त्रिपुरा: मिज़ोरम से आए ब्रू शरणार्थियों के शिविर में लगी आग, 18 घर तबाह

शनिवार की सुबह उत्तर त्रिपुरा के हम्सापारा राहत शिवर में रह रहे विस्थापित मिज़ोरम ब्रू के घरों में आग लग गई. इसमें 18 विस्थापितों की झोपड़ियां जल कर खाक हो गईं. आग फैलने से रोकने के लिए 11 अन्य झोपड़ियों को भी तोड़ा गया.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश, अभिजीत श्रीवास्तव and मोहम्मद शाहिद

  1. पीएम मोदी के कृषि क़ानून वापस लेने के फ़ैसले पर विदेशी मीडिया में क्या छपा है?

    मोदी

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    भारत में कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के प्रदर्शन को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफ़ी सुर्ख़ियां मिली थीं. कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में तो बाक़ायदा इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होते रहे हैं.

    इन क़ानूनों के वापस लिए जाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद यह भी साफ़ था कि इसको अंतरराष्ट्रीय सुर्ख़ियां मिलेंगी.

    शुक्रवार को जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह 9 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए इन क़ानूनों को आगामी संसद सत्र मे वापस लेने की घोषणा की वैसे ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस ख़बर को प्रमुखता से अपनी वेबसाइट, अख़बार और टीवी पर जगह देनी शुरू कर दी.

    अमेरिका के मीडिया समूह सीएनएन ने इसको लेकरख़बर अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कीऔर इसका शीर्षक है 'एक साल से अधिक प्रदर्शनों के बाद भारत के प्रधानमंत्री मोदी विवादित कृषि क़ानूनों को वापस लेंगे.'

  2. मोदी सरकार क्या अब सीएए और एनआरसी पर भी पीछे हटेगी?

    मोदी

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    इसी साल 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार के तीनों कृषि क़ानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी.

    सुनवाई के दौरान मोदी सरकार के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध-प्रदर्शन में 'ख़ालिस्तानियों' ने अपनी पैठ बना ली है.

    केके वेणुगोपाल ने ये बात सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ़ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कही थी. वेणुगोपाल ने कहा था कि वह इस मामले में आईबी के इनपुट के साथ एक हलफ़नामा भी दाख़िल करेंगे.

    अटॉर्नी जनरल ने किसानों के आंदोलन में प्रतिबंधित संगठन 'सिख्स फोर जस्टिस' के शामिल होने का दावा किया था.

    पिछले साल एक फ़रवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव की एक रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जो कश्मीर में आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं वही शाहीन बाग़ में नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर रहे हैं.

  3. केंद्र सरकार एमएसपी पर कानून लाए तो बेहतर होगा: मायावती

    मायावती

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    बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को तीन कृषि क़ानूनों पर पीएम मोदी के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क़ानून लेकर आए तो यह बेहतर होगा.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते शुक्रवार तीनों विवादित कृषि क़ानूनों को वापस लेने का फ़ैसला किया है.

    बीते एक साल से देश भर में किसान संगठन इन क़ानूनों का विरोध कर रहे थे. लेकिन इस फ़ैसले के बाद किसान संगठनों से लेकर विपक्ष की ओर से एमएसपी पर भी एक क़ानून लाने की मांग उठ रही है.

    इस सिलसिले में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने एमएसपी की मांग को अपना समर्थन दिया है.

    मायावती ने अपने ट्विटर एकाउंट से ट्वीट करते हुए कहा, "देश में तीव्र आन्दोलन के बाद तीन विवादित कृषि कानूनों की वापसी की केंद्र सरकार की घोषणा का देर आए दुरुस्त आए कहकर स्वागत किया गया, किन्तु इसे चुनावी स्वार्थ व मजबूरी का फैसला बताकर भाजपा सरकार की नीयत पर भी शक किया जा रहा है. अतः इस बारे में कुछ और ठोस फैसले जरूरी हैं."

