अखिलेश यादव की पिछली सरकार पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के बोल, 'वो मियाओं की सरकार थी'

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कर्नाटक के युवा नेता और भाजपा के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने एक विवादित बयान दिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जनाब अखिलेश कहते हुए कहा कि, "वो मियाओं की सरकार थी, वो मियाओं की सरकार थी."

लाइव कवरेज

मोहम्मद शाहिद, कमलेश मठेनी and भूमिका राय

  1. धन्यवाद! बीबीसी हिंदी के इस लाइव पेज से जुड़ने के लिए आपका शुक्रिया. यह पेज अब यहीं बंद हो रहा है. 16 नवंबर के अपडेट्स के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं

  2. अखिलेश यादव की पिछली सरकार पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के बोल, 'वो मियाओं की सरकार थी'

      • Author, अनंत झणाणे
      • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कर्नाटक के युवा नेता और भाजपा के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने एक विवादित बयान दिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जनाब अखिलेश कहते हुए कहा कि, "वो मियाओं की सरकार थी, वो मियाओं की सरकार थी."

    बीजेपी सांसद ने आगे कहा, "आदित्यनाथ जी की सरकार मोदी जी के नेतृत्व में जो हमारा लक्ष्य है, सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास, इस मंत्र पर चल रहा है. हमको ऐसी ही सरकार चाहिए, मियाओं की सरकार नहीं चाहिए."

    बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या अक्सर अपने विवादित बयानों और राजनीति को लेकर सुर्ख़ियों में रहते हैं. कुछ ही दिन पहले अखिलेश यादव ने एक प्रेस वार्ता में कन्नौज से एक लाए गए समाजवादी इत्र का उद्घाटन किया था.

    उस इत्र पर तंज करते हुए तेजस्वी सूर्या ने कहा कि, "पांच साल पहले कैसा था उत्तर प्रदेश का माहौल. करप्शन कैसा था? हमारी माँ बहनों की सुरक्षा का विचार कैसा था? हमारी सांस्कृतिक विरासत, हमारे श्रद्धा केंद्र, हमारे मंदिरों की हालत कैसी थी? आज सपा और जनाब अखिलेश ने परफ्यूम बाँट कर उनकी पांच साल की अवधि में जो दुष्कर्म दुर्गन्ध आया था, जनाब अखिलेश सुनिए, यह परफ्यूम बांटने से आपके दुष्कर्म का दुर्गन्ध उत्तर प्रदेश की जनता से नहीं छुपा सकते हैं."

    तेजस्वी सूर्या भाजपा युवा मोर्चा के एक कार्यक्रम "युवोत्थान" में शिरकत करने गोरखपुर पहुंचे थे.

    अपने भाषण के बाद मीडिया से बार करते वक्त कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए तेजस्वी सूर्या ने कहा कि, "बीजेपी, जो लोग भारत के प्रति श्रद्धा और निष्ठा रखते हैं और देशभक्त हैं, भाजपा उन सभी लोगों की पार्टी है. जो लोग भारत के विरुद्ध बोलते हैं, देश के टुकड़े टुकड़े होने के लिए नारा लगाते हैं, इन लोगों के पक्ष में आज कांग्रेस पार्टी बोल रही है. देश के सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की ऐसी हालत होना देश के लिए बड़े दुर्भाग्य की बात है. कांग्रेस पार्टी सभी देश विरोधी आवाज़ों की प्रवक्ता है. आज कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश और देश भर में राजनीतिक तौर पर अप्रासंगिक हो गयी है. और ऐसे बयान देने से कांग्रेस पार्टी और भी अप्रासंगिक हो जाएगी."

  3. हरियाणा के चरखी दादरी में 25 साल पहले कैसे टकरा गए थे दो विमान?

    विमान हादसा

    इमेज स्रोत, Getty Images

    12 नवंबर, 1996 की उस शाम को, सऊदी एयरलाइंस की एक उड़ान ने हमेशा की तरह दिल्ली हवाई अड्डे से उड़ान भरी. मौसम साफ़ था और हवा भी शांत थी और कोई भी ऐसा संकेत नहीं था, जिससे पता चल सकता कि कुछ ही पल में हज़ारों फ़ीट की ऊंचाई पर लगभग 350 यात्रियों सहित ये विमान चकनाचूर हो जायेगा.

