अगरतला से, बीबीसी हिंदी के लिए
तृणमूल कांग्रेस की युवा नेता और बांग्ला फ़िल्मों की अभिनेत्री सयानी घोष को अगरतला के अपर सीजेएम और सिविल जज की अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी. पार्टी के लिए यह राहत की ख़बर है.
इससे पहले त्रिपुरा पुलिस ने रविवार की दोपहर को उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था. उन पर ग़ैर-जमानती धाराओं के तहत हत्या की साजिश रचने और शत्रुता फैलाने के आरोप लगाए गए. और इसके लिए उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153, 153ए, 307, 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया.
सोमवार को क़रीब 11.30 बजे उन्हें अदालत लाया गया और दोपहर बाद अदालत में पेश किया गया. सरकारी वक़ील बिश्वजीत देब ने अदालत से उन्हें पूछताछ के लिए दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का अनुरोध किया.
हालांकि सयानी का बचाव करने वाले वक़ील शंकर लोध ने अदालत से कहा कि पुलिस के तर्क विरोधाभासी हैं. उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाले ने ख़ुद को प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए कहा कि सयानी अपनी गाड़ी से पत्थर फेंक रही थीं.
उनके अनुसार, पुलिस ने बताया है कि सयानी गाड़ी से निकल कर उस पर चढ़कर पत्थर फेंक रहीं थी. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन मीडिया में जो वीडियो सामने आए उसमें सयानी ऐसा करती हुई नहीं दिख रही हैं.
सयानी के वक़ील ने ऐसी परिस्थिति में अदालत से अपील की कि धारा 437 की उपधारा 1 के तहत उन्हें जमानत दे दी जाए. और अदालत ने उनके तर्क स्वीकार करते हुए अभिनेत्री को जमानत दे दी.
अदालत से बाहर निकलकर अपने समर्थन के लिए लोगों को शुक्रिया कहा और दावा किया कि सत्य की जीत हुई.
रविवार सुबह 11:30 बजे घोष समेत अन्य तृणमूल कांग्रेस नेता ईस्ट अगरतला महिला पुलिस स्टेशन पहुंचे थे जहां उनकी गाड़ियों पर ईंटों और लाठियों से हमला किया गया.
इस हमले का आरोप बीजेपी समर्थकों पर लगाया जा रहा है.
इस मामले में कम से कम पांच तृणमूल कांग्रेस समर्थक जख़्मी हुए, जिन्हें इलाज़ के लिए अस्पताल ले जाया गया. इसी बीच सयानी घोष के साथ पूछताछ के बाद रविवार 4 बजे उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देब ने कहा, “ये एक पूरी तरह से झूठा मुकदमा है. और उन्होंने इस युवती के साथ जो बर्ताव किया है, वह दुर्भाग्यशाली है. पुलिस ने जानबूझकर उसे कोर्ट में पेश नहीं किया ताकि उसे रात भर थाने में रखा जा सके. ये डराने-धमकाने की रणनीति है. हमें पुलिस के अत्याचार से डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है.”
“हम जमीन पर लड़ रहे हैं. क्या बीजेपी राज्य के लोगों से ज़्यादा ताक़तवर है? नहीं. लोग अपना फैसला करेंगे. बीजेपी अपनी ज़मीन खो रही है और इसी वजह से वह इस तरह के कदम उठा रही है. अगर वह हार नहीं रहे होते तो ऐसा क्यों करते. लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं.”
बिश्वजीत देबनाथ नामक शख़्स ने सयानी घोष के ख़िलाफ़ शिकायत अगरतला पूर्व थाने में दर्ज कराई.
देबनाथ ने अपनी शिकायत में दावा किया कि सयानी घोष ने कथित रूप से 20 नवंबर 2021 को लगभग सात बजकर दस मिनट पर आश्रम चौमुहानी से सफेद रंग की स्कॉर्पियो में गुजरते हुए सीएम बिप्लव कुमार देव के चुनावी रैली पर हमले का नेतृत्व किया, शांति भरे वातावरण को ठेस पहुंचाई और दो पक्षों के बीच शत्रुता पैदा की.