    उन्होंने लिखा है, "इसके लिए किसानों की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए नया कानून बनाना तथा देश की आन, बान व शान से जुड़े अति गम्भीर मामलों को छोड़कर आन्दोलित किसानों पर दर्ज बाकी सभी मुकदमों की वापसी आदि करना भी केन्द्र सुनिश्चित करे तो यह उचित होगा."

    इसके साथ ही उन्होंने लिखा है, "वैसे पूर्व में देश ने ख़ासकर कांग्रेस पार्टी की श्रीमती इन्दिरा गांधी सरकार के अहंकार एवं तानाशाही वाले रवैये आदि को काफी झेला है, किन्तु अब पूर्व की तरह वैसी स्थिति देश में दोबारा उत्पन्न नहीं हो, ऐसी देश को आशा है."

  4. वरुण गाँधी ने कृषि क़ानून वापस लेने के बाद पीएम से की एक और मांग

    वरुण गांधी

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    बीजेपी सांसद वरुण गांधी काफ़ी समय से अपनी पार्टी और पार्टी के कुछ फ़ैसलों पर टिप्पणी करते आ रहे हैं और ऐसा माना जा रहा है कि उनके और उनकी पार्टी के बीच कुछ मुद्दों पर गतिरोध हैं.

    इस बीच वरुण गांधी ने शनिवार को पीएम मोदी के नाम एक पत्र लिखा है. इस पत्र को ऑनलाइन पोस्ट करते हुए उन्होंने किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को भी जल्द से जल्द हल करने की मांग की है.

    वरुण गांधी ने यह पत्र ट्वीट करते हुए लिखा है- तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा का मैं स्वागत करता हूँ. मेरा विनम्र निवेदन है कि एमएसपी पर क़ानून बनाने की मांग व अन्य मुद्दों पर भी अब तत्काल निर्णय होना चाहिए.इससे किसान भाई आंदोलन समाप्त कर ससम्मान घर लौट जाएं.

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    पीएम मोदी को संबोधित इस पत्र में वरुण गांधी ने लिखा है- तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी की मांग को लेकर पिछले एक साल से किसान आंदोलन चल रहा है.''

    ''आपने दिल बड़ा करते हुए इन क़ानूनों को निरस्त करने की घोषणा की है, मैं उसका स्वागत करता हूं. पिछले एक साल से धरना देने के दौरान सात सौ से अधिक किसानों की मौत भी हो चुकी है. मेरा मानना है कि यदि यह फ़ैसला पहले ही ले लिया जाता तो इतने लोगों की जान नहीं जाती. आपसे अनुरोध है कि मारे गए लोगों के परिजनो को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया जाए. साथ ही इस दौरान जितनी भी फर्जी एफ़आईआर दर्ज हुई हैं उन्हें भी तत्काल से रद्द किया जाए.''

    इसके अलावा अपने पत्र में वरुण गांधी ने पीएम मोदी से एमएसपी को वैधानिक बनाने की गारंटी देने और लखीमपुर मामले की निष्पक्ष जांच के आश्वासन की भी मांग की है.

    लखीमपुर मामले पर वरुण ने लिखा है कि इस मामले में शामिल केंद्रीय मंत्री पर भी सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए.

  5. हिंदू सारी दुनिया में गए लेकिन किसी पर कुछ थोपा नहीं: मोहन भागवत, आलोक प्रकाश पुतुल, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए

    मोहन भागवत

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    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने धर्मांतरण को इशारों-इशारों में कहा कि किसी को बदलने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए.

    उन्होंने धर्म, सत्व और सत्य पर बोलते हुए कहा कि हम सारी दुनिया में जाएंगे, मंगल और चांद पर भी जाएंगे.

    छत्तीसगढ़ के मदकूद्वीप में संघ के एक आयोजन के समापन समारोह में पहुँचे मोहन भागवत ने कहा, "हमारे लोग दूर-दूर तक गए. मेक्सिको से साइबेरिया तक. सर्वत्र हमारे पूर्वजों का संचार हुआ है. ये इतिहास है. लेकिन कहीं पर हमने किसी को बदला नहीं. जो उसका था, उसी के पास रहने दिया. हमने उसको ज्ञान दिया. गणित दिया, आयुर्वेद दिया, विज्ञान दिया, सभ्यता सिखाई."