    क़रीब 500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ते हुए बोइंग 747 कुछ ही मिनटों में 14 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर पहुंच गया था और इसने दिल्ली एयरपोर्ट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से और भी ऊपर जाने की इजाज़त मांगी. लेकिन एटीसी ने उसे उसी ऊंचाई पर रहने का निर्देश दिया.

    उन दिनों दिल्ली हवाई अड्डे का रनवे वन-वे था (यानी प्रस्थान और आगमन दोनों रनवे के एक ही तरफ़ से होता था). उसी समय, क़ज़ाकिस्तान का एक विमान आईएल-76 विपरीत दिशा से 15 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर दिल्ली की तरफ़ आ रहा था. दिल्ली एटीसी ने उसे 'एफ़एल 150' यानी 15 हज़ार फ़ीट, पर बने रहने का निर्देश दिया.

    एटीसी ने क़ज़ाकिस्तान के विमान को यह भी बताया कि बिलकुल विपरीत दिशा में सऊदी एयरलाइंस की उड़ान केवल दस मील दूर है और मुमकिन है कि अगले पांच मील में क़ज़ाकिस्तान के विमान को पार करेगी. एटीसी ने आगे निर्देश दिया कि 'रिपोर्ट, इफ़ इन साइट' यानी अगर ये विमान दिखाई दे तो एटीसी को इसकी सूचना दी जाए.

  4. बिरसा मुंडाः जिनकी याद में पीएम मोदी ने किया जनजातीय गौरव दिवस मनाने का एलान

    बिरसा मुंडा

    इमेज स्रोत, rajyasabha.nic.in

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की याद में एक संग्रहालय का उद्घाटन किया है.

    15 नवंबर 2021 को वीडियो लिंक के ज़रिए इस संग्रहालय का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- "भगवान बिरसा मुंडा जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. वे स्वतंत्रता आंदोलन को तेज़ धार देने के साथ-साथ आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए सदैव संघर्षरत रहे. देश के लिए उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा."

    प्रधानमंत्री ने साथ ही घोषणा की कि बिरसा मुंडा की जयंती को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाया जाएगा.

    बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व और उनके योगदान पर एक बार फिर पढ़ें बीबीसी हिन्दी पर इसी वर्ष प्रकाशित एक विशेष लेख.

    बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के ऐसे नायक रहे, जिनको जनजातीय लोग आज भी गर्व से याद करते हैं. आदिवासियों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले बिरसा मुंडा ने तब के ब्रिटिश शासन से भी लोहा लिया था.

  5. बाबर आज़म 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' नहीं बने, कुछ पाकिस्तानी ख़फ़ा

    पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आज़म

    इमेज स्रोत, Matthew Lewis-ICC/ICC via Getty Images

    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आज़म

    टी-20 क्रिकेट विश्व कप फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड को हराकर ऑस्ट्रेलियाई टीम विजेता बन चुकी है.

    लेकिन इस जीत के अलावा एक दूसरी मामले पर भी चर्चा तेज़ है और कई प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

    दरअसल, टी-20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी डेविड वॉर्नर को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया है.

    लेकिन पाकिस्तानी आवाम समेत क्रिकेट के कुछ दिग्गज नाम इस बात पर हैरानी जता रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आज़म को चुना जाना चाहिए था.

    लोगों का ऐसा कहने की एक वजह आंकड़ों का गणित भी है, जिसमें बाबर आज़म डेविड वॉर्नर पर भारी पड़ते दिखाई देते हैं.

  6. एबीवीपी और जेएनयूएसयू के बीच ताज़ा विवाद पर जेएनयू प्रशासन ने क्या कहा

    जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्र (फ़ाइल फ़ोटो)

    इमेज स्रोत, ANI

    इमेज कैप्शन, जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्र (फ़ाइल फ़ोटो)

    जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने सोमवार को कहा कि विश्वविद्यालय का स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर सभी छात्रों के उपयोग के लिए है.

