दो सरकारी बैंकों के निजीकरण के लिए क़ानून लाएगी मोदी सरकार: रिपोर्ट

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सार्वजनकि क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण का रास्ता साफ़ करने के लिए केंद्र सरकार सोमवार से शुरू होने जा रहे शीतकालीन सत्र में बैंकिंग क़ानूनों में संशोधन के लिए विधेयक लाने जा रही है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2021-22 का बजट पेश करने के दौरान सरकार की विनिवेश अभियान के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग क़ानून (संशोधन) विधेयक, 2021 को शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किया जाना है. मौजूदा क़ानून के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में न्यूनतम सरकारी हिस्सेदारी 51 फ़ीसदी है.
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि प्रस्तावित संशोधन बिल के पारित हो जाने के बाद सरकारी हिस्सेदारी की न्यूनतम सीमा 51 फ़ीसदी से घटकर 26 फ़ीसदी रह जाएगी.
हालांकि केंद्र सरकार की तरफ़ से इस पर कोई अंतिम निर्णय कैबिनेट की बैठक में तब लिया जाएगा, जब इस विधेयक का मसौदा विचार के लिए रखा जाएगा.
शीतकालीन सत्र के लिए निर्धारित विधायी कार्यसूची के अनुसार, दो सरकारी बैंकों के निजीकरण को लेकर बजट की घोषणा के संदर्भ में बैंकिंग कंपनीज़ (एक्विजीशन एंड ट्रांसफर ऑफ़ अंडरटेकिंग्स) एक्ट्स, 1970 और 1980 और बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाना है.
इन्हीं दो क़ानूनों के ज़रिए भारत में दो चरणों में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था और इनके फिर से निजीकरण के लिए इनमें बदलाव किया जाना ज़रूरी है.


