    मोहन भागवत ने दावा किया कि इसी का परिणाम है कि आज भी अगर भारत का व्यक्ति ऐसे देशों में जाता है तो वहां के लोग, केवल हम भारत के हैं, इसलिए हमारे साथ आदरपूर्वक व्यवहार करते हैं.

    भागवत ने कहा, "उनके स्मरण में है कि कभी न कभी अपने लड़खड़ाए देश को इन लोगों ने आ कर संवारा था. हमारा राज्य नहीं लिया. हमारी पूजा हरण करके नहीं ले गए. अपनी पूजा हम पर थोपी नहीं, लोभ-लालच, ज़बर्दस्ती से. बल्कि हम जैसे थे, हमको उससे अच्छा किया और श्रेय भी लेते नहीं.''

    ''इसलिए दुनिया के हर देश का व्यक्ति हमारे सामने नम्र होता है. यहाँ तक कि हमसे लड़ाई करने वाले चीन के लोग भी ये कहने में सकुचाते नहीं कि भारतवर्ष ने तो दो हज़ार साल पूर्व ही सारे चीन पर अपनी संस्कृति का प्रभाव जमाया था. क्योंकि उस प्रभाव की यादें सुखद हैं, दुखद नहीं. उसके कारण उन लोगों का लाभ हुआ."

    इशारों-इशारों में धर्मांतरण पर क्या कहा

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    धर्मांतरण पर इशारों-इशारों में मोहन भागवत ने कहा, "हमने किसी के स्वत्व को लूटा नहीं क्योंकि हम जानते हैं कि सत्य है, सब एक है और इस सत्य का साक्षात्कार सबको करा देना है. और अगर सत्य को साक्षात्कार करना है तो सत्व चाहिए. बिना सत्व के सत्य की प्राप्ति होती नहीं. और सत्व तब मिलता है, जब स्वत्व में हम जागृत होते हैं.”

    “हम संपूर्ण दुनिया को अपना कुटुंब मानने वाले लोग हैं. हमको सारी दुनिया को उस सत्य को देना है, अपने व्यवहार से. हम फिर से देश-विदेश जाएंगे, सारी दुनिया में जाएंगे. और तब तक अगर विज्ञान कहता है कि हम चंद्रमा पर जाएंगे, मंगल पर जाएंगे तो उनके पीछे-पीछे हम वहां भी जाएंगे."

    मोहन भागवत ने कहा कि "जो बिना किसी की पूजा बदले, बिना किसी का प्रांत भाषा बदले, उसको अच्छा मनुष्य बनाता है, जो सबको अपना मानता है, किसी को पराया नहीं मानता. यहां तक कि उसको न मानने वाले को भी, वो पराया नहीं मानता. ऐसा जो हमारा धर्म है, जिसको आजकल लोग हिंदू धर्म कहते हैं, हमको सारी दुनिया में देना है. मतांतरण नहीं करना है. ये तरीक़ा सीखाना है. ये पूजा का तरीका नहीं है. ये जीने का तरीका है."

  6. प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, कहा- लखीमपुर पीड़ितों को न्याय दिलाना आपका नैतिक दायित्व

    प्रियंका गांधी

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    प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर लखीमपुर किसानों के लिए न्याय की मांग की है.

    अपने इस पत्र का ज़िक्र करते हुए उन्होंने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

    उन्होंने कहा- "आज प्रधानमंत्री लखनऊ आए हैं और पुलिस के आला अधिकारियों के साथ उनकी एक बैठक है. मैंने इस संबंध में उन्हें एक पत्र लिखा है. आपके माध्यम से मैं उस पत्र को सभी के सामने रखना चाहती हूं."

    इस पत्र में प्रियंका गांधी ने लखनऊ आगमन पर पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा, "आपने कृषि कानूनों को किसानों पर थोपने के अत्याचार को स्वीकार करते हुए उन्हें वापस लेने की घोषणा की. मैंने अख़बारों में पढ़ा है कि आज आप लखनऊ में होने वाली डीजीपी कांफ्रेंस में देश की कानून व्यवस्था संभालने वाले आला अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे."