    यूनिवर्सिटी ने ये भी जोर देते हुए कहा कि एक अकादमिक संस्थान में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और विश्वविद्यालय प्रशासन इसकी निंदा करता है.

    रविवार को यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर के इस्तेमाल को लेकर विवाद छिड़ गया था.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जवाहरलाल नेहरू स्टूडेंट्स यूनियन के बीच यूनिवर्सिटी कैंपस में स्थित स्टूडेंट यूनियन हॉल के इस्तेमाल को लेकर कथित तौर पर विवाद हो गया था.

    दोनों ही संगठनों ने एक दूसरे पर ये आरोप लगाया कि रविवार रात उनके सदस्यों पर हमला किया गया जिनमें कुछ छात्र घायल हो गए. जेएनयूएसयू का कहना है कि उस जगह को एक सगंठन ने एक कार्यक्रम के लिए पहले से बुक कर रखा था और एबीवीपी के सदस्यों ने उस रूम पर कब्ज़ा करने की कोशिश की जहां वो कार्यक्रम होने वाला था.

    जबकि एबीवीपी का कहना है कि जेएनयूएसयू ने ये फरमान निकाल रखा है कि केवल छात्र संघ के अध्यक्ष ही स्टूडेंट यूनियन रूम के इस्तेमाल की इजाजत दे सकते हैं. जेएनयू में इस जगह को टेफलास के नाम से भी जाना जाता है.

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बयान जारी कर कहा, "जेएनयू प्रशासन के संज्ञान में ये जानकारी आई है कि बीती रात कैंपस में स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर के पास छात्रों के दो समूहों के बीच विवाद हुआ है. छात्र इस बात से अवगत होंगे कि जेएनयू कैंपस की ये जगह बिना किसी भेदभाव के सभी छात्रों के लिए उपलब्ध है और सभी छात्र यूनिवर्सिटी के नियमों का पालन करते हुए इसके इस्तेमाल के लिए स्वतंत्र हैं."

  7. सीबीआई और ईडी के बारे में मोदी सरकार के फ़ैसले पर क्यों उठे सवाल?

    नरेंद्र मोदी

    इमेज स्रोत, Getty Images

    बात इसी साल25 अगस्तकी है. सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा था, सीबीआई और ईडी जैसे एजेंसियों को अभियुक्तों पर 'तलवार लटकाकर' नहीं रखनी चाहिए और समयबद्ध तरीके से जांच करनी चाहिए.

    सुनवाई कुछ सांसदों और विधायकोंपर सीबीआई और ईडी के दशकों से लंबित पड़े मामले से जुड़ा था.

    लेकिन ये पहला मौका नहीं था जब सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों पर कोर्ट ने इस तरह की 'सख़्त' टिप्पणी की थी.

    साल 2013 में सीबीआई को 'पिंज़ड़े में बंद तोता' कहा गया था जो अपने मालिक की बोली बोलता है. वो मामला कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाले की सुनवाई का था. केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार थी.

    यानी सरकार कोई भी हो, जाँच एजेंसियों की जाँच और तौर-तरीके हमेशा से सवालों के घेरे में रहे हैं. अब इन दोनों एजेंसियों से जुड़ा एक नया विवाद चर्चा में है.

  8. त्रिपुरा हिंसाः दो महिला पत्रकारों को मिली ज़मानत

    Samriddhi K Sakunia and Swarna Jha

    इमेज स्रोत, Pinaki Das

    त्रिपुरा की एक अदालत ने पिछले दिनों राज्य में हुई सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्टिंग के लिए वहाँ पहुँचीं दो महिला पत्रकारों को ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. दोनों पत्रकारों को कथित तौर पर भड़काउ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में असम पुलिस ने त्रिपुरा से लगी सीमा के पास रविवार को हिरासत में ले लिया था.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दोनों राज्यों की पुलिस ने बताया कि समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा नाम की एचडब्लू न्यूज़ नेटवर्क की इन महिला पत्रकारों को असम के करीमगंज ज़िले में नीलम बाज़ार से हिरासत में लिया गया.

