जवाद चक्रवात: ओडिशा के चार ज़िलों में रेड अलर्ट, मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह

मौसम विभाग ने ओडिशा के चार ज़िलों के लिए रेड अलर्ट, सात ज़िलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.

लाइव कवरेज

चंदन शर्मा

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  16. अमेरिका के 'पीस प्लान' पर रूस और यूक्रेन में हलचल तेज़, ज़ेलेंस्की ने कहा- अपने देश को धोखा नहीं दूंगा

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की एक पुरानी तस्वीर.

    यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग को रोकने के लिए अमेरिका के प्रस्तावित पीस प्लान पर रूस ने कहा है कि उसे अभी तक अमेरिका की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है.

    अमेरिका का जो 28 बिंदुओं वाला प्रस्ताव सामने आया है उसमें यूक्रेन के पूर्वी दोनेत्स्क क्षेत्र से पीछे हटने, उसकी सैन्य संख्याबल को घटाने और नेटो में कभी शामिल न होने के वादे जैसी शर्तें शामिल हैं.

    इस प्रस्ताव के बारे में जब रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "हम कुछ नई चीज़ें देख रहे हैं, लेकिन औपचारिक तौर पर हमारे पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है. इन बिंदुओं पर भी कोई ठोस चर्चा नहीं हुई है."

    हालांकि, उन्होंने कहा कि रूस शांति वार्ता के लिए एकदम तैयार है.

    अमेरिका का ये प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब रूस ने पूर्वी यूक्रेन के हिस्सों पर छोटी बढ़त का दावा किया है और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की अपने शीर्ष अधिकारियों पर लगे 10 करोड़ डॉलर के भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे हैं.

    अमेरिका की ओर से लगातार इस प्रस्ताव पर बढ़ते ज़ोर के बीच ज़ेलेंस्की ने देश की जनता को संबोधित किया है. उन्होंने कहा कि वह अपने देश को धोखा नहीं देंगे.

    हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि वह अमेरिका के साथ इस प्रस्ताव पर काफ़ी मशक्कत से काम कर रहे हैं.

    दस मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, "यूक्रेन बेहद मुश्किल परिस्थिति का सामना कर सकता है जहां वह या तो अपना सम्मान चुने या फिर उसे अपना एक ख़ास सहयोगी खोना होगा."

  17. लागू हुए चार नए श्रम क़ानून, कामकाजी घंटों से लेकर वेतन तक क्या कुछ बदलेगा?

    प्रधानमंत्री मोदी

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    इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री मोदी

    भारत सरकार ने आज से सभी चार श्रम क़ानूनों को लागू करने की घोषणा कर दी है. पीआईबी की प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, ''इन क़ानूनों को मौजूदा 29 श्रम क़ानूनों के स्थान पर लागू किया जा रहा है.''

    इन 29 क़ानूनों में चार क़ानून वेतन और पारिश्रमिक वाले प्रावधानों से संबंधित हैं. नौ क़ानून सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों से और 13 क़ानून पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी सुविधाओं से जुड़े हैं. बाक़ी बचे तीन क़ानूनी प्रावधान उद्योग धंधों से संबंधित हैं.

    सरकार का दावा है कि इन बदलावों से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कामगारों को फ़ायदा होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फ़ैसले को ऐतिहासिक बताते हुए एक्स पर पोस्ट किया है.

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, ''श्रमिक भाई-बहनों के लिए ऐतिहासिक दिन है. हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं. आज़ादी के बाद यह श्रमिकों के हित में किया गया सबसे बड़ा रिफ़ॉर्म है. यह देश के कामगारों को बहुत सशक्त बनाने वाला है. इससे जहां नियमों का पालन करना बहुत आसान होगा, वहीं ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा.''

    सीपीआई(एम) ने किया विरोध

    कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) ने सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करते हुए एक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि ये नए कानून कर्मचारियों के ख़िलाफ़ और मालिकों के हित में हैं.

    सीपीआई(एम) ने सरकार के फ़ैसले का विरोध करते हुए यह प्रेस रिलीज़ जारी की है.

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    इमेज कैप्शन, सीपीआई(एम) ने सरकार के फ़ैसले का विरोध करते हुए यह प्रेस रिलीज़ जारी की है.

    इसी साल जुलाई के महीने में भी भारत की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और फ़ेडरेशनों के फ़ोरम ने इस चार लेबर कोड्स के ख़िलाफ़ देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया था. ट्रेड यूनियनों का कहना था कि चार लेबर कोड्स के ज़रिए जिन 29 श्रम क़ानूनों को बदला गया है वो कॉरपोरेट सेक्टर को फ़ायदा पहुंचाने के लिए किया गया है.

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  20. बिहार में नीतीश कुमार की जीत में, जिसकी रही अहम भूमिका