    पत्र में आगे प्रियंका गांधी ने लखीमपुर खीरी घटना का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि 'लखीमपुर किसान नरसंहार में अन्नदाता किसानों के साथ हुए अत्याचार को पूरे देश ने देखा. आपको यह जानकारी भी है कि किसनों को अपनी गाड़ी से कुचलने का मुख्य आरोपी आपकी सरकार के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री का बेटा है. राजनीतिक दबाव के चलते इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरुआत से ही न्याय की आवाज़ को दबाने की कोशिश की है.'

    इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि ख़ुद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि – इस मामले में सरकार की मंशा देखकर लगता है कि सरकार किसी विशेष आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है.

    प्रियंका गांधी ने इस पत्र में लखीमपुर में पीड़ित परिजनों से अपनी मुलाक़ात की बात लिखी है.

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    उन्होंने पीएम को संबोधित करते हुए लिखा है, "मैं लखीमपुर में पीड़ित परिवारों से मिली हूं. वे सभी असहनीय पीड़ा में हैं. सभी का कहना है कि वे सिर्फ़ अपनों के लिए न्याय चाहते हैं. और जब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अपने पद पर बने रहेंगे उन्हें न्याय की कोई आस नहीं है. लखीमपुर मामले में जांच की हालिया स्थिति उन परिवारों की आशंका को सही साबित करती है. देश की क़ानून व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार अमित शाह जी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हीं मंत्री के साथ मंच साझा करते हैं.”

    “आप देश के पीएम हैं. आप देश के किसानों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को अच्छी तरह से समझते हैं. हर देशवासी के लिए न्याय सुनिश्चित करना सिर्फ़ कर्तव्य ही नहीं आपका नैतिक दायित्व भी है. कल देश को संबोधित करते हुए आपने कहा था कि सच्चे मन और पवित्र हृदय से किसानों के हित के लिए कृषि क़ानून को वापस लेने का फ़ैसला लिया गया. आपने कहा कि देश के किसानों के प्रति आपकी नेक नीयत है और अगर ये सच है तो लखीमपुर मामले में पीड़ितों को न्याय दिलवाना आपके लिए सर्वोपरि होना चाहिए."

    अपने पत्र में प्रियंका गांधी ने केंद्रीय गृराज्य मंत्री टेनी की बर्ख़ास्तगी की भी मांग की है.

  7. ब्रेकिंग न्यूज़, राजस्थान की कांग्रेस सरकार के तीन मंत्रियों ने दिया इस्तीफ़ा

    अशोक गहलोत

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    मोहर सिंह मीणा

    जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

    राजस्थान कांग्रेस में साल भर से मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर जारी अटकलों पर अब विराम लग गया है.

    कांग्रेस में एक व्यक्ति एक पद के तहत राज्य के चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

    हाल ही में रघु शर्मा को गुजरात प्रभारी और हरीश चौधरी को पंजाब प्रभारी को ज़िम्मेदारी दी गई थी. वहीं गोविंद सिंह डोटासर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं. इसलिए तीनों मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया है.

    राजस्थान प्रभारी अजय माकन शुक्रवार को जयपुर पहुँचे. उन्होंने मीडिया को मंत्रियों के इस्तीफ़े की जानकारी दी.

    अजय माकन मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर एक-एक विधायक से रायशुमारी कर चुके हैं. राज्य की अशोक गहलोत सरकार में पहले 9 मंत्री पद ख़ाली थे, जिन पर मंत्री बनाए जाने को लेकर लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा था.

    अब 12 मंत्री पद खाली हैं. पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने बीबीसी से कहा, "मुझे पंजाब की ज़िम्मेदारी मिलते ही मैंने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जो अभी स्वीकार नहीं हुआ है."

    राज्य में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर उन्होंने कहा, "मेरा पूरा ध्यान अब पंजाब पर है. मैं अधिकतर समय वहीं रहता भी हूँ, इसलिए मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर मुझे जानकारी नहीं."