    उनकी संस्था की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि दोनों पत्रकारों के नाम त्रिपुरा के फ़टिकरॉय थाने में लिखी गई एक एफ़आईआर में दर्ज है. इसे विश्व हिन्दू परिषद के एक समर्थक की शिकायत पर दर्ज किया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग से त्रिपुरा सरकार की छवि ख़राब की है. कंचन दास नाम के एक शख़्स ने आरोप लगाया है कि समृद्धि साकुनिया और स्वर्णा झा उन्नाकोटि ज़िले के पॉल बाज़ार में मुसलमान समुदाय के लोगों से मिलने गईं और वहां हिंदुओं और त्रिपुरा सरकार के खिलाफ़ 'भड़काऊ बातें कहीं'.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, त्रिपुरा के आईजी (कानून व्यवस्था) अरिंदम नाथ ने कहा, '' त्रिपुरा पुलिस ने दो महिला पत्रकार समृद्धि साकुनिया और स्वर्णा झा के खिलाफ़ कई मामले दर्ज किए हैं और उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के उद्देश्य से झूठी और मनगढ़ंत खबरें छापने और प्रसारित करने के कारण हिरासत में लिया गया है.''

  9. कोविड: वैक्सीन के दोनो डोज़ लेने के बाद भी घर में फैला सकते हैं वायरस

    कोविड: दो वैक्सीन लगने के बाद भी लोग घर में फैला सकते हैं वायरस

    इमेज स्रोत, Getty Images

    वैक्सीन की दो डोज़ लगने के बाद भी लोग कोविड-19 के संपर्क में आ रहे हैं और उसे घर में अपने साथ रहने वाले लोगों तक पहुंचा रहे हैं. ब्रिटेन में घरों पर अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों ने इस बात की चेतावनी दी है.

    वैक्सीन की दोनों डोज़ ले चुके लोग भी वायरस को उतना ही फैला सकते हैं, जितना वो लोग जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है.

    हो सकता है उनमें कोई लक्षण ना दिख रहे हों या बहुत कम लक्षण दिख रहे हों, लेकिन वो अपने घर में बिना वैक्सीन लिए लोगों को संक्रमण दे सकते हैं. ऐसा होने की संभावना पांच में से क़रीब दो है यानी 38%.

    अगर घर के लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है तो ये संभावना घटकर चार में से एक हो जाती है यानी 25%.

  10. तालिबान के विदेश मंत्री ने कहा, हम भारत से संघर्ष नहीं चाहते हैं- बीबीसी इंटरव्यू

    तालिबान
    इमेज कैप्शन, तालिबान सरकार के अंतरिम विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के अंतरिम विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने पुष्टि की है कि वह पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

    बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 'दोनों पक्षों की इच्छा' पर इस समझौते में तीसरे पक्ष और मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है.

    उन्होंने कहा, "अभी तक एक अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआत बहुत अच्छी हुई है और समझौते के पहले हिस्से में एक महीने के सीज़ फ़ायर पर सहमति हुई है. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि बातचीत जारी रहेगी."

    उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह एक अच्छा क़दम है और उन्हें उम्मीद है कि इस संबंध में आगे कोई मुश्किल नहीं होगी. उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान और टीटीपी के बीच नज़दीकी बढ़ेगी.

    अगस्त में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता में वापसी के बाद तालिबान के अंतरिम विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिवसीय यात्रा पर पाकिस्तान गए थे.

  11. सलमान ख़ुर्शीद के घर तोड़फोड़ और आगजनी के बाद 20 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत

      • Author, राजेश डोबरियाल
      • पदनाम, देहरादून से बीबीसी हिंदी के लिए
    सलमान खुर्शीद

    इमेज स्रोत, ANI

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद के नैनीताल वाले घर में आगजनी और तोड़फोड़ की घटना के बाद उनकी तरफ़ से 20 लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई गई है.

    बीबीसी हिंदी से भवाली के सीओ भूपेंद्र सिंह धोनी ने बताया कि दोपहर करीब एक से डेढ़ बजे के बीच 20 से ज़्यादा लोग सलमान खुर्शीद के घर के बाहर इकट्ठे हुए और नारेबाज़ी करने लगे.

