त्रिपुरा में एक शख़्स ने शुक्रवार को अपनी दो बेटियों, बड़े भाई, पुलिस इंस्पेक्टर और एक ऑटोवाले पर फावड़े
से हमला करके उनकी जान ले ली है.
इसके साथ इस शख़्स ने अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति को भी गंभीर रूप से जख़्मी किया है.
सब-डिविज़नल पुलिस ऑफिसर राजीब सूत्रधार ने बताया
है, “बीती रात लगभग 11 बजकर 45 मिनट
पर हमें खोवई पुलिस थाने में उत्तरी रामचंद्रघाट के शाउरतोली इलाके में पारिवारिक कलह
होने की सूचना मिली थी. इस जानकारी पर हमारे सेकेंड ऑफ़िसर सत्यजीत मलिक अपने
साथियों के साथ मौके पर पहुंचे. यहां उन्हें कमलेश देबरॉय नाम के शख़्स दो अन्य
बच्चों के साथ मृत अवस्था में मिले. इसके साथ ही एक शख़्स हिंसक तरीके से आसपास
घूमता हुआ नज़र आया.”
“इस व्यक्ति
पर काबू पाने की कोशिश में हमारे सेकेंड ऑफिसर भी हमले का शिकार हुए और उनके सिर
पर गंभीर चोट आई. इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया जहां से उन्हें
अगरतला रिफर कर दिया गया लेकिन इस चोट के चलते उनकी मौत हो गयी.”
पुलिस ने इस मामले में प्रमुख अभियुक्त
प्रदीप देबरॉय को गिरफ़्तार करके उनके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया है और फॉरेंसिक
टीम की मदद से इस मामले की जांच शुरू कर दी है.
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया - कैसे हुआ ये हमला
इस मामले के चश्मदीद गवाह और अभियुक्त के पड़ोसी झांतू दासगुप्ता ने बताया है कि प्रदीप ने अपनी पत्नी मीना, दो बेटियों और बड़े भाई कमलेश पर हमला किया जिससे डरकर घर के दूसरे सदस्यों ने उनके घर में शरण ली लेकिन हमलावर उनका पीछा करते दासगुप्ता के घर भी पहुंचा और उसने घर के बाहरी हिस्से में लगी रेलिंग पर हमला किया.
झांतू कहते हैं, “लगभग आधी रात को पूरे परिवार ने डरकर मेरे घर में शरण ली लेकिन प्रदीप मेरे घर भी आ गया और फावड़े से मेरे घर पर हमला किया. मैंने पुलिस को बुलाया और उनके आने के बीस मिनट बाद मैं अपने घर का दरवाज़ा खोलकर बाहर आने की हिम्मत जुटा पाया.”
“जब मैंने देखा कि प्रदीप पुलिस इंस्पेक्टर पर हमला कर रहा है और दूसरे पुलिसकर्मी उस पर लाठियां चला रहे थे तो मैं हक्का-बक्का रह गया. ये सब देखकर मैं बहुत डर गया और अपनी जान बचाने के लिए भागा. इसके बाद मुझे पता चला कि उसने रास्ते से जा रहे एक ऑटो ड्राइवर और उसके बेटे कर्णबीर दास पर भी हमला किया.”
कृष्ण दास नामक इस ऑटो ड्राइवर की भी हमले में मौत हो गयी. लेकिन इसके बेटे को पुलिस इंस्पेक्टर और अभियुक्त की पत्नी मीना देबरॉय के साथ अस्पताल ले जाया गया.
सत्यजीत और मीना की हालत नाजुक होने की वजह से अगरतला रिफर किया गया. लेकिन मलिक की मौत अगरतला जीबी हॉस्पिटल में हो गयी. और अभियुक्त की पत्नी अस्पताल में भर्ती हैं.
त्रिपुरा पुलिस विभाग की ओर से शनिवार को मृत पुलिस अधिकारी सत्यजीत मलिक के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया.