अखिलेश यादव की पिछली सरकार पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के बोल, 'वो मियाओं की सरकार थी'
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कर्नाटक के युवा नेता और भाजपा के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने एक विवादित बयान दिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जनाब अखिलेश कहते हुए कहा कि, "वो मियाओं की सरकार थी, वो मियाओं की सरकार थी."
लाइव कवरेज
मोहम्मद शाहिद, कमलेश मठेनी and भूमिका राय
ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदी साहित्य की मशहूर लेखिका मन्नू भंडारी का हुआ निधन

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हिंदी साहित्य की मशहूर लेखिका मन्नू भंडारी का सोमवार को निधन हो गया.
90 वर्षीय मन्नू भंडारी गुड़गांव के नारायणा अस्पताल में भर्ती थीं. वो कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, उनकी बेटी ने पुष्टि की है कि मन्नू भंडारी का अंतिम संस्कार मंगलवार को दिल्ली में होगा.
एस-400 मिसाइल सिस्टम से भारत पर अमेरिका के प्रतिबंधों का ख़तरा
यूपी के चुनावी माहौल में जिन्ना की चर्चा
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को लेकर सपा-भाजपा में क्यों हो रही है सियासत

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अनंत झणाणे
बीबीसी हिन्दी के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 नवंबर को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर ज़िले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने जा रहे हैं. 340 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर वायुसेना के लड़ाकू विमान उतार कर एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दिखाई जाएगी.
सोमवार को उद्घाटन की तैयारियों का जायज़ा लेने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुल्तानपुर पहुंचे.
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समाजवादी पार्टी ने सोमवार सुबह ट्विटर पर पूर्व की अखिलेश यादव सरकार का एक पोस्टर जारी किया जिसमें लिखा है कि समाजवादी पार्टी सरकार ने 22 दिसंबर 2016 को "समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे" का शिलान्यास किया था.
ट्वीट में लिखा है, "पूर्वांचल एक्सप्रेसवे सपा की देन है. मुख्यमंत्री सिर्फ़ सपा के कामों का उद्घाटन और शिलान्यास कर रहे हैं. सपा सरकार ने पांच वर्ष पहले ही आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर लड़ाकू जहाज़ उतार कर दिखा दिया. अब पांच वर्ष बाद योगी सरकार उसी की नकल कर रही है. सपा का काम, जनता के नाम."
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सोमवार को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को समाजवादी पार्टी सरकार की योजना बताया और कहा की इसका शिलान्यास और बजट का आवंटन समाजवादी पार्टी सरकार ने ही कर दिया था.
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि एक्सप्रेसवे का उद्घाटन भारतीय वायुसेना के विमानों से करवाने का काम भी उत्तर प्रदेश में पहली बार उनके शासनकाल में बने आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुआ था. प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के वीडियो भी दिखाए जा रहे थे.

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इमेज कैप्शन, प्रेस कांफ्रेंस में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के वीडियो दिखाए गए ग़ाज़ीपुर से समाजवादी रथ निकालने की नहीं मिली इजाज़त
गाज़ीपुर के डीएम एमपी सिंह ने अखिलेश यादव की रथ यात्रा को एक्सप्रेसवे पर निकालने की अनुमति देने से इंकार करते हुए अपने आदेश में लिखा, "प्रधानमंत्री के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कार्यक्रम की वजह से सुरक्षा व्यवस्था के नज़रिये से एक्सप्रेसवे पर सार्वजनिक यातायात पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. लोकार्पण के बाद ही एक्सप्रेसवे सामान्य यातायात के लिए खोला जायेगा."
पत्र में डीएम ने अखिलेश यादव से 17 तारीख तक अपना कार्यक्रम स्थगित करने को कहा है.

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अखिलेश यादव ने कहा की इजाज़त न मिलने की वजह से वो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का सांकेतिक उद्घाटन करेंगे और कहा, "हाईवे पर जगह-जगह बोल्डर लगाकर रास्ता रोक दिया गया है. सुल्तानपुर में समाजवादी पार्टी के नेताओं के घरों पर अभी से ही पुलिस घूमने लगी है. लोगों को घर में कैद करने का काम होने लगा है. जो लोग रास्ते पर बोल्डर लगा देते हैं वो रास्ते क्या बनाएंगे. यह लोग समाजवादी पार्टी की सरकार में बनाये हुए एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर रहे हैं. समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का नाम बदल कर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे कर दिया गया."
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे में कुछ तकनीकी खामियां भी निकालीं.

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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट डिटेल्स
उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवे अथॉरिटी लिमिटेड की वेबसाइट के मुताबिक़ 22 हज़ार करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यह 6 लेन का एक्सप्रेसवे 340 किलोमीटर लम्बा है.
लखनऊ के चाँद सराए गाँव से शुरू होकर यह बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, आंबेडकर नगर, आज़मगढ़, मऊ, बलिया के रास्ते होते हुए गाज़ीपुर के हैदरिया पहुंचेगा, और बिहार-उत्तर प्रदेश बॉर्डर से महज़ 18 किलोमीटर दूरी पर उत्तर प्रदेश में खत्म होगा. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र को पूर्वांचल क्षेत्र से जोड़ने का काम करेगा.
36 महीनों में बन कर तैयार हुए इस एक्सप्रेसवे को योगी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बता रही है.
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पीएम मोदी का विपक्ष पर निशाना, कहा- आज़ादी के बाद की सरकारों ने छिपाया आदिवासियों का योगदान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में एक सभा के दौरान विपक्ष को निशाने पर लेते हुए पिछली सरकारों पर आदिवासियों के योगदान को छिपाने का आरोप लगाया.
पीएम मोदी जनजातीय गौरव दिवस पर एक सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद की सरकारों ने आदिवासियों के योगदान को छिपाया है या सीमित करके बताया है.
उन्होंने कहा कि आदिवासियों के योगदान को बताया नहीं गया या फिर सीमित दायरे में जानकारी दी गई.
पीएम मोदी ने कहा, “आज जब हम राष्ट्रीय मंचों से, राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समाज के योगदान की चर्चा करते हैं, तो कुछ लोगों को हैरानी होती है.ऐसे लोगों को विश्वास ही नहीं होता कि जनजातीय समाज का भारत की संस्कृति को मज़बूत करने में कितना बड़ा योगदान रहा है.”
"जनजातीय समाज के योगदान के बारे में या तो देश को बताया ही नहीं गया और अगर बताया भी गया तो बहुत ही सीमित दायरे में जानकारी दी गई.ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आज़ादी के बाद दशकों तक जिन्होंने देश में सरकार चलाई, उन्होंने अपनी स्वार्थ भरी राजनीति को ही प्राथमिकता दी."
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आज आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती है. केंद्र सरकार ने इस दिन यानी 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की है.
इसी मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी आज मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हैं. यहां लोगों को संबोधित करने के साथ-साथ वो रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का उद्घाटन भी करेंगे.
हाल ही में इस स्टेशन का नाम हबीबगंज से बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन किया गया है.

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अपनी सरकार के काम
इस सभा में पीएम मोदी ने आदिवासियों के लिए किए गए अपनी सरकार के कामों की भी चर्चा की.
उन्होंने कहा, "देश की आबादी का करीब 10% होने के बावजूद दशकों तक, जनजातीय समाज को, उनकी संस्कृति, उनके सामर्थ्य को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया.आदिवासियों का दुख, उनकी तकलीफ, बच्चों की शिक्षा उन लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखती थी.’’
"जब देश ने मुझे 2014 में आप सब देशवासियों की सेवा का मौका दिया तो मैंने जनजातीय समुदाय के हितों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा.आज सही मायने में आदिवासी समाज के हर साथी को देश के विकास में उचित हिस्सेदारी और भागीदारी दी जा रही है.’’
उन्होंने पद्म पुरस्कारों की बात करते हुए कहा, "अभी हाल में पद्म पुरस्कार दिए गए हैं. जनजातीय समाज से आने वाले साथी जब राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो दुनिया हैरान रह गई.आदिवासी और ग्रामीण समाज में काम करने वाले ये देश के असली हीरे हैं.’’

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स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
पीएम मोदी ने रानी कमलापति का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि गोंड महारानी वीर दुर्गावती का शौर्य हो या फिर रानी कमलापति का बलिदान, देश इन्हें भूल नहीं सकता.वीर महाराणा प्रताप के संघर्ष की कल्पना उन बहादुर भीलों के बिना नहीं की जा सकती जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी और बलिदान दिया.
उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में जनजातीय नायक-नायिकाओं की वीर गाथाओं को देश के सामने लाना, उसे नई पीढ़ी से परिचित कराना, हमारा कर्तव्य है.गुलामी के कालखंड में विदेशी शासन के खिलाफ खासी-गारो आंदोलन, मिजो आंदोलन, कोल आंदोलन समेत कई संग्राम हुए.
पीएम मोदी ने आदिवासियों में टीकाकरण को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मध्य प्रदेश में जनजातीय परिवारों में तेजी से टीकाकरण हो रहा है. हमारे आदिवासी भाई-बहन टीकाकरण के महत्व को समझते भी हैं, स्वीकारते भी हैं और देश को बचाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, इससे बड़ी समझदारी क्या हो सकती है.”
ब्रेकिंग न्यूज़, म्यांमार में 11 साल जेल की सज़ा पाए अमेरिकी पत्रकार डेनी फ़ेंस्टर हुए रिहा

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अमेरिकी पत्रकार डेनी फ़ेंस्टर को म्यांमार की जेल से रिहा कर दिया गया है. तीन दिन पहले एक सैन्य अदालत ने डेनी को 11 साल जेल की सज़ा सुनाई थी.
जुंटा के प्रवक्ता मेजर जनरल ज़ॉ मिन तुन ने बीबीसी से पुष्टि की है कि 37 साल के पत्रकार को अब देश छोड़ने की अनुमति होगी.
फ़्रंटियर म्यांमार के लिए काम करने वाले फ़ेंस्टर को अमेरिका जाने से पहले मई में हिरासत में लिया गया था.
वो उन दर्जनभर पत्रकारों में शामिल थे जिन्हें फ़रवरी में सैन्य तख़्तापलट के बाद हिरासत में लिया गया था.
फ़ेंस्टर को अप्रवासन नियमों के उल्लंघन, ग़ैर क़ानूनी संपर्क और सेना के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने का दोषी पाया गया था.
बीते सप्ताह उन पर राजद्रोह और आतंकवाद के दो अतिरिक्त मामले भी दर्ज किए गए थे जिसमें अधिकतम सज़ा आजीवन कारावास हो सकती थी.
फ़ेंस्टर को अचानक कैसे रिहा किया गया यह अभी तक साफ़ नहीं है. हालांकि, पूर्व अमेरिकी राजदूत बिल रिचर्डसन म्यांमार में ही हैं और ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने रिहाई के लिए मध्यस्थता की है.
मौत की सज़ा पाए नागेंद्रन धर्मालिंगम की बहन ने सिंगापुर से की अपील

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सिंगापुर में मौत की सज़ा पाए मलेशिया के नागेंद्रन धर्मालिंगम की बहन शर्मिला धर्मालिंगम ने अपने भाई को ‘दूसरा मौक़ा’दिए जाने की मांग की है.
नागेंद्रन को साल 2010 में सिंगापुर में हेरोइन तस्करी करने के जुर्म में मौत की सज़ा सुनाई गई थी. कई बार माफ़ी की अपील दायर किए जाने के बाद उन्हें बीते सप्ताह फांसी दी जानी थी और उनके कोविड संक्रमित होने के कारण उनकी फांसी पर रोक लगा दी गई थी.
सिंगापुर में ड्रग्स को लेकर बेहद कड़े क़ानून हैं जिसके कारण 33 साल के नागेंद्रन को मौत की सज़ा दी गई है.
उनकी बहन शर्मिला ने हार नहीं मानी है और वो सिंगापुर से अपने भाई के लिए ‘दूसरा मौक़ा मांग रही हैं.’
35 वर्षीय उनकी बहन ने मलेशिया के पेराक प्रांत से समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि ‘हमें उम्मीद है कि सिंगापुर सरकार उनकी जान बख़्श देगी.’
“वह बौद्धिक अक्षमता से पीड़ित हैं.”

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नागेंद्रन को फांसी दिए जाने के मामले की बड़े स्तर पर आलोचना हुई है. यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना की है और क्षमादान याचिका पर 85,000 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.
नागेंद्रन मूल रूप से भारतीय हैं और मुस्लिम बहुल मलेशिया के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं उनका परिवार प्रार्थना कर रहा है कि उनकी जान बख़्श दी जाएगी.
नागेंद्रन धर्मालिंगम के बारे में और पढ़ने के लिए क्लिक करें...
केरल में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या, बीजेपी ने लगाया एसडीपीआई पर आरोप
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यकर्ता की केरल के मांबरम ज़िले में सोमवार सुबह हत्या कर दी गई.
पुलिस के मुताबिक, 27 वर्षीय संजीत की हत्या सुबह क़रीब नौ बजे उस समय की गई जब वह अपनी पत्नी को लेकर उनके ऑफ़िस जा रहे थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़, उनकी हत्या में इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफआई) की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के कार्यकर्ताओं पर शक ज़ाहिर किया गया है.
पुलिस के मुताबिक संजीत की हत्या करके फ़रार हुए अभियुक्तों की तलाश और इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है.
बीजेपी का आरोप है कि हमला करने वालों ने एलाप्पल्ली के रहने वाले संजीत का एक गाड़ी से पीछा किया और उसके बाद उनके दो-पहिया वाहन को टक्कर मारकर गिरा दिया. जब संजीत गिर गए तो हमलावरों ने उनकी पत्नी के सामने ही उनकी हत्या कर दी.
आरएसएस कार्यकर्ता संजीत की हत्या की आलोचना करते हुए, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने इसे सुनियोजित हत्या बताया है और इसके लिए एसडीपीआई को ज़िम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने राज्य में होने वाली इस तरह की घटनाओं को पुलिस और राज्य सरकार की विफलता बताया है.
लखीमपुर मामले की जांच पर निगरानी के लिए पूर्व जज की नियुक्ति को तैयार यूपी सरकार

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा की जांच पर सुनवाई के दौरान सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वो इस जांच की निगरानी के लिए अन्य राज्य के पूर्व हाई कोर्ट जज की नियुक्ति के लिए तैयार है.
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा की एसआईटी जांच के तरीक़े पर नाराज़गी जताते हुए यह संकेत दिया था कि वो इस पर निगरानी के लिए पूर्व जजों की नियुक्ति कर सकता है.
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जजों जस्टिस राकेश कुमार जैन और जस्टिस रंजीत सिंह के नाम का भी सुझाव दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस पर बुधवार 17 नवंबर को आदेश पारित करेगा और उसने यूपी सरकार से कहा है कि वो एसआईटी में और वरिष्ठ पुलिस अफ़सरों को शामिल करे.
राहुल गांधी के 'हिंदू और हिंदुत्व में फ़र्क' वाले बयान पर क्या बोले मणिशंकर अय्यर?