    पुलिस ने बताया कि इन लोगों ने सलमान खुर्शीद का पुतला जलाया और उन्हीं में से किसी ने जलता हुआ गत्ता और दूसरा सामान उनके घर के दरवाज़े और अंदर फेंक दिया.

    धोनी ने बताया कि घर के केयरटेकर सुंदरराम ने इस मामले में तहरीर दी है. उन्होंने राकेश कपिल नाम के एक व्यक्ति और 20 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ तहरीर दी है.

    नैनीताल के मुक्तेश्वर थाने के एसओ मोहम्मद आसिफ़ दोपहर को इस घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही मौके पर मौजूद हैं.

    उन्होंने बताया कि खुर्शीद के घर के केयरटेकर सुंदर राम ने अपनी शिकायत में कहा है कि भीड़ में मौजूद लोग सलमान खुर्शीद के ख़िलाफ़ और हिंदूवादी नारे लगा रहे थे. शिकायत में किसी हिंदूवादी संगठन का नाम नहीं लिया गया है.

    एसओ मुक्तेश्वर ने यह भी कहा कि उनके समेत करीब 15 पुलिसकर्मी मौके पर घटना की सूचना मिलने के बाद से ही मौजूद हैं. स्थिति सामान्य है. मामले की जांच शुरू की जा रही है.

    सलमान खुर्शीद ने अपने फ़ेसबुक अकाउंट में इस घटना के बाद कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए दोपहर करीब साढ़े तीन बजे लिखा, "मुझे लगता है कि मुझे अपने उन दोस्तों के लिए दरवाज़े खोल देने चाहिए थे जो अपनी पहचान यहां छोड़ गए हैं. क्या अब भी मैं गलत कह रहा हूं कि यह हिंदुत्व नहीं हो सकता."

  12. बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, 15 नवंबर 2021, सुनिए वात्सल्य राय से

    छोड़िए YouTube पोस्ट
    Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

    पोस्ट YouTube समाप्त

  13. ब्रिटेन के लिवरपूल वुमन्स हॉस्पिटल में हुआ विस्फोट चरमपंथी हमला था: पुलिस

    लिवरपूल वुमन्स हॉस्पिटल के बाहर विस्फोट

    इमेज स्रोत, PA MEDIA

    ब्रिटेन में रविवार को लिवरपूल वुमन्स हॉस्पिटल के सामने एक कार में हुए विस्फोट को पुलिस ने चरमपंथी घटना करार दिया है.

    रविवार शाम करीब 4:30 बजे अस्पताल के प्रवेश द्वार के सामने एक टैक्सी में विस्फोट हुआ और उसमें आग लग गई. इस घटना में एक यात्री की मौत हो गई और ड्राइवर घायल हो गया.

    टैक्सी चलाने वाले ड्राइवर का नाम डेविड पैरी है. उन्हें संदिग्ध को गाड़ी के अंदर ही बंद करने के लिए लिवरपूल के मेयर जोआन एंडर्सन ने हीरो घोषित किया है.

    आतंकवाद क़ानून के तहत शहर में चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

    आतंकवाद-रोधी पुलिस उत्तर पश्चिम के प्रमुख रस जैक्सन ने बताया कि ऐसा लगता है कि यात्री ने "इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस" बनाया था जिससे विस्फोट हुआ.

    उन्होंने हमला करने वाले की पहचान जाहिर करने से इनकार किया है और हमला करने का मकसद पता करने की कोशिश की जा रही है.

    इस हमले के बाद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सोमवार दोपहर को एक आपातकालीन कोबरा बैठक बुलाई थी.

  14. सलमान ख़ुर्शीद के नैनीताल के घर हुई तोड़फोड़ और आगजनी

    कांग्रेस नेता सलमान ख़ुर्शीद

    इमेज स्रोत, AFP

    नैनीताल में कांग्रेस नेता सलमान ख़ुर्शीद के घर पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटना हुई है.

    उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर अपने घर की कुछ तस्वीरें और वीडियो डालकर इसकी जानकारी दी है.

