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टी-20 वर्ल्ड कपः इंग्लैंड को रौंदकर फ़ाइनल में पहुंचा न्यूज़ीलैंड

एक रोमांचक मुक़ाबले में न्यूज़ीलैंड ने इंग्लैंड को पांच विकेट से हरा दिया है.

लाइव कवरेज

भूमिका राय, पवन सिंह अतुल and अभिजीत श्रीवास्तव

  1. नवाब मलिक का देवेंद्र फडणवीस पर हमला, अंडरवर्ल्ड और जाली नोट को लेकर गंभीर आरोप

    महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मंत्री नवाब मलिक ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

    मलिक ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने नोटबंदी के दौरान नकली नोटों के मामलों को दबा दिया था. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 8 नवंबर 2016 को देश में नोटबंदी की गई थी. देश भर में जाली नोट पकड़े जाने लगे थे लेकिन 8 अक्टूबर 2017 तक महाराष्ट्र में एक भी जाली नोट का मामला सामने नहीं आया था क्योंकि देवेंद्र फडणवीस के संरक्षण में जाली नोट का खेल चल रहा था.

    इसके बाद जब 8 अक्टूबर 2017 को बीकेसी पर छापा मारा गया था तब 14.56 करोड़ रुपये ज़ब्त किए गए थे. तब भी फडणवीस ने इसे छुपाने का काम किया था.

    नवाब मलिक ने फणनवीस पर आरोप लगाते हुए कहा कि एनसीबी जिस तरह निर्दोष लोगों को फंसाने का काम कर रही है, उगाही करने का जो मामला है उसे देवेंद्र फणनवीस कमज़ोर करने का काम कर रहे हैं और इसका एक प्रमुख कारण यह है कि वे लोग इनके क़रीबी हैं.

    नवाब मलिक ने देवेंद्र फणनवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बड़े-बड़े क्रिमिनल्स और माफ़ियाओं को अलग-अलग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया.

    नवाब मलिक ने देवेंद्र फणनवीस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में मुंबई में वसूली और उगाही का काम हुआ. उन्होंने क्रिमिनल लोगों को सरकारी पदों पर बिठाया. जाली नोटों का नेक्सस, उगाही का धंधा करवाया. ये सारा काम उनके संरक्षण में हुआ.

    रियाज़ भाटी और देवेंद्र फणनवीस के संबंधों को लेकर भी नवाब मलिक ने देवेंद्र फणनवीस पर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि रियाज़ भाटी लगातार दाउद के साथ संबंध में रहा और वो पीएम के कार्यक्रम तक में पहुंच जाता है ऐसे में यह तो तय है कि उनके सिर पर किसी ना किसी का हाथ है.

    इससे पूर्व फणनवीस ने क्या कुछ कहा था?

    इससे एक दिन पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी प्रवक्ता और राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक पर मुंबई धमाकों के अभियुक्त सरदार शाहवाली और सलीम पटेल से जमीन खरीदने का आरोप लगाया था.

    फडणवीस ने कहा था कि नवाब मलिक ने सिर्फ 30 लाख रुपये में करोड़ों रुपये की ज़मीन खरीदी. उनका दावा था कि नवाब मलिक ने साल 1993 में हुए बम धमाकों के अभियुक्त सरदार शाह वली खान के जरिए एलबीएस रोड पर ज़मीन खरीदी है.

    फडणवीस का कहना था कि एलबीएस रोड पर ये जमीन रणनीतिक रूप से 1 लाख 23 हजार वर्ग फुट की है. जमीन सॉलिडस नाम की कंपनी के नाम रजिस्टर्ड है. करोड़ों रुपये की जमीन महज 30 लाख रुपये में बिकी.

    फडणवीस ने दावा किया कि गोवा की एक प्लंबर मरियम बाई की ओर से सलीम पटेल को पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई थी. उन्हें वली खां से जमीन मिली थी. सलीम पटेल हसीना पार्कर के ड्राइवर थे. उसने जमीन सॉलिडस नामक कंपनी को बेच दी. इस कंपनी का स्वामित्व नवाब मलिक के परिवार के पास है. जब वे मंत्री बने तो उन्होंने सॉलिडस कंपनी छोड़ दी. कंपनी फरहान मलिक के पास गई.

    अंडरवर्ल्ड से संबंध रखने के देवेंद्र फडणवीस के आरोपों का जवाब देते हुए एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा था कि वो अगले दिन यानी आज दस बजे कॉन्प्रेंस में इन आरोपों का जवाब देंगे.