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कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी के हिंदू और हिंदुत्व में फ़र्क वाले बयान पर कहा कि 'राहुल गांधी ने हाल में कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व को लेकर अंतर की बात कही थी लेकिन मैं उसमें कुछ और बातें जोड़ना चाहता हूं.'
मणिशंकर अय्यर ने अपने एक संबोधन में कहा कि हाल ही में राहुल गांधी ने कहा कि 'हिंदू धर्म और हिंदुत्व में अंतर है. तो मैं उसके साथ ये जोड़ना चाहता हूं कि अंतर ये है कि हम जो हिंदू धर्म पर भरोसा करते हैं हम सौ फ़ीसदी भारतीय हैं. हम सारे, जो इस देश के बाशिंदें हैं उन्हें भारतीय समझते हैं. लेकिन जो चंद लोग हमारे बीच में हैं. जो आज के दिन सत्ता में हैं वे यह कहते हैं अस्सी फ़ीसदी भारतीय जो कि हिंदू धर्म को मानते हैं वही असली भारतीय हैं और जो बाकी लोग जो हैं वे ग़ैर-भारतीय हैं.'
मणिशंकर अय्यर ने कहा कि वे लोग कहते हैं कि ऐसे लोग हमारे देश में मेहमान बनकर रह रहे हैं और जब भी हम चाहें हम उनको इस देश से निकाल देंगे.
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उन्होंने आगे कहा कि भारत की जो विविधता है उसे जवाहर लाल नेहरू से अधिक किसी ने नहीं समझा. उन्हें पता था कि भारत में अनेक भाषाएं हैं, रंग के लोग हैं, नस्ल हैं, बोलिया हैं, साहित्य हैं, और गीत हैं और अनेक किस्म की मौसिकी है.
दरअसल कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की किताब के प्रकाशित होने के बाद से ही हिंदू और हिंदुत्व पर बहस छिड़ गई है.
इस संबंध में राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में कार्यकर्ताओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा, "हिंदू धर्म और हिंदुत्व में फर्क़ है. अगर फर्क़ नहीं होता तो नाम एक होता. हिंदू को हिंदुत्व की ज़रूरत नहीं होती?"
उन्होंने आगे कहा, "क्या हिंदू धर्म किसी सिख या मुस्लिम को मारने का नाम है? लेकिन हिंदुत्व है. क्या हिंदू धर्म अख़लाक को मारने के बारे में है? किस किताब में ये लिखा है? मैंने उपनिषद पढ़ा है उसमें नहीं लिखा. किस हिंदू धर्म की किताब में लिखा है कि किसी बेगुनाह को मार सकते हैं? मैंने नहीं पढ़ा है. लेकिन हिंदुत्व में मैं इसे देख सकता हूँ."
महिला टेनिस संघ ने कहा- चीन की टेनिस खिलाड़ी के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच हो

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महिला टेनिस संघ ने कहा है कि देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री पर सार्वजनिक रूप से उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली चीन की खिलाड़ी पेंग शुआई को बोलने का मौक़ा दिया जाना चाहिए, ना कि उन पर रोक लगाई जानी चाहिए.
चीन की सोशल मीडिया साइट वीबो पर एक पोस्ट में पेंग ने आरोप लगाते हुए लिखा था कि उन्हें पूर्व उप-प्रधानमंत्री झांग गाओली के साथ सेक्शुअल रिलेशन बनाने के लिए मजबूर किया गया.
महिला टेनिस संघ ने पेंग के मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह एक गंभीर चिंता का विषय है.
संघ ने कहा है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. इस मामले की बिना सेंसरशिप के जांच होनी चाहिए.
35 वर्षीय पेंग दुनिया की पूर्व नंबर एक युगल खिलाड़ी हैं, जिनके नाम दो ग्रैंड स्लैम ख़िताब हैं. 2013 में विंबलडन और 2014 फ्रेंच ओपन में उन्होंने ताइवान के हसिह सु-वेई के साथ ख़िताब जीता था.
पेंग ने इस महीने की शुरुआत में आरोप लगाए थे लेकिन जल्दी ही उसे इंटरनेट से हटा दिया था. यह पहली बार है जब चीन के किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता के ख़िलाफ़ ऐसा आरोप लगाया है.
75 वर्षीय झांग ने उन पर लगे आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया है.
उन्होंने 2013 और 2018 के बीच चीन के उप-प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला था. वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के क़रीबी सहयोगी रहे हैं.
हालांकि पेंग ने यह भी माना है कि वह अपने आरोपों का समर्थन करने के लिए सुबूत नहीं दे पाएंगी.
पीएम मोदी ने संसद परिसर में जाकर दी बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सोमवार को बिरसा मुंडा की जयंती पर संसद भवन परिसर में उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की.
इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट भी किया गया- 'भगवान बिरसा मुंडा जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. वे स्वतंत्रता आंदोलन को तेज़ धार देने के साथ-साथ आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए सदैव संघर्षरत रहे. देश के लिए उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा.'
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के लोगों को राज्य स्थापना दिवस बधाई देते हुए कहा कि झारखंड के सभी निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की ढेरों शुभकामनाएं. अपनी विशिष्ट संस्कृति के साथ ऐतिहासिक पहचान रखने वाली भगवान बिरसा मुंडा की यह धरती विकास यात्रा में आगे बढ़े, यही कामना है."
कौन थे बिरसा मुंडा
बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के ऐसे नायक रहे, जिनको जनजातीय लोग आज भी गर्व से याद करते हैं. आदिवासियों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले बिरसा मुंडा ने तब के ब्रिटिश शासन से भी लोहा लिया था.
उनके योगदान के चलते ही उनकी तस्वीर भारतीय संसद के संग्रहालय में लगी हुई है. ये सम्मान जनजातीय समुदाय में केवल बिरसा मुंडा को ही अब तक मिल सका है. बिरसा मुंडा का जन्म झारखंड के खूंटी ज़िले में हुआ था.
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वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम कैबिनेट नेताओं और अन्य नेताओं ने ट्वीट करके बिरसा मुंडा को याद किया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया है- देशभक्ति, पराक्रम व धर्मनिष्ठा के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा जी ने जनजाति अस्मिता व अधिकारों के संरक्षण हेतु विदेशी शासन के विरुद्ध 'उलगुलान' आंदोलन शुरू कर समाज को नई दिशा दी. स्वधर्म और स्वदेश की रक्षा हेतु उनका संघर्ष व समर्पण वंदनीय है.
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कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी ने भी ट्वीट किया है-
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हालांकि इससे एक दिन पूर्व भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर ना तो प्रधानमंत्री और ना ही कैबिनेट का कोई नेता संसद भवन पहुंचा था.
संसद भवन में नेहरू के श्रद्धांजलि कार्यक्रम लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और राज्यसभा स्पीकर वैंकेया नायडू भी शामिल नहीं हुए.
इसे लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट भी किया था और क्षोभ ज़ाहिर किया था.
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उन्होंने लिखा- आज संसद में अनोखा दृश्य दिखाई दिया.लोकसभा, राज्यसभा के स्पीकर तक पंडित नेहरू के जयंती कार्यक्रम में नहीं पहुंचे. यहां तक कि कोई मंत्री भी वहां मौजूद नहीं था.
ब्रेकिंग न्यूज़, वायु प्रदूषण पर वर्क फ़्रॉम होम अपनाने के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा

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दिल्ली में वायु प्रदूषण के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा है कि वो केंद्र और एनसीआर के संबंधित राज्यों को निर्देश देते हैं कि वो इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ समय के लिए वर्क फ़्रॉम होम को अपनाएं.
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रित करने के मुद्दे पर दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को मंगलवार को एक आपात बैठक बुलाने को कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी.
प्रदूषण के मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से दिल्ली NCR में सिर्फ़ 10% प्रदूषण होता है, 75% प्रदूषण उद्योगों, धूल, वाहनों या शहर के परिवहन से होता है.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फ़टकार लगाते हुए कहा कि वो इस मुद्दे को म्यूनिसिपल कमिश्नर पर डाल रही है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार का इस तरह का बहाना उसे राजस्व का ऑडिट कराने पर मजबूर कर रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि वो कल शाम तक यह जवाब दे कि किस उद्योग को बंद किया जाए और किन वाहनों और पावर प्लांट को बंद किया जाए और उसका विकल्प क्या होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ इलाक़ों में पराली जलाने के अलावा वायु प्रदूषण का मुख्य कारण परिवहन, उद्योग और वाहनों की भीड़ है.
ब्रेकिंग न्यूज़, दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन लगाने पर तैयार लेकिन..

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दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के स्तर के मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो इस पर नियंत्रण पाने के लिए पूरी तरह लॉकडाउन लगाने को तैयार है लेकिन ऐसा ही क़दम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए भी उठाया जाना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि दो दिन पहले देश के सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए आपातकालीन योजना के तहत दो दिन के लॉकडाउन पर विचार करने को कहा था.
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने एफ़िडेविट दायर करते हुए कहा है कि लॉकडाउन के सीमित प्रभाव होंगे. इसके साथ ही उसका कहना है कि दिल्ली की तरह ही कुछ पाबंदियां उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में भी लगाई जानी चाहिए.

