हांगकांग चुनाव में चीन समर्थक उम्मीदवारों ने किया जीत का दावा

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चीन समर्थक उम्मीदवारों ने हांगकांग के विधान परिषद (लेगको) चुनाव में भारी जीत का दावा किया है. इस चुनाव में अब तक का सबसे कम मतदान हुआ है.
चीन के हांगकांग चुनाव प्रणाली में व्यापक बदलाव लागू करने के बाद ये पहला लेगको चुनाव है. इन बदलावों ने हांगकांग का राजनीतिक परिदृश्य ही बदल कर रख दिया है.
चीन ने ‘राष्ट्रभक्त’ प्रस्ताव पारित किया जो चीन को प्रत्येक उम्मीदवार की जांच करने का हक़ देता है.
चीन के अधिकारियों का तर्क है कि स्थिरता के लिए इस बदलाव की ज़रूरत है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे हांगकांग में लोकतंत्र कमजोर किया गया है.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़ केवल 30.2% मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया.

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इसी साल मार्च में चीन ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत 'देशभक्त ही हांगकांग की सत्ता चलाएंगे.' इस प्रस्ताव ने लेगको के मूल स्वरूप को ही बदल दिया है.
सबसे बड़ा बदलाव ये था कि चीन ने हांगकांग में सीधे तौर पर जनता द्वारा चुने जाने वाले प्रतिनिधियों की संख्या कम कर दी.
पहले 50 फ़ीसदी सदस्यों का चुनाव सीधे मतदान से होता था. अब जनता सिर्फ़ 22 फ़ीसदी सदस्य ही चुन सकेगी.
अब सभी उम्मीदवारों को एक स्क्रीनिंग समिति से अनुमोदन लेना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे चीन के आलोचकों की उम्मीदवारी ख़ारिज करना आसान हो गया है.
नए नियमों ने चुनाव समिति को भी अधिक शक्तियां दी हैं. इस अलग समूह में भी चीन समर्थित लोग ही हैं.
साल 2019 में हुए लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद से ही चीन हांगकांग पर अपना नियंत्रण मज़बूत कर रहा है.
इन नए क़दमों से चीन ये सुनिश्ति कर रहा है कि सत्ता के हर स्तर पर उसके वफ़ादार लोग ही हों.