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार शाम पांच बजे मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई है. मना जा रहा है कि इस बैठक में ही सीएम गहलोत की नए मंत्रियों की टीम तय हो जाएगी. एक से दो दिनों में ही नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण होगा.

    राज्य के राज्यपाल कलराज मिश्र उत्तर प्रदेश दौरे पर हैं. उनके वापस लौटते ही अशोक गहलोत सरकार के नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी.

    राज्य में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सीएम अशोक गहलोत दिल्ली में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, के सी वेणुगोपाल और अजय माकन से मुलाक़ात भी कर चुके हैं.

  8. कृषि क़ानून वापस लिए जाने के मायने क्या हैं?

  9. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के नए आँकड़ों से चिंता बढ़ी

    इमरान ख़ान

    पाकिस्तान में अर्थव्यवस्था को लेकर जारी नए आँकड़े देश के लिए चिंतित करने वाले हैं.

    इस वर्ष अक्टूबर में चालू खाता घाटा बढ़कर 1.6 अरब डॉलर हो गया है.

    स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान ने शुक्रवार को जो आँकड़े जारी किए हैं, उनके अनुसार अक्टूबर महीने का चालू खाता घाटा सितंबर के घाटे की तुलना में अधिक था.

    यह घाटा जीडीपी का 4.1 प्रतिशत से 4.7 प्रतिशत हो गया है.

    चालू खाता घाटा पहले ही तय टारगेट को पार कर चुका है. दरअसल, पूरे चालू वित्त वर्ष के लिए इसे जीडीपी के दो से तीन फ़ीसदी रखने का लक्ष्य था.

    बढ़ते घाटे का विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सचेंज रेट पर काफी बुरा असर हुआ है. इसका नतीजा यह हुआ है कि चालू वित्त वर्ष में रुपए में 13.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

    चालू खाते में घाटे के पीछे का सबसे अहम कारण आयात का बढ़ना माना जा रहा है.

    स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान के आँकड़ों के अनुसार, जुलाई से अक्टूबर के बीच आयात 66.3 प्रतिशत बढ़कर 23.484 अरब डॉलर हो गया है जबकि वित्त वर्ष 2021 में इसी दौरान यह 14.118 अरब डॉलर था.

  10. पीएम मोदी के कृषि क़ानूनों को वापस लेने में योगी फैक्टर क्या है?

  11. बेलारूस: लुकाशेंको ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहीं अहम बातें

    लुकाशेंको

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    बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने बीबीसी को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में कहा कि यह बिल्कुल संभव है कि उनकी सेना ने प्रवासियों को पोलैंड में दाख़िल होने में मदद की.

    हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि प्रवासियों को इसके लिए आमंत्रित किया गया था.

    बेलारूस के नेता लुकाशेंको पहले भी इस दावे से इनकार करते रहे हैं कि बेलारूस यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का बदला लेने के लिए सीमा पर प्रवासियों को भेज रहा है.

    हज़ारों की संख्या में प्रवासी जिनमें मुख्य रूप से मध्य-पूर्व के शणार्थी शामिल है,बेलारूस के रास्ते पोलैंड में दाख़िल होने की कोशिश कर रहे हैं.

    एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में लुकाशेंको ने बीबीसी से कहा कि "हम स्लाव हैं. हमारे पास दिल है. हमारे सैनिकों को पता है कि प्रवासी जर्मनी जा रहे हैं."

    उन्होंने कहा, "हो सकता है कि किसी ने उनकी मदद की हो और असल में अगर किसी ने ऐसा किया भी है तो भी मैं इस पर ग़ौर नहीं करूंगा."

    यूरोपीय संघ, नेटो और अमेरिका ने बेलारूस पर प्रवासियों को लुभाने का आरोप लगाया है. हालांकि बेलारूस के नेता ऐसे किसी भी आरोप को निराधार बताते हैं.

    बीबीसी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मैंने यूरोपीय संघ से कहा है कि मैं सीमा पर मौजूद प्रवासियों को हिरासत में नहीं लेने जा रहा हूँ, या तो मैं उन्हें बॉर्डर पर ही रोके रखने भी नहीं जा रहा क्योंकि वे मेरे देश में नहीं आ रहे हैं, वे आपके देश जा रहे हैं.”