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दिल्ली सरकार ने एफ़िडेविट में कहा है, “स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार पूरी तरह लॉकडाउन लगाने का क़दम उठाने को तैयार है. हालांकि, इस तरह का फ़ैसला अगर पूरे NCR क्षेत्र पर लागू किया जाता है तभी इसका वास्तविक अर्थ होगा. दिल्ली के क्षेत्र को देखते हुए लॉकडाउन से हवा की गुणवत्ता पर सीमित असर होगा.”
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की एक ख़ास पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.
राजधानी में प्रदूषण के संकट से निपटने को लेकर दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस ने कहा है कि वो उन सभी वाहनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी जो बिना प्रदूषण सर्टिफ़िकेट के चल रहे हैं. इसको लेकर ट्रैफ़िक पुलिस ने 550 पुलिसकर्मियों को 170 जगहों पर तैनात किया है.
ऑस्ट्रिया में वैक्सीन की डोज़ पूरी नहीं लेने वालों के लिए लगा लॉकडाउन

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ऑस्ट्रिया में लगभग 20 लाख लोगों को कोरोना की पूरी डोज़ नहीं लगी है और अब जिन लोगों को कोरोना की पूरी डोज़ नहीं लगी है उनके लिए देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है.
ऑस्ट्रिया में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए ये लॉकडाउन लगाया गया है. चांसलर एलेक्ज़ेंडर शैलेनबर्ग ने कहा कि हम इस क़दम को लेकर काफी गंभीर हैं और दुर्भाग्य की बात है लेकिन ऐसा करना ज़रूरी था.
जिन लोगों को वैक्सीन की पूरी डोज़ नहीं लगी है वे सिर्फ़ कुछ चुनिंदा वजहों से ही अपने घर से बाहर जा सकेंगे.
ऑस्ट्रिया की लगभग 65% आबादी को कोरोना वैक्सीन की पूरी डोज़ दी जा चुकी है.
लेकिन इस दौरान ऑस्ट्रिया में कोरोना के मामलों में तेज़ी आयी है. बीते सात दिनों में संक्रमण दर प्रति 100,000 लोगों पर 800 है, जो यूरोप के कई देशों की तुलना में काफी अधिक है.
यूरोप एक बार फिर से महामारी से सबसे अधिक प्रभावित इलाक़े के तौर पर सामने आ रहा है. यूरोप के कई देशों ने बढ़ते मामलों के तहत प्रतिबंध लगाए हैं और चेतावनी जारी की है
भारत में बीते 24 घंटे में कोरोना की स्थिति

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बीते 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 10,229 नए मामले सामने आए हैं. वहीं 11,926 लोग इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं.
बीते 24 घंटे में 125 लोगों की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो गई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक-
भारत में कोरोना के कुल केस- 3,44,47,536
भारत में कोरोना के कुल एक्टिव मामले- 1,34,096
भारत में संक्रमण के बाद ठीक हुए कुल लोगों की संख्या-3,38,49,785
भारत में कोरोना संक्रमण के कारण हुईं कुल मौतें- 4,63,655
कुल वैक्सीनेशन- 1,12,34,30,478
आर्मी चीफ़ इसराइल के दौरे पर, क्या है एजेंडा?

