बोतल के तेजाब से ज़्यादा ख़तरनाक है मन का तेजाब : अंशु राजपूत
55 साल के जिस शख़्स को अंशु दादा कह कर बुलाती थी वही उनका पीछा किया करता था. तब वो महज़ 15 साल की थीं.
इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के बाद एक रात कपिल शर्मा नाम के इस शख़्स ने अंशु के चेहरे पर तेजाब डाल दिया. लेकिन 14 फ़रवरी 2014 की उस रात ने अंशु की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल दी.
आज अंशु देश के कोने-कोने से ऐसिड अटैक सर्वाइवर के लिए लड़ाई लड़ती हैं और उन्हें हौसला देती हैं. सोशल मीडिया पर भी अंशु के बड़ी तादाद में फ़ॉलोअर्स हैं.
वीडियो: प्रज्ञा सिंह, दीपक जसरोटिया और देवेश
अब आपके पास मौका है अपना हुनर दिखाने का और दुनिया को प्रेरित करने का. जैसे अंशु राजपूत लोगों को अपने हौसले से प्रेरित कर रही हैं. अगर आप भी ऐसा कुछ अनोखा काम करते हैं या किसी ऐसे शख़्स को जानते हैं तो हम तक पहुंचाइए वो कहानी.


