    “हां, लेकिन यह ज़रूर है कि मैंने उन्हें न्योता देकर यहाँ नहीं बुलाया है. अगर वास्तविक तौर पर कहूँ तो मैं नहीं चाहता कि वे बेलारूस के रास्ते से होकर जाएं.”

    लुकाशेंको साल 1994 से सत्ता में हैं लेकिन पिछले साल जब वह एक बार फिर राष्ट्रपति के रूप में चुनकर आए तो पश्चिमी देशों ने उनकी काफ़ी आलोचना की थी और यूरोपीय संघ ने मान्यता नहीं दी थी.

    बेलारूस

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    प्रदर्शन और गिरफ़्तारियां

    हज़ारों प्रदर्शनकारियों और विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. विपक्ष की नेता स्वेतलाना तिखानोव्सकाया को जीत का दावा करने के साथ ही बेलारूस से बाहर कर दिया गया.

    स्वेतलाना की टीम ने शुक्रवार को लिए गए इस साक्षात्कार के लिए बीबीसी की निंदा भी की है. अपनी आलोचना में उनकी ओर से कहा गया कि यह इंटरव्यू एक तानाशाह को रास्ता मुहैया कराने जैसा है.

    बाद में स्वेतलाना की ओर से बीबीसी को कहा गया कि इस इंटरव्यू ने लुकाशेंको के झूठ और प्रोपेगेंडा के प्रचार के लिए मंच देने का काम किया है.

    बेलारूस

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    राष्ट्रपति भवन में इस इंटरव्यू के दौरान बेलारूस के नेता से जब शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों को मारे-पीटे जाने का सवाल किया और इस घटना से संबंधित एक वीडियो दिखाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा- ठीक है, ठीक है. मैं इसे मानता हूं.

    उन्होंने आगे कहा कि – आपने ओक्रेस्टिना डिटेंशन सेंटर में लोगों को मारा गया. लेकिन वहां पुलिस को भी मारा-पीटा गया और आपने वह नहीं दिखाया.

    जमा देने वाली ठंड में फँसे प्रवासी

    प्रवासियों में से ज़्यादातर युवक हैं, लेकिन इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं, ज़्यादातर लोग मध्य-पूर्व और एशिया से हैं और वे बेलारूस के सीमावर्ती इलाक़े में तंबू में डेरा डाले हुए हैं. इनके एक तरफ़ पोलिश गार्ड और दूसरी तरफ बेलारूस के गार्ड हैं, ये लोग दोनों के बीच फँसे हुए हैं.

    सीमा पर रात में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और हाल के हफ़्तों में यहाँ कई लोगों की मौत हो चुकी है.

  12. नक्सलियों का भारत बंद, झारखंड में रेल पटरी पर विस्फोट

    क्षतिग्रस्त रेलवे ट्रैक

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    रवि प्रकाश

    राँची से, बीबीसी हिन्दी के लिए

    सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेता प्रशांत बोस की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ बुलाए गए भारत बंद के दौरान नक्सलियों ने 19 और 20 नवंबर की रात क़रीब एक बजे झारखंड में रेल पटरी उड़ा दी.

    टोरी-लातेहार रेलखंड के रिचुघुटा और डेमू स्टेशनों के बीच रेल पटरी पर किए गए इस विस्फोट के कारण वहाँ से गुजर रही एक ट्रॉली बे-पटरी हो गई. विस्फोट से ओवरहेड तार भी क्षतिग्रस्त हुआ है.

    धनबाद रेल मंडल के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है.

    नक्सलियों ने अप और डाउन की दोनों पटरियाँ उड़ा दी हैं. इस कारण रांची- टोरी लोहरदगा पैसेंजर ट्रेन आज केवल लोहरदगा तक जाएगी. उसका परिचालन लोहरदगा और टोरी के बीच रद्द कर दिया गया है.