  2. इमरान ख़ान ने फिर साधा मोदी सरकार पर निशाना, लगाया अल्पसंख्यकों की प्रताड़ना का आरोप

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक ओर जहां करतारपुर कॉरिडोर को अल्पसंख्यकों के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता बताया है वहीं ट्वीट करके बीजेपी पर निशाना भी साधा है.

    9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर की दूसरी वर्षगांठ थी. इस मौक़े पर इमरान ख़ान ने ट्वीट किया- "आज करतारपुर कॉरिडोर की दूसरी वर्षगांठ है. यह अंतरधार्मिक सद्भाव का प्रतीक है जो भारत के सिख समुदाय के लोगों को उनके एक सबसे पवित्र स्थल के दर्शन की अनुमति देता है. करतारपुर कॉरिडोर अल्पसंख्यकों और अंतरधार्मिक सद्भाव के प्रति मेरी सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है."

    लेकिन एक अन्य ट्वीट में उन्होंने भारत की केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है.

    उन्होंने लिखा है कि- हमारी प्रतिबद्धता ने दुनिया के सामने हमें साबित कर दिया है. हमने यह ऐसे समय पर दुनिया को दिखाया है जब भारत में हिंदुत्व विचारधारा वाली बीजेपी सरकार कश्मीरियों, भारतीय मुसलमानों और अल्पसंख्यकों को हमारी आंखों के सामने प्रताड़ित कर रही है. भारत सरकार की यही मानसिकता हमारे क्षेत्र में शांति की राह का सबसे बड़ा रोड़ा है.

    करतारपुर साहिब का महत्व

    करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है लेकिन इसकी भारत से दूरी महज़ साढ़े चार किलोमीटर है.

    पहले कुछ श्रद्धालु दूरबीन से करतारपुर साहिब के दर्शन करते थे. ये काम बीएसएफ़ की निगरानी में होता था.

    श्रद्धालु यहां आकर दूरबीन से सीमा पार मौजूद करतापुर साहिब के दर्शन करते थे.

    मान्यताओं के मुताबिक़, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे. उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल यहीं गुज़ारे थे.

    माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव का देहावसान हुआ था वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था.

  3. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग कर सकते हैं बैठक

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के नेता शी जिनपिंग के बीच अगले सप्ताह एक वर्चुअल मीटिंग हो सकती है.

    न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने एक सूत्र के हवाले से यह ख़बर दी है. हालांकि व्हाइट हाउस और वॉशिंगटन मे चीन दूतावास के प्रवक्ताओं ने तय तारीख़ की पुष्टि करने से इनक़ार कर दिया है.

    बाइडन प्रशासन के शुरुआती दौर में चीन के साथ हुई राजनयिक स्तर की वार्ता बहुत सफल नहीं रही है. साथ ही अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि बिना मध्यस्थ के सीधे शी जिनपिंग के साथ बातचीत से दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के बीच जारी संघर्ष को रोका जा सकता है.

    इससे पूर्व दोनों देशों की ओर से कहा गया था कि बीते महीने ज्यूरिख़ में अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार ज़ेक सलिवन और चीन के शीर्ष राजनयिक यांग के बीच हुई मुलाक़ात के दौरान ही इन दो शीर्ष नेताओं की वर्चुअल मीटिंग की रूपरेखा तय की गई थी.

    एक ओर जहां व्हाइट हाउस की ओर से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है वहीं बीते सोमवार को जब व्हाइट हाउस के डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच साल ख़त्म होने से पहले वर्चुअल मीटिंग ज़रूर होगी.

    इस मीटिंग को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक ओर जहां चीन और अमेरिका कोविड महामारी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं वहीं परमाणु हथियारों के मुद्दे पर भी दोनों देश एक-दूसरे के सामने हैं.

    हालांकि बाइडन प्रशासन इस मीटिंग से बहुत बड़ी अपेक्षाएं नहीं रख रहा है.

    वहीं चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ज़ेक सलिवन के ताज़ा बयान को नरमी वाला तो बताया है लेकिन साथ ही चीन को सतर्क रहने की चेतावनी भी दी है.

    ग्लोबल टाइम्स ने चीन को लेकर अमेरिका की 'दोहरेपन' की नीति को लेकर सावधान रहने को कहा है. इससे पूर्व सलिवन ने एक बयान में दावा किया था कि बाइडन प्रशासन चीनी प्रणाली में मूलभूत परिवर्तन नहीं चाहता.

  4. नमस्कार!

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