    इन तस्वीरों और वीडियो में दिख रहा है कि उनके घर का दरवाज़ा जला हुआ है, खिड़कियां टूटी हुई हैं और आग लग रही है.

    सलमान खुर्शीद ने ये तस्वीरें डालते हुए लिखा, “मुझे उम्मीद थी कि मैं अपने उन दोस्तों के लिए इन दरवाजों को खोलूंगा जिन्होंने ये निशानियां छोड़ी हैं. क्या मेरा ये कहना अब भी ग़लत है कि ये हिंदू धर्म नहीं है.”

    ‘‘तो अब इस तरह की बहस है. शर्मिंदगी जैसे शब्द बेमतलब हो गए हैं. इसके अलावा मुझे अब भी उम्मीद है कि हम एक दिन साथ मिलकर विचार कर सकते हैं और ज़्यादा कुछ नहीं तो असहमत होने के लिए सहमत हो सकते हैं.’’

    सलमान ख़ुर्शीद की नई किताब 'सनराइज़ ओवर अयोध्या' में हिंदुत्व को लेकर लिखी गई बात को लेकर पिछले कुछ दिनों से विवाद चल रहा है.

    उनकी ये किताब अयोध्या विवाद और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर है.

    विवाद किताब के एक पन्ने पर हिंदुत्व से जुड़ी एक लाइन पर है. बीजेपी और वीएचपी से जुड़े कुछ नेताओं का आरोप है कि किताब में हिंदुत्व के ताज़ा वर्ज़न की तुलना चरमपंथी समूह आईएसआईएस और बोको हराम से की गई है.

    सलमान ख़ुर्शी के घर पर आगजनी

    इमेज स्रोत, Facebook/Salman Khurshid

    इमेज कैप्शन, सलमान ख़ुर्शी के घर पर आगजनी

    वहीं, सलमान ख़ुर्शीद का दावा है कि उन्होंने किताब में 'हिंदू धर्म' को नहीं 'हिंदुत्व' को आईएसआईएस और बोको हरम से जोड़ा है. उन्होंने दोनों में समानताओं की बात की है ना कि दोनों को एक जैसा बताया है. किताब में हिंदू धर्म के बारे में बहुत कुछ अच्छा लिखा है. लोगों को चाहिए कि वो उनकी पूरी किताब पढ़ें.

    इस किताब के आने के बाद से ही इस पर विवाद चल रहा है. सलमान ख़ुर्शीद पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है.

  15. बाबर आज़म को 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' न चुनने पर सवाल

  16. विदेशी दूल्हों को नागरिकता नहीं देता पाकिस्तान, लड़कियां परेशान

  17. आज का कार्टून: वर्क फ़्रॉम होम की समस्या

  18. कंगना रनौत के ‘आज़ादी’ वाले बयान पर क्या बोले नीतीश कुमार

    नीतीश कुमार

    इमेज स्रोत, Getty Images

    साल 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने को ‘भीख में मिली आज़ादी’ बताने वाले अभिनेत्री कंगना रनौत के बयान पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि ऐसे बयानों को मज़ाक में उड़ा दिया जाना चाहिए.

    नीतीश कुमार ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि ऐसे बयानों पर ध्यान देने की ज़रूरत ही नहीं है.

    उन्होंने कहा, “हमको देखकर आश्चर्य होता है कि ऐसी बातों को पब्लिश कौन करता है? इसका कोई क्या महत्व है? ऐसी चीज़ों पर क्या ध्यान दिया जाना चाहिए? कौन नहीं जानता है कि देश को आज़ादी कब मिली? इन चीज़ों को महत्व नहीं दिया जाना चाहिए बल्कि इन्हें मज़ाक में उड़ा दिया जाना चाहिए.”

    गौरतलब है कि हाल ही में कंगना रनौत ने एक टीवी इंटरव्‍यू में कहा था कि भारत को सही मायनों में आज़ादी 2014 में मिली जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, जो आज़ादी 1947 में मिली थी, वह 'भीख' थी.