    इसके अलावा चक्रधरपुर रेल डिविज़न के लोटा पहाड़ और सोनुआ स्टेशनों के बीच भी नक्सलियों ने रेल पटरी उड़ाने की कोशिश की. इससे कंक्रीट स्लीपर डैमेज हो गया. उसकी मरम्मत की जा रही है. इसकी वजह से चक्रधरपुर-राउरकेला मेमू ट्रेन रद्द कर दी गई है.

    पुणे- हावड़ा आजाद हिन्द एक्सप्रेस को चक्रधरपुर स्टेशन पर रोक दिया गया है.

    समरसत्ता एक्सप्रेस राजखरसंवा में, पोरबंदर - हावड़ा एक्सप्रेस सोनुआ में और पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस को गम्हरिया स्टेशन पर रोक दिया गया है.

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    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, रेलवे की ओर से कहा गया है कि यह एक बम विस्फोट था. हालांकि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है. इस मामले की जांच की जा रही है.

  13. भारत को लेकर चीन को कोई संदेह नहीं होना चाहिए: एस जयशंकर

    जयशंकर

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    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि द्विपक्षीय संबंधों पर भारत की स्थिति के संबंध में चीन को कोई संदेह नहीं होना चाहिए.

    भारत के विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर गतिरोध जारी है और बीते एक महीने से सैन्य कमांडर स्तर पर होने वाली बातचीत भी रुकी हुई है.

    सिंगापुर में ब्लूमबर्ग न्यू इकनॉमिक फ़ोरम में बोलते हुए भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि मुझे नहीं लगता है चीन को इस संबंध में कोई भी संदेह है कि द्विपक्षीय रिश्तों में हमारी स्थिति क्या है. या हम अपने संबंधों में कहां खड़े हैं. इस द्विपक्षीय संबंध में क्या है जो सही नहीं हुआ.

    एस जयशंकर

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    उन्होंने कहा, "मैं अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ कई बार मिला हूँ. जैसा की आपने यह समझा होगा कि मैं बिल्कुल निष्पक्ष होकर बोलता हूँ, तार्किक बोलता हूँ और अपनी बात को पूरी स्पष्टता के साथ रखता हूँ तो ऐसे में अगर वह सुनना चाहते हैं तो मुझे पूरा यक़ीन है कि उन्होंने बिल्कुल सुना होगा."

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    उन्होंने आगे कहा कि बेशक हम हमारे रिश्तों में एक ख़ास मुद्दे पर ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं क्योंकि उन्होंने कुछ क़दम ऐसे उठाए हैं, जिससे हमारे बीच के समझौते का उल्लंघन हुआ.

    इसे लेकर अब भी उनके पास कोई सटीक और विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं है. यह बात एक बार फिर विचार करने के लिए मजबूर करती है कि आख़िर वे हमारे बीच के रिश्तों को कहाँ लेकर जाना चाहते हैं. लेकिन इसका जवाब उन्हें ही देना है.

    अमेरिका के साथ संबंधों पर एस जयशंकर ने कहा कि आज की तारीख़ में अमेरिका कहीं अधिक सहज साझेदार है. एस जयशंकर ने कहा,"वे नए विचारों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं. बीते समय की तुलना में आज वे साथ मिलकर काम करने और विचारों को लेकर कहीं अधिक खुले हुए हैं."

    उन्होंने उन बातों को निराधार बताया कि अमेरिका की स्थिति अब पहले की तरह नहीं है.

    उन्होंने कहा कि इसे किसी भी तरह से इस तरह नहीं देखा जाना चाहिए और मेरे हिसाब से यह निराधार और हास्यास्पद है.

    इस सम्मेलन में शामिल हुए एस जयशंकर ने कहा कि यह सच है कि चीन विस्तार कर रहा है लेकिन चीन की प्रवृत्ति और उसके विस्तार का तरीक़ा बहुत अलग है और हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं, जहां चीन अनिवार्य तौर पर अमेरिका की जगह ले.

    हालांकि चीन और अमेरिका के बारे में सोचना स्वाभाविक है.

    एस जयशंकर ने बदलते समीकरणों पर कहा कि असल बात यह है कि भारत समेत दुनिया के कई देश अब मैदान में आ चुके हैं.

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