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भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे पांच दिवसीय इसराइल यात्रा के लिए रविवार को रवाना हुए.
इसराइल के साथ भारत के रक्षा सहयोग को और मज़बूत करने के उद्देश्य से वह आगामी पांच दिनों तक इसराइल यात्रा पर रहेंगे.
बतौर थल सेना प्रमुख यह नरवणे की पहली इसराइल यात्रा है.
थल सेना प्रमुख से कुछ सप्ताह पूर्व भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा सचिव अजय कुमार ने भी इसराइल की यात्रा की थी.
इससे पूर्व अगस्त महीने में तत्कालीन वायु सेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल आर के एस भदौरिया ने भी इसराइल का चार दिवसीय दौरा किया था.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने सेना के हवाले से कहा है कि - "थल सेनाध्यक्ष नरवणे 15 से 19 नवंबर तक इसराइल दौरे पर हैं. यह उनकी पहली इसराइल यात्रा है."
बयान के मुताबिक़, अपनी इस यात्रादौरान नरवणे इसराइल के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ सदस्यों से मुलाक़ात करेंगे. वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत-इसराइल रक्षा संबंधों को और मज़बूत बनाने और आगे बढ़ाने के तरीक़ों पर चर्चा होगी.
सेना ने कहा कि जनरल नरवणे अधिकारियों के साथ मुलाक़ात करके इसराइल और भारत के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीक़ों पर भी चर्चा करेंगे.
इस दौरान वह इसराइली सेना प्रमुखों के साथ भी बातचीत करेंगे और आईडीएफ मुख्यालय का दौरा भी करेंगे.
द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को ध्यान में रखते हुएभारत और इसराइल ने पिछले महीने रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हुए, सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान के लिए 10 साल की रणनीति विकसित करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने रर सहमति दी थी.
दोनों देशों ने प्रौद्योगिकी, ड्रोन, रोबोटिक्स, आर्टिफ़िशियल टेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक उत्पादों को साझेदारी में विकसित करने के लिए भी एक समझौता किया है.
बाइडन और शी की वर्चुअल बैठक पर दुनिया की नज़र, ताइवान पर बात संभव

अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से विभिन्न मुद्दों पर जारी गतिरोध के बीच सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वर्चुअल बैठक होने वाली है.
दुनिया के दो सबसे ताकतवर देशों ने पिछले सप्ताह स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त घोषणा करके पूरी दुनिया को चौंका दिया था. हालांकि हाल के दिनों में ताइवान जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तीख़ी बयानबाज़ी होती रही है.
इस बैठक से जुड़े कुछ सूत्रों ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि बैठक में साइबर सुरक्षा, व्यापार और परमाणु अप्रसार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.
शुक्रवार को जारी एक बयान में, अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस ने कहा, "दोनों नेता अमेरिका और चीन के बीच जारी प्रतिस्पर्धा को ज़िम्मेदारी के साथ बनाए रखने के तरीक़ों पर विचार करेंगे. साथ ही साझा हित के मामलों पर साथ मिलकर काम करने के मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे."
इस साल जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद से जो बाइडन और शी जिनपिंग ने दो बार बात की है. लेकिन दोनों ही नेता मानते हैं कि दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर गतिरोध है.
पिछले सप्ताह शी जिनपिंग ने अमेरिका-चीन संबंधों पर राष्ट्रीय समिति को लिखा था कि दोनों देशों के संबंधों को बेहतर करने के लिए उनका देश तैयार है.
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क्या होगा बाइडन का फ़ोकस?
वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता झाओयिन फेंग के अनुसार जो बाइडन को इस बैठक से कोई बहुत बड़ी उम्मीदें नहीं हैं.
लेकिन यह भी सच है कि दोनों देशों के नेताओं के बीच इस तरह से जो मुलाक़ात हो रही है वही अपने आप में एक बड़ा महत्व रखती है. दोनों पक्ष आपसी रिश्तों को सुधारने की सोच रखते हैं.
इस बैठक में ताइवान का मुद्दा प्रमुख होने की संभावना है. जो बाइडन चाहते हैं कि शी जिनपिंग ताईवान जलडमरूमध्य में शांति बनाए रखने का भरोसा दें. इसके बदले मेंबाइडन को भी उन्हें आश्वस्त करना होगा कि अमेरिका ताइवान की संप्रभुता पर कोई क़दम नहीं उठाएगा.
शी जिनपिंग को क्या हैं उम्मीदें?
शंघाई में बीबीसी संवाददाता रॉबिन ब्रैंट कहते हैं कि शी जिनपिंग के लिए भी ताइवान एक प्रमुख मुद्दा होगा.
ताइवान एशिया के बाहर कई लोगों के लिए एक अस्पष्ट मुद्दा लगता है. लेकिन बीजिंग के लिए ताइवान एक ऐसा हिस्सा है जिसे वह हमेशा से जोड़ना चाहता है.
और अब जब ये बैठक हो रही है तो शी जिनपिंग निश्चित तौर पर इस पर बात करेंगे.
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