  19. थोक महंगाई दर पांच महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर, महंगा हुआ सामान

    महंगाई

    इमेज स्रोत, NURPHOTO/ CONTRIBUTOR

    देश में थोक महंगाई दर पिछले पांच महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. इसके साथ ही उपभोक्ताओं के लिए भी महंगाई बढ़ गई है.

    सोमवार को सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में महंगाई दर 12.54 प्रतिशत हो गई है.

    महंगाई बढ़ने की वजह ऊर्जा और बिजली की बढ़ती कीमतों के कारण बुनियादी गैर-खाद्य वस्तुओं से लेकर कार तक की कीमतें बढ़ गई हैं.

    थोक मूल्य वो होता है जिस पर थोक विक्रेता खुदरा विक्रेताओं को समान बेचते हैं. फिर आगे खुदरा विक्रेता उपभोक्ताओं को वो सामान बेचते हैं.

    ऐसे में थोक मुद्रास्फिती के कारण खुदरा महंगाई भी बढ़ गई है जिससे उपभोक्ताओं के लिए सामान महंगा हो गया है.

    उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सितंबर के 4.35 प्रतिशत के मुक़ाबले अक्टूबर में 4.48 प्रतिशत रहा है.

  20. त्रिपुरा हिंसाः हिरासत में ली गईं दो महिला पत्रकारों को मिली ज़मानत

    पत्रकार समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा

    इमेज स्रोत, PINAKI DAS

    त्रिपुरा की एक अदालत ने पिछले दिनों राज्य में हुई सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्टिंग करने गईं दो महिला पत्रकारों को ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया है.

    दोनों पत्रकारों को कथित तौर पर भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में असम पुलिस ने त्रिपुरा से लगी सीमा के पास रविवार को हिरासत में ले लिया था.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दोनों राज्यों की पुलिस ने बताया कि समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा नाम की एचडब्लू न्यूज़ नेटवर्क की इन महिला पत्रकारों को असम के करीमगंज ज़िले में नीलम बाज़ार से हिरासत में लिया गया.

    पत्रकारों के वकील पिजूष बिस्वास ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को ज़मानत की जानकारी देते हुए बताया, “दोनों महिला पत्रकारों को 75 हज़ार के बॉन्ड पर ज़मानत दी गई है. कोर्ट ने उन्हें ककराबान पुलिस थाने में पेश होने के लिए कहा है जहां उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज है. पूछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा.”

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, त्रिपुरा के आईजी (कानून व्यवस्था) अरिंदम नाथ ने कहा, ''त्रिपुरा पुलिस ने दो महिला पत्रकार समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा के खिलाफ़ कई मामले दर्ज किए हैं और उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के उद्देश्य से झूठी और मनगढ़ंत खबरें छापने और प्रसारित करने के कारण हिरासत में लिया गया है.''

    पुलिस ने कहा है कि त्रिपुरा में हुई सांप्रदायिक घटनाओं के परिणामस्वरूप अमरावती और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में हाल में हुई हिंसा से ये स्पष्ट हो गया है कि कुछ लोग निहित स्वार्थ के लिए त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.

    समृद्धि सकुनिया

    इमेज स्रोत, TWITTER/SAMRIDHI

    इमेज कैप्शन, समृद्धि सकुनिया

    न्यूज़ संस्था एचडब्लू न्यूज़ ने इस पूरे मामले पर रविवार को बयान जारी कर कहा है, ''एचडब्लू न्यूज़ की पत्रकार समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा को असम पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. असम पुलिस का कहना है कि उनके पास पत्रकारों को लेकर कोई शिकायत नहीं है लेकिन त्रिपुरा पुलिस के कहने पर उन्होंने ऐसा किया है.''

    ''आज सुबह 5.30 बजे इन पत्रकारों को एफ़आईआर की कॉपी दी गई, लेकिन पुलिस उन्हें कोई वॉरंट नहीं दिखा सकी. पत्रकारों पर आईपीसी की धारा 120B, 153A और 504 के तहत स्थानीय विश्व हिंदू परिषद के नेता की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने पत्रकारों पर त्रिपुरा सरकार और वीएचपी की छवि खराब करने का आरोप लगाया है.''