हुई है.
महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के सबसे ज़्यादा मामले हैं. भारतीय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जनवरी से फ़्रंटलाइन वर्कर और 60
साल से ऊपर की उम्र वालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज़ देने की घोषणा की है.
महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के सबसे ज़्यादा 108 मामले हैं.
इसके बाद दिल्ली में 79 और गुजरात में 43 लोग संक्रमित हो चुके हैं.
कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित 183 मामलों पर
केंद्र सरकार के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि 10 में से कम से
कम 9 लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लगी थी. इस विश्लेषण का डेटा शेयर करते
हुए शुक्रवार को केंद्र ने कहा कि महामारी से बचने के लिए वैक्सीन काफ़ी नहीं है.
केंद्र ने कहा कि मास्क और निगरानी वैक्सीन लगाने के बाद भी उतनी ही ज़रूरी है
ताकि ट्रांसमिशन चेन को तोड़ा जा सके.
इस विश्लेषण को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने जारी किया है.
इस विश्लेषण से पता चलता है कि 27 फ़ीसदी संक्रमित ऐसे लोग हैं, जिन्होंने
विदेश दौरा नहीं किया था. इससे संकेत मिलता है कि ओमिक्रॉन की मौजूदगी समुदायों के
बीच है.
इस विश्लेषण के मुताबिक़ 87 (91 फ़ीसदी)
संक्रमितों ने पहले ही वैक्सीन की दोनों डोज़ लगा ली थी और तीन ने तो बूस्टर
शाॉट्स भी लिया था. 183 में केवल सात लोगों ने वैक्सीन नहीं लगाई थी जबकि दो लोगों को पहली
डोज़ ही लगी थी. केंद्र ने ये भी बताया है कि 73 लोगों के
वैक्सीनेशन स्टेटस का पता नहीं है और 16 लोग वैक्सीन लगाने के लिए मेडिकली
अनफिट थे.
कोविड टास्क फ़ोर्स से प्रमुख डॉ वीके पॉल ने चेतावनी दी है कि
डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन ज़्यादा संक्रामक है. डॉ पॉल ने कहा कि कोई एक
व्यक्ति बाहर से ओमिक्रॉन संक्रमण अपने घर में इसलिए ला रहा है क्योंकि वो बिना
मास्क लगाए निकला था. उस व्यक्ति से घर के बाक़ी लोग भी संक्रमित होंगे. ओमिक्रॉन
में यह जोखिम ज़्यादा बड़ा है. डॉ पॉल ने कहा कि इसे हमें दिमाग़ में रखना होगा.
डॉ पॉल ने कहा, ''मैं ये ज़ोर देकर कहा रहा हूँ कि सतर्क
रहने की ज़रूरत है. त्योहार और नए साल आ रहे हैं और ओमिक्रॉन इस दौरान पाँव फैला
सकता है. हमें ज़िम्मेदार बनना होगा. मास्क पहनकर ही बाहर निकलें और हाथों को साफ़
रखें. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें. ग़ैरज़रूरी यात्राएं टाल दें.''
केंद्र सरकार के विश्लेषण में कहा गया है, ''क्लिनिकल लक्षण
स्तर पर देखें तो ओमिक्रॉन के 70 फ़ीसदी मरीज़ों में कोई लक्षण नहीं है.
अभी भी भारत में डेल्टा का संक्रमण ज़्यादा है.''भारत में
ओमिक्रॉन के कुल मामले 415 हो गए हैं. महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के
सबसे ज़्यादा 108, दिल्ली में 79, गुजरात में 43, तेलंगाना में 38,
केरल
में 37 और तमिलनाडु में 34 हैं.
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पंजाब विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे 22 किसान संगठन
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पंजाब में अगले साल की शुरुआत में होने
वाले विधानसभा चुनाव में 22 किसान संगठनों ने उतरने की घोषणा की है.
ये किसान संगठन तीनों विवादित कृषि
क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में भी शामिल थे. संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले
पिछले एक साल से मोदी सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन चल रहा था.
हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि वह चुनाव नहीं लड़ेगा.
संयुक्त समाज मोर्चा के नाम से बने इस
नए राजनीतिक मोर्चे ने विधानसभा की सभी 117 सीटों पर लड़ने का फ़ैसला किया है.
इसका नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के बलबीर सिंह राजेवाल कर सकते हैं.
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बीकेयू (कादयान) के हरमीत सिंह ने कहा
कि दिल्ली बॉर्डर से लौटने के बाद पंजाब के लोगों को किसानों से बहुत उम्मीदें हैं
कि वो राज्य को तकलीफ़ दे रहे लंबित मुद्दों को सुलझाएं.
उन्होंने कहा, “लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए 22
संगठनों ने साथ चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है.”
चुनाव लड़ने
के फ़ैसले के बाद अलग-अलग किसान संगठनों से कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
पंजाब के सबसे
बड़े किसान संगठन बीकेयू (एकता-उग्राहां) और किसान मज़दूर संघर्ष समिति ने साफ़
कहा है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. ये दोनों ही संगठन 32 किसान संगठनों के मोर्चे
में शामिल नहीं थे लेकिन कृषि क़ानूनों को वापस लेने की दिशा में साथ मिलकर काम कर
रहे